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Question
जैसे बादल उमड़-घुमड़कर बारिश करते हैं वैसे ही कवि के अंतर्मन में भी भावों के बादल उमड़-घुमड़कर कविता के रूप में अभिव्यक्त होते हैं। ऐसे ही किसी प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर अपने उमड़ते भावों को कविता में उतारिए।
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Solution
ऊपर निहारो नभ के भीतर, किसने काला रंग फैलाया।
सूरज न जाने कहाँ छिप बैठा, उसका सारा प्रकाश नज़र न आया।।
आकाश का श्यामल मुख देखकर, बिजली हल्की-सी मुस्कुराई।
मानो बादलों को सजाने हेतु, उसने अपनी झलक दिखलाई।।
कुछ बादल धरती की ओर उतर आए।।
वे अपने संग जल से भरा एक थाल लेकर आए, जिससे नभ का मुख धुलवाया।
थोड़ा जल आकाश में ठहरा, शेष सारा धरती पर बरस आया।।
कुछ बूँदें फूलों पर जा गिरीं, कुछ ने चातक की प्यास मिटाई।
कुछ तालाबों और कुछ खेतों तक पहुँचकर, सबको हरियाली दिलाई।।
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