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Question
'माता का अँचल' पाठ में बच्चों की दिनचर्या आजकल के बच्चों की दिनचर्या से भिन्न है, कैसे? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
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Solution
'माता का अँचल' पाठ में उस समय के लोग अधिकतर संयुक्त परिवार में रहते थे और ग्रामीण जीवन के अधिक निकट थे। भोलानाथ के पिता उस समय भोलानाथ के साथ पूजा में बैठकर रामायण का पाठ करते थे। भोलानाथ अपने साथियों के साथ खेल में फसल उगाता था और बारात का भी खेल खेलता था। लेकिन वक्त के साथ कई परिवर्तन आए हैं। नए खेलों के उपकरण आ गए हैं और बच्चों के पालन-पोषण में भी बदलाव आया है। आज के बच्चे मोबाइल पर अधिक निर्भर हो गए हैं।
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भोलानाथ के पिता भोलानाथ को पूजा-पाठ में शामिल करते, उसे गंगा तट पर ले जाते तथा लौटते हुए पेड़ की डाल पर झुलाते। उनका ऐसा करना किन-किन मूल्यों को उभारने में सहायक है?
‘माता का अंचल’ पाठ में वर्णित बचपन और आज के बचपन में क्या अंतर है? क्या इस अंतर का प्रभाव दोनों बचपनों के जीवन मूल्यों पर पड़ा है? तर्क सहित स्पष्ट कीजिए।
'माता का अँचल' पाठ में भोलानाथ का अपने माता-पिता से बहुत लगाव है। बचपन में हर बच्चा एक पल के लिए भी माता-पिता का साथ नहीं छोड़ना चाहता है, किंतु माता-पिता के बूढ़े हो जाने पर इनमें से ही कुछ उन्हें साथ न रखकर वृद्धाश्रम में पहुँचा देते हैं। ऐसे लोगों को आप किन शब्दों में समझाएँगे? विचार करके लिखिए।
वात्सल्य और ममता की आधार-भूमि एक रहने पर भी माता-पिता और बच्चों के संबंधों में तब से अब तक बहुत बदलाव हुए हैं। ‘माता का अँचल’ पाठ के आधार पर इसे सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
