Advertisements
Advertisements
प्रश्न
कवि ने गुलाब का मानवीकरण किस तरह किया है?
Advertisements
उत्तर
कवि देव ने गुलाब को मानवीय क्रियाएँ करते हुए दिखाया है। गुलाब प्रात:काल जब चटककर खिलता है तो चटकने की | आवाज़ सुनकर ऐसा लगता है मानो वह चुटकी बजाकर सोए हुए बालक वसंत को जगा रहा है। इस तरह कवि ने गुलाब का मानवीकरण किया है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
चाँदनी रात की सुंदरता को कवि ने किन-किन रूपों में देखा है?
'प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद' - इस पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताएँ कि इसमें कौन-सा अलंकार है?
कवि देव अपनी सहायता के लिए किसका आहवान कर रहे हैं?
बालक वसंत का पालना कहाँ है? उसमें सजा बिस्तर किस तरह का है?
कामदेव के पुत्र को कौन, किस तरह प्रसन्न रखने का प्रयास कर रहा है?
बालक को बुरी नजर से बचाने का प्रयास कौन किस तरह कर रहा है?
‘फटिक सिलानि सौं सुधार्या सुधा मंदिर के आधार पर सुधा मंदिर का चित्रण कीजिए।
कवि देव ने चाँद का वर्णन परंपरा से हटकर किया है, स्पष्ट कीजिए।
कवि देव ने वसंत को राजा कामदेव का पुत्र क्यों कहा है?
कवि ने 'चाहत चलन ये संदेसो ले सुजान को' क्यों कहा है?
कवि मौन होकर प्रेमिका के कौन से प्रण पालन को देखना चाहता है?
कवि ने किस प्रकार की पुकार से 'कान खोलि है' की बात कही है?
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
बहुत दिनान को अवधि आसपास परे/खरे अरबरनि भरे हैं उठि जान को
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
मौन हू सौं देखिहौं कितेक पन पालिहौ जू/कूकभरी मूकता बुलाय आप बोलिहै।
संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए-
झूठी बतियानि की पत्यानि तें उदास है, कै ______ चाहत चलन ये संदेशो लै सुजान को।
संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए-
जान घनआनंद यों मोहिं तुम्है पैज परी ______ कबहूँ तौ मेरियै पुकार कान खोलि है।
आशय स्पष्ट कीजिए।
अधर लगे हैं आनि करि कै पयान प्रान,
चाहत चलन ये सैंदेसो लै सुजान को।
