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Question
पुलिस द्वारा ठाकुरबारी के कमरे से मुक्त कराए गए काका ने वहाँ के महंत, पुजारी और साधुओं की किस असलियत से परिचित कराया?
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Solution
पुलिस ने जब हरिहर काका को ठाकुरबारी के एक कमरे से निकालकर बंधन मुक्त किया और उनके मुँह में ढूंसा कपड़ा निकाला तो हरिहर काका ने ठाकुरबारी के महंत, पुजारी और साधुओं की काली करतूतों का परदाफ़ाश करना शुरू किया कि वह साधु नहीं, डाकू, हत्यारे और कसाई हैं, वे उन्हें इस रूप में कमरे में बंद कर गुप्त दरवाजे से भाग गए, इसके अलावा उन्होंने कई सादे और लिखे हुए कागजों पर जबरन उनके अँगूठे के निशान लिए ताकि जमीन-जायदाद पर कब्ज़ा कर सकें।
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अथवा
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| कल भी उनके यहाँ गया था, लेकिन न तो वह कल ही कुछ कह सके और न आज ही। दोनों दिन उनके पास मैं देर तक बैठा रहा, लेकिन उन्होंने कोई बातचीत नहीं की। जब उनकी तबीयत के बारे में पूछा तब उन्होंने सिर उठाकर एक बार मुझे देखा फिर सिर झुकाया तो दुबारा मेरी ओर नहीं देखा। हालाँकि उनकी एक ही नज़र बहुत कुछ कह गई। जिन यंत्रणाओं के बीच वह घिरे थे और जिस मनःस्थिति में जी रहे थे, उसमें आँखें ही बहुत कुछ कह देती हैं, मँहु खोलने की ज़रूरत नहीं पड़ती। |
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लोगों के बीच बहस छिड़ जाती है। उत्तराधिकारी के कानून पर जो जितना जानता है, उससे दस गुना अधिक उगल देता है। फिर भी कोई समाधान नहीं निकलता। रहस्य खत्म नहीं होता, आंशकाएँ बनी ही रहती हैं। लेकिन लोग आशंकाओं को नजरअंदाज कर अपनी पक्षधरता शुरू कर देते हैं।
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए:
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