Advertisements
Advertisements
Question
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ के आधार पर फ़ादर कामिल बुल्के के व्यक्तित्व के किन्हीं दो पहलुओं का उल्लेख कीजिए, जिनसे आप प्रभावित हैं। इस प्रभाव के उपयुक्त कारण भी स्पष्ट कीजिए।
Advertisements
Solution
फ़ादर बुल्के विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। उनका गोरा रंग, चेहरे पर सफेद भूरी दाढ़ी, नीली आँखें थी, उनका विशाल व्यक्तित्व संन्यासी जैसा प्रतीत होता था, जो मानवीय गुणों से युक्त, करुणा की भावना से परिपूर्ण, अपनत्व, प्रेम, वात्सल्य तथा सहृदयता के गुणों से सराबोर था। उनकी यही विशेषता मानव को अपनी ओर आकर्षित करने का एक महत्वपूर्ण पहलू था जो मिलने वाले को प्यार एवं अपनत्व से भर देते थे।
द्वितीय उनका देवदारु जैसा ऊँचा व्यक्तित्व ऐसा प्रतीत होता था, जो मानो थके हारे लोगों को छाया द्वारा शीतलता प्रदान करा रहा हो। किसी भी पारिवारिक उत्सव और संस्कार समारोह में वे अपने आशीर्वचनों एवं सांत्वना भरे शब्दों द्वारा लोगों को शांति व सुख प्रदान करते थे।
RELATED QUESTIONS
इस पाठ के आधार पर फ़ादर कामिल बुल्के की जो छवि उभरती है उसे अपने शब्दों में लिखिए।
लेखक ने फ़ादर बुल्के को 'मानवीय करुणा की दिव्य चमक' क्यों कहा है?
आशय स्पष्ट कीजिए -
फ़ादर को याद करना एक उदास शांत संगीत को सुनने जैसा है।
आपके विचार से बुल्के ने भारत आने का मन क्यों बनाया होगा?
फ़ादर बुल्के की मृत्यु से लेखक आहत क्यों था?
लेखक ने फ़ादर का शब्द चित्र किस तरह खींचा है?
‘परिमल’ क्या है? लेखक को परिमल के दिन क्यों याद आते हैं?
फ़ादर की पारिवारिक पृष्ठभूमि और उनका स्वभाव भी किसी सीमा तक उन्हें संन्यासी बनाने में सहायक सिद्ध हुई’–स्पष्ट कीजिए।
फ़ादर बुल्के ने भारत में बसने के लिए क्या आवश्यक समझा? उन्हें किस तरह हासिल किया?
अथवा
भारत आने पर फ़ादर द्वारा शिक्षा-दीक्षा प्राप्ति के सोपानों का क्रमिक वर्णन कीजिए।
‘संन्यासी होने के बाद भी फ़ादर का अपनी माँ से स्नेह एवं प्रेम कम न हुआ’–स्पष्ट कीजिए।
फ़ादर बुल्के ने हिंदी के उत्थान के लिए क्या-क्या प्रयास किए?
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ के आधार पर फ़ादर की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ नामक पाठ में निहित संदेश स्पष्ट कीजिए।
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ के आधार पर फ़ादर कामिल बुल्के का अपने शब्दों में रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए।
“फ़ादर कामिल बुल्के का सान्निध्य लेखक के लिए सुखद अनुभूति थी।” कथन का आशय ‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ के लेखक और फ़ादर बुल्के के संबंध, आपकी दृष्टि में कैसे थे? इससे फ़ादर के स्वभाव के विषय में क्या कहा जा सकता है?
