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Question
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उपर्युक्त किरण आरेख एक परावर्तक दूरदर्शी द्वारा प्रतिबिंब निर्माण दर्शाने के लिए है। परावर्तक दूरदर्शी ने आकाश को देखने के तरीके में क्रांति ला दी। परावर्तक दूरदर्शी, अपवर्तक दूरदर्शी की भाँति केवल लेंसों पर निर्भर रहने के बजाए प्रकाश को एकत्रित करने और फोकस करने के लिए विशाल दर्पणों का उपयोग करते हैं। ये दूरदर्शी आने वाले प्रकाश को एकत्र करने के लिए सटीक आकार और उच्च परावर्तन क्षमता के दर्पणों का उपयोग करते हैं और प्रकाश को फोकस बिंदु की ओर परावर्तित कर देते हैं, जहाँ पर दूरदर्शी प्रेक्षण के लिए प्रतिबिंब बनाता है। |
(a) प्रेक्षक द्वारा नेत्रिका से एक तारे का देखा गया प्रतिबिंब किस प्रकार का होता है?
(b) इस परावर्तक दूरदर्शी में किस प्रकार के दर्पण का उपयोग किया जाता है?
(c) नेत्रिका में किस प्रकार की प्रकाशिक युक्ति (लेंस अथवा दर्पण का प्रकार) का उपयोग किया जाता है? कारण सहित व्याख्या कीजिए।
अथवा
(c) इस दूरदर्शी द्वारा प्रतिबिंब निर्माण में समतल दर्पण की क्या भूमिका है?
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Solution
(a) नेत्रिका से प्रेक्षक द्वारा देखा गया तारे का प्रतिबिंब वास्तविक प्रतिबिंब होता है, क्योंकि अंतिम प्रतिबिंब नेत्रिका में स्थित अभिसारी लेंस द्वारा बनाया जाता है।
(b) इस परावर्तक दूरदर्शी में प्रयुक्त वक्र दर्पण अवतल दर्पण होता है, जो दूर स्थित तारे से आने वाली समांतर प्रकाश किरणों को एकत्रित करके उन्हें फोकस करता है।
(c) नेत्रिका में अभिसारी लेंस (उत्तल लेंस) का उपयोग किया जाता है। यह समतल दर्पण से परावर्तित किरणों को एकत्रित करता है तथा प्रेक्षक को तारे का वास्तविक एवं सीधा प्रतिबिंब देखने में सहायता करता है।
अथवा
(c) दूरदर्शी में समतल दर्पण, वक्र दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब का पार्श्व परिवर्तन करता है तथा अपनी स्थिति के कारण प्रकाश किरणों को नेत्रिका की ओर मोड़ देता है, जिससे प्रतिबिंब को सुविधापूर्वक देखा जा सकता है।

