English

आर्जकल बच्चे घरों में अकेले खेलते हैं, पर भोलानाथ और उसके साथी मिल-जुलकर खेलते थे। इनमें से आप भावी जीवन के लिए किसे उपयुक्त मानते हैं और क्यों?

Advertisements
Advertisements

Question

आर्जकल बच्चे घरों में अकेले खेलते हैं, पर भोलानाथ और उसके साथी मिल-जुलकर खेलते थे। इनमें से आप भावी जीवन के लिए किसे उपयुक्त मानते हैं और क्यों?

Short/Brief Note
Advertisements

Solution

यह सत्य है कि आजकल के बच्चे कंप्यूटर पर गेम, वीडियो गेम, टेलीविज़न पर कार्टून देखते हुए अकेले समय बिताते हैं, परंतु भोलानाथ का समय साथियों के साथ खेलते हुए बीतता था। खेत में चिड़ियाँ उड़ाना हो या चूहे के बिल में पानी डालना या खेती करना, बारात निकालना आदि खेल ऐसे थे जिनमें बच्चों का एक साथ खेलना आवश्यक था। मैं मिलजुलकर खेलने को भावी जीवन के लिए उपयुक्त मानता हूँ, क्योंकि-

  • इससे सामूहिकता की भावना मजबूत बनती है।
  • इस प्रकार के खेलों से सहयोग की भावना विकसित होती है।
  • मिल-जुलकर खेलने से सभी बच्चे अपना-अपना योगदान देते हैं, जिससे सक्रिय सहभागिता की भावना का उदय होता है।
  • मिल-जुलकर खेलने से बच्चों में हार-जीत को समान रूप से अपनाने की प्रेरणा मिलती है जिनका भावी जीवन में बड़ी उपयोगिता होती है।
shaalaa.com
माता का आँचल
  Is there an error in this question or solution?

RELATED QUESTIONS

प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है। आपकी समझ से इसकी क्या वजह हो सकती है?


आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है?


भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है?


पाठ में आए ऐसे प्रसंगों का वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गए हों?


इस पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है, वह आपके बचपन की दुनिया से किस तरह भिन्न है?


‘माता का अँचल’ पाठ में वर्णित समय में गाँवों की स्थिति और वर्तमान समय में गाँवों की स्थिति में आए परिवर्तन को स्पष्ट कीजिए।


पिता भले ही बच्चे से कितना लगाव रखे पर माँ अपने हाथ से बच्चे को खिलाए बिना संतुष्ट नहीं होती है- ‘माता का अँचल’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।


बच्चे रोना-धोना, पीड़ा, आपसी झगड़े ज्यादा देर तक अपने साथ नहीं रख सकते हैं। माता के अँचल’ पाठ के आधार पर बच्चों की स्वाभाविक विशेषताएँ लिखिए।


भोलानाथ और उसके साथी खेल-खेल में फ़सल कैसे उगाया करते थे?


भोलानाथ की माँ उसे किस तरह कन्हैया बना देती?


भोलानाथ के पिता भोलानाथ को पूजा-पाठ में शामिल करते, उसे गंगा तट पर ले जाते तथा लौटते हुए पेड़ की डाल पर झुलाते। उनका ऐसा करना किन-किन मूल्यों को उभारने में सहायक है?


‘माता का अंचल’ पाठ में वर्णित बचपन और आज के बचपन में क्या अंतर है? क्या इस अंतर का प्रभाव दोनों बचपनों के जीवन मूल्यों पर पड़ा है? तर्क सहित स्पष्ट कीजिए।


'माता का अँचल' पाठ में भोलानाथ का अपने माता-पिता से बहुत लगाव है। बचपन में हर बच्चा एक पल के लिए भी माता-पिता का साथ नहीं छोड़ना चाहता है, किंतु माता-पिता के बूढ़े हो जाने पर इनमें से ही कुछ उन्हें साथ न रखकर वृद्धाश्रम में पहुँचा देते हैं। ऐसे लोगों को आप किन शब्दों में समझाएँगे? विचार करके लिखिए।


पिता द्वारा भोलानाथ को खाना खिलाने के बाद भी उसकी माँ उसे खाना खिलाती थी, क्यों? ‘माता का अँचल’ पाठ के आधार पर लिखिए।


'माता का अँचल' पाठ में बच्चों की दिनचर्या आजकल के बच्चों की दिनचर्या से भिन्न है, कैसे? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।


'पूरक पाठ्य-पुस्तक' के पाठ पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखिए -

यह स्वाभाविक है कि बच्चा माता या पिता किसी एक से अधिक नज़दीकी का अनुभव करता हो - 'माता का आँचल' के भोलानाथ के संदर्भ से इस कथन पर प्रकाश डालें। इसके साथ ही अपने जीवन के अनुभव से इसके पक्ष या विपक्ष में टिप्पणी कीजिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×