मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता ८ वी

मैंने समझा मेरे रजा साहब पाठ से

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प्रश्न

मैंने समझा मेरे रजा साहब पाठ से 

लघु उत्तर
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उत्तर

व्यक्ति को सर्वधर्मसमभाव की भावना के साथ सर्वत्र प्रेम फैलाते हुए आगे बढ़ना चाहिए। जीवन में छोटी-बड़ी बातों को महत्त्व देते हुए अपने कर्तव्यों का शांति व धैर्य से पालन करना चाहिए। इसके साथ ही व्यक्ति को अपने मित्र के प्रति कर्तव्यों का पालन पूरी ईमानदारी से करना चाहिए।

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उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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पाठ 1.7: मेरे रजा साहब - उपयोजित लेखन [पृष्ठ १८]

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बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 8 Maharashtra State Board
पाठ 1.7 मेरे रजा साहब
उपयोजित लेखन | Q 2 | पृष्ठ १८

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ध्या चं        
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मी भा हो भा     - ______
नी से भि   - ______
मं बं जू   - ______
स्क रा र्य भा चा   - ______
जे. ला ए.  पी. - ______
जा म्म की - ______
ना ला चा ल्प - ______

आप तरुण वैश्य/तरुणा वैश्य हैं। आप बी. एड कर चुके हैं। आपको विवेक इंटरनेशनल स्कूल, अ ब स नगर में हिंदी अध्यापक/अध्यापिका पद के लिए आवेदन करना है। इसके लिए आप अपना एक संक्षिप्त स्ववृत्त (बायोडाटा) लगभग 80 शब्दों में तैयार कीजिए।


निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

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