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जाने क्या रिश्ता है, जाने क्या नाता है, जितना भी उँडेलताहूँ, भर-भर फिर आता है,' इन पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए।

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Question

जाने क्या रिश्ता है, जाने क्या नाता है, जितना भी उँडेलताहूँ, भर-भर फिर आता है,' इन पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए।

Answer in Brief
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Solution

 कवि कहता है कि तुम्हारे साथ न जाने मेरा कौन-सा संबंध है, न जाने कैसा नाता है कि मैं अपने भीतर समाए हुए तुम्हारे स्नेह रूपी जल को जितना बाहर निकालता हूँ, उतना वह चारों ओर से सिमटकर चला आता है और मेरे हृदय में भर आता है।

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पद्य (Poetry) (11th Standard)
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Chapter 12: सहर्ष स्वीकारा है - काव्य सौंदर्य [Page 63]

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Balbharati Hindi Yuvakbharati Standard 11 Maharashtra State Board
Chapter 12 सहर्ष स्वीकारा है
काव्य सौंदर्य | Q 2 | Page 63
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