Advertisements
Advertisements
Question
‘अट नहीं रही है’ कविता का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखिए।
Advertisements
Solution
‘अट नहीं रही है’ कविता में फागुन महीने के सौंदर्य का वर्णन है। इस महीने में प्राकृतिक सौंदर्य कहीं भी नहीं समा रहा है और धरती पर बाहर बिखर गया है। इस महीने सुगंधित हवाएँ वातावरण को महका रही हैं। पेड़ों पर आए लाल-हरे पत्ते और फूलों से यह सौंदर्य और भी बढ़ गया है। इससे मन में उमंगें उड़ान भरने लगी हैं।
RELATED QUESTIONS
होली के आसपास प्रकृति में जो परिवर्तन दिखाई देते हैं, उन्हें लिखिए।
कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?
प्रस्तुत कविता अट नहीं रहीं है में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रुपों में किया है?
फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है?
इन कविताओं के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की विशेषताएँ लिखिए।
‘कहीं साँस लेते हो’ ऐसा कवि ने किसके लिए कहा है और क्यों?
अथवा
कवि ने फागुन का मानवीकरण कैसे किया है?
‘उड़ने को नभ में तुम पर-पर कर देते हो’ के आलोक में बताइए कि फागुन लोगों के मन को किस तरह प्रभावित करता है?
इस सत्र में पढ़ी गई किस कविता में फागुन के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किया गया है? उसे अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए।
प्रकृति के सौंदर्य का जो चित्र ‘अट नहीं रही है’ कविता उपस्थित करती है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।
'अट नहीं रही है' कविता में कवि ने फागुन मास के सौंदर्य को किस प्रकार चित्रित किया है?
'अट नहीं रही' कविता के आधार पर लिखिए कि फाल्गुन में प्रकृति में क्या-क्या बदलाव आते हैं?
पद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए -
पाठ्यक्रम में पढ़ी कौन-सी कविता पूरी तरह प्रकृति के सौंदर्य पर केंद्रित है? उसमें वर्णित प्राकृतिक सुंदरता के किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए।
