मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता ६ वी

‘साक्षरता अभियान’ के बारे में जानकारी बताओ।

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

‘साक्षरता अभियान’ के बारे में जानकारी बताओ।

टीपा लिहा
Advertisements

उत्तर

साक्षरता का अर्थ है साक्षर होना अर्थात पढ़ने और लिखने की क्षमता से संपन्न होना। सभी देशों में साक्षरता के अलग-अलग अर्थ होते हैं। भारतीय साक्षरता अभियान के अनुसार यदि कोई व्यक्ति पढ़ना और लिखना सीख ले, तो उसे साक्षर माना जाएगा। भारतीय सरकार साक्षरता अभियान को तेजी से आगे बढ़ाते हुए, जन-जन को शिक्षा के प्रति जागरूक करने में जुटी है।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 2.02: तूफानों से क्या डरना - तूफानों से क्या डरना [पृष्ठ ३२]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 6 Maharashtra State Board
पाठ 2.02 तूफानों से क्या डरना
तूफानों से क्या डरना | Q (४) | पृष्ठ ३२

संबंधित प्रश्‍न

अंतरजाल से डॉ. रामकुमार वर्मा जी से संबंधित अन्य साहित्‍यिक जानकारियाँ प्राप्त करो।


‘तंबाकू सेवन के दुष्‍परिणाम’ विषय पर लगभग सौ शब्‍दों में निबंध लिखो।


मैंने समझा मेरा विद्रोह पाठ से 


गणतंत्र दिवस पर सम्मानित बच्चों के बहादुरी के प्रसंग पढ़ो और पसंदीदा किसी एक का वर्णन करो।


।। जीवन चलता ही रहता।।


तुम्हें रुपयों से भरा बटुआ मिल जाए तो .....


किसी दुकानदार और ग्राहक के बीच होने वाला संवाद लिखो और सुनाओ: जैसे - माँ और सब्जीवाली।


१ से १०० तक की संख्याओं का मुखर वाचन करो।


निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

आप आस्था/मनु हैं। 'ऐतिहासिक इमारतों की सुरक्षा प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य' इस विषय पर लगभग 100 शब्दों में अपने विचार लिखकर किसी दैनिक समाचार- पत्र के संपादक को भेजिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×