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प्रश्न
मैंने समझा मधुबन पाठ से
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उत्तर
इस पाठ के माध्यम से मैंने प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. रामकुमार वर्मा के जीवन से संबंधित जानकारी प्राप्त की। उनकी काव्य रचना की प्रेरणा के बारे में जाना; साहित्य के प्रति उनके जीवन के लौकिक व पारलौकिक प्रेम तथा देश की राजनीति में उनकी रुचि आदि के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।
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संबंधित प्रश्न
शब्दों के आधार पर कहानी लिखो :
ग्रंथालय, स्वप्न, पहेली, काँच
‘जहाँ चाह होती है वहाँ राह निकल आती है’, इस सुवचन पर आधारित अस्सी शब्दों तक कहानी लिखिए।
मैंने समझा पूर्ण विश्राम पाठ से


पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होळकर के कार्य पढ़ो और प्रमुख मुद्दे बताओ।
।। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ ।।
किसी शहीद और उसके परिवार के बारे में सुनो: मुद्दे - जन्म तिथि, गाँव, शिक्षा, घटना।
गृह उद्याेगों की जानकारी प्राप्त करो और इसपर चर्चा करो।
सच्चाई में ही सफलता निहित है।
हमें सदैव प्रसन्न रहना चाहिए।
नीतिपरक दोहे सुनो और आनंदपूर्वक सुनाओ।
विद्यालय के स्नेह सम्मेलन का वर्णन करो।
यदि खनिज तेल का खजाना समाप्त हो जाए तो...
सद्गुणों को आत्मसात करने के लिए क्या करोगे, इसपर आपस में चर्चा करो।
यदि भोजन से नमक गायब हो जाए तो...
मार्ग पर चलते हुए तुमने कुछ यातायात संकेत देखे होंगे। इन सांकेतिक चिह्न का क्या अर्थ है, लिखो:

चित्रवाचन करके अपने शब्दों में कहानी लिखो और उचित शीर्षक बताओ:






आप तरुण वैश्य/तरुणा वैश्य हैं। आप बी. एड कर चुके हैं। आपको विवेक इंटरनेशनल स्कूल, अ ब स नगर में हिंदी अध्यापक/अध्यापिका पद के लिए आवेदन करना है। इसके लिए आप अपना एक संक्षिप्त स्ववृत्त (बायोडाटा) लगभग 80 शब्दों में तैयार कीजिए।
निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:
| “कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |
