हिंदी

चाँदनी रात की सुंदरता को कवि ने किन-किन रूपों में देखा है?

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

चाँदनी रात की सुंदरता को कवि ने किन-किन रूपों में देखा है?

टिप्पणी लिखिए
Advertisements

उत्तर

देवदत्त जी आकाश में चाँदनी रात की सुंदरता अपनी कल्पना के सागर में निम्नलिखित रुपों में देखते हैं -

  1. देवदत्त जी आकाश में फैली चाँदनी को आकाश में स्फटिक शिला से बने मंदिर के रुप में देख रहे हैं।
  2. देवदत्त के अनुसार चाँदनी रुपी दही का समंदर समस्त आकाश में उमड़ता हुआ सा नज़र आ रहा है।
  3. उनके अनुसार चाँदनी समस्त आकाश में फैली हुई ऐसी प्रतीत हो रही है मानो आकाश रुपी आँगन में दूध का फेन (झाग) फैल गया हो।
  4. देवदत्त कहते हैं आकाश के सारे तारे नायिका का वेश धारण कर अपनी सुंदरता की आभा को समस्त आकाश में बिखेर रहे हैं।
  5. देवदत्त के अनुसार चाँदनी में चाँद के प्रतिबिंब में राधा रानी की छवि का आभास प्राप्त होता है।
shaalaa.com
कवित्त
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?

संबंधित प्रश्न

दूसरे कवित्त के आधार पर स्पष्ट करें कि ऋतुराज वसंत के बाल-रूप का वर्णन परंपरागत वसंत वर्णन से किस प्रकार भिन्न है।


'प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै' - इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।


'प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद' - इस पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताएँ कि इसमें कौन-सा अलंकार है?


तीसरे कवित्त के आधार पर बताइए कि कवि ने चाँदनी रात की उज्ज्वलता का वर्णन करने के लिए किन-किन उपमानों का प्रयोग किया है?


कवि देव अपनी सहायता के लिए किसका आहवान कर रहे हैं?


कवि देव ने वसंत को किस अनूठे रूप में चित्रित किया है? उनकी यह कल्पना अन्य कवियों से किस तरह अलग है?


बालक वसंत का पालना कहाँ है? उसमें सजा बिस्तर किस तरह का है?


बालक को बुरी नजर से बचाने का प्रयास कौन किस तरह कर रहा है?


कवि ने गुलाब का मानवीकरण किस तरह किया है?


सुधा मंदिर के बाहर और आँगन की क्या विशेषता है?


कवि देव को चाँदनी रात में तारे कैसे दिख रहे हैं?


कवि देव ने चाँद का वर्णन परंपरा से हटकर किया है, स्पष्ट कीजिए।


कवि देव ने वसंत को राजा कामदेव का पुत्र क्यों कहा है?


कवि मौन होकर प्रेमिका के कौन से प्रण पालन को देखना चाहता है?


कवि ने किस प्रकार की पुकार से 'कान खोलि है' की बात कही है?


निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
मौन हू सौं देखिहौं कितेक पन पालिहौ जू/कूकभरी मूकता बुलाय आप बोलिहै।


आशय स्पष्ट कीजिए।

अधर लगे हैं आनि करि कै पयान प्रान,
चाहत चलन ये सैंदेसो लै सुजान को।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×