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Question
हरिहर काका के भाइयों और ठाकुरवारी के साधु-संतों के व्यवहार में कोई अंतर नहीं था। स्पष्ट कीजिए।
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Solution
जब हरिहर काका ने अपने भाइयों के कहने पर अपनी जमीन-जायदाद उनके नाम नहीं किया तो उनके भाइयों ने उनके साथ बहुत जुल्म-अत्याचार किया और जबरन अनेक कागजों पर उनके अँगूठे के निशान लिए, इसके अलावा उन्हें खूब मारा-पीटा तथा उनकी कोई भी दुर्गति बाकी नहीं छोड़ी, अगर और थोड़ी देर तक पुलिस नहीं आती तो वह उन्हें जान से मार देते। इससे स्पष्ट है कि हरिहर काका के भाइयों और ठाकुरबारी के साधु-संतों के व्यवहार में कोई अंतर नहीं था।
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हरिहर काका की पंद्रह बीघे ज़मीन उनके लिए जी का जंजाल बन गई। कथन के आलोक में अपने विचार व्यक्त कीजिए।
लोगों के बीच बहस छिड़ जाती है। उत्तराधिकारी के कानून पर जो जितना जानता है, उससे दस गुना अधिक उगल देता है। फिर भी कोई समाधान नहीं निकलता। रहस्य खत्म नहीं होता, आंशकाएँ बनी ही रहती हैं। लेकिन लोग आशंकाओं को नजरअंदाज कर अपनी पक्षधरता शुरू कर देते हैं।
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पूरक पाठ्य-पुस्तक पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:
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