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Question
जाने क्या रिश्ता है, जाने क्या नाता है, जितना भी उँडेलताहूँ, भर-भर फिर आता है,' इन पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer in Brief
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Solution
कवि कहता है कि तुम्हारे साथ न जाने मेरा कौन-सा संबंध है, न जाने कैसा नाता है कि मैं अपने भीतर समाए हुए तुम्हारे स्नेह रूपी जल को जितना बाहर निकालता हूँ, उतना वह चारों ओर से सिमटकर चला आता है और मेरे हृदय में भर आता है।
shaalaa.com
पद्य (Poetry) (11th Standard)
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