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English Medium कक्षा १० - CBSE Question Bank Solutions

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कवि देव ने वसंत को किस अनूठे रूप में चित्रित किया है? उनकी यह कल्पना अन्य कवियों से किस तरह अलग है?

[3] देव : सवैया और कवित्त
Chapter: [3] देव : सवैया और कवित्त
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बालक वसंत का पालना कहाँ है? उसमें सजा बिस्तर किस तरह का है?

[3] देव : सवैया और कवित्त
Chapter: [3] देव : सवैया और कवित्त
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कामदेव के पुत्र को कौन, किस तरह प्रसन्न रखने का प्रयास कर रहा है?

[3] देव : सवैया और कवित्त
Chapter: [3] देव : सवैया और कवित्त
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बालक को बुरी नजर से बचाने का प्रयास कौन किस तरह कर रहा है?

[3] देव : सवैया और कवित्त
Chapter: [3] देव : सवैया और कवित्त
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कवि ने गुलाब का मानवीकरण किस तरह किया है?

[3] देव : सवैया और कवित्त
Chapter: [3] देव : सवैया और कवित्त
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‘फटिक सिलानि सौं सुधार्या सुधा मंदिर के आधार पर सुधा मंदिर का चित्रण कीजिए।

[3] देव : सवैया और कवित्त
Chapter: [3] देव : सवैया और कवित्त
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सुधा मंदिर के बाहर और आँगन की क्या विशेषता है?

[3] देव : सवैया और कवित्त
Chapter: [3] देव : सवैया और कवित्त
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कवि देव को चाँदनी रात में तारे कैसे दिख रहे हैं?

[3] देव : सवैया और कवित्त
Chapter: [3] देव : सवैया और कवित्त
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कवि देव ने चाँद का वर्णन परंपरा से हटकर किया है, स्पष्ट कीजिए।

[3] देव : सवैया और कवित्त
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कवि देव ने वसंत को राजा कामदेव का पुत्र क्यों कहा है?

[3] देव : सवैया और कवित्त
Chapter: [3] देव : सवैया और कवित्त
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होली के आसपास प्रकृति में जो परिवर्तन दिखाई देते हैं, उन्हें लिखिए।

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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छायावाद की एक खास विशेषता है अंतर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। कविता की किन पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है? लिखिए।

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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प्रस्तुत कविता अट नहीं रहीं है में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रुपों में किया है?

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है?

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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इन कविताओं के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की विशेषताएँ लिखिए।

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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‘कहीं साँस लेते हो’ ऐसा कवि ने किसके लिए कहा है और क्यों?
अथवा
कवि ने फागुन का मानवीकरण कैसे किया है?

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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‘उड़ने को नभ में तुम पर-पर कर देते हो’ के आलोक में बताइए कि फागुन लोगों के मन को किस तरह प्रभावित करता है?

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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‘अट नहीं रही है’ कविता के आधार पर फागुन में उमड़े प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
Chapter: [4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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‘अट नहीं रही है’ कविता का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखिए।

[4] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : उत्साह और अट नहीं रही है
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