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कल भी उनके यहाँ गया था, लेकिन न तो वह कल ही कुछ कह सके और न आज ही। हरिहर काका की पंद्रह बीघे ज़मीन उनके लिए जी का जंजाल बन गई। कथन के आलोक में अपने विचार व्यक्त कीजिए।

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प्रश्न

कल भी उनके यहाँ गया था, लेकिन न तो वह कल ही कुछ कह सके और न आज ही। दोनों दिन उनके पास मैं देर तक बैठा रहा, लेकिन उन्होंने कोई बातचीत नहीं की। जब उनकी तबीयत के बारे में पूछा तब उन्होंने सिर उठाकर एक बार मुझे देखा फिर सिर झुकाया तो दुबारा मेरी ओर नहीं देखा। हालाँकि उनकी एक ही नज़र बहुत कुछ कह गई। जिन यंत्रणाओं के बीच वह घिरे थे और जिस मनःस्थिति में जी रहे थे, उसमें आँखें ही बहुत कुछ कह देती हैं, मँहु खोलने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

हरिहर काका की पंद्रह बीघे ज़मीन उनके लिए जी का जंजाल बन गई। कथन के आलोक में अपने विचार व्यक्त कीजिए।

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

हरिहर काका और लेखक के बीच बहुत ही मधुर एवं आत्मीय संबंध थे। लेखक गाँव में जिन लोगों का सम्मान करते थे हरिहर काका उनमें से एक थे। हरिहर काका की आँखों में लेखक ने उस दुख को देखा जो रिश्तों की गर्माहट के भावों को नकारता हुआ तथा पाँव पसारती हुई, स्वार्थ लिप्सा और धर्म की आड़ में फलने-फूलने का अवसर पा रही हिंसा प्रवृत्ति को उजागर करता है।

ठाकुरबारी के महंत एवं हरिहर काका के भाइयों का एकमात्र उद्देश्य हरिहर काका की पंद्रह बीघे ज़मीन को हथियाना था। इसके लिए उन्होंने कई तरह के हथकंडे अपनाए और हरिहर काका पर बहुत जुल्म और अत्याचार किए। उनके विश्वास को ठेस पहुँचाई। ठाकुरबारी के महंत ने ज़बरदस्ती सादे कागज़ पर अँगूठे के निशान लिए, उन्हें मारा-पीटा तथा हाथ पाँव और मुँह बाँधकर कमरे में बंद कर दिया। हरिहर के भाइयों ने भी ऐसा ही किया। भौतिक सुखों की होड़, रिश्तों की अहमियत को औपचारिकता और आडंबर का जामा पहनाना इत्यादि के कारण हरिहर की पंद्रह बीघे ज़मीन उनके लिए जी का जंजाल बन गई थी।

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हरिहर काका
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
2021-2022 (March) Term 2 Sample

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