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Question
माता यशोदा अपने कृष्ण को किस प्रकार और क्या कहकर जगा रही है?
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Solution
माता यशोदा अपने ललना श्रीकृष्ण को तरह-तरह के संकेत देकर जगाती है। वह अपने पुत्र से कहती है कि हे वंशीवाले प्यारे कन्हा! जागो रात बीत चुकी है। सुबह हो गई है। घरों के दरवाजे खुल गए हैं। गोपियाँ दही बिलो रही हैं। ग्वाल बाल द्वार पर खड़े होकर तुम्हारी जयकार कर रहे हैं। यानी वे गायों को लेकर जाने की तैयारी में हैं।
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कविता की भाषा में लय या तालमेल बनाने के लिए प्रचलित शब्दों और वाक्यों में बदलाव होता है। जैसे-आगे-पीछे अधिक प्रचलित शब्दों की जोड़ी है, लेकिन कविता में 'पीछे-आगे' का प्रयोग हुआ है। यहाँ 'आगे' का '...बोली ये धागे' से ध्वनि का तालमेल है। इस प्रकार के शब्दों की जोड़ियों में आप भी परिवर्तन कीजिए-दुबला-पतला, इधर-उधर, ऊपर-नीचे, दाएँ-बाएँ, गोरा-काला, लाल-पीला आदि।
नीचे दिए गए दोहों में बताई गई सच्चाइयों को यदि हम अपने जीवन में उतार लें तो उनके क्या लाभ होंगे? सोचिए और लिखिए-
(क) तरुवर फल ____________ सचहिं सुजान||
(ख) धरती की-सी ____________ यह देह||
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छोड़ घोंसला बाहर आया. देखी डालें, देखे पात।
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