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प्रश्न
‘इफ़्फ़न के पिता के तबादले के बाद टोपी शुक्ला का अकेलापन और महंत और भाईयों के दुर्व्यवहार के कारण ‘हरिहर काका’ का मौन धारण वर्तमान समाज की ऐसी सच्चाई है, जिससे आज बहुत से लोग पीड़ित हैं।’ इस स्थिति से निकलने में आप ऐसे लोगों को क्या सुझाव देंगे?
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उत्तर
इफ़्फ़न के चले जाने से टोपी बेहद अकेला महसूस करने लगा और उसके जीवन में फिर कभी ऐसी गहरी दोस्ती नहीं हो पाई। दूसरी ओर, हरिहर काका भी अपने भाइयों के धोखे से आहत होकर निराश हो गए। टोपी और हरिहर काका की यह उदासीनता उनके जीवन में आए खालीपन और दूसरों पर अत्यधिक भरोसा करने का परिणाम थी। इन दोनों का अकेलापन अन्य लोगों और परिवारजनों की उपेक्षा के कारण बढ़ गया। यदि टोपी को अन्य सहपाठियों या भाई-बहनों का सहारा मिला होता, तो वह इस स्थिति से उबर सकता था। ऐसे समय में व्यक्ति को भावनात्मक रूप से खुद को मजबूत बनाना चाहिए। अपनी रुचि के कामों में मन लगाना, नए लोगों से मिलना, दोस्त बनाना, या घूमने-फिरने जैसी गतिविधियों के जरिए अकेलेपन को दूर किया जा सकता है। यदि कोई हमें सहारा न दे, तो हमें खुद दूसरों का सहारा बनने की कोशिश करनी चाहिए। इससे न केवल हम खुद को संभाल पाएंगे, बल्कि दूसरों को भी मदद कर सकेंगे।
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