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संजाल पूर्ण कीजिएः हार हमें देती है - Hindi - Composite [हिंदी - संयुक्त]

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Question

संजाल पूर्ण कीजिएः

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Solution

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जिंदगी की बड़ी जरुरत है हार...!
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Chapter 1.8: जिंदगी की बड़ी जरुरत है हार...! - स्वाध्याय [Page 26]

APPEARS IN

Balbharati Hindi (Composite) Lokvani [English] Standard 9 Maharashtra State Board
Chapter 1.8 जिंदगी की बड़ी जरुरत है हार...!
स्वाध्याय | Q (४) | Page 26

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सही विकल्‍प चुनकर वाक्‍य फिर से लिखिए:

कवि ने इसे पार करने के लिए कहा है-


लय-संगीत निर्माण करने वाली दो शब्‍द जोड़ियाँ लिखिए।


‘जिंदगी की बड़ी जरूरत है हार’ इस विषय पर अपने विचार लिखिए।


यू ट्यूब से मैथिलीशरण गुप्त की कविता ‘नर हो न निराश करो मन काे’ सुनिए और उसका आशय अपने शब्‍दों में लिखिए ।


‘हर बार कुछ सिखाकर ही गई, सबसे बड़ी गुरु है हार’ इस पंक्‍ति द्वारा आपने जाना .....


ऐसा प्रश्न तैयार कीजिए जिसका उत्‍तर निम्‍नलिखित शब्द हों:

फूलों के रास्ते


ऐसा प्रश्न तैयार कीजिए जिसका उत्‍तर निम्‍नलिखित शब्द हों:

जीत का आनंद मिलेगा


ऐसा प्रश्न तैयार कीजिए जिसका उत्‍तर निम्‍नलिखित शब्द हों:

बहार


ऐसा प्रश्न तैयार कीजिए जिसका उत्‍तर निम्‍नलिखित शब्द हों:

गुरु


उचित जोड़ मिलाइए:

 
i) इन्हें अपनाना नही तकदीर का प्रहार
ii) इन्हें पार करना वृक्षों की छाया
iii) इन्हें सहना तपती धूप
iv) इससे परे रहना पर्वत
    फूलों के रास्ते

निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करके फिर से लिखिए:

वृक्षों का छाया से रहे परे।


निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करके फिर से लिखिए:

फूल के रास्‍ते को मत अपनाओ।


निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करके फिर से लिखिए:

किनारों से पहले मिला मझधार।


निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करके फिर से लिखिए:

जिसने जीवन का दिया सँवार।


निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करके फिर से लिखिए:

बरसाओं मेहनत का बूँदों का फुहार।


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