मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता ८ वी

मैंने समझा मेरे रजा साहब पाठ से

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

मैंने समझा मेरे रजा साहब पाठ से 

लघु उत्तर
Advertisements

उत्तर

व्यक्ति को सर्वधर्मसमभाव की भावना के साथ सर्वत्र प्रेम फैलाते हुए आगे बढ़ना चाहिए। जीवन में छोटी-बड़ी बातों को महत्त्व देते हुए अपने कर्तव्यों का शांति व धैर्य से पालन करना चाहिए। इसके साथ ही व्यक्ति को अपने मित्र के प्रति कर्तव्यों का पालन पूरी ईमानदारी से करना चाहिए।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.7: मेरे रजा साहब - उपयोजित लेखन [पृष्ठ १८]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 8 Maharashtra State Board
पाठ 1.7 मेरे रजा साहब
उपयोजित लेखन | Q 2 | पृष्ठ १८

संबंधित प्रश्‍न

मैंने समझा हे मातृभूमि कविता से 


मैंने समझा मधुबन पाठ से 


‘जहाँ चाह होती है वहाँ राह निकल आती है’, इस सुवचन पर आधारित अस्‍सी शब्‍दों तक कहानी लिखिए।


‘कर्म ही पूजा है’, विषय पर अपने विचार सौ शब्‍दों में लिखो।


मैंने समझा अंधायुग कविता से।  


निम्‍नलिखित मुद्दों के आधार पर कहानी लिखकर उसे उचित शीर्षक दो। 



।। सत्यमेव जयते ।।


किसी शहीद और उसके परिवार के बारे में सुनो: मुद्दे - जन्म तिथि, गाँव, शिक्षा, घटना।


चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

____________


किसी एक संस्मरणीय घटना का वर्णन करो।


बिना सोचे विचारे किसी बात पर विश्वास ना करें।


।। विज्ञान का फैलाओगे प्रकाश तो होगा अंधविश्वास का नाश ।।


विभिन्न पशु-पक्षियों की बोलियों की नकल सुनाओ।


अपने साथ घटित कोई मजेदार घटना बताओ।


यदि प्राणी नहीं होते तो ...


१ से १०० तक की संख्याओं का मुखर वाचन करो।


निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

Write a composition in approximately 400 words in Hindi of the topic given below:

नीचे दिए गए विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो।

'उपहार देना प्यार जताने और सम्मान करने का परिचायक है वर्तमान में उपहार का स्वरूप प्यार कम, व्यापार अधिक हो गया है।' - इस कथन के पक्ष अथवा विपक्ष में अपने तर्क प्रस्तुत कीजिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×