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‘उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की’ - कथन के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

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Question

‘उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की’ - कथन के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

Short Answer
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Solution

कवि यह कहना चाहता है कि अपनी प्रेयसी के साथ बिताए गए क्षणों को वह सबके सामने कैसे प्रकट करे। जीवन के कुछ अनुभवों को गोपनीय रखना ही उचित होता है। ऐसी स्मृतियों को वह सबके सामने प्रस्तुत कर अपनी हँसी नहीं उड़ाना चाहता है। अत: वह अपने जीवन की मधुर स्मृतियों को अपने तक ही सीमित रखना चाहता है।

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आत्मकथ्य
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Chapter 4: जयशंकर प्रसाद - आत्मकथ्य - प्रश्न-अभ्यास [Page 20]

APPEARS IN

NCERT Hindi Kshitij Bhag 2 [English] Class 10
Chapter 4 जयशंकर प्रसाद - आत्मकथ्य
प्रश्न-अभ्यास | Q 5. | Page 20

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कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहता है?


स्मृति को ‘पाथेय’ बनाने से कवि का क्या आशय है?


भाव स्पष्ट कीजिए -

मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।
आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।


भाव स्पष्ट कीजिए -

जिसके अरुण कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।


कवि ने जो सुख का स्वप्न देखा था उसे कविता में किस रूप में अभिव्यक्त किया है?


‘मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ’ किसका प्रतीक हैं? ये किसका बोध करा रही हैं?


‘तुम ही खाली करने वाले’ के माध्यम से कवि किनसे, क्या कहना चाहता है?


कवि किसकी हँसी नहीं उड़ाना चाहता है और क्यों?


कवि ने अपने जीवन की उज्ज्वल गाथा किसे कहा है?


कवि के लिए सुख दिवास्वप्न बनकर रह गए, स्पष्ट कीजिए।


कवि ने अपनी तुलना किससे की है? उसके जीवन का पाथेय क्या है?


आत्मकथा लिखने के लिए किन गुणों की आवश्यकता होती है? कवि के लिए यह कार्य कठिन क्यों था? सोचकर लिखिए।


'आत्मकथ्य' से उद्धृत निम्नलिखित काव्य-पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए -

“उसकी स्मृति पाथेय बनी है थके पथिक की पंथा की।”


पद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए -

'कथा के सीवन को उधेड़ने' का अर्थ स्पष्ट करते हुए बताइए कि कवि के लिए आत्मकथा लिखना सीवन उधेड़ने जैसा क्यों है?


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