Advertisements
Advertisements
प्रश्न
कवि देव को चाँदनी रात में तारे कैसे दिख रहे हैं?
Advertisements
उत्तर
चाँदनी के उज्ज्वल प्रकाश में स्वच्छ आसमान के चाँद के आसपास बिखरे तारे ऐसे लग रहे हैं, जैसे धरती पर राधा के आसपास सफ़ेद वस्त्र पहने गौरवर्ण वाली सहेलियाँ खड़ी हों। इनके शरीर से मोतियों-सी चमक और मल्लिका की महक उठ रही है।
संबंधित प्रश्न
दूसरे कवित्त के आधार पर स्पष्ट करें कि ऋतुराज वसंत के बाल-रूप का वर्णन परंपरागत वसंत वर्णन से किस प्रकार भिन्न है।
'प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै' - इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
चाँदनी रात की सुंदरता को कवि ने किन-किन रूपों में देखा है?
तीसरे कवित्त के आधार पर बताइए कि कवि ने चाँदनी रात की उज्ज्वलता का वर्णन करने के लिए किन-किन उपमानों का प्रयोग किया है?
बालक वसंत का पालना कहाँ है? उसमें सजा बिस्तर किस तरह का है?
कामदेव के पुत्र को कौन, किस तरह प्रसन्न रखने का प्रयास कर रहा है?
बालक को बुरी नजर से बचाने का प्रयास कौन किस तरह कर रहा है?
कवि ने गुलाब का मानवीकरण किस तरह किया है?
‘फटिक सिलानि सौं सुधार्या सुधा मंदिर के आधार पर सुधा मंदिर का चित्रण कीजिए।
कवि देव ने चाँद का वर्णन परंपरा से हटकर किया है, स्पष्ट कीजिए।
कवि देव ने वसंत को राजा कामदेव का पुत्र क्यों कहा है?
कवि मौन होकर प्रेमिका के कौन से प्रण पालन को देखना चाहता है?
कवि ने किस प्रकार की पुकार से 'कान खोलि है' की बात कही है?
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
बहुत दिनान को अवधि आसपास परे/खरे अरबरनि भरे हैं उठि जान को
संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए-
जान घनआनंद यों मोहिं तुम्है पैज परी ______ कबहूँ तौ मेरियै पुकार कान खोलि है।
आशय स्पष्ट कीजिए।
अधर लगे हैं आनि करि कै पयान प्रान,
चाहत चलन ये सैंदेसो लै सुजान को।
