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‘मेरी अभिलाषा’ लगभग छह से आठ पंक्तियों में लिखिए।

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Question

‘मेरी अभिलाषा’ लगभग छह से आठ पंक्तियों में लिखिए।

Very Long Answer
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Solution 1

  1. सपनों की ऊँचाइयों को छूने की है अभिलाषा,
  2. मन से भरी है जिंदगी की हर एक आशा।
  3. हार नहीं मानूंगा, जीत ही मेरा लक्ष्य है।
  4. समर्पण से मैं अपने सपनों को पाऊंगा, यह तय है।
  5. मेरी अभिलाषा है ऊँचाइयों को छूना, सपनों को हकीकत में बदलना।
  6. सिखना, बढ़ना और बदलना, हर दिन कुछ नया सीखना है।
  7. साहसी और संघर्षी बनकर आगे बढ़ना है।
  8. सपनों को हासिल करने के लिए हर मुश्किल का सामना करना है।
  9. मेरी अभिलाषा है, इस जीवन को एक महान कहानी बनाना।
shaalaa.com

Solution 2

मेरी अभिलाषा एक ऐसा सुनहरा सपना है, जो मुझे हर पल आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। मैं अपने जीवन में सफलता की ऊँचाइयों को छूना चाहता हूँ और एक ऐसा इंसान बनना चाहता हूँ जो समाज के लिए उपयोगी हो। मेरा सपना है कि मैं न केवल अपने परिवार का नाम रोशन करूँ, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाला एक जागरूक नागरिक भी बनूँ।

मैं शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करना चाहता हूँ ताकि ज्ञान के माध्यम से स्वयं को और दूसरों को आगे बढ़ा सकूँ। मेरी यही आकांक्षा है कि मैं अपने लक्ष्य के प्रति पूरी ईमानदारी और समर्पण से कार्य करूँ। कठिनाइयाँ चाहे जैसी भी हों, मैं डटकर उनका सामना करूँगा और कभी हार नहीं मानूँगा।
इस प्रकार, मेरी अभिलाषा ही मेरी प्रेरणा है, जो मुझे लगातार आगे बढ़ने, सीखने और समाज में कुछ अच्छा करने की दिशा में मार्गदर्शन देती है।

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अपठित गद्यांश
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Chapter 2.14: रचना एवं व्याकरण विभाग - स्वाध्याय [Page 117]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Kumarbharati Standard 9 Maharashtra State Board
Chapter 2.14 रचना एवं व्याकरण विभाग
स्वाध्याय | Q ४ | Page 117

RELATED QUESTIONS

निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

           रविशंकर जी भारत के जाने-माने सितार वादक व शास्त्रीय संगीतज्ञ हैं। उन्होंने बोटल्स व विशेष तौर पर जॉर्ज हैरीसन के सहयोग से भारतीय शास्त्रीय संगीत को, विदेशों तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई थी।

           उनका जन्म ०७ अप्रैल, १९२० को वाराणसी में हुआ। उनके बड़े भाई उदयशंकर एक प्रसिद्ध शास्त्रीय नर्तक थे। प्रारंभ में रविशंकर जी उनके साथ विदेश यात्राओं पर जाते रहे व कई नृत्य-नाटिकाओं में अभिनय भी किया।

           १९३८ में उन्होंने नृत्य कों छोड़कर संगीत को अपना लिया व मेहर घराने के उस्ताद अलाउद्‌दीन खाँ से सितार वादन का प्रशिक्षण लेने लगे। १९४४ में अपनो प्रशिक्षण समाप्त करने के बाद, उन्होंने आई. पी. टी. ए. में दाखिला लिया व बैले के लिए सुमधुर धुनें बनाने लगे। वे ऑल इंडिया रेडियो में वाद्‌यवृंद प्रमुख भी रहे।

           १९५४ में उन्होंने सर्वप्रथम सोवियत यूनियन में पहला विदेशी प्रदर्शन दिया। फिर एडिनबर्ग फेस्टिवल के अतिरिक्त रॉयल फे. स्टिवल हॉल में भी प्रदर्शन किया। १९६० के दर्शक में ब्रीटल्स के साथ काम करके उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत की धूम विदेशों तक पहुँचा दी।

           वे १९८६ से १९९२ तक राज्य सभा के मनोनीत सदस्य रहे। १९९९ में उन्हें भारतरत्न से सम्मानित, किया गया। उन्हें पद्मविभूषण, मैग्सेसे, ग्रेमी, क्रिस्टल तथा फूकुओका आदि अनेक पुरस्कार भी प्राप्त हुए।

           उनकी पुत्री अनुष्का का जन्म १९८२ में, लंदन में हुआ। अनुष्का का पालन-पोषण दिल्‍ली व न्यूयार्क में हुआ। अनुष्काने पिता से सितार वादन सीखा व अल्प आयु में ही अच्छा कैरियर बना लिया। वे बहुप्रतिभाशाली कलाकर हैं। उन्होंने पिता को समर्पित करते हुए एक पुस्तक लिखी- ‘बापी, द लव ऑफ माई लाईफ।’ इसके अतिरिक्त उन्होंने एक फिल्म में भरतनाट्यम नर्तकी का रोल भी अदा किया।

           पंडित रविशंकर जी ने अनेक नए रागों की रचना की। सन्‌ २००० में उन्हें तीसरी बार ग्रेमी-पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पंडित जी ने सही मायने में पूर्व तथा पश्चिमी संगीत के मध्य एक से हेतु कायम किया है। दिसंबर २०१२ में उनका स्वर्गवास हुआ।

(१) तालिका पूर्ण कीजिए: (२)

रविशंकर जी को प्राप्त पुरस्कार

(१)  
  ↓
(२)   
  ↓
(३)  
  ↓
(४)  

(२) निम्नलिखित शब्दों का लिंग परिवर्तन कीजिए: (२)

  1. नर्तक - ______
  2. माता - ______
  3. पंडिताईन - ______
  4. पुत्र - ______

(३) ‘संगीत का जीवन में महत्व’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)


निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

आने वाली महिला की तबीयत थोड़ी खराब थी और पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उनका इलाज होना था। चूँकि वह मेरी बुआ जी को जानते थे और बुआ जी के छोटे भाई का परिवार पटना में था इसलिए ये तो सोचने की बात नहीं थी कि वह कहाँ रहेंगे। वह बिना किसी पूर्व सूचना के हमारे घर पहुँच गए थे। उनकी ट्रेन तो शाम को थी, लेकिन ट्रेन के टाइम से न चलने का बुरा कौन मानता है।

ट्रेन पाँच घंटे लेट पहुँची थी और हमारे वह मेहमान बिना खाए-पिए आधी रात में हमारे घर पहुँच गए थे।

फटाफट खाना बना। सोने का जुगाड़ हुआ।
और सुबह उन्हें अस्पताल पहुँचाने का भी।

वे कोई सप्ताह भर हमारे घर रहे। हम खूब घूल-मिल गए। हम रोज ठहाके लगाते, साथ खाते और पूरी मस्ती करते। ऐसा लग रहा था, मानो हम सदियों से एक-दूसरे को जानते हों। बुआ जी ने तिल की मिठाई भेजी थी। दिल्‍ली में उसे गजक कहते हैं, हमारे यहाँ सब तिलकुंट कहते थे। हम सबने तिल और गुड़ की उस मिठाई को खूब मजे लेकर खाया। हमारी बुआ जी सारे संसार का ख्याल रखती थीं और भाई-भतीजों में तो उनकी आत्मा ही बसती थी।

उन्होंने अपने परिचित भेज दिए, हमने उन्हें रिश्तेदार बना लिया।
आप जानकर हैरान रह जाएँगे कि हम दुबारा कभी उन रिश्तेदारों से नहीं मिल पाए जो उस रात हमारे घर आए थे। लेकिन हम सभी भाई-बहनों के जेहन में उस रिश्ते की याद आज भी ताजा है। हम आज भी उनके आने और अपनी रजाई छिन जाने को याद कर खुश होते हैं।

(1) कृति पूर्ण कीजिए:   (2)

(i)

(ii)

(2) उत्तर लिखिए:   (2)

  1. बुआ जी की आत्मा बसती थी - .....................
  2. आने वाली महिला की तबीयत थी - .....................
  3. बुआ जी खयाल रखती थीं - .....................
  4. अतिथि लेखक के घर रहे - .....................

(3) ‘संयुक्त परिवार’ इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए।   (3)


निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

“हम रसायनों के युग में रह रहे हैं। हमारे पर्यावरण कीं सारी वस्तुएँ और हम सब, रासायनिक यौगिकों के बने हुए हैं। हवा मिट्टी, पानी, खाना, वनस्पति और जीव-जंतु ये सब अजूबे जीवन कौ रासायनिक सच्चाई ने पैदा किए हैं। प्रकृति में सैकड़ों -हजारों रासायनिक पदार्थ हैं। रसायन न होते तो धरती पर जीवन भी नहीं होता। पानी, जो जीवन के आधार है, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बना एक रासायनिक यौगिक है। मधुर-मीठी चीनी, कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बनी है। कोयला और तेल, बीमारियों से मुक्ति दिलाने वाली औषधियाँ, एंटीबायोटिक्स, एस्प्रीन और पेनिसिलीन, अनाज साब्जियाँ फल और मेवे-सभी तो रसायन हैं।

जीवन जोखिम से भरा है, गुफामानव ने जब भी आग जलाई, उसने जल जाने का खतरा उठाया। जीवन-यापन के आधुनिक तरीकों के कुछ खतरों को कम किया है, पर कुछ खतरे अनेक गुना बढ़ गए हैं। ये खतरे नुकसान और शारीरिक चोट के रूप में हैं। हम सभी अपने दैनिक जीवन में जोखिम उठाते हैं। जैसे जब हम सड़क पार करते हैं, स्टोव जलातें हैं, कार में बैठते हैं, खेलते हैं, पालतू जानवरों को दुलारते हैं, घरेलू काम-काज करते हैं या केवल पेड़ के नीचे बैठे होते हैं, तो हम जोखिम उठा रहे होते हैं। इन जोखिमों में से कुछ तात्कालिक हैं, जैसे जलने का, गिरने का या अपने ऊपर कुछ गिर जाने का खतरा। कुछ खतरे ऐसे हैं जिनमें प्रभाव लंबे समय के बाद सामने आते हैं जैसे लंबे समय तक शोर-गुल वाले पर्यावरण में रहने वाले व्यक्तियों की श्रवणशक्ति कम हो सकती है।

क्या रसायन भी जोखिम उत्पन्न करते हैं ? स्पष्ट है कि कुछ अवश्य करते हैं। उनमें से अनेक बहुत अधिक जहरीले हैं, कुछ प्रचंड 'विस्फोट करते हैं और कुछ अन्य अचानक आग पकड़ लेते हैं, ये रसायनों के कुछ तात्कालिक 'उग्र' खतरे हैं। रसायनों में कुछ दीर्घकालीन खतरे भी होते हैं, क्योंकि कुछ रसायनों के संपर्क में अधिक समय तक रहने पर, चाहे उन रसायनों का स्तर लेशमात्र ही क्यों न हो, शरीर में बीमारियाँ पैदा हो सकती हैं।''

1. आकृति पूर्ण कीजिए:   (2)

2.  परिच्छेद में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढकर लिखिए।  (2)

  1. जीव - ______
  2. सैकड़ों - ______
  3. काम - ______
  4. मधुर - ______

3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए ।  (2)

'ध्वनि प्रदूषण' इस विषय पर अपने विचार लिखिए।


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

          एक बार अंग्रेजी के मशहूर साहित्यसेवी डॉ. जॉनसन के पास उनका एक मित्र आया और अफसोस जाहिर करने लगा कि उसे धार्मिक ग्रंथ पढ़ने के लिए समय ही नहीं मिलता।

          “क्यों?” डॉ. जॉनसन ने फौरन पूछा।

           “आप ही देखिए, दिन-रात मिलाकर सिर्फ चौबीस घंटे होते हैं, इसमें से आठ घंटे तो सोने में निकल जाते हैं।”

          “पर यह बात सब ही के लिए लागू है।” डॉ. जॉनसन ने कहा।

          “और करीब आठ ही घंटे ऑफिस में काम करना पड़ता है।”

           “और बाकी आठ घंटे?” डॉ. जॉनसन ने पूछा।

          “इन्हीं आठ घंटों में खाना-पीना, हजामत बनाना, नहाना-धोना, ऑफिस आना-जाना, मित्रों से मिलना-जुलना, चिट्ठी-पत्री का जबाब देना, इत्यादि कितने काम रहते हैं। मैं तो बड़ा परेशान हूँ।”

          “तब तो मुझे भी अब भूखों मरना पड़ेगा।” डॉ. जॉनसन एक गहरी साँस लेकर बोले।

          “क्यों? क्यों?” उनके मित्र ने तुरंत पूछा।

          “मैं काफी खाने वाला आदमी हूँ और अन्न उपजाने के लिए दुनिया में एक चौथाई ही तो जमीन है, तीन-चौथाई तो पानी ही है और संसार में मेरे जैसे करोड़ों लोग हैं जिन्हें अपना पेट भरना पड़ता है।”

          “पर इतने लोगों के लिए फिर तो भी जमीन काफी है।”

          “काफी कहाँ है? इस एक-चौथाई जमीन में कितने पहाड़ हैं, ऊबड़-खाबड़ स्थल हैं, नदी-नाले हैं, रेगिस्तान और बंजर भूमि हैं। अब मेरा भी कैसे निभ सकेगा भगवान! मित्र महोदय बड़ी हमदर्द के साथ डॉ. जॉनसन को दिलासा देने लगे कि उन्हे परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। दुनिया में करोड़ों लोग रहते आए हैं और उन्हें सदा अन्न मिलता ही रहा है।”

(१) तालिका पूर्ण कीजिए: (२)

(२) परिच्छेद में आए हुए शब्दयुग्म के कोई भी चार उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए: (२)

  1. ______
  2. ______
  3. ______
  4. ______

(३) ‘समय अनमोल है’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)


निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए।

वैज्ञानिकों का मानना है कि दुनियाभर में बढ़ते पर्यावरण संकट को कम करने में जैविक खेती एक उपचारक भूमिका निभा सकती है। गौरतलब है कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में प्राकृतिक खेती बड़े पैमाने पर अपनाई जा रही है। धीरे-धीरे दक्षिण, मध्य भारत और उत्तर भारत में भी यह किसानों में लोकप्रिय हो रही है। अब किसानों ने जैविक खेती को एक सशक्त विकल्प के रूप में अपना लिया है। गौरतलब है कि जैविक या प्राकृतिक खेती की तरफ भारतीय किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। धीरे-धीरे जैविक खेती का प्रचलन बढ़ रहा है। जैविक बीज, जैविक खाद, पानी, किसानी के यंत्रों आदि की आसानी से उपलब्धता जैविक खेती की लोकप्रियता को और अधिक बढ़ा सकती है।

प्राकृतिक खेती को लेकर अनुसंधान भी बहुत हो रहे हैं। किसान नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। इससे कृषि वैज्ञानिक भी प्राकृतिक खेती को लेकर अधिक उत्साहित हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि जैविक या प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से पर्यावरण,खाद्यान्न, भूमि, इंसान की सेहत, पानी की शुद्धता को और बेहतर बनाने में मदद मिलती है। रासायनिक खादों और कीटनाशकों के इस्तेमाल से होने वाली बीमारियों और समस्याओं की जानकारी न होने की वजह से किसान इनका प्रयोग काफी ज़्यादा करने लगे हैं। वहीं दूसरी तरफ सिक्किम में प्राकृतिक खेती से पर्यावरण को जितनी मदद मिली है उससे साफ़ हो गया है कि प्राकृतिक खेती को अपनाकर कई समस्याओं का समाधान हो सकता है।

  1. आज जैविक खेती की माँग क्यों बढ़ती जा रही है?
    1. सस्ती होने के कारण 
    2. अधिक उत्पादन के कारण
    3. स्वच्छ पर्यावरण के कारण 
    4. सरकारी मदद मिलने के कारण
  2. सही कथन का चयन कीजिए-
    1. उत्तर भारत में जैविक खेती के लिए प्रेरणा की ज़रूरत है।
    2. पूर्वोत्तर राज्यों में जैविक खेती के प्रति अधिक उत्साह है।
    3. लोगों में प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी का अभाव है।
    4. प्राकृतिक खेती के लिए विश्वविद्यालय से शिक्षित होना ज़रूरी है।
  3. जैविक खेती को किसानों की पहली पसंद बनाने के लिए क्या करना चाहिए?
    1. रासायनिक खेती निषिद्ध की जानी चाहिए।
    2. बाजार में केवल जैविक उत्पादों बिक्री होनी चाहिए।
    3. युवकों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करना चाहिए।
    4. जैविक बीज, खाद, किसानी के यंत्र आदि सुविधाएँ उपलब्ध करवानी चाहिए।
  4. वर्तमान समय में खेती के लिए; अनुसंधानों में बढ़ोतरी किसके बारे में हुई है?
    1. जैविक खेती 
    2. रासायनिक खाद
    3. नई-नई दवाइयाँ 
    4. नए बीज
  5. किसान कीटनाशकों और रासायनिक खादों का अधिक प्रयोग क्यों करने लगे हैं?
    1. सहज उपलब्धता के कारण
    2. दुष्प्रभावों की जानकारी न होने के कारण
    3. अधिक प्रचार-प्रसार के कारण
    4. सस्ती होने के कारण

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्‍प चुनकर लिखिए:

    कृषि में हरी खाद उस सहायक फ़सल को कहते हैं जिसकी खेती मुख्यतः भूमि में पोषक तत्त्वों को बढ़ाने तथा उसमें जैविक पदार्थों की पूर्ति करने के उद्देश्य से की जाती है। प्रायः इस तरह की फ़सल को हरित स्थिति में हल चलाकर मिट्टी में मिला दिया जाता है। हरी खाद से भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है और भूमि की रक्षा होती है। मृदा के लगातार उपयोग से उसमें उपस्थित पौधे की बढ़वार के लिए आवश्यक तत्त्व नष्ट होते जाते हैं। इनकी क्षतिपूर्ति के लिए और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखने के लिए हरी खाद एक उत्तम विकल्प है। बिना गले-सड़े हरे पौधे (फ़सलों अथवा उनके भाग) को जब मिट्टी की नत्रजन या जीवांश की मात्रा बढ़ाने के लिए खेत में दबाया जाता है तो इस क्रिया को हरी खाद देना कहते हैं।
हरी खाद के उपयोग से न सिर्फ़ जीवांश भूमि में उपलब्ध होता है बल्कि मृदा की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक दशा में भी सुधार होता है। वातावरण तथा भूमि प्रदूषण की समस्या को समाप्त किया जा सकता है। लागत घटने से किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर होती है, भूमि में सूक्ष्म तत्त्वों की आपूर्ति होती है साथ ही साथ मृदा की उर्वरा शक्ति भी बेहतर हो जाती है।

  1. हरी खाद का उपयोग खेतों में क्यों किया जाना चाहिए?
    (a) रासायनिक खाद की महँगी लागत से बचने के लिए।
    (b) रासायनिक खाद के ज़हर से बचने के लिए।
    (c) खेती के पारंपरिक तरीकों को बढ़ावा देने के लिए।
    (d) मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए।
  2. मिट्टी का उपजाऊपन कैसे कम हो जाता है?
    (a) रासायनिक खाद के उपयोग से।
    (b) समय पर वर्षा न होने से।
    (c) मिट्टी के निरंतर उपयोग से।
    (d) तेज़ आँधी-तूफान के आने से।
  3. 'हरी खाद देना' क्रिया कहा जाता है:
    (a) खेतों में हरे रंग की खाद का प्रयोग करने को।
    (b) खेतों में ताज़ी खाद का प्रयोग करने को।
    (c) गलने-सड़ने से पूर्व सहायक फसल को खेतों में दबाने को।
    (d) गलने-सड़ने के बाद सहायक फ़सल को खेतों में दबाने को।
  4. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
    (I) हरी खाद के उपयोग से भूमि में नमी बढ़ती है।
    (II) हरी खाद के उपयोग से भूमि की उर्वरता बढ़ती है।
    (III) हरी खाद के उपयोग से वातावरण शुद्ध होता है।
    (IV) हरी खाद के उपयोग से मिट्टी में जीवांश बढ़ते हैं।
    उपयुक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?
    (a) केवल (II)
    (b) केवल (I)  
    (c) (I), (II) और (IV)
    (d) (II), (III) और (IV)
  5. निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए, उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए:
    कथन (A) - मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखने के लिए हरी खाद एक उत्तम विकल्प है।
    कारण (B) - हरी खाद से मृदा की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक दशा में सुधार होता है और लागत घटती है।
    (a) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
    (b) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं।
    (c) कथन (A) सही है तथा कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
    (d) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं, तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इस पर आधारित प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्‍प चुनकर लिखिए:

शोर से होने वाली बहरेपन की बीमारी एक गंभीर स्वास्थ्यगत समस्या है। तेज़ आवाज़ हमारी श्रवण कोशिकाओं पर बहुत दबाव डालती है, जिससे वे स्थायी रूप से चोटिल हो सकती हैं। यदि सुनने की क्षमता एकबार चली गई तो उसे पुनः पाना नामुमकिन है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की 'वर्ल्ड हीयरिंग रिपोर्ट' के मुताबिक विश्व की 1.5 अरब आबादी बहरेपन के साथ जी रही है। ध्वनि प्रदूषण दरअसल ऐसे अवांछित विद्युत चुंबकीय संकेत हैं, जो इंसान को कई रूपों में नुकसान पहुँचाते हैं। इसीलिए, शोर-प्रेरित बहरेपन पर फौरन ध्यान देने की ज़रूरत है। वैश्विक अध्ययन बताते हैं कि निर्माण कार्य, औद्योगिक कामकाज़, जहाज बनाने या मरम्त करने संबंधी काम, अग्निश्मन, नागरिक उड्डयन आदि सेवाओं में लगे श्रमिकों में शोर-प्रेरित बहरेपन का खतरा अधिक होता है। आकलन है कि 15 फीसदी नौजवान संगीत-कार्यक्रमों, खेल-आयोजनों और दैनिक कामकाज़ में होने वाले शोर से बहरेपन का शिकार होते हैं। शोर-प्रेरित बहरनेपन की समस्या विकासशील देशों में ज़्यादा है, जहाँ तीव्र औद्योगीकरण, अनौपचारिक क्षेत्र के विस्तार और सुरक्षात्मक व शोर-नियंत्रणरोधी उपायों की कमी से लोग चौतरफ़ा शोर-शराबे में दिन-बिताने को अभिशप्त हैं। हमें यह समझना ही होगा कि श्रवण-शक्ति का ह्रास न सिर्फ़ इंसान को प्रभावित करता है, बल्कि समाज पर भी नकारात्मक असर डालता है।
  1. शोर-प्रेरित बहरेपन का खतरा किस क्षेत्र से जुड़े लोगों को कम है?
    (a) जहाज-निर्माण से जुड़े लोगों को
    (b) स्वास्थ्य-सेवाओं से जुड़े लोगों को
    (c) खेल-आयोजनों से जुड़े लोगों को
    (d) संगीत-कार्यक्रमों से जुड़े लोगों को
  2. गद्यांश के संदर्भ में अनुपयुक्त कथन है -
    (a) विकासशील देशों में अनौपचारिक क्षेत्र विस्तार की समस्या नहीं है।
    (b) विकासशील देशों में शोर-निंयत्रणरोधी उपायों पर अधिक ध्यान नहीं दिया जाता है।
    (c) कुछ सेवाओं से जुडे लोग अन्य की तुलना में बहरेपन के अधिक शिकार हैं।
    (d) कुछ खास सेवाओं से जुड़े युवा भी आज बहरेपन का शिकार हो रहे हैं।
  3. विकासशील देशों के लोगों के जीवन को अभिशप्त क्यों कहा गया है?
    (a) उनका जीवन अनेक सामाजिक संकटों से घिरा है।
    (b) उनका जीवन अनेक आर्थिक संकटों से घिरा है।
    (c) वे खराब सेहत वाली विवश ज़िंदगी बसर करते हैं।
    (d) वे शोर-शराबे से भी ज़िंदगी जीने को विवश हैं।
  4. तीव्र आवाज़ का हमारे शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
    (a) तंत्रिका-कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त
    (b) श्रवण-कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त
    (c) रक्त-कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त
    (d) हृदय-कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त
  5. निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए:
    कथन (A) - वर्तमान में श्रवण शक्ति का ह्रास एक सार्वजनिक समस्या बन गई है।
    कारण (R) - आर्थिक विकास की अनियमित होड़ इस समस्या के मूल कारणों में से एक है।
    (a) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
    (b) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
    (c) कथन (A) सही है तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (d) कथन (A) सही है परंतु कारण (R) कथन (A) की गलत व्याख्या करता है।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:

'किसी भी राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर उसकी आत्मा है।' यह उक्ति भारत जैसे प्राचीन राष्ट्र के संदर्भ में और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है। संस्कृति राष्ट्र के जीवन मूल्यों, आदर्शों, दर्शन आदि को मानसिक धरातल पर अभिव्यक्त करने का महत्त्वपूर्ण साधन है। भारत में इसके पीछे हजारों वर्षों के आचरण, व्यवहार, अनुभव, चिंतन, मनन आदि की पूंजी लगी हुई है। कालचक्र के सैकड़ों सुखद एवं दुखद घटनाक्रमों के दौरान कसौटी पर खरे उतर कर उन्होंने अपनी सत्यता व विश्वसनीयता अनेक बार सिद्ध की है। त्याग, संयम, परहित एवं अहिंसा या जीवों पर दया आदि भारतीय संस्कृति के सर्वोच्च मूल्यों में से हैं। संस्कृति और सभ्यता दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। अपने आयु, पद और अनुभव में बड़ों के प्रति आदर भाव, श्रद्धा व सम्मान रखना ही संस्कृति की आत्मा है, उसकी पहचान है। संस्कृति और उसके आदर्श एवं मूल्य एक दिन में निर्मित नहीं होते, वें हजारों वर्षों की अनुभूतियों तथा सिद्धांतों के परिणाम होते हैं। इन आदर्शों व मूल्यों के आधार पर ही राष्ट्रीय संस्कृति निर्मित होती है। इसका निर्माण कार्य ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका आचरण, व्यावहारिक ज़िंदगी में सहज रूप से अभिव्यक्त होना अर्थात उसका अंगीभाव हो जाना, संस्कृति कहलाता है।

भारतीय संस्कृति का सर्वोच्च मूल्य त्याग है, यह मूल्य हमें पाश्चात्य संस्कृति तथा साम्यवादी संस्कृति की भोगवादी वृत्ति से दूर रखता है। इनकी इस भोगवादी संस्कृति ने आज संपूर्ण मानव जाति को विनाश के कगार पर पहुँचा दिया है और इसी प्रवृत्ति ने मनुष्य और प्रकृति के बीच एक खाई पैदा कर दी है भारतीय संस्कृति सर्वसमावेशक है, जीवमात्र में ईश्वरीय सत्ता की अनुभूति करने वाली है। भारतीय संस्कृति अपने सुखों के लिए दूसरों को नष्ट करने की बर्बरता नहीं रखती। भारतीय संस्कृति में विश्वास करने वाले लोग, राजा से भी अधिक उस संन्यासी को समादृत करते हैं, जो विश्व कल्याण के लिए संयम नियम का पालन करते हुए अपना सर्वस्वार्पण करते हैं।

(क) 'भारत में आचरण, व्यवहार, अनुभव, चिंतन और मनन आदि की पूंजी लगी हुई है' पंक्ति से आशय है?     (1)

  1. जीवन मूल्यों का महत्त्व
  2. ईश्वरीय सत्ता का योगदान
  3. राष्ट्रीय संस्कृति की चेतना
  4. त्याग का उदात्त रूप

(ख) पाश्चात्य संस्कृति तथा साम्यवादी संस्कृति की भोगवादी वृति से बचाव होता है -   (1)

  1. संयम से
  2. अहिंसा से 
  3. मूल्यों से
  4. चिंतन से

(ग) संस्कृति और सभ्यता एक दूसरे के पूरक हैं, क्योंकि ______.    (1)

  1. सभ्यता के भीतर ही संस्कृति का विकास हैं
  2. सांस्कृतिक निर्धारक तत्व ही सभ्यता को परिभाषित करते हैं
  3. सभ्यता व संस्कृति का प्रभाव एक-दूसरे पर पड़ता है
  4. सभ्यता उन्नति है और संस्कृति उदात्तता

(घ) भारतीय संस्कृति पाश्चात्य संस्कृति से किन अर्थों में भिन्न है -   (1)

  1. भोगवाद से मुक्त होने के कारण
  2. भोगवाद से युक्त होने के कारण
  3. उदारता के कारण
  4. स्वार्थ भावना के कारण

(ड) 'समादृत' शब्द का समानार्थी हो सकता है -    (1)

  1. समवयस्क
  2. सम्मानित
  3. सुसंस्कृत
  4. समावेशक

(च) मनुष्य और प्रकृति के बीच खाई पैदा करने के महत्त्वपूर्ण कारण हैं -      (1)

  1. आधुनिकता
  2. भोगवादी दृष्टिकोण
  3. प्रकृति के प्रति उदासीनता
  4. लालची स्वभाव

(छ) संस्कृति के मूल में समाहित है: इस कथन के मूलभाव हेतु निम्नलिखित कथनों को पढ़कर सही विकल्प का चयन कीजिए:  (1)

कथन -

  1. एक राष्ट्र की आत्मा
  2. जीवन मूल्यों, दर्शन का आईना
  3. पाश्चात्य जगत की भोगवादी संस्कृति
  4. आधारभूत तत्वों का अवमूल्यन

विकल्प -

  1. कथन 1 व 4 सही है।
  2. कथन 1 व 2 सही है।
  3. कथन 1, 2, 3 व 4 सही है।
  4. कथन 1 व 3 सही है।

(ज) प्रस्तुत गद्यांश के आधार पर सांस्कृतिक संरक्षण के विषय में कहा जा सकता है -    (1)

  1. सांस्कृतिक व्यवहार का संरक्षण करना
  2. सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाना
  3. संस्कृति का हस्तांतरण करना
  4. संरक्षण को व्यावहारिक रूप प्रदान करना

(झ) राष्ट्रीय संस्कृति का निर्माण होता है -    (1)

  1. ईश्वरीय सत्ता के प्रभाव से
  2. विश्व के कल्याण की ओर उन्मुख होने से
  3. आदर्शों व मूल्यों के आधार पर
  4. आर्थिक विकास की ओर अग्रसर होने से 

(ञ) भारतीय संस्कृति में राजा से अधिक संन्यासी को आदर देने का प्रबल कारण है -   (1)

  1. आत्मसंयम
  2. परोपकार
  3. त्याग की भावना
  4. जनप्रियता

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढक़र इसके आधार पर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:

आज के दौर में जिसे देखो, वही दुखी, परेशीन, हताश और उदास नजर आता है। तमाम तरह की चिंताओं ने लोगों को घेर रखा है। कोई अपनी सेहत को लेकर परेशान रहता है, तो कोई काम-धंधे की मंदी या वेतन में कटौती से दुखी है। किसी को भविष्य की चिंता सता रही है तो कोई अपने मान-सम्मान के बारे में सोच कर मायूस महसूस कर रहा है। जाहिर है, ऐसे में हर कोई खुशी के पीछे भाग रहा है। कई लोग सोचते हैं कि अमीर उद्योगपति या मोटा वेतन पाने वाले पेशेवर लोग खुश रहते हैं और गरीबी या आर्थिक विपनन्‍नता ही खुशी से वंचित रहने की एकमात्र वजह है। लेकिन अगर धन से खुशी आती तो दुनिया में कई धनी लोग कुंठा और हताशा में जीवन नहीं जीते। खुशी पैसा नहीं, संतुष्टि का भाव है। यह पैसे से नहीं, हमारे प्रयासों से आती है और सबसे बड़ी बात है कि खुशी के पीछे भागने से खुशी नहीं मिलती। खुशी हमारे बिल्कुल आसपास होती है, जिसे हमें पहचानना और ग्रहण करना होता है।

ज्यादातर लोग खुशी हमेशा बाहर खोजते हैं, जबकि यह उसी परिवार में उपलब्ध होती है, जिसका हम अहम हिस्सा होते हैं। मुश्किल यह हैं कि आजकल परिवार की परिभाषा सिकुड़ गई है। हम सिर्फ पति-पत्नी और अपने बच्चों को ही परिवार मानने लगे हैं जबकि भाई-बहन, देवर-देवरानी, जेट-जेठानी, सास-ससुर, चाचा-मामा आदि सभी इस परिवार के सदस्य होते हैं। जब हम अपने परिवार के सदस्यों की खुशी में सच्चे मन से सम्मिलित होने लगते हैं और उनकी खुशी के लिए सक्रिय रहते हैं, तो खुशी स्वयं हमारे पास आती है। जब हम इस मानसिकता से व्यवहार करते हैं, तो परिवार के दूसरे सदस्य भी हमारे लिए ऐसा ही करते हैं। फिर खुशी न मिलने का कोई कारण नहीं हो सकता। इसलिए हम भले ही एक चारदीवारी में न रहकर अलग रहते हों, अलग खाना बनाते हैं, लेकिन मन से हम अपने संपूर्ण परिवार से जुड़े रह सकते हैं ।

(i) निम्नलिखित में से कौन-सा/से वाक्य गद्यांश से मेल खाते हैं ?   [1]

    1. संपूर्ण परिवार से जुड़कर खुशी पाई जा सकती है।
    2. दादा-दादी, चाचा-चाची, बुआ आदि को मिलाकर परिवार मानना चाहिए।
    3. दुनिया में सभी धनी कुंठाग्रस्त और हताश नहीं है।
    4. तथाकथित खुशी को धन से नहीं खरीदा जा सकता।
      विकल्प:
      1. केवल I
      2. II और III
      3. केवल IV
      4. I, II, IV

(ii) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर लिखिए:   [1]

कथन: हमें अपने परिवार की खुशियों में सच्चे मन से और सक्रियता से उपस्थित रहना चाहिए।

कारण: यही प्रसन्न रहने का एकमात्र साधन है।

विकल्प:

  1. कथन तथा कारण दोनों ग़लत हैं।
  2. कथन ग़लत हैं, लेकिन कारण सही है।
  3. कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
  4. कथन सही है, लेकिन कारण उसकी गलत व्याख्या करता है।

(iii) प्रत्येक व्यक्ति खुशी के पीछे क्यों भाग रहा है?    [1]

  1. आर्थिक विपन्नता के कारण
  2. विभिन्‍न चिंताओं से घिरे होने के कारण
  3. 'खुशी' से स्वस्थ रह पाएँगे, ऐसी सोच के कारण
  4. 'खुशी' से पैसा आएगा, ऐसी सोच के कारण

(iv) खुश रहने के लिए आवश्यक है:    [1]

  1. आर्थिक संपन्नता
  2. प्रतिष्ठित होना
  3. उद्योगपति होना
  4. संतोषी होना

(v) आजकल लोगों की चिंता के कारण हैं:    [1]

  1. अस्वस्थ होना, वेतन कटौती, व्यावसायिक मंदी
  2. आर्थिक मंदी, अस्वस्थ होना, हताशा
  3. उदासी, वेतन कटौती, व्यावसायिक मंदी
  4. निराशा, आर्थिक मंदी, अस्वस्थ होना

Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:

निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए:

लगभग एक सप्ताह यही क्रम चलता रहा। हर समय एक व्यक्ति उनके पास बैठा रहता। कभी माँ तो कभी मीनू, कभी रोहित तो कभी आशा। उन सबकी सेवा व ईश्वर के आशीर्वाद से पिताजी की दशा में काफी सुधार हो गया। अब वे धीरे-धीरे अपने आप बैठने भी लगे थे, और थोड़ी देर बातें भी कर लेते थे। प्रात: लगभग नौ बजे का समय था। उस समय हल्की वर्षा की बुँदें पड़ रही थी। तभी घर के बाहर एक कार आकर रुकी।
  1. 'पिताजी' को क्या हुआ था? डॉक्टर ने उन्हें क्या सलाह दी थी?      [2]
  2. कार से कौन आए थे और क्यों?     [2]
  3. बुआ जी जाते-जाते अपने भैया को क्या-क्या सलाह दे गई? क्या उपर्युक्त अवसर पर उनकी यह सलाह उचित थी? समझाइए।     [3]
  4. पिताजी द्वारा मीनू को शादी का सुझाव दिए जाने पर मीनू ने उन्हें क्या कहकर समझाया?    [3]

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