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Question
'फ़ादर कामिल बुल्के संकल्प से संन्यासी थे, मन से नहीं।' लेखक के इस कथन के आधार पर सिद्ध कीजिए कि फ़ादर का जीवन परंपरागत संन्यासियों से किस प्रकार अलग था ?
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Solution
फ़ादर कामिल बुल्के संकल्प से संन्यासी थे, मन से नहीं। परंपरागत संन्यासी जिस तरह ईश्वर की भक्ति भजन-कीर्तन, ज्ञानोपदेश देने में लगे रहते हैं, वे उन अर्थों में संन्यासी नहीं थे। समाज से पलायन कर जाने की उनकी प्रवत्ति नहीं थी, बल्कि कॉलेज में अध्ययन-अध्यापन, प्रियजनों के घर आना-जाना, संकट के समय उन्हें धैर्य बँधना उनके स्वभाव में था। उनके मन में प्रियजनों के प्रति मोह व अपनत्व की भावना थी।
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फ़ादर बुल्के भारतीय संस्कृति के एक अभिन्न अंग हैं, किस आधार पर ऐसा कहा गया है?
इस पाठ के आधार पर फ़ादर कामिल बुल्के की जो छवि उभरती है उसे अपने शब्दों में लिखिए।
फ़ादर बुल्के ने संन्यासी की परंपरागत छवि से अलग एक नयी छवि प्रस्तुत की है, कैसे?
आशय स्पष्ट कीजिए -
फ़ादर को याद करना एक उदास शांत संगीत को सुनने जैसा है।
फ़ादर बुल्के की मृत्यु से लेखक आहत क्यों था?
लेखक ने फ़ादर का शब्द चित्र किस तरह खींचा है?
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‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
“फ़ादर कामिल बुल्के का सान्निध्य लेखक के लिए सुखद अनुभूति थी।” कथन का आशय ‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ से क्या संदेश मिलता है? अपने शब्दों में समझाइए।
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ के आधार पर फ़ादर कामिल बुल्के के व्यक्तित्व के किन्हीं दो पहलुओं का उल्लेख कीजिए, जिनसे आप प्रभावित हैं। इस प्रभाव के उपयुक्त कारण भी स्पष्ट कीजिए।
