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अपनी जिंदगी को सहर्ष स्वीकारना चाहिए' इस कथन परअपने विचार लिखिए।

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Question

अपनी जिंदगी को सहर्ष स्वीकारना चाहिए' इस कथन परअपने विचार लिखिए।

Answer in Brief
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Solution

हमारे जीवन में अच्छा-बुरा, सफलता-असफलता, सुख- दुख जो भी मिलता है, उसे हमें सहर्ष स्वीकारना चाहिए। मानव जीवन में उतार-चढ़ाव आते ही रहते हैं। उसका अस्तित्व गति से है। अत: हमें निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। सृष्टि में ऐसे अनेक तत्त्व हैं, जिन पर मानव अभी तक विजय प्राप्त नहीं कर पाया है। बार-बार प्रयत्न करने पर भी हम आशा के अनुरूप सफलता नहीं प्राप्त कर पाते। और दुख में डूबकर उस सफलता का भी आनंद नहीं उठा पाते, जो हमें मिली है। हमें जो नहीं मिला, उसका दुख मनाने के स्थान पर जो मिल रहा है, उसे सुखी होना चाहिए। कर्तव्य करना हमारे हाथ है, परिणाम हमारे हाथ में नहीं होता। सुख और दुख दोनों इस जीवन रूपी नदी के दो तटों के समान हैं। नदी की यह गतिशीलता ही उसका जीवन है। जिस दिन नदी चलना, बहना छोड़ देगी, उस दिन उसका अस्तित्त्व समाप्त हो जाएगा। ठीक इसी प्रकार मनुष्य भी जिस दिन कर्म करना छोड़ देगा, उसके दुर्दिन प्रारंभ हो जाएंगे। और की वह घड़ियाँ जब काटे नहीं कटेंगी, तो वह एक-एक पल गिन-गिनकर काटेगा। अगर हम आगे बढ़ने का प्रयास छोड़ देंगे, तो जीवन में जड़ता घर कर जाएगी, जो बड़ी कष्टदायक स्थिति उत्पन्न कर देगी। जीवन का दूसरा नाम ही है रवानगी। क्योंकि चलना ही जीवन है, जो रुक गया, उसकी मृत्यु निश्चित है।

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पद्य (Poetry) (11th Standard)
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Chapter 12: सहर्ष स्वीकारा है - अभिव्यक्ति [Page 63]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Yuvakbharati [English] Standard 11 Maharashtra State Board
Chapter 12 सहर्ष स्वीकारा है
अभिव्यक्ति | Q 1 | Page 63

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