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Question
सत्य की राह पर चल। अगर अपना भला चाहता है तो सच्चाई को पकड़।– इन पंक्तियों के प्रकाश में कविता का मर्म खोलिए।
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Solution
आज का युग अधर्म और अनैतिकता के ताने-बाने में उलझकर रह गया है। लोग पूर्णता सत्य का आचरण नहीं करते हैं। असत्य का साम्राज्य चारों ओर फैल रहा है। कवि असत्य की विजय देखकर दुखी है। यह मानवता की हत्या है। यही कविता का मर्म है। कवि के अनुसार मानवता की भलाई इसी में ही कि वह सत्य के मार्ग पर चले। क्योंकि असत्य का मार्ग अधर्म और अनैतिकता को बढ़ावा देता है, इससे लोगों में निराशा, दुख, विरोध, क्रोध, लालच, स्वार्थ आदि भावों का विकास होता है। भाई-भाई को मारने पर आतुर हो जाता है। परन्तु यदि मनुष्य सत्य के मार्ग पर चलता है, तो धर्म और नैतिकता को बढ़ावा मिलता है। लोगों में इस कारण आशा, सुख, प्रेम, शांति तथा परोपकार जैसी भावनाओं का विकास होता है। यदि एक व्यक्ति असत्य को नकारता है, तो इससे कई लोगों का ही भला होता।
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