Advertisements
Advertisements
Question
लेखक ने फ़ादर बुल्के को 'मानवीय करुणा की दिव्य चमक' क्यों कहा है?
Advertisements
Solution
लेखक ने फ़ादर बुल्के को ‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ इसलिए कहा है क्योंकि उनके जीवन में प्रेम, करुणा और सेवा की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी। वे अत्यंत दयालु, सहृदय और सादगीपूर्ण व्यक्ति थे। उन्होंने मानवता की सेवा को ही धर्म माना।
फ़ादर बुल्के ने अपने जीवन में मानवता के प्रति गहरी संवेदना दिखाई, उन्होंने दूसरों के दुख को अपना समझा, सबके प्रति स्नेह और सहानुभूति रखी, और अपनी सादगी तथा सच्चाई से लोगों के मन को छू लिया। उनकी निष्काम सेवा भावना और स्नेहिल स्वभाव से उनके जीवन में सचमुच मानवीय करुणा की दिव्य चमक झलकती थी।
RELATED QUESTIONS
फ़ादर बुल्के भारतीय संस्कृति के एक अभिन्न अंग हैं, किस आधार पर ऐसा कहा गया है?
पाठ में आए उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए जिनसे फ़ादर बुल्के का हिंदी प्रेम प्रकट होता है?
फ़ादर बुल्के ने संन्यासी की परंपरागत छवि से अलग एक नयी छवि प्रस्तुत की है, कैसे?
आशय स्पष्ट कीजिए -
नम आँखों को गिनना स्याही फैलाना है।
आपके विचार से बुल्के ने भारत आने का मन क्यों बनाया होगा?
'बहुत सुंदर है मेरी जन्मभूमि - रेम्सचैपल।'- इस पंक्ति में फ़ादर बुल्के की अपनी जन्मभूमि के प्रति कौन-सी भावनाएँ अभिव्यक्त होती हैं? आप अपनी जन्मभूमि के बारे में क्या सोचते हैं?
‘परिमल’ क्या है? लेखक को परिमल के दिन क्यों याद आते हैं?
फ़ादर का सान्निध्य पाकर लेखक को ऐसा क्यों लगन्ना कि वह किसी देवदारु वृक्ष की छाया में खड़ा हो?
संन्यासी बनने से पूर्व फ़ादर ने धर्म गुरु के सामने क्या शर्त रखी और क्यों?
भारत आने के लिए पूछने पर फ़ादर क्या जवाब देते थे?
‘संन्यासी होने के बाद भी फ़ादर का अपनी माँ से स्नेह एवं प्रेम कम न हुआ’–स्पष्ट कीजिए।
फ़ादर बुल्के ने हिंदी के उत्थान के लिए क्या-क्या प्रयास किए?
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ के आधार पर फ़ादर की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
फ़ादर की उपस्थिति लेखक को देवदार की छाया के समान क्यों लगती थी? पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए।
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ के आधार पर लिखिए कि फ़ादर कामिल बुल्के की मृत्यु से बहुत बड़ी संख्या में लोग शोक-संतप्त क्यों हुए?
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ के आधार पर फ़ादर कामिल बुल्के का अपने शब्दों में रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए।
“फ़ादर कामिल बुल्के का सान्निध्य लेखक के लिए सुखद अनुभूति थी।” कथन का आशय ‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ के लेखक और फ़ादर बुल्के के संबंध, आपकी दृष्टि में कैसे थे? इससे फ़ादर के स्वभाव के विषय में क्या कहा जा सकता है?
