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प्रश्न
पूरक पाठ्य पुस्तक पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए -
हरिहर काका और टोपी शुक्ला दोनों ही भरे-पूरे परिवार से संबंधित होते हुए भी अकेले थे। दोनों के अकेलेपन के कारणों की समीक्षा कीजिए।
'भरे-पूरे परिवार में रहता हुआ भी व्यक्ति अकेला हो सकता है।' 'हरिहर काका' और 'टोपी शुक्ला' कहानी के आधार पर इस कथन को सिद्ध कीजिए।
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उत्तर
हरिहर काका की कहानी जीवन की वास्तविकता को दर्शाती है। यह कहानी पारिवारिक अशांति, बड़ों का अपमान तथा उनके मन के असंतोष के कटु सत्य को उजागर करती है। हरिहर काका को अपने भरे-पूरे परिवार के होते हुए भी अकेलेपन में दिन गुजारना पड़ता था। हरिहर काका की अपनी कोई संतान नहीं थी। वे अपने भाइयों के परिवार को ही अपना मानकर उनके साथ रहते थे परंतु उनके भाइयों ने उनकी जमीन को हथियाने के लालच में हरिहर काका के साथ विश्वासघात किया तथा उनके साथ अनुचित व्यवहार किया। इसी कारण हरिहर काका मानसिक वेदना से ग्रसित हो अकेलेपन में जीवन यापन कर रहे थे। वहीं दूसरी ओर टोपी को भी उनके परिवार में समझने वाला कोई नहीं था। टोपी को अपनी दादी से कोई लगाव नहीं था।
टोपी शुक्ला का अकेलापन सामाजिक और धार्मिक भेदभाव से जुड़ा था। समाज और परिवार की कठोर सोच और धार्मिक विभाजन ने उसे अलग-थलग कर दिया। वह अपनी सोच और विचारधारा के कारण समाज से कट गया और अपने मन की बात किसी से नहीं कह पाया। उसकी दादी उसकी भावनाओं को नहीं समझती थी। उसे डाँटती थी। पूरे घर में ऐसा कोई नहीं था जो उसे समझ सके। विद्यालय में भी उसे अपना आत्मसम्मान खोना ही पड़ता था। घर में किसी से भी वह अपने दुख को नहीं बाँट पाता था। इस प्रकार के व्यवहार के कारण भरे-पूरे घर में वह स्वयं को अकेला ही पाता था।
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