English

English Medium Class 10 - CBSE Question Bank Solutions

Advertisements
Subjects
Topics
Subjects
Popular subjects
Topics

Please select a subject first

Advertisements
Advertisements
< prev  1821 to 1840 of 6864  next > 

आत्मकथा सुनाने के संदर्भ में ‘अभी समय भी नहीं’ कवि ऐसा क्यों कहता है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined

स्मृति को ‘पाथेय’ बनाने से कवि का क्या आशय है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined

Advertisements

भाव स्पष्ट कीजिए -

मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।
आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined

भाव स्पष्ट कीजिए -

जिसके अरुण कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined

‘उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की’ - कथन के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined

‘आत्मकथ्य’ कविता की काव्यभाषा की विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined

कवि ने जो सुख का स्वप्न देखा था उसे कविता में किस रूप में अभिव्यक्त किया है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined

आप किन व्यक्तियों की आत्मकथा पढ़ना चाहेंगे और क्यों?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined

कोई भी अपनी आत्मकथा लिख सकता है। उसके लिए विशिष्ट या बड़ा होना जरूरी नहीं। हरियाणा राज्य के गुड़गाँव में घरेलू सहायिका के रुप में काम करने वाली बेबी हालदार की आत्मकथा बहुतों के द्वारा सराही गई। आत्मकथात्मक शैली में अपने बारे में कुछ लिखिए।

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined

‘मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ’ किसका प्रतीक हैं? ये किसका बोध करा रही हैं?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined

‘असंख्य जीवन-इतिहास’ कहकर कवि किस ओर संकेत करना चाहता है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined

कवि के मित्र उससे क्या आग्रह कर रहे थे? वह इस आग्रह को पूरा क्यों नहीं करना चाहता था?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined

कवि को अपनी गागर रीती क्यों लगती है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined

‘तुम ही खाली करने वाले’ के माध्यम से कवि किनसे, क्या कहना चाहता है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined

कवि किसकी हँसी नहीं उड़ाना चाहता है और क्यों?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined

उन तथ्यों का उल्लेख कीजिए जिनका उल्लेख कवि अपनी आत्मकथा में नहीं करना चाहता है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined

कवि ने अपने जीवन की उज्ज्वल गाथा किसे कहा है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined

कवि के लिए सुख दिवास्वप्न बनकर रह गए, स्पष्ट कीजिए।

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined

‘अनुरागिनी उषा लेती थी, जिन सुहाग मधुमाया, में’ के आलोक में कवि ने अपनी पत्नी के विषय में क्या कहना चाहता है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined

कवि ने अपनी तुलना किससे की है? उसके जीवन का पाथेय क्या है?

[3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Chapter: [3] जयशंकर प्रसाद : आत्मकथ्य
Concept: undefined >> undefined
< prev  1821 to 1840 of 6864  next > 
Advertisements
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×