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Question
यदि अतिथि पाँचवें दिन भी रुक गया तो लेखक की क्या दशा हो सकती थी?
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Solution
यदि अतिथि पाँचवें दिन भी रुक जाता तो लेखक की बची-खुची सहनशक्ति भी जवाब दे जाती। वह आतिथ्य के बोझ को और न सह पाता। डिनर से उतरकर खिचड़ी से होते हुए उपवास करने की स्थिति आ जाती। वह किसी भी स्थिति में अतिथि का सत्कार न कर पाता।
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −
उन पत्रों को देख-देखकर दिल्ली और शिमला में बैठे वाइसराय लंबी साँस-उसाँस लेते रहते थे।
निम्नलिखित शब्दों के पर्याय लिखिए
- वारिस – ____________
- जिगरी – ___________
- कहर – ___________
- मुकाम – ___________
- रूबरू – ___________
- फ़र्क – ___________
- तालीम – ___________
- गिरफ्तार – ___________
उदाहरण के अनुसार वाक्य बदलिए-
उदाहरण : गांधी जी ने महादेव भाई को अपना वारिस कहा था।
गांधी जी महादेव भाई को अपना वारिस कहा करते थे।
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- देश-विदेश के समाचार-पत्र गांधी जी की गतिविधियों पर टीका-टिप्पणी करते थे।
- गांधी जी के पत्र हमेशा महादेव की लिखावट में जाते थे।
सूर्योदय के 2-3 घंटे पहले पूर्व दिशा में या सूर्यास्त के 2-3 घंटे बाद पश्चिम दिशा में एक खूब चमकाता हुआ ग्रह दिखाई देता है, वह शुक्र ग्रह है। छोटी दूरबीन से इसकी बदलती हुई कलाएँ देखी जा सकती हैं, जैसे चंद्रमा की कलाएँ।
देश-विदेश के समाचार-पत्र गांधी जी की गतिविधियों पर टीका-टिप्पणी करते थे।
गांधी जी ने महादेव भाई को अपने उत्तराधिकारी का पद कब सौंपा?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए −
लेखक की दृष्टि में धर्म की भावना कैसी होनी चाहिए?
लोपसांग ने लेखिका की जान किस तरह से बचाई?
लेखक अपने अतिथि को दिखाकर दो दिनों से कौन-सा कार्य कर रहा था और क्यों?
‘तुम कब जाओगे, अतिथि’ पाठ की प्रासंगिकता आधुनिक संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
नीचे कुछ समानदर्शी शब्द दिए जा रहे हैं जिनका अपने वाक्य में इस प्रकार प्रयोग करें कि उनके अर्थ का अंतर स्पष्ट हो सके।
|
(क) |
प्रमाण |
____________ |
|
(ख) |
प्रणाम |
____________ |
|
(ग) |
धारणा |
____________ |
|
(घ) |
धारण |
____________ |
|
(ङ) |
पूर्ववर्ती |
____________ |
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(च) |
परवर्ती |
____________ |
|
(छ) |
परिवर्तन |
____________ |
|
(ज) |
प्रवर्तन |
____________ |
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −
यहाँ है बुद्धि पर परदा डालकर पहले ईश्वर और आत्मा का स्थान अपने लिए लेना, और फिर धर्म, ईमान, ईश्वर और आत्मा के नाम पर अपनी स्वार्थ-सिद्धि के लिए लोगों को लड़ाना-भिड़ाना।
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −
तुम्हारे मानने ही से मेरा ईश्वरत्व कायम नहीं रहेगा, दया करके, मनुष्यत्व को मानो, पशु बनना छोड़ो और आदमी बनो !
‘धर्म की आड़’ पाठ में निहित संदेश का उल्लेख कीजिए।
अथवा
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