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निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए: आकाश में बिजली की कौंधें बीच-बीच में लपक उठती थीं। बादलों की गड़गड़ाहट सुनकर रामबोला को लगा कि मानों।

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Question

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

आकाश में बिजली की कौंधें बीच-बीच में लपक उठती थीं। बादलों की गड़गड़ाहट सुनकर रामबोला को लगा कि मानों चैनसिंह ठाकुर अपने हलवाहा को डॉट रहे हैं। रामबोला अनायास ही ताव में आ गया। उठा और फिर नये श्रम की साधना में लग गया। दूसरे छप्पर के ढीले पड़ गए अंजर-पंजर को कसने के 'लिए पास ही खलार में उगी लंबी घास-पतवार उखाड़ लाया। रामबोला ने भिखारी बस्ती के और लोगों को जैसे घास बैँटकर रस्सी बनाते देखा था; वैसे ही बैंटने लगा। जैसे-तैसे रस्सियाँ बैंटी, जस-तस टट्टर बाँधा। अब जो उसकी आधी से अधिक उधड़ी हुई छावन पर ध्यान गया तो नन्हे मन के उत्साह को फिर' काठ मार गया। घास-फूस, ज्यौनारों में जूठन के साथ-साथ बाहर फेंकी गई पत्तलों और चिथड़े-गुदड़ों से 'बनाई गई वह छोटी -सी छपरिया फिर से छानें के लिए वह सामान कहाँ से जुटाए? हवा दूवारा उड़ाए हुए.माल वह इस बरसात में कहाँ-कहाँ ढूँढ़ैगा। दैव आज प्रलय की बरखा करके ही दम लेंगे। हवा के मारे औरों के छप्पर भी पेंगें ले रहे हैं।

(1) लिखिए:  (2)

गद्यांश में उल्लिखित प्राकृतिक घटक

↓
____________
____________
____________
____________

(2) लिखिए:

(i) एक शब्द में उत्तर लिखिए :   (1)

  1. हलवाहा को डाँटने वाला - ____________
  2. अनायास ही ताव में आने वाला - ____________

(ii) विशेषता लिखिए :  (1)

  1. बिजली - ______
  2. बादल - ______

(3) 'विनाश और निर्माण प्रकृति के नियम हैं' इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए।  (3)

Answer in Brief
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Solution

(1)

गद्यांश में उल्लिखित प्राकृतिक घटक

↓
बिजली 
बादल
घास
आकाश

(2) (i)

  1. चैनसिंह ठाकुर
  2. रामबोला

(ii) 

  1. बिजली - लपकना
  2. बादल - गड़गड़ाहट

(3) इस संसार में कुछ भी अपरिवर्तनशील नहीं है। सब कुछ नश्वर और क्षणभंगुर है। परिवर्तन प्रकृति का नियम है। जो परिवर्तन को और अनित्यता को समझता है, वस्तुत: वही ज्ञानी है। निर्माण और विनाश परस्पर विरोधी होते हुए भी एक सिक्के के दो पहलुओं की तरह जुड़े रहते है। इन्हे अलग-अलग नही किया जा सकता। सदा के लिए कोई भी इस दुनिया में नहीं रह सकता है। बीज का वृक्ष बनना रूप परिवर्तन होता है यह निर्माण नहीं कहलाता। परन्तु वृक्ष को काट कर उससे अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ बनाना, निर्माण है तथा उस वृक्ष को काट कर नष्ट कर देना, या इन्धन के रूप में इसका प्रयोग करना ही विनाश कहलाता है।

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अपठित गद्यांश
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2021-2022 (March) Set 1

RELATED QUESTIONS

निम्‍नलिखित परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए 

हर किसी को आत्‍मरक्षा करनी होगी, हर किसी को अपना कर्तव्य करना होगा । मैं किसी की सहायता की प्रत्‍याशा नहीं करता। मैं किसी का भी प्रत्‍याह नहीं करता । इस दुनिया से मदद की प्रार्थना करने का मुझे कोई अधकिार नहीं है । अतीत में जनि लोगों ने मेरी मदद की है या भविष्य में भी जो लोग मेरी मदद करेंगे, मेरे प्रति उन सबकी करुणा मौजूद है, इसका दावा कभी नहीं किया जा सकता। इसीलिए मैं सभी लोगों के प्रति चरि कृतज्ञ हूँ । तुम्‍हारी परिस्तिति इतनी बुरी देखकर मैं बेहद चिंतति हूँ । लेकनि यह जान लो कि-‘तुमसे भी ज्‍यादा दुखी लोग इस संसार में हैं । मैं तुमसे भी ज्‍यादा बुरी परसि्‍थतिि में हूँ । इंग्‍लैंड में सब कुछ के लिए मुझे अपनी ही जेब से खर्च करना पड़ता है । आमदनी कुछ भी नहीं है । लंदन में एक कमरे का किराया हर सप्ताह के लिए तीन पाउंड होता है । ऊपर से अन्य कई खर्च हैं । अपनी तकलीफों के लिए मैं किससे शकिायत करूँ ? यह मेरा अपना कर्मफल है, मुझे ही भुगतना होगा ।’

(१) कृति पूर्ण कीजिए :

१.

२.

(२) उत्‍तर लिखिए :

१. परिच्छेद में उल्लिखित देश - ______
२. हर किसी को करना होगा - ______
३. लेखक की तकलीफें - ______
4. हर किसी को करनी होगी - ______

(३) निर्देशानुसार हल कीजिए :

(अ) निम्‍नलिखित अर्थ से मेल खाने वाला शब्‍द उपर्युक्‍त परिच्छेद से ढूँढ़कर लिखिए :

१. स्‍वयं की रक्षा करना - ______
२. दूसरों के उपकारों को मानने वाला - ______

(ब) लिंग पहचानकर लिखिए :

१. जेब - ______
२. दावा - ______
३. साहित्‍य - ______
4. सेवा - ______

(४) ‘कृतज्ञता’ के संबंध में अपने विचार लिखिए ।


परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

      परोपकार ही मानवता है, जैसा कि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने लिखा है - ‘वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे।’ केवल अपने दुख-सुख की चिंता करना मानवता नहीं, पशुता है। परोपकार ही मानव को पशुता से सदय बनाता है। वस्तुतः निस्स्वार्थ भावना से दूसरों का हित साधन ही परोपकार है। मनुष्य अपनी सामर्थ्य के अनुसार परोपकार कर सकता है। दूसरों के प्रति सहानुभूति करना ही परोपकार है और सहानुभूति किसी भी रूप में प्रकट की जा सकती है। किसी निर्धन की आर्थिक सहायता करना अथवा किसी असहाय की रक्षा करना परोपकार के रूप हैं। किसी पागल अथवा रोगी की सेवा-शुश्रूषा करना अथवा किसी भूखे को अन्नदान करना भी परोपकार है। किसी को संकट से बचा लेना, किसी को कुमार्ग से हटा देना, किसी दुखी-निराश को सांत्वना देना-ये सब परोपकार के ही रूप हैं। कोई भी कार्य, जिससे किसी को लाभ पहॅुंचता है, परोपकार है, जो अपनी सामर्थ्य के अनुसार विभिन्न रूपों में किया जा सकता है।

(१) संजाल पूर्ण कीजिए :

 

(२) ‘वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे’ इस पंक्ति का तात्पर्य लिखिए। 

(३)

१. वचन परिवर्तन कीजिए :
१. चिंता - ______
२. भूखे - ______

२. निम्न शब्दों के लिंग पहचानिएः
१. सामर्थ्य - ______
२. परोपकार - ______

(४) ‘परहित सरिस धरम नहिं भाई’ पर अपने विचार लिखिए ।


निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए- 

परिश्रम यानी मेहनत अपना जवाब आप ही है। उसका अन्य कोई जवाब न है, न हो सकता है अर्थात जिस काम के लिए परिश्रम करना आवश्यक हो, हम चाहें कि वह अन्य किसी उपाय से पूरा हो जाए, ऐसा हो पाना कतई संभव नहीं। वह तो लगातार और मन लगाकर परिश्रम करने से ही होगा। इसी कारण कहा जाता है कि 'उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मी' अर्थात उद्योग या परिश्रम करने वाले पुरुष सिंहों का ही लक्ष्मी वरण करती है। सभी प्रकार की धन-संपत्तियाँ और सफलताएँ लगातार परिश्रम से ही प्राप्त होती हैं। परिश्रम ही सफलता की कुंजी है, यह परीक्षण की कसौटी पर कसा गया सत्य है। निरंतर प्रगति और विकास की मंज़िलें तय करते हुए हमारा संसार आज जिस स्तर और स्थिति तक पहुँच पाया है, वह सब हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहने से नहीं हुआ। कई प्रकार के विचार बनाने, अनुसंधान करने, उनके अनुसार लगातार योजनाएँ बनाकर तथा कई तरह के अभावों और कठिनाइयों को सहते हुए निरंतर परिश्रम करते रहने से ही संभव हो पाया है। आज जो लोग सफलता के शिखर पर बैठकर दूसरों पर शासन कर रहे हैं, आदेश दे रहे हैं, ऐसी शक्ति और सत्ता प्राप्त करने के लिए पता नहीं किन-किन रास्तों से चलकर, किस-किस तरह के कष्ट और परिश्रमपूर्ण जीवन जीने के बाद उन्हें इस स्थिति में पहुँच पाने में सफलता मिल पाई है। हाथ-पैर हिलाने पर ही कुछ पाया जा सकता है, उदास या निराश होकर बैठ जाने से नहीं। निरंतर परिश्रम व्यक्ति को चुस्त-दुरुस्त रखकर सजग तो बनाता ही है, निराशाओं से दूर रख आशा-उत्साह भरा जीवन जीना भी सिखाया करता है।
  1. परीक्षण की कसौटी पर कसे जाने से तात्पर्य है-
    (क) सत्य सिद्ध होना
    (ख) कथन का प्रामाणिक होना
    (ग) आकलन प्रक्रिया तीव्र होना
    (घ) योग्यता का मूल्यांकन होना

  2. 'हाथ-पैर हिलाने से कुछ पाया जा सकता है।' पंक्ति के माध्यम से लेखक ______ की प्रेरणा दे रहे हैं।
    (क) तैराकी
    (ख) परिश्रम
    (ग) परीक्षण
    (घ) हस्तशिल्प

  3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए -
    1. परिश्रम व्यक्ति को सकारात्मक बनाता है।
    2. आज संसार पतन की ओर बढ़ रहा है।
    3. पुरुषार्थ के बल पर ही व्यक्ति धनार्जन करता है।
      उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा /कौन-से कथन सही है / हैं?

      (क) केवल (i)
      (ख) केवल (ii)
      (ग) (i) और (iii)
      (घ) (ii) और (iii)
  4. निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द गद्यांश में दिए गए 'अनुसंधान' शब्द के सही अर्थ को दर्शाता है-
    (क) परीक्षण
    (ख) योजनाएँ
    (ग) अन्वेषण
    (घ) सिंहमुपैति
  5. निम्नलिखित में से किस कथन को गद्यांश की सीख के आधार पर कहा जा सकता है -
    (क) अल्पज्ञान खतरनाक होता है।
    (ख) गया समय वापस नहीं आता है।
    (ग) मेहनत से कल्पना साकार होती है।
    (घ) आवश्यकता आविष्कार की जननी है।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए।

       उपवास और संयम ये आत्महत्या के साधन नहीं हैं। भोजन का असली स्वाद उसी को मिलता है जो कुछ दिन बिना खाए भी रह सकता है। ‘त्यक्तेन भुंजीथा:’, जीवन का भोग त्याग के साथ करो, यह केवल परमार्थ का ही उपदेश नहीं है, क्योंकि संयम से भोग करने पर जीवन में जो आनंद प्राप्त होता है, वह निरा भोगी बनकर भोगने से नहीं मिल पाता ज़िंदगी की दो सूरतें हैं। एक तो यह कि आदमी बड़े-से-बड़े मकसद के लिए कोशिश करे, जगमगाती हुई जीत पर पंजा डालने के लिए हाथ बढ़ाए, और अगर असफलताएँ कदम-कदम पर जोश की रोशनी के साथ अंधियाली का जाल बुन रही हों, तब भी वह पीछे को पाँव न हटाए। दूसरी सूरत यह है कि उन गरीब आत्माओं का हमजोली बन जाए जो न तो बहुत अधिक सुख पाती हैं और न जिन्हें बहुत अधिक दुख पाने का ही संयोग है, क्योंकि वे आत्माएँ ऐसी गोधूलि में बसती हैं जहाँ न तो जीत हँसती है और न कभी हार के रोने की आवाज़ सुनाई पड़ती है। इस गोधूलि वाली दुनिया के लोग बंधे हुए घाट का पानी पीते हैं, वे ज़िंदगी के साथ जुआ नहीं खेल सकते। और कौन कहता है कि पूरी ज़िंदगी को दाँव पर लगा देने में कोई आनंद नहीं है?

       जनमत की उपेक्षा करके जीने वाला आदमी दुनिया की असली ताकत होता है और मनुष्यता को प्रकाश भी उसी आदमी से मिलता है। ज़िंदगी से, अंत में, हम उतना ही पाते हैं जितनी कि उसमे पूँजी लगाते हैं। यह पूँजी लगाना ज़िंदगी के संकटों का सामना करना है, उसके उस पन्ने को उलट कर पढ़ना है जिसके सभी अक्षर फूलों से ही नहीं, कुछ अंगारों से भी लिखे गए हैं। ज़िंदगी का भेद कुछ उसे ही मालूम है जो यह जानकार चलता है की ज़िंदगी कभी भी ख़त्म न होने वाली चीज़ है।

       अरे! ओ जीवन के साधकों! अगर किनारे की मरी सीपियों से ही तुम्हें संतोष हो जाए तो समुद्र के अंतराल में छिपे हुए मौक्तिक - कोष को कौन बाहर लाएगा? दुनिया में जितने भी मज़े बिखेरे गए हैं उनमें तुम्हारा भी हिस्सा है। वह चीज़ भी तुम्हारी हो सकती है जिसे तुम अपनी पहुँच के परे मान कर लौटे जा रहे हो। कामना का अंचल छोटा मत करो, ज़िंदगी के फल को दोनों हाथों से दबाकर निचोड़ो, रस की निर्झरी तुम्हारे बहाए भी बह सकती है।

(i) ‘त्यक्तेन भुंजीथा:’ कथन से लेखक के व्यक्तित्व की किस विशेषता का बोध होता है? (1)

(क) परिवर्जन
(ख) परिवर्तन
(ग) परावर्तन
(घ) प्रत्यावर्तन

(ii) मंज़िल पर पहुँचने का सच्चा आनंद उसे मिलता है, जिसने उसे - (1)

(क) आन की आन में प्राप्त कर लिया हो
(ख) पाने के लिए भरसक प्रयास किया हो
(ग) हाथ बढ़ा कर मिट्ठी में कर लिया हो
(घ) सच्चाई से अपने सपनों में बसा लिया हो

(iii) ‘गोधूलि’ शब्द का तात्पर्य है - (1)

(क) गोधेनु
(ख) संध्यावेला
(ग) गगन धूलि
(घ) गोद ली कन्या

(iv) ‘गोधूलि’ वाली दुनिया के लोगों से अभिप्राय है - (1)

(क) विवशता और अभाव में जीने वाले
(ख) जीवन को दाँव पर लगाने वाले
(ग) गायों के खुरों से धूलि उड़ाने वाले
(घ) क्षितिज में लालिमा फैलाने वाले

(v) जीवन में असफलताएँ मिलने पर भी साहसी मनुष्य क्या करता है? (1)

(क) बिना डरे आगे बढ़ता है क्योंकि डर के आगे जीत है
(ख) पराजय से निपटने के लिए फूँक-फूँककर कदम आगे रखता है
(ग) अपने मित्र बंधुओं से सलाह और मदद के विषय में विचार करता है
(घ) असफलता का कारण ढूँढकर पुनः आगे बढ़ने का प्रयास करता है

(vi) आप कैसे पहचानेंगे कि कोई व्यक्ति साहस की ज़िंदगी जी रहा है? (1)

(क) जनमत की परवाह करने वाला
(ख) निडर और निशंक जीने वाला
(ग) शत्रु के छक्के छुड़ाने वाला
(घ) भागीरथी प्रयत्न करने वाला

(vii) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - (1)

(I) प्रत्येक परिस्थिति का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।

(II) मनुष्य अपने दृढ़ मंतव्य व कठिन परिश्रम से सर्वोच्च प्राप्ति की ओर अग्रसर रहता है।

(III) विपत्ति सदैव समर्थ के समक्ष ही आती है, जिससे वह पार उतर सके।

उपरिलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?

(क) केवल I
(ख) केवल III
(ग) I और II
(घ) II और III

(viii) ‘ज़िंदगी को दाँव पर लगा देने’ में कोई आनंद नहीं है? लेखक इससे सिद्ध करना चाहते हैं कि ज़िंदगी - (1)

(क) रंगमंच के कलाकारों के समान व्यतीत करनी चाहिए।
(ख) में सकारात्मक परिस्थितियाँ ही आनंद प्रदान करती हैं।
(ग) में प्रतिकूलता का अनुभव जीवनोपयोगी होता है।
(घ) केवल दुखद स्थितियों का सामना करवाती है।

(ix) किन व्यक्तियों को सुख का स्वाद अधिक मिलता है? (1)

(क) जो अत्यधिक सुख प्राप्त करते हैं
(ख) जो सुख-दुख से दूर होते हैं
(ग) जो पहले दुख झेलते हैं
(घ) जो सुख को अन्य लोगों से साझा करते हैं

(x) निम्नलिखित कथन कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए। (1) 

कथन (A): ‘ज़िंदगी के फल को दोनों हाथों से दबाकर निचोड़ो, रस की निर्झरी तुम्हारे बहाए भी बह सकती है’।

कारण (R): ज़िंदगी रूपी फल का रसास्वादन करने के लिए दोनों हाथों से श्रम करना होगा।

(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(घ) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।


निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर दी गई सूचनाओं केअनुसार कृतियाँ कीजिए:

सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति के बाद शनि ग्रह की कक्षा है। शनि सौरमंडल का दूसरा बड़ा ग्रह है। यह हमारी पृथ्वी के करीब 750 गुना बड़ा है। शनि के गोले का व्यास 116 हज़ार किलोमीटर है; अर्थात्‌, पृथ्वी के व्यास से करीब नौ गुना अधिक।

सूर्य से शनिग्रह की औसत दूरी 143 करोड़ किलोमीटर है। यह ग्रह प्रति सेकंड 9.6 किलोमीटर की औसत गति से करीब 30 वर्षों में सूर्य का एक चक्कर लगाता है। अत: 90 साल का कोई बूढ़ा आदमी यदि शनि ग्रह पर पहुँचेगा, तो उस ग्रह के अनुसार उसकी उम्र होगी सिर्फ तीन साल !

हमारी पृथ्वी सूर्य से करीब 15 करोड़ किलोमीटर दूर है। तुलना में शनि ग्रह दस गुना अधिक दूर है। इसे दूरबीन के बिना कोरी आँखों से भी आकाश में पहचाना जा सकता है। पुराने ज़माने के लोगों ने इस पीले चमकीले ग्रह को पहचान लिया था। प्राचीन काल के ज्योतिषियों को सूर्य, चंद्र और काल्पनिक राहु-केतु के अलावा जिन पाँच ग्रहों का ज्ञान था उनमें शनि सबसे अधिक दूर था। 

शनि को 'शनैश्वर' भी कहते हैं। आकाश के गोल पर यह ग्रह बहुत धीमी गति से चलता दिखाई देता है, इसीलिए प्राचीन काल के लोगों ने इसे 'शनैःचर नाम' दिया था। 'शनैःचर' का अर्थ होता है - धीमी गति से चलने वाला। 

लेकिन बाद के लोंगों ने इस शनैश्चर को 'सनीचर' बनों डाला ! सनीचर का नाम लेते ही अंधविश्वासियों की रूह काँपने लगती है। फलित-ज्योतिषियों की पोथियों में इस ग्रह को इतना अशुभ माना गया हैं कि जिस राशि में इसका निवास होता है उसके आगे और पीछे की राशियों को भी यह छेड़ता है। एक बार यदि यह ग्रह किसी की राशि में पहुँच जाए तो फिर साढ़े सात साल तक उसकी खैर नहीं ! हमारी पौराणिक कथाओं के अनुसार शनि महाराज सूर्य के पुत्र हैं। भैंसा इनका वाहन है। पाश्चात्य ज्योतिष में शनि को सैटर्न कहते हैं। यूनानी आख्यानों के अनुसार सैटर्न जूपिटर के पिता हैं। रोमन लोग सैटर्न को कृषि का देवता मानते थे। हमारे देंश में शनि महाराज तेल के देवता बन गए हैं !

1. संजाल पूर्ण कीजिए।  (2)

2. निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए:  (2)

  1. आकाश
  2. कथा
  3. सूर्य
  4. आँख

3. 'सौर मंडल' इस विषय पर अपने विचार लिखिए।  (2)


निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

आरा शहर। भादों का महीना। कृष्ण पक्ष की अँधेरी रात। जोरों की बारिश। हमेशा की भाँति बिजली का गुल हो जाना। रात के 'गहराने और सूनेपन को और सघन भयावह बनाती बारिश कौ तेज़ आवाज़। अंधकार में डूबा शहर तथा अपने घरें में सोए - दुबके लोग ! लेकिन सचदेव बाबू की आँखों में नींद नहीं। अपने आलीशान भवन के भीतर अपने शयनकक्ष में बेहद आरामदायक बिस्तर पर लेटे थे वे। पर लेटने भर से ही तो नींद नहीं आती। नींद के लिए - जैसी निर्शिचितता और बेफिक्री की जरुरत होती है, वह तो उनसे कोसों दूर थी।

हालाँकि यह स्थिति सिर्फ सचदेव बाबू की ही नहीं थी। पूरे शहर का खौफ का यह कहर था। आए दिन चोरी, लूट, हत्या, बलात्कार, राहजनी और अपहरण की घटनाओं ने लोगों को बेतरह भयभीत और असुरक्षित बना दिया था। कभी रातों में गुलज़ार रहने वाला उनका 'यह शहर अब शाम गहराते ही शमशानी सन्ताटे में तब्दील होने लगा था। अब रातों में सड़कों और गलियों में नज़र आने वाले लोग शहर के सामान्य और संभ्रांत नागरिक नहीं, संदिग्ध लोग होते थे। कब 'किसके यहाँ कया हो जाए, सब आतंकित थे। जब इस शहर में अपना यह घर बनवा रहे थे सचदेव बाबू तो बहुत प्रसन्न थे कि महानगरों में दमघोंटू, विषाक्त, अजनबीयत और छल - छदमी वातावरण से अलग इस शांत-सहज और निश्छल - निर्दोष गँँबई शहर में बस रहे हैं। लेकिन अब तो महानगर की अजनबीयत की अपेक्षा यहाँ की भयावहता ने बुरी तरह से न्रस्त और परेशान कर दिया था उन्हें। ये 'बरसाती रातें तो उन्हें बरबादी और तबाही का साक्षात संकेत जान पड़ती थीं। इसे दुर्योग कहें या विडंबना कि जिस बात को लेकर आदमी आशंकित बना रहता है, कभी-कभी वह बात घट भी जाती है। इस अंधेरी, तूफानी, बरसाती रात में जिस बात को लेकर डर रहे थे सचदेव बाबू उसका आभास भी अब उन्हें होने लगा था। उन्हें लगा आगंतुक की आहट होने लगी । उनकी शंका सही थी। अब दरवाजे पर थपथपाहट की आवाज़ भी आने लगी थी । सचमुच कोई आ धमका था।

1. आकृति पूर्ण कीजिए:  (2)

  1. आरा शहर में घर बनवाते समय ये बहुत प्रसन्न थे।
  2. सचदेव बाबू की आँखों में इसका नाम नहीं था।
  3. बरसाती रातें बरबादी और तबाही का साक्षात यह थी-
  4. सचदेव बाबू को लगा आगंतुक की आहाट होने लगी-

2. निम्नलिखित शब्दों का वचन बदलकर लिखिए:    (2)

  1. आवाज - ______
  2. चोरी - ______
  3. शंका - ______
  4. सड़क - ______

3. चोरी, डकैती, राहजनी आदि की घटनाएँ इस विषय पर 40 से 50 शब्दों में अपना मत स्पष्ट कीजिए।  (2)


निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी/वस्तुपरक प्रश्नों के उत्तर सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए।

    हमारे देश में हिंदी फ़िल्मों के गीत अपने आरंभ से ही आम दर्शक के सुख-दुख के साथी रहे हैं। वर्तमान समय में हिंदी फ़िल्मों के गीतों ने आम जन के हृदय में लोकगीतों सी आत्मीय जगह बना ली है। जिस तरह से एक जमाने में लोकगीत जनमानस के सुख-दुख, आकांक्षा, उल्लास और उम्मीद को स्वर देते थे, आज फ़िल्मी गीत उसी भूमिका को निभा रहे हैं। इतना ही नहीं देश की विविधता को एकता के सूत्र में बाँधने में हिंदी फ़िल्मों का योगदान सभी स्वीकार करते हैं। हिंदी भाषा की शब्द संपदा को समृद्ध करने का जो काम राजभाषा विभाग तत्सम शब्दों की सहायता से कर रहा है वही कार्य फ़िल्मी गीत और डायलॉग लिखने वाले विविध क्षेत्रीय भाषाओं के मेल से करते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। यह गाने जन-जन के गीत इसी कारण बन सके क्योंकि इनमें राजनीति के उतार-चढ़ाव की अनुगूंजों के साथ देहाती कस्बायी और नए बने शहरों का देशज जीवन दर्शन भी आत्मसात किया जाता रहा है। भारत की जिस गंगा-जमुनी संस्कृति का महिमामंडन बहुधा होता है उसकी गूंज भी इन गीतों में मिलती है। आजादी की लड़ाई के दौरान लिखे प्रदीप के गीत हों या स्वाधीनता प्राप्ति साथ ही होनेवाले देश के विभाजन की विभीषिका, सभी को भी इन गीतों में बहुत संवेदनशील रूप से व्यक्त किया गया है।

   हिंदी फ़िल्मी गीतों के इस संसार में हिंदी-उर्दू का 'झगड़ा' भी कभी पनप नहीं सका। प्रदीप, नीरज जैसे शानदार हिंदी कवियों, इंदीवर तथा शैलेंद्र जैसे श्रेष्ठ गीतकारों और साहिर, कैफी, मजरूह जैसे मशहूर शायरों को हिंदी सिनेमा में हमेशा एक ही बिरादरी का माना जाता रहा है। यह सिनेमा की इस दुनिया की ही खासियत है कि एक तरफ गीतकार साहिर ने 'कहाँ हैं कहाँ हैं/मुहाफिज खुदी के/जिन्हें नाज है हिंद पर/वो कहाँ हैं' लिखा तो दूसरी तरफ उन्होंने ही 'संसार से भागे फिरते हो/भगवान को तुम क्या पाओगे !/ये भोग भी एक तपस्या है/तुम प्यार के मारे क्या जानोगे/अपमान रचयिता का होगा/रचना को अगर ठुकरा ओगे!' जैसी पंक्तियाँ भी रची हैं। परवर्तियों में गुलजार ऐसे गीतकार हैं जिन्होंने उर्दू, हिंदी, पंजाबी, राजस्थानी के साथ पुरबिया बोलियों में मन को मोह लेने वाले गीतों की रचना की है। बंदिनी के 'मोरा गोरा अंग लइले, मोहे श्याम रंग दइदे', 'कजरारे-कजरारे तेरे कारे-कारे नयना!', 'यारा सिली सिली रात का ढलना' और 'चप्पा चप्पा चरखा चले' जैसे गीतों को रचकर उन्होंने भारत की साझा संस्कृति को मूर्तिमान कर दिया है। वस्तुतः भारत में बनने वाली फिल्मों में आने वाले गीत उसे विश्व-सिनेमा में एक अलग पहचान देते हैं। ये गीत सही मायने में भारतीय संस्कृति की खूबसूरती को अभिव्यक्त करते हैं।

  1. हिंदी फिल्‍मी गीतों और लोकगीतों में क्या समानता है?
    A. ये लोगों के रीति-रिवाजों, उनकी लालसाओं उनकी सोच और कल्पनाओं को स्वर देते हैं।
    B. ये लोगों के जीवन के अनुभवों, आमोद प्रमोद, विचारों और दर्शन को स्वर देते हैं।
    C. ये लोगों के आनंद उनके शोक, उनके हर्ष और उनकी आशाओं को स्वर देते हैं।
    D. ये लोगों के जीवन के यथार्थ और कठोरताओं में ज़िंदा रहने की चाह को स्वर देते हैं।
  2. हिंदी भाषा की शब्द संपदा को समृद्ध करने का काम फिल्‍मी गीतों ने किस प्रकार किया?
    A. राजभाषा विभाग से प्रेरणा पाकर
    B. विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं के मेल से
    C. क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों को प्रोत्साहित करके
    D. विदेशी भाषाओं की फिल्मों को हतोत्साहित करके
  3. कथन (A) और कारण (R) को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए:
    कथन (A): हिंदी फिल्मों के गाने जन जन के गीत बन गए हैं।
    कारण (R): इन गीतों में राजनीति की अनुगूंजों के साथ, देहाती कस्बायी और नए बने शहरों का जीवन दर्शन थी आत्मसात किया जाता रहा है।
    A. कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
    B. कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत हैं।
    C. कथन (A) सही है और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है।
    D. कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  4. 'हिंदी फिल्‍मी गीतों के इस संसार में हिंदी-उर्दू का 'झगड़ा' भी कभी पनप नहीं सका।' उपर्युक्त कथन के पक्ष में निम्नलिखित तर्कों पर विचार कीजिए।
    1. यहाँ सभी गीतकारों को एक ही बंधुत्व वर्ग का माना जाता है।
    2. ये गीतकार सभी भाषाओं में समान रूप से गीत लिखते हैं।
    3. इन गीतकारों में वैमनस्य व प्रतिस्पर्धा का भाव नहीं है।
    A. 1 सही है।
    B. 2 सही है।
    C. 3 सही है।
    D. 1 और 2 सही है।
  5. उपर्युक्त गद्यांश में हिंदी फिल्‍मी गीतों की किस विशेषता पर सर्वाधिक बल दिया गया है?
    A. ये गीत कलात्मक श्रेष्ठता व सर्वधर्म समभाव को अभिव्यक्त करते हैं।
    B. ये गीत सांप्रदायिक सद्धाव को अभिव्यक्त करते हैं।
    C. ये गीत पारस्परिक प्रेम व सद्भाव को अभिव्यक्त करते हैं।
    D. ये गीत हमारी तहज़ीब की खूबसूरती को अभिव्यक्त करते हैं।

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए -

कोलकाता भी दूसरे बड़े शहरों की तरह एक बड़ी नदी के किनारे बसा है। गंगा से निकली एक धारा ही है हुगली नदी। लेकिन दूसरे कई नगरों की तरह कोलकाता में नदी का बहाव एकतरफा नहीं है। हुगली ज्वारी नदी है और बंगाल की खाड़ी से उसका मुहाना 140 किलोमीटर की दूरी पर ही है। हर रोज़ ज्वार के समय समुद्र नदी के पानी को वापस कोलकाता तक ठेलता है। ज्वार और भाटे के बीच जल स्तर एक ही दिन में कई फुट ऊपर-नीचे हो जाता है।

शहर के पश्चिम में बहने वाली हुगली नदी में कोलकाता अपना मैला पानी बहाकर उसे भुला नहीं सकता। नीचे बह जाने की बजाए क्या पता ज्वार के पानी के साथ अपशिष्ट पदार्थ वापस शहर लौट आएँ? शहर के कुल मैले पानी का एक छोटा-सा हिस्सा ही हुगली में बहाया जाता है, वह भी चोरी-छिपे। इसका परिणाम यह है कि कोलकाता में हुगली अधिक दूषित नहीं है। लेकिन हर बड़े शहर को अपना मैला पानी फेंकने के लिए एक नदी चाहिए। तो फिर कोलकाता का मैला कहाँ जाता है?

हुगली से उल्टी दिशा में, शहर के पूरब में बहने वाली एक छोटी-सी नदी कुल्टीगंग में। पर नदी तक पहुँचने के पहले इस मैले पानी के बड़े हिस्से का उपचार होता है। कुल्टीगंग में गिरने वाला मैला पानी उतना दूषित नहीं होता है जितना वह शहर से निकलते समय होता है। यहाँ मैले पानी की सफाई का तरीका भी दूसरे शहरों से निराला है। कोई 30,000 एकड़ में फैले तालाब और खेत कोलकाता के कुल मैले पानी का दो-तिहाई हिस्सा साफ करते हैं। यही नहीं, इससे कई हज़ार लोगों को रोज़गार मिलता है मैले पानी से मछलियाँ, सब्जियाँ और धान उगाकर।

इसका एक कारण है यहाँ का अनूठा भूगोल, जो बना है गंगा के मुहाने पर होने वाले मिट्टी और पानी के प्राकृतिक खेल से। पता नहीं कब से गंगा की बड़ी धार यहाँ से बहकर बंगाल की खाड़ी में विसर्जित होती थी। पर यह संगम केवल गंगा और बंगाल की खाड़ी भर का नहीं रहा है। छोटी-बड़ी कई नदियों की कई धाराएँ हिमालय की मिट्टी गाद या साद के रूप में लाकर यहाँ जमा करती रही हैं। कह सकते हैं कि यहाँ हिमालय और समुद्र मिलते हैं।

  1. कोलकाता में बहने वाली किन-किन नदियों का उल्लेख अनुच्छेद में हुआ है?
    1. गंगा, कुल्टीगंग, यमुना
    2. गंगा, हुगली, उल्टीगंगा
    3. गंगा, यमुना, हुगली
    4. हुगली, गंगा, कुल्टीगंग
  2. गद्यांश आधारित निम्नलिखित कथनों को पढ़कर सही विकल्प का चयन कीजिए -
    कथन 
    (क) हुगली नदी में जल-स्तर ज्वार और भाटे के अनुरूप ऊपर-नीचे होता रहता है।
    (ख) कुल्टीगंग कोलकाता के पूरब में बहती है।
    (ग) कोलकाता की अधिकतर नदियाँ उल्टी दिशा की ओर बहती हैं।
    विकल्प
    1. कथन (क) सही है।
    2. कथन (क) और (ख) सही हैं।
    3. कथन (ख) और (ग) सही हैं।
    4. कथन (ग) और (क) सही हैं।
  3. कुल्टीगंग में गिरने वाला कोलकाता का मैला पानी उतना दूषित क्यों नहीं होता?

    1. क्योंकि वह पहले हुगली नदी में जाता है।
    2. कोलकाता के लोग पानी मैला नहीं करते।
    3. नदी में गिरने से पूर्व खेतों और तालाबों से उपचारित होता है।
    4. क्योंकि कुल्टीगंग स्वयं ही गंदगी को उपचारित कर लेती है।
  4. निम्नलिखित कथन (A) और कारण (R) को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए -
    कथन (A): कोलकाता के बंगाल में बंगाल की खाड़ी में हिमालय और समुद्र मिलते हैं।
    कारण (R): यहाँ गंगा और अन्य नदियाँ मिट्टी गाद या साद इकट्ठा करती हैं।

    1. कथन (A) गलत है पर कारण (R) सही है।
    2. कथन (A) सही है पर कारण (R) गलत है।
    3. कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं।
    4. कथन (A) और कारण (R) दोनों गलत हैं।
  5. कोलकाता हुगली नदी में अपना मैला पानी क्यों नहीं बहा सकता?

    1. शहर में हुगली को पवित्र मानकर उसकी पूजा की जाती है।
    2. हुगली एक छोटी नदी है, मैला पानी बहाने लायक नहीं है।
    3. हुगली में समुद्र पानी वापस भेजता है, अपशिष्ट लौट सकता है।
    4. हुगली पश्चिम में बहती है, अपशिष्ट उस ओर लाना कठिन है।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए -

    आदमी की पहचान उसकी भाषा से होती है और भाषा संस्कार से बनती है। जिसके जैसे संस्कार होंगे, वैसी उसकी भाषा होगी। जब कोई आदमी भाषा बोलता है, तो साथ में उसके संस्कार भी बोलते हैं। यही कारण है कि भाषा शिक्षक का दायित्व बहुत गुरुतर और चुनौतीपूर्ण है। परंपरागत रूप में शिक्षक की भूमिका इन तीन कौशलों - बोलना, पढ़ना और लिखना तक सीमित कर दी गई है। केवल यांत्रिक कौशल किसी जीती-जागती भाषा का उदाहरण नहीं हो सकते हैं। सोचना और महसूस करना दो ऐसे कारक हैं, जिनमें भाषा सही आकार पाती है। इनके बिना भाषा, भाषा नहीं है, इनके बिना भाषा संस्कार नहीं बन सकती, इनके बिना भाषा युगों-युगों का लंबा सफ़र तय नहीं कर सकती, इनके बिना कोई भाषा किसी देश या समाज की धड़कन नहीं बन सकती। केवल संप्रेषण ही भाषा नहीं है। दर्द और मुस्कान के बिना कोई भाषा जीवंत नहीं हो सकती।

    भाषा हमारे समाज के निर्माण, विकास, अस्मिता, सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण साधन है। भाषा के बिना मनुष्य पूर्ण नहीं है। भाषा में ही हमारे भाव राज्य, संस्कार, प्रांतीयता झलकती है। इस झलक का संबंध व्यक्ति की मानवीय संवेदना और मानसिकता से भी होता है। जिस व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य और मानसिकता जिस स्तर की होगी, उसकी भाषा के शब्द और मुख्यार्थ भी उसी स्तर के होंगे। साहित्यकार ऐसी भाषा को आधार बनाते हैं, जो उनके पाठकों एवं श्रोताओं की संवेदना के साथ एकाकार करने में समर्थ हों।

  1. आदमी की पहचान उसकी भाषा से होती है, क्योंकि -
    (A) मनुष्य की पूर्णता भाषा द्वारा ही संभव है।
    (B) व्यक्ति के मनोभाव भाषा से ही व्यक्त होते हैं।
    (C) भाषा का प्रचार और विकास कोई रोक नहीं सकता।
    (D) दर्द और मुस्कान के बिना भाषा जीवित नहीं हो सकती।
  2. निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
    कथन (A): जब कोई आदमी बोलता है, तो साथ में उसके संस्कार भी बोलते हैं।
    कारण (R): भाषा शिक्षक का दायित्व बहुत चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि उसे कौशलों का विकास करना होता है।
    (A) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत है।
    (B) कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
    (C) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
    (D) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
  3. गद्यांश में साहित्यकार द्वारा किए गए कार्य का उल्लेख इनमें से कौन-से विकल्प से ज्ञात होता है -
    (A) साहित्य समाज का दर्पण है।
    (B) साहित्यकार साहित्य सृजन में व्यस्त रहता है।
    (C) साहित्यकार सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान बनाता है।
    (D) साहित्यकार जन सामान्य की अस्मिता का परिचायक होता है।
  4. 'दर्द और मुसकान के बिना भाषा जीवंत नहीं हो सकती।' लेखक द्वारा ऐसा कथन दर्शाता है -
    (A) यथार्थ की समझ
    (B) सामाजिक समरसता
    (C) साहित्य-प्रेम
    (D) भाषा कौशल
  5. भाषा तब सही आकार पाती है, जब -
    (A) मनुष्य निरंतर उसका अभ्यास करता रहता है।
    (B) भाषा को सरकारी समर्थन भी प्राप्त होता है।
    (C) भाषा सामाजिक संस्थाओं से प्रोत्साहन प्राप्त करती है।
    (D) भाषायी कौशलों के साथ मनुष्य सोचता और महसूस भी करता है।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इस पर आधारित प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:

कभी-कभी सहज से तेज़ गति में परिवर्तित होते क्रोध को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो उसके परिणाम उत्यंत घातक और पश्चाताप के भाव जगाने वाले हो सकते हैं। कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी के मनोविश्लेषक टॉम जी. स्टीवेन्स ने अपनी किताब 'ओवरकम एंगर ऐंड एग्रेसन' में स्पष्ट किया है कि क्रोध-नियंत्रण का एक प्रमुख तरीका यह है कि स्थिति को अपने नहीं, दूसरों के नज़रिए से देखें। दूसरों को उन स्थितियों पर प्रकाश डालने के लिए प्रोत्साहित करें, क्षमा करना सीखें, बीते को बिसारने की आदत विकसित करें और किसी को चोट पहुँचाने के बजाए प्रशंसा से उसका मूल्यांकन करें। याद रखें, क्रोध-नियंत्रण से आप स्वयं शक्तिशाली बनाते हैं। इससे आपकी खुशहाली और स्मृतियों का विस्तार होता है। यूनिवर्सिटी ऑफ सिनियाटी के वैज्ञानिकों ने अपनी किताब 50 साइंस ऑफ मेंटल इलनेस में इन कमज़ोरियों पर प्रकाश डालते हुए गुस्से को काबू में रखने के कारगर सूत्र दिए हैं। क्रोध-नियंत्रण से हम अपना ही नहीं, दूसरों के उजड़ते संसार को फिर से आबाद कर सकते हैं क्योंकि शांत मन सृजन में समर्थ होता है। हमारे सृजनात्मक होने से ही मानवता का हित सध सकता है। तो जब भी क्रोध आए, तो इन उपायों को आजमाएँ। जीवन में बिखरी हुई चीजों को सँवारने की ओर कदम खुद बढ़ चलेंगे।
  1. क्रोध-नियंत्रण से होने वाले लाभों के संबंध में अनुपयुक्त कथन है।
    (a) इससे व्यक्ति स्वयं को शक्तिशाली बनाता है।
    (b) इससे व्यक्ति के जीवन में खुशहाली आती है।
    (c) इससे व्यक्ति की विस्मृतियों का विस्तार होता है।
    (d) इससे व्यक्ति की रचनात्मकता में वृद्धि होती है।
  2. किस तरह का क्रोध अंततः पश्चात्ताप का कारण बनता है?
    (a) अत्यंत आवेग में किया गया क्रोध
    (b) सहज भाव से किया गया क्रोध
    (c) प्रायश्चित भाव से किया गया क्रोध
    (d) आत्मघात भाव से किया गया क्रोध
  3. मनोविश्लेषक स्टीवेन्स के अनुसार क्रोध पर काबू पाने पर सर्वोपयुक्त उपाय है।
    (a) परिस्थितियों पर दूसरों के नियंत्रण को स्वीकार करना।
    (b) परिस्थितियों पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित करना।
    (c) परिस्थितियों को अपने नज़रिए से और अच्छे से समझना।
    (d) परिस्थितियों को दूसरों के नज़रिए से जानने का प्रयास करना।
  4. क्रोध आने पर क्या करना चाहिए?
    (a) उसकी असहज अभिव्यक्ति
    (b) उसकी सहज अभिव्यक्ति
    (c) संयमित रहने का प्रयत्न
    (d) घातक परिणाम का स्मरण
  5. निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए:
    कथन (A) - क्रोध नवसृजन का संहारक है।
    कारण (R) - क्रोध अवस्था में क्षमाशीलता न्यून हो जाती है।
    (a) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
    (b) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
    (c) कथन (A) सही है तथा कारण (R) उसकी सही व्याख्या है।
    (d) कथन (A) सही है तथा कारण (R) उसकी सही व्याख्या नहीं है।

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