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छायावाद की एक खास विशेषता है अंतर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। कविता की किन पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है? लिखिए।

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Question

छायावाद की एक खास विशेषता है अंतर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। कविता की किन पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है? लिखिए।

Very Long Answer
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Solution

छायावादी काव्य में कवि अपने हृदय की अनुभूतियों को प्रकृति के साथ जोड़कर बाहरी जगत से एक गहरा संबंध स्थापित करता है। उदाहरणस्वरूप, यदि कविता में ऐसी पंक्तियाँ हों जहाँ कवि कहता है कि “मन के अंतरतम में छिपी भावनाएँ भी फागुन की हँसमुख बयार से जागृत हो उठती हैं,” या “पुष्पों की मुस्कान देखकर मेरा हृदय भी प्रसन्नता से खिल गया,” तो ये पंक्तियाँ अंतर्मन और प्रकृति के भावात्मक सामंजस्य को व्यक्त करती हैं।

अर्थात्, वे पंक्तियाँ जिनमें कवि अपनी भावनाओं को प्रकृति की मनोहरता के साथ जोड़कर प्रस्तुत करता है, छायावाद की इस प्रमुख विशेषता को स्पष्ट रूप से सिद्ध करती हैं।

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अट नहीं रही है
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Chapter 5: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' - उत्साह और अट नहीं रही है - प्रश्न-अभ्यास [Page 26]

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NCERT Hindi Kshitij Bhag 2 [English] Class 10
Chapter 5 सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' - उत्साह और अट नहीं रही है
प्रश्न-अभ्यास | Q 1. | Page 26

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होली के आसपास प्रकृति में जो परिवर्तन दिखाई देते हैं, उन्हें लिखिए।


कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?


प्रस्तुत कविता अट नहीं रहीं है में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रुपों में किया है?


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'अट नहीं रही' कविता के आधार पर लिखिए कि फाल्गुन में प्रकृति में क्या-क्या बदलाव आते हैं?


पद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए -

पाठ्यक्रम में पढ़ी कौन-सी कविता पूरी तरह प्रकृति के सौंदर्य पर केंद्रित है? उसमें वर्णित प्राकृतिक सुंदरता के किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए।


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