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Question
उचित उदाहरणद्वारा निम्नलिखित पद को परिभाषित कीजिए।
F-केन्द्र
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Solution
जब क्षारकीय हैलाइड; जैसे- NaCl को क्षार धातु (जैसे- सोडियम) की वाष्प के वातावरण में गर्म किया जाता है तो सोडियम परमाणु क्रिस्टल की सतह पर जम जाते हैं। Cl– आयन क्रिस्टल की सतह में विसरित हो जाते हैं और Na+ आयनों के साथ जुड़कर NaCl देते हैं। Na+ आयन बनाने के लिए Na परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन निकल जाता है। निर्मुक्त इलेक्ट्रॉन विसरित होकर क्रिस्टल के ऋणायनिक स्थान को अध्यासित करते हैं, परिणामस्वरूप अब क्रिस्टल में सोडियम का आधिक्य होता है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों द्वारा भरी जाने वाली इन ऋणायनिक रिक्तिकाओं को F-केन्द्र कहते हैं। ये NaCl क्रिस्टलों को पीला रंग प्रदान करते हैं। यह रंग इन इलेक्ट्रॉनों द्वारा क्रिस्टल पर पड़ने वाले प्रकाश से ऊर्जा अवशोषित करके उत्तेजित होने के परिणामस्वरूप दिखता है।
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समझाइए कि एक उच्च संयोजी धनायन को अशुद्धि की तरह मिलाने पर आयनिक ठोस में रिक्तिकाएँ किस प्रकार प्रविष्ट होती हैं?
उचित उदाहरणद्वारा निम्नलिखित पद को परिभाषित कीजिए।
फ्रेंकेल दोष
उचित उदाहरणद्वारा निम्नलिखित पद को परिभाषित कीजिए।
अन्तराकाशी
ऐलुमिनियम घनीय निविड संकुलित संरचना में क्रिस्टलीकृत होता है। इसका धात्विक अर्द्धव्यास 125 pm है।
- एकक कोष्ठिका के कोर की लम्बाई ज्ञात कीजिए।
- 1.0 cm3 ऐलुमिनियम में कितनी एकक कोष्ठिकाएँ होंगी?
______ में धनायन अन्तरकाशी स्थल में उपस्थित होते हैं।
क्रिस्टलों में शॉट्की दोष तब प्रेक्षित होता है जब ______।
AgBr (s) क्रिस्टल द्वारा निम्नलिखित में से कौन-से बिन्दु दोष प्रदर्शित किए जाते हैं?
- शॉट्की दोष
- फ्रेंकेल दोष
- धातु आधिक्य दोष
- धातु न्यूनता दोष
FeO(s) इस स्टॉइकियोमीट्री संघटन में क्यों नहीं मिलता?
कॉलम I में दिए गए दोषों को कॉलम II में दिए गए कथनों से सुमेलित कीजिए-
| कॉलम I | कॉलम II |
| (i) सामान्य रिक्तिका दोष | (a) आयन रहित ठोसों द्वारा दर्शाया जाता है औरठोस के घनत्व में वृद्धि होती है। |
| (ii) सामान्य अन्तराकाशी दोष | (b) आयनिक ठोसों द्वारा दर्शाया जाता है और ठोस के घनत्व में कमी आती है। |
| (iii) फ्रेंकेल दोष |
(c) आयन रहित ठोसों द्वारा द्शाया जाता है और ठोस का घनत्व कम हो जाता है। |
| (iv) शॉट्की दोष |
(d) आयनिक ठोसों द्वारा दर्शाया जाता है और ठोस का घनत्व समान बना रहता है। |
कॉलम I में दिए गए दोषों के प्रकारों को कॉलम II में दिए गए कथनों से सुमेलित कीजिए-
| कॉलम I | कॉलम II |
| (i) अशुद्ध दोष | (a) वह NaCl जिसमें F-केंद्र नामक ऋणायनिक स्थल उपस्थित हों |
| (ii) धातु आधिक्य दोष | (b) Fe3+ युक्त FeO |
| (iii) धातु न्यूनता दोष | (c) Sr2+ युक्त NaCl जिसमें कुछ धनायनी स्थल रिक्त हों |
