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Question
कवि एक नया संसार बसाना चाहता है जहाँ मानव की मेहनत पूजी जाए, जहाँ जनता में एकता हो, जहाँ सब समान हों, जहाँ सभी सुखी हों। तुम्हें अपने संसार में ऊपर लिखी बातें नज़र आती हैं या नहीं? इन बातों के होने या न होने का क्या कारण है?
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Solution
'हाँ' मुझे अपने संसार में ये बातें नज़र आती हैं। हमारे संसार में मानव की मेहनत पूजी जाती है। तभी तो आज वही लोग शिखर पर विद्यमान है, जिन्होंने अपनी मेहनत के बल पर असंभव को संभव कर दिखाया है। हमारे संसार में जनता के बीच एकता विद्यमान है। यदि ऐसा नहीं होता, तो अभी तक मानव सभ्यता समाप्त हो चूकी होती। ये बातें भी सच हैं कि यहाँ सबको समान रूप से देखा जाता है और यहाँ सब सुखी हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो सारा संसार आपस में जुड़ा नहीं होता। आज सारे देश एक दूसरे के साथ व्यापारिक संबंध बनाए हुए हैं व सारे एक दूसरे की संस्कृति और सभ्यताओं के विषय में जानने को इच्छुक हैं। ये सब प्रमाण है हमारे संसार के अच्छे होने के।
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बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर
कठपुतली ने अपनी इच्छा प्रकट की
बहुविकल्पी प्रश्न
‘उथल-पुथल मचने’ से कवि का क्या अभिप्राय है?
कवि अन्य कवियों से क्या आह्वान करता है?
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नीचे कविता में से पंक्ति दी गई हैं। बताओ, इस पंक्ति का क्या अर्थ हो सकता है?
हमको तुमको प्रान मिलेगा।
सही शब्द चुनकर वाक्य पूरा करो
सूरज ने ___________ बंद कर दिया अपने घर का दरवाज़ा।
सूरज को उसकी माँ ने क्यों बुला लिया?
"तब माँ कोई कर न सकेगा
अपने ऊपर अत्याचार।"
कविता की इस पंक्ति में किस अत्याचार की बात की जा रही है? वे किस तरह के अत्याचार करते थे?
'भूखे-प्यासे' में द्वंद्व समास है। इन दोनों शब्दों के बीच लगे चिह्न को सामासिक चिह्न (-) कहते हैं। इस चिह्न से 'और' का संकेत मिलता है, जैसे-
भूखे-प्यासे = भूखे और प्यासे।
• इस प्रकार के दस अन्य उदाहरण खोजकर लिखिए।
कठपुतली को गुस्सा क्यों आया?
कई बार जब दो शब्द आपस में जुड़ते हैं तो उनके मूल रूप में परिवर्तन हो जाता है। कठपुतली शब्द में भी इस प्रकार का सामान्य परिवर्तन हुआ है। जब काठ और पुतली दो शब्द एक साथ हुए कठपुतली शब्द बन गया और इससे बोलने में सरलता आ गई। इस प्रकार के कुछ शब्द बनाइए-
जैसे-काठ (कठ) से बना-कठगुलाब, कठफोड़ा
| हाथ-हथ | सोना-सोन | मिट्टी-मट |
'बहुत दिन हुए / हमें अपने मन के छंद छुए।'- इस पंक्ति का अर्थ और क्या हो सकता है? अगले पृष्ठ पर दिए हुए वाक्यों की सहायता से सोचिए और अर्थ लिखिए-
(क) बहुत दिन हो गए, मन में कोई उमंग नहीं आई।
(ख) बहुत दिन हो गए, मन के भीतर कविता-सी कोई बात नहीं उठी, जिसमें छंद हो, लय हो।
(ग) बहुत दिन हो गए, गाने-गुनगुनाने का मन नहीं हुआ।
(घ) बहुत दिन हो गए, मन का दुख दूर नहीं हुआ और न मन में खुशी आई।
इस कविता को चित्रित करने के लिए किन-किन रंगों का प्रयोग करना होगा?
नीचे लिखी पंक्तियों में रेखांकित शब्दों को ध्यान से देखिए-
(क) घुटनों पर पड़ी है नदी चादर-सी
(ख) सिमटा बैठा है भेड़ों के गल्ले-सा
(ग) पानी का परदा-सामेरे आसपास था हिल रहा
(घ) मँडराता रहता था एक मरियल-सा कुत्ता आसपास
(ङ) दिल है छोटा-सा छोटी-सी आशा
(च) घास पर फुदकती नन्ही-सी चिड़िया
• इन पंक्तियो में सा/सी का प्रयोग व्याकरण की दृष्टि से कैसे शब्दों के साथ हो रहा है?
नीचे दिए उदाहरण पढ़िए-
(क) बनत बहुत बहु रीत।
(ख) जाल परे जल जात बहि।
- उपर्युक्त उदाहरणों की पहली पंक्ति में 'ब' का प्रयोग कई बार किया गया है और दूसरी में 'ज' का प्रयोग। इस प्रकार बार-बार एक ध्वनि के आने से भाषा की सुंदरता बढ़ जाती है। वाक्य रचना की इस विशेषता के अन्य उदाहरण खोजकर लिखिए।
नीचे दी गई कविता की पंक्तियों को सामान्य वाक्य में बदलिए।
जैसे-एक तिनका आँख में मेरी पड़ा-मेरी आँख में एक तिनका पड़ा।
मूँठ देने लोग कपड़े की लगे-लोग कपड़े की मूँठ देने लगे।
(क) एक दिन जब था मुंडेरे पर खड़ा- ____________
(ख) लाल होकर आँख भी दुखने लगी- __________
(ग) ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी- ___________
(घ) जब किसी ढब से निकल तिनका गया- ____________
घमंडी की आँख से तिनका निकालने के लिए उसके आसपास लोगों ने क्या किया?
तिनके से कवि की क्या हालत हो गई?
निम्न पंक्तियों को ध्यान से देखिए
‘कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ ______ एक हिलोर उधर से आए’,
इन पंक्तियों के अंत में आए, जाए जैसे तुक मिलानेवाले शब्दों का प्रयोग किया गया है। इसे तुकबंदी या अंत्यानुप्रास कहते हैं। कविता से तुकबंदी के अन्य शब्दों को छाँटकर लिखिए। छाँटे गए शब्दों से अपनी कविता बनाने की कोशिश कीजिए।
