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महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता ८ वी

‘जहाँ चाह होती है वहाँ राह निकल आती है’, इस सुवचन पर आधारित अस्‍सी शब्‍दों तक कहानी लिखिए।

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प्रश्न

‘जहाँ चाह होती है वहाँ राह निकल आती है’, इस सुवचन पर आधारित अस्‍सी शब्‍दों तक कहानी लिखिए।

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

जहाँ चाह होती है वहाँ राह निकल आती है

     मेहनती रोहन अपनी माँ के साथ गाँव में रहता था। वह बहुत ही गरीब था। बचपन में ही उसके पिता की मृत्यु हो गई थी। रोहन की पढ़ाई-लिखाई व उसके भरण-पोषण की जिम्मेदारी उसकी माँ पर ही थी। माँ सब्जियाँ बेचकर घर चलाती थी। रोहन बहुत ही होशियार था। वह हमेशा बुद्धिमानी व चतुराई से कार्य करता था। जीवन में एक सफल इंसान बनकर दूसरों की सेवा करना उसका लक्ष्य था। एक दिन अचानक बीमार पड़ने के कारण माँ सब्जियाँ बेचने नहीं जा पाई। दवा खाने के बाद भी माँ की तबियत में कोई सुधार नहीं हुआ, बल्कि हालत और भी खराब होती गई। रोहन ने बड़े डॉक्टर से माँ का इलाज करवाया। घर में जितने भी पैसे थे सारे माँ के इलाज में खर्च हो गए। डॉक्टर ने माँ को कुछ दिन आराम करने की सलाह दी।

     सारे पैसे खर्च हो जाने के कारण रोहन अपने विद्यालय की फीस नहीं जमा कर पाया। शिक्षक ने जब उसे बुलाकर फिस न जमा करने का कारण पूछा तो रोहन ने सारी बात शिक्षक को बताई। शिक्षक ने प्रधानाचार्य से बातकर रोहन की उस महीने की फीस माफ करा दी।

    रोहन की घर की स्थिति देखकर उसके पड़ोसियों ने उसे समझाया कि तुम पढ़ाई- लिखाई छोड़कर कोई नौकरी करो और अपनी माँ की देखभाल करो। रोहन को अपनी पढ़ाई नहीं छोड़नी थी। उसे पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना था, परंतु उसे कुछ समझ नहीं रहा था कि वह क्या करे। अगले महीने जब फिर से वह विद्यालय की फीस नहीं भर पाया तो, शिक्षक ने उसे एक सुझाव दिया कि तुम विद्यालय के बाद छोटे-छोटे विद्यार्थियों को पढ़ाया करो, उससे तुम्हें थोड़ी आर्थिक मदद मिलेगी। रोहन भी इस बात के लिए मान गया। उसने अपने शिक्षक की सहायता से छोटे बच्चों को पढ़ाना शुरू किया और अपने मित्र की सहायता से सुबह घर-घर अखबार पहुँचाने का कार्य करने लगा।

     माँ अपने बेटे को इस तरह कड़ी मेहनत करते देख परेशान हो गई, परंतु रोहन ने माँ को प्यार से समझाया कि अब वह बड़ा हो गया है। अपने बेटे की बड़ी-बड़ी बातें सुनकर माँ की आँखों में आँसू आ गए। देखते-ही-देखते रोहन के पास ढेर सारे पैसे जमा हो गए और उसने वे पैसे अपनी माँ को दिए और विद्यालय की फीस भी जमा कर दी। पढ़ाई में कड़ी मेहनत करके रोहन इस वर्ष परीक्षा में अव्वल आया और विद्यालय ने उसकी आगे की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति देना शुरू किया। इस तरह रोहन ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपने घर को भी सँभाला और आगे चलकर वह एक डॉक्टर बन गया। गाँव के लोग रोहन की तरक्की देखकर बस यही कहते थे, 'जहाँ चाह होती है वहाँ राह निकल आती है।'

सीख: यदि मन में कुछ पाने की चाह हो तो उसके लिए रास्ते अपने आप निकल आते

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उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.7: मेरे रजा साहब - उपयोजित लेखन [पृष्ठ १८]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 8 Maharashtra State Board
पाठ 1.7 मेरे रजा साहब
उपयोजित लेखन | Q 1 | पृष्ठ १८

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