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Question
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:
'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के आधार पर लिखिए कि कवि को ऐसा क्यों लगता है कि जैसे अचानक पर्वत पंख लगाकर उड़ गया हो?
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Solution
पर्वतीय प्रदेश में वर्षा ऋतु में प्रकृति का चेहरा पल-पल बदलता है। वर्षा में प्रकृति का रूप हर पल बदलता है, कभी वर्षा होती है तो कभी धूप निकल आती है। पर्वतों पर फूल खिलते हैं, झरने की मधुर आवाज़ सुनाई देती है। अचानक बारिश के बाद बदलते मौसम से प्रतीत होता है कि आकाश में छाई धुंध अर्थात् उमड़ते-घुमड़ते बादलों के साथ बड़े-बड़े पहाड़ अपने पंखों को फड़फड़ाते हुए उड़ गए हों और वर्षा का देवता इंद्र बादल रूपी यान पर बैठकर जादू का खेल दिखा रहा हो। प्रकृति का यह सौंदर्य देखकर आनंद आता है।
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कवि ने तालाब की समानता किसके साथ दिखाई है?
निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-
है टूट पड़ा भू पर अंबर।
आपकी दृष्टि में इस कविता का सौंदर्य इनमें से किस पर निर्भर करता है −
(क) अनेक शब्दों की आवृति पर
(ख) शब्दों की चित्रमयी भाषा पर
(ग) कविता की संगीतात्मकता पर
कवि ने चित्रात्मक शैली का प्रयोग करते हुए पावस ऋतु का सजीव चित्र अंकित किया है। ऐसे स्थलों को छाँटकर लिखिए।
वर्षा ऋतु पर लिखी गई अन्य कवियों की कविताओं का संग्रह कीजिए और कक्षा में सुनाइए।
बारिश, झरने, इंद्रधनुष, बादल, कोयल, पानी, पक्षी, सूरज, हरियाली, फूल, फल आदि या कोई भी प्रकृति विषयक शब्द का प्रयोग करते हुए एक कविता लिखने का प्रयास कीजिए।
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पर्वत से गिरने वाले झरनों की विशेषता लिखिए।
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‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखिए।
'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में पर्वत द्वारा अपना प्रतिबिंब तालाब में देखना पर्वत के किन मनोभावों को स्पष्ट करना चाहता है?
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:
'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के आधार पर पर्वतों द्वारा अपने रूप-सौंदर्य को निहारने की कल्पना और कारण को स्पष्ट कीजिए।
