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‘इफ़्फ़न के पिता के तबादले के बाद टोपी शुक्ला का अकेलापन और महंत और भाईयों के दुर्व्यवहार के कारण ‘हरिहर काका’ का मौन धारण वर्तमान समाज की ऐसी सच्चाई है, जिससे आज बहुत से लोग

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Question

‘इफ़्फ़न के पिता के तबादले के बाद टोपी शुक्ला का अकेलापन और महंत और भाईयों के दुर्व्यवहार के कारण ‘हरिहर काका’ का मौन धारण वर्तमान समाज की ऐसी सच्चाई है, जिससे आज बहुत से लोग पीड़ित हैं।’ इस स्थिति से निकलने में आप ऐसे लोगों को क्या सुझाव देंगे?

Short Answer
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Solution

इफ़्फ़न के चले जाने से टोपी बेहद अकेला महसूस करने लगा और उसके जीवन में फिर कभी ऐसी गहरी दोस्ती नहीं हो पाई। दूसरी ओर, हरिहर काका भी अपने भाइयों के धोखे से आहत होकर निराश हो गए। टोपी और हरिहर काका की यह उदासीनता उनके जीवन में आए खालीपन और दूसरों पर अत्यधिक भरोसा करने का परिणाम थी। इन दोनों का अकेलापन अन्य लोगों और परिवारजनों की उपेक्षा के कारण बढ़ गया। यदि टोपी को अन्य सहपाठियों या भाई-बहनों का सहारा मिला होता, तो वह इस स्थिति से उबर सकता था। ऐसे समय में व्यक्ति को भावनात्मक रूप से खुद को मजबूत बनाना चाहिए। अपनी रुचि के कामों में मन लगाना, नए लोगों से मिलना, दोस्त बनाना, या घूमने-फिरने जैसी गतिविधियों के जरिए अकेलेपन को दूर किया जा सकता है। यदि कोई हमें सहारा न दे, तो हमें खुद दूसरों का सहारा बनने की कोशिश करनी चाहिए। इससे न केवल हम खुद को संभाल पाएंगे, बल्कि दूसरों को भी मदद कर सकेंगे।

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हरिहर काका
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2021-2022 (March) Outside Delhi Set 1

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कथावाचक और हरिहर काका के बीच क्या संबंध है और इसके क्या कारण हैं?


अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुनिया की बेहतर समझ रखते हैं। कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।


कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि लेखक ने यह क्यों कहा, "अज्ञान की स्थिति में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं। ज्ञान होने के बाद तो आदमी आवश्यकता पड़ने पर मृत्यु को वरण करने के लिए तैयार हो जाता है।"


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लोभी महंत एक ओर हरिहर काका को यश और बैकुंठ का लोभ दिखा रहा था तो दूसरी ओर पूर्व जन्म के उदाहरण द्वारा भय भी दिखा रहा था। स्पष्ट कीजिए।


कल भी उनके यहाँ गया था, लेकिन न तो वह कल ही कुछ कह सके और न आज ही। दोनों दिन उनके पास मैं देर तक बैठा रहा, लेकिन उन्होंने कोई बातचीत नहीं की। जब उनकी तबीयत के बारे में पूछा तब उन्होंने सिर उठाकर एक बार मुझे देखा फिर सिर झुकाया तो दुबारा मेरी ओर नहीं देखा। हालाँकि उनकी एक ही नज़र बहुत कुछ कह गई। जिन यंत्रणाओं के बीच वह घिरे थे और जिस मनःस्थिति में जी रहे थे, उसमें आँखें ही बहुत कुछ कह देती हैं, मँहु खोलने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

हरिहर काका की पंद्रह बीघे ज़मीन उनके लिए जी का जंजाल बन गई। कथन के आलोक में अपने विचार व्यक्त कीजिए।


‘हरिहर काका’ कहानी वृद्धों के प्रति संवेदनहीन होते समाज की कथा है।' इस कथन को कहानी के आधार पर उदाहरण सहित सिद्ध कीजिए।


पूरक पाठ्य पुस्तक पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए -

हरिहर काका और टोपी शुक्ला दोनों ही भरे-पूरे परिवार से संबंधित होते हुए भी अकेले थे। दोनों के अकेलेपन के कारणों की समीक्षा कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:

'हरिहर काका कहानी पारिवारिक जीवन में घर कर चुकी स्वार्थपरता और हिंसा-प्रवृत्ति को बेनकाब करती है।' तर्कसंगत उत्तर दीजिए।


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