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Question
प्रस्तुत कविता अट नहीं रहीं है में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रुपों में किया है?
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Solution
कवि ने कविता “अट नहीं रही है” में प्रकृति की व्यापकता का वर्णन फागुन मास की छटा के रूप में किया है। उन्होंने दिखाया है कि फागुन की सुगंध और सौंदर्य घर-घर भर रहा है, हवा में उड़कर पूरे वातावरण में फैल रहा है। कहीं हरी तो कहीं लाल पत्तियों की लड़ी है, और मंद गंध, पुष्प-माल, पट-पट करती शोभा-श्री से पूरा वातावरण सजा है। इन रूपों के माध्यम से कवि ने प्रकृति की सर्वव्यापकता और सौंदर्य को व्यक्त किया है।
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