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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) १० वीं कक्षा

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए: आकाश में बिजली की कौंधें बीच-बीच में लपक उठती थीं। बादलों की गड़गड़ाहट सुनकर रामबोला को लगा कि मानों।

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प्रश्न

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

आकाश में बिजली की कौंधें बीच-बीच में लपक उठती थीं। बादलों की गड़गड़ाहट सुनकर रामबोला को लगा कि मानों चैनसिंह ठाकुर अपने हलवाहा को डॉट रहे हैं। रामबोला अनायास ही ताव में आ गया। उठा और फिर नये श्रम की साधना में लग गया। दूसरे छप्पर के ढीले पड़ गए अंजर-पंजर को कसने के 'लिए पास ही खलार में उगी लंबी घास-पतवार उखाड़ लाया। रामबोला ने भिखारी बस्ती के और लोगों को जैसे घास बैँटकर रस्सी बनाते देखा था; वैसे ही बैंटने लगा। जैसे-तैसे रस्सियाँ बैंटी, जस-तस टट्टर बाँधा। अब जो उसकी आधी से अधिक उधड़ी हुई छावन पर ध्यान गया तो नन्हे मन के उत्साह को फिर' काठ मार गया। घास-फूस, ज्यौनारों में जूठन के साथ-साथ बाहर फेंकी गई पत्तलों और चिथड़े-गुदड़ों से 'बनाई गई वह छोटी -सी छपरिया फिर से छानें के लिए वह सामान कहाँ से जुटाए? हवा दूवारा उड़ाए हुए.माल वह इस बरसात में कहाँ-कहाँ ढूँढ़ैगा। दैव आज प्रलय की बरखा करके ही दम लेंगे। हवा के मारे औरों के छप्पर भी पेंगें ले रहे हैं।

(1) लिखिए:  (2)

गद्यांश में उल्लिखित प्राकृतिक घटक

↓
____________
____________
____________
____________

(2) लिखिए:

(i) एक शब्द में उत्तर लिखिए :   (1)

  1. हलवाहा को डाँटने वाला - ____________
  2. अनायास ही ताव में आने वाला - ____________

(ii) विशेषता लिखिए :  (1)

  1. बिजली - ______
  2. बादल - ______

(3) 'विनाश और निर्माण प्रकृति के नियम हैं' इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए।  (3)

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

(1)

गद्यांश में उल्लिखित प्राकृतिक घटक

↓
बिजली 
बादल
घास
आकाश

(2) (i)

  1. चैनसिंह ठाकुर
  2. रामबोला

(ii) 

  1. बिजली - लपकना
  2. बादल - गड़गड़ाहट

(3) इस संसार में कुछ भी अपरिवर्तनशील नहीं है। सब कुछ नश्वर और क्षणभंगुर है। परिवर्तन प्रकृति का नियम है। जो परिवर्तन को और अनित्यता को समझता है, वस्तुत: वही ज्ञानी है। निर्माण और विनाश परस्पर विरोधी होते हुए भी एक सिक्के के दो पहलुओं की तरह जुड़े रहते है। इन्हे अलग-अलग नही किया जा सकता। सदा के लिए कोई भी इस दुनिया में नहीं रह सकता है। बीज का वृक्ष बनना रूप परिवर्तन होता है यह निर्माण नहीं कहलाता। परन्तु वृक्ष को काट कर उससे अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ बनाना, निर्माण है तथा उस वृक्ष को काट कर नष्ट कर देना, या इन्धन के रूप में इसका प्रयोग करना ही विनाश कहलाता है।

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अपठित गद्यांश
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
2021-2022 (March) Set 1

संबंधित प्रश्न

निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

संस्कृति ऐसी चीज नहीं है कि जिसकी रचना दस-बीस या सौ-पचास वर्षों में की जा सकती हो। अनेक शताब्दियों तक एक समाज के लोग जिस तरह खाते-पीते, रहते-सहते, पढ़ते-लिखते, सोचते-समझते और राज-काज चलाते अथवा धर्म-कर्म करते हैं, उन सभी कार्यों से उनकी संस्कृति उत्पन्न होती है। हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें हमारी संस्कृति की झलक होती है। यहाँ तक कि हमारे उठने-बैठने, पहनने-ओढ़ने, घूमने-फिरने और रोने-हँसने में भी हमारी संस्कृति की पहचान होती है। हमारा कोई भी काम हमारी संस्कृति का पर्याय नहीं बन सकता।असल में संस्कृति जिंदगी का एक तरीका है और यह तरीका सदियों से जमा होकर उस समाज में छाया रहता है, जिसमें हम जन्म लेते हैं। इसलिए जिस समाज में हम पैदा हुए हैं, अथवा जिस समाज से मिलकर हम जी रहे हैं, उसकी संस्कृति हमारी संस्कृति है।

(1) घटक लिखिए: (2)

(2) विधानों को पढ़कर केवल सही अथवा गलत लिखिए: (2)

  1. समाज के लोगों के कार्यों से उनकी संस्कृति उत्पन होती है ______
  2. हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें हमारी संस्कृति की झलक नहीं होती ______
  3. जिस संस्कृति में हम पैदा हुए हैं उसकी संस्कृति हमारी संस्कृति है ______
  4. संस्कृति जिंदगी का तरीका नहीं है ______

(3) दी गई सूचना के अनुसार लिखिए: (2)

(4) ‘पाश्चात्य संस्कृति का बढ़ता प्रभाव’ अपने विचार लिखिए। (2)


निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए-

कुछ नहीं पूछ पाए हालदार साहब। कुछ पल चुपचाप खड़े रहे, फिर पान के पैसे चुकाकर जीप में आ बैठे और रवाना हो गए। बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-ज़िंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है। दुखी हो गए। पंद्रह दिन बाद फिर उसी कस्बे से गुज़रे। कस्बे में घुसने से पहले ही खयाल आया कि कस्बे की हृदयस्थली में सुभाष की प्रतिमा अवश्य ही प्रतिष्ठापित होगी, लेकिन सुभाष की आँखों पर चश्मा नहीं होगा। ...क्योंकि मास्टर बनाना भूल गया। ...और कैप्टन मर गया। सोचा, आज वहाँ रुकेंगे नहीं, पान भी नहीं खाएँगे, मूर्ति की तरफ़ देखेंगे भी नहीं, सीधे निकल जाएँगे। ड्राइवर से कह दिया, चौराहे पर रुकना नहीं, आज बहुत काम है, पान आगे कहीं खा लेंगे। लेकिन आदत से मजबूर आँखें चौराहा आते ही मूर्ति की तरफ़ उठ गईं। कुछ ऐसा देखा कि चीखे, रोको! जीप स्पीड में थी, ड्राइवर ने ज़ोर से ब्रेक मारे। रास्ता चलते लोग देखने लगे। जीप रुकते-न-रुकते हालदार साहब जीप से कूदकर तेज़-तेज़ कदमों से मूर्ति की तरफ़ लपके और उसके ठीक सामने जाकर अटेंशन में खड़े हो गए। मूर्ति की आँखों पर सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा रखा हुआ था, जैसा बच्चे बना लेते हैं। हालदार साहब भावुक हैं। इतनी-सी बात पर उनकी आँखें भर आईं।
  1. हालदार साहब क्या सोचकर दुखी हो गए?
    (क) नेता जी की मूर्ति की आँखों पर चश्मा न देखकर
    (ख) देशभक्तों का मज़ाक उड़ाने वाली बिकाऊ कौम को देखकर
    (ग) घर-गृहस्थी, जवानी-ज़िंदगी आदि की बीती हुई बातें सोचकर
    (घ) देश में अलग-अलग कौमों की विचारधारा में बहुत अंतर देखकर

  2. 'सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति की आँखों पर चश्मा नहीं होगा...!'  हालदार साहब ऐसा क्यों सोच रहे थे?
    (क) कैप्टन के सारे चश्मे बिक जाने के कारण
    (ख) कैप्टन के गंभीर रूप से बीमार हो जाने के कारण
    (ग) मूर्तिकार मास्टर की भूल और कैप्टन की मृत्यु के कारण
    (घ) नटखट बच्चों द्वारा चश्मा बार-बार उतार दिए जाने के कारण

  3. हालदार साहब की आदत से मजबूर आँखों ने क्या किया?
    (क) चौराहे पर आते ही पान की दुकान खोजने लगीं
    (ख) उन्होंने कैप्टन का स्मरण किया और वे नम हो गईं
    (ग) चौराहे पर आते ही स्वभावतः मूर्ति की ओर उठ गईं
    (घ) बाँस पर चश्मे लगाकर उन्हें बेचते हुए कैप्टन को खोजने लगीं

  4. हालदार साहब क्यों चीख पड़े?
    (क) पानवाले का बदला हुआ व्यवहार देखकर
    (ख) नेता जी की मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा लगा देखकर
    (ग) नेता जी की मूर्ति के पास बहुत सारे बच्चों को एकत्र देखकर
    (घ) ड्राइवर के द्वारा उनके आदेश का पालन न किए जाने के कारण

  5. सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा किस बात का प्रतीक था?
    (क) राष्ट्रीय धरोहरों को संरक्षण देने का
    (ख) हस्तकला के प्रति बढ़ रहे अनुराग का
    (ग) देशभक्तों के प्रति श्रद्धा व सम्मान का
    (घ) सरकंडे जैसी वनस्पति को संरक्षित करने का

निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

आज संपूर्ण विश्व में एक धर्म दूसरे धर्म का दुश्मन बन बैठा है। धर्म का उद्देश्य सिर्फ मानवता की रक्षा करना है। कर्म, भक्ति, ज्ञान इनके त्रिरत हैं। इनमें से किसी एक के न होने पर धर्म को सही अर्थ में परिभाषित नहीं किया जा सकता है। आज धर्म के नाम पर विभाजन, संप्रदायवाद, सामाजिक बैर आम हैं। धर्म किसी से बैर करना नहीं सिखाता। धर्म सिर्फ जोड़ता है। धर्म का आश्रय लेकर आज कुछ स्वार्थी लोग कुछ लोगों को पथश्रष्ट कर रहे हैं। हमें कबीर की उक्ति हमेशा याद रखनी चाहिए-

'कांकड़ पाथर जोड़ के मस्जिद लयी बनाय।।
ता चढ़ि मुल्ला बांग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय।।

(1) उत्तर लिखिए-

धर्म की विशेषताएँ लिखिए।     (2)

  1. ____________
  2. ____________

(2) धर्म विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए-  (2)


निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर दी गई सूचनाओं केअनुसार कृतियाँ कीजिए:

सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति के बाद शनि ग्रह की कक्षा है। शनि सौरमंडल का दूसरा बड़ा ग्रह है। यह हमारी पृथ्वी के करीब 750 गुना बड़ा है। शनि के गोले का व्यास 116 हज़ार किलोमीटर है; अर्थात्‌, पृथ्वी के व्यास से करीब नौ गुना अधिक।

सूर्य से शनिग्रह की औसत दूरी 143 करोड़ किलोमीटर है। यह ग्रह प्रति सेकंड 9.6 किलोमीटर की औसत गति से करीब 30 वर्षों में सूर्य का एक चक्कर लगाता है। अत: 90 साल का कोई बूढ़ा आदमी यदि शनि ग्रह पर पहुँचेगा, तो उस ग्रह के अनुसार उसकी उम्र होगी सिर्फ तीन साल !

हमारी पृथ्वी सूर्य से करीब 15 करोड़ किलोमीटर दूर है। तुलना में शनि ग्रह दस गुना अधिक दूर है। इसे दूरबीन के बिना कोरी आँखों से भी आकाश में पहचाना जा सकता है। पुराने ज़माने के लोगों ने इस पीले चमकीले ग्रह को पहचान लिया था। प्राचीन काल के ज्योतिषियों को सूर्य, चंद्र और काल्पनिक राहु-केतु के अलावा जिन पाँच ग्रहों का ज्ञान था उनमें शनि सबसे अधिक दूर था। 

शनि को 'शनैश्वर' भी कहते हैं। आकाश के गोल पर यह ग्रह बहुत धीमी गति से चलता दिखाई देता है, इसीलिए प्राचीन काल के लोगों ने इसे 'शनैःचर नाम' दिया था। 'शनैःचर' का अर्थ होता है - धीमी गति से चलने वाला। 

लेकिन बाद के लोंगों ने इस शनैश्चर को 'सनीचर' बनों डाला ! सनीचर का नाम लेते ही अंधविश्वासियों की रूह काँपने लगती है। फलित-ज्योतिषियों की पोथियों में इस ग्रह को इतना अशुभ माना गया हैं कि जिस राशि में इसका निवास होता है उसके आगे और पीछे की राशियों को भी यह छेड़ता है। एक बार यदि यह ग्रह किसी की राशि में पहुँच जाए तो फिर साढ़े सात साल तक उसकी खैर नहीं ! हमारी पौराणिक कथाओं के अनुसार शनि महाराज सूर्य के पुत्र हैं। भैंसा इनका वाहन है। पाश्चात्य ज्योतिष में शनि को सैटर्न कहते हैं। यूनानी आख्यानों के अनुसार सैटर्न जूपिटर के पिता हैं। रोमन लोग सैटर्न को कृषि का देवता मानते थे। हमारे देंश में शनि महाराज तेल के देवता बन गए हैं !

1. संजाल पूर्ण कीजिए।  (2)

2. निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए:  (2)

  1. आकाश
  2. कथा
  3. सूर्य
  4. आँख

3. 'सौर मंडल' इस विषय पर अपने विचार लिखिए।  (2)


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

      मधुरता सत्य का अनुपान है और मितता उसका पथ्य है। जिसे हम सम्यक वाणी कहते हैं; वह सत्य, मित और मधुर होती है और वही परिणामकारक भी होती है। समाज का हित किस बात में है, समझना कभी कठिन हो सकता है। परंतु सम्यक वाणी से ही  वह सधेगा, यह किसी भी आदमी के लिए समझना कठिन नहीं होना चाहिए।

      परंतु यही आज भारी हो रहा है। समाजहित के नाम पर कार्यकर्ताओं की वाणी दूषित हो गई हैं, अर्थात मन ही दूषित हो गया है। फिर कृति कैसे भूषित हो सकती है?

      आज लेखन व भाषण के साधन सुलभतम हो गए हैं। परंतु शायद इसी कारण सभ्य वाणी दुर्लभ हो गई है। सभ्य वाणी को खोकर सुलभ साधनों की प्राप्ति करना यानी कवि की भाषा में नेत्र बेचकर चित्र खरीदने जैसा है।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए: (2)

(2) ‘वाणी : मनुष्य को प्राप्त वरदान’ इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

            अंजुना बीच नीले पानीवाला, पथरीला बहुत ही खूबसूरत हैं। इसके एक ओर लंबी-सी पहाड़ी है, जहाँ से बीच का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है। समुद्र तक जाने के लिए थोड़ा नीचे उतरना पड़ता है। नीला पानी काले पत्थरों पर पछाड़ खाता रहता है। पानी ने काट-काटकर इन पत्थरों में कई छेद कर दिए हैं जिससे ये पत्थर कमजोर भी हो गए हैं। साथ ही समुद्र के काफी पीछे हट जाने से कई पत्थरों के बीच में पानी भर गया है। इससे वहाँ काई ने अपना घर बना लिया है। फिसलने का डर हमेशा लगा रहता है, लेकिन संघर्षों में ही जीवन है, इसलिए यहाँ घूमने का भी अपना अलग आनंद है। यहाँ युवाओं का दल तो अपनी मस्ती में डूबा रहता है, लेकिन परिवार के साथ आए पर्यटकों का ध्यान अपने बच्चों को खतरों से सावधान रहने के दिशानिर्देश देने में ही लगा रहता है। मैंने देखा कि समुद्र किनारा होते हुए भी बेनालियम बीच तथा अंजुना बीच का अपना-अपना सौंदर्य है। बेनालियम बीच रेतीला तथा उथला है। यह मछुआरों की पहली पसंद है।

(1) विशेषताएँ लिखिए: (2)

अंजुना बीच बेनालियम बीच
(i) ______ (i) ______
(ii) ______ (ii) ______

(2) निम्नलिखित विधान सही अथवा गलत पहचानकर लिखिए: (2)

  1. पानी ने काट-काटकर इन पत्थरों में कई छेद नहीं कर दिए हैं।
  2. समुद्र तक जाने के लिए थोड़ा नीचे उतरना पड़ता है।
  3. बेनालियम बीच नीले पानीवाला है।
  4. अंजुना बीच पर फिसलने का डर हमेशा लगा रहता है।

(3) ‘संघर्षों में ही जीवन है’- इस विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

          एक बार अंग्रेजी के मशहूर साहित्यसेवी डॉ. जॉनसन के पास उनका एक मित्र आया और अफसोस जाहिर करने लगा कि उसे धार्मिक ग्रंथ पढ़ने के लिए समय ही नहीं मिलता।

          “क्यों?” डॉ. जॉनसन ने फौरन पूछा।

           “आप ही देखिए, दिन-रात मिलाकर सिर्फ चौबीस घंटे होते हैं, इसमें से आठ घंटे तो सोने में निकल जाते हैं।”

          “पर यह बात सब ही के लिए लागू है।” डॉ. जॉनसन ने कहा।

          “और करीब आठ ही घंटे ऑफिस में काम करना पड़ता है।”

           “और बाकी आठ घंटे?” डॉ. जॉनसन ने पूछा।

          “इन्हीं आठ घंटों में खाना-पीना, हजामत बनाना, नहाना-धोना, ऑफिस आना-जाना, मित्रों से मिलना-जुलना, चिट्ठी-पत्री का जबाब देना, इत्यादि कितने काम रहते हैं। मैं तो बड़ा परेशान हूँ।”

          “तब तो मुझे भी अब भूखों मरना पड़ेगा।” डॉ. जॉनसन एक गहरी साँस लेकर बोले।

          “क्यों? क्यों?” उनके मित्र ने तुरंत पूछा।

          “मैं काफी खाने वाला आदमी हूँ और अन्न उपजाने के लिए दुनिया में एक चौथाई ही तो जमीन है, तीन-चौथाई तो पानी ही है और संसार में मेरे जैसे करोड़ों लोग हैं जिन्हें अपना पेट भरना पड़ता है।”

          “पर इतने लोगों के लिए फिर तो भी जमीन काफी है।”

          “काफी कहाँ है? इस एक-चौथाई जमीन में कितने पहाड़ हैं, ऊबड़-खाबड़ स्थल हैं, नदी-नाले हैं, रेगिस्तान और बंजर भूमि हैं। अब मेरा भी कैसे निभ सकेगा भगवान! मित्र महोदय बड़ी हमदर्द के साथ डॉ. जॉनसन को दिलासा देने लगे कि उन्हे परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। दुनिया में करोड़ों लोग रहते आए हैं और उन्हें सदा अन्न मिलता ही रहा है।”

(१) तालिका पूर्ण कीजिए: (२)

(२) परिच्छेद में आए हुए शब्दयुग्म के कोई भी चार उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए: (२)

  1. ______
  2. ______
  3. ______
  4. ______

(३) ‘समय अनमोल है’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)


निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए -

कोलकाता भी दूसरे बड़े शहरों की तरह एक बड़ी नदी के किनारे बसा है। गंगा से निकली एक धारा ही है हुगली नदी। लेकिन दूसरे कई नगरों की तरह कोलकाता में नदी का बहाव एकतरफा नहीं है। हुगली ज्वारी नदी है और बंगाल की खाड़ी से उसका मुहाना 140 किलोमीटर की दूरी पर ही है। हर रोज़ ज्वार के समय समुद्र नदी के पानी को वापस कोलकाता तक ठेलता है। ज्वार और भाटे के बीच जल स्तर एक ही दिन में कई फुट ऊपर-नीचे हो जाता है।

शहर के पश्चिम में बहने वाली हुगली नदी में कोलकाता अपना मैला पानी बहाकर उसे भुला नहीं सकता। नीचे बह जाने की बजाए क्या पता ज्वार के पानी के साथ अपशिष्ट पदार्थ वापस शहर लौट आएँ? शहर के कुल मैले पानी का एक छोटा-सा हिस्सा ही हुगली में बहाया जाता है, वह भी चोरी-छिपे। इसका परिणाम यह है कि कोलकाता में हुगली अधिक दूषित नहीं है। लेकिन हर बड़े शहर को अपना मैला पानी फेंकने के लिए एक नदी चाहिए। तो फिर कोलकाता का मैला कहाँ जाता है?

हुगली से उल्टी दिशा में, शहर के पूरब में बहने वाली एक छोटी-सी नदी कुल्टीगंग में। पर नदी तक पहुँचने के पहले इस मैले पानी के बड़े हिस्से का उपचार होता है। कुल्टीगंग में गिरने वाला मैला पानी उतना दूषित नहीं होता है जितना वह शहर से निकलते समय होता है। यहाँ मैले पानी की सफाई का तरीका भी दूसरे शहरों से निराला है। कोई 30,000 एकड़ में फैले तालाब और खेत कोलकाता के कुल मैले पानी का दो-तिहाई हिस्सा साफ करते हैं। यही नहीं, इससे कई हज़ार लोगों को रोज़गार मिलता है मैले पानी से मछलियाँ, सब्जियाँ और धान उगाकर।

इसका एक कारण है यहाँ का अनूठा भूगोल, जो बना है गंगा के मुहाने पर होने वाले मिट्टी और पानी के प्राकृतिक खेल से। पता नहीं कब से गंगा की बड़ी धार यहाँ से बहकर बंगाल की खाड़ी में विसर्जित होती थी। पर यह संगम केवल गंगा और बंगाल की खाड़ी भर का नहीं रहा है। छोटी-बड़ी कई नदियों की कई धाराएँ हिमालय की मिट्टी गाद या साद के रूप में लाकर यहाँ जमा करती रही हैं। कह सकते हैं कि यहाँ हिमालय और समुद्र मिलते हैं।

  1. कोलकाता में बहने वाली किन-किन नदियों का उल्लेख अनुच्छेद में हुआ है?
    1. गंगा, कुल्टीगंग, यमुना
    2. गंगा, हुगली, उल्टीगंगा
    3. गंगा, यमुना, हुगली
    4. हुगली, गंगा, कुल्टीगंग
  2. गद्यांश आधारित निम्नलिखित कथनों को पढ़कर सही विकल्प का चयन कीजिए -
    कथन 
    (क) हुगली नदी में जल-स्तर ज्वार और भाटे के अनुरूप ऊपर-नीचे होता रहता है।
    (ख) कुल्टीगंग कोलकाता के पूरब में बहती है।
    (ग) कोलकाता की अधिकतर नदियाँ उल्टी दिशा की ओर बहती हैं।
    विकल्प
    1. कथन (क) सही है।
    2. कथन (क) और (ख) सही हैं।
    3. कथन (ख) और (ग) सही हैं।
    4. कथन (ग) और (क) सही हैं।
  3. कुल्टीगंग में गिरने वाला कोलकाता का मैला पानी उतना दूषित क्यों नहीं होता?

    1. क्योंकि वह पहले हुगली नदी में जाता है।
    2. कोलकाता के लोग पानी मैला नहीं करते।
    3. नदी में गिरने से पूर्व खेतों और तालाबों से उपचारित होता है।
    4. क्योंकि कुल्टीगंग स्वयं ही गंदगी को उपचारित कर लेती है।
  4. निम्नलिखित कथन (A) और कारण (R) को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए -
    कथन (A): कोलकाता के बंगाल में बंगाल की खाड़ी में हिमालय और समुद्र मिलते हैं।
    कारण (R): यहाँ गंगा और अन्य नदियाँ मिट्टी गाद या साद इकट्ठा करती हैं।

    1. कथन (A) गलत है पर कारण (R) सही है।
    2. कथन (A) सही है पर कारण (R) गलत है।
    3. कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं।
    4. कथन (A) और कारण (R) दोनों गलत हैं।
  5. कोलकाता हुगली नदी में अपना मैला पानी क्यों नहीं बहा सकता?

    1. शहर में हुगली को पवित्र मानकर उसकी पूजा की जाती है।
    2. हुगली एक छोटी नदी है, मैला पानी बहाने लायक नहीं है।
    3. हुगली में समुद्र पानी वापस भेजता है, अपशिष्ट लौट सकता है।
    4. हुगली पश्चिम में बहती है, अपशिष्ट उस ओर लाना कठिन है।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इस पर आधारित प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:

कभी-कभी सहज से तेज़ गति में परिवर्तित होते क्रोध को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो उसके परिणाम उत्यंत घातक और पश्चाताप के भाव जगाने वाले हो सकते हैं। कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी के मनोविश्लेषक टॉम जी. स्टीवेन्स ने अपनी किताब 'ओवरकम एंगर ऐंड एग्रेसन' में स्पष्ट किया है कि क्रोध-नियंत्रण का एक प्रमुख तरीका यह है कि स्थिति को अपने नहीं, दूसरों के नज़रिए से देखें। दूसरों को उन स्थितियों पर प्रकाश डालने के लिए प्रोत्साहित करें, क्षमा करना सीखें, बीते को बिसारने की आदत विकसित करें और किसी को चोट पहुँचाने के बजाए प्रशंसा से उसका मूल्यांकन करें। याद रखें, क्रोध-नियंत्रण से आप स्वयं शक्तिशाली बनाते हैं। इससे आपकी खुशहाली और स्मृतियों का विस्तार होता है। यूनिवर्सिटी ऑफ सिनियाटी के वैज्ञानिकों ने अपनी किताब 50 साइंस ऑफ मेंटल इलनेस में इन कमज़ोरियों पर प्रकाश डालते हुए गुस्से को काबू में रखने के कारगर सूत्र दिए हैं। क्रोध-नियंत्रण से हम अपना ही नहीं, दूसरों के उजड़ते संसार को फिर से आबाद कर सकते हैं क्योंकि शांत मन सृजन में समर्थ होता है। हमारे सृजनात्मक होने से ही मानवता का हित सध सकता है। तो जब भी क्रोध आए, तो इन उपायों को आजमाएँ। जीवन में बिखरी हुई चीजों को सँवारने की ओर कदम खुद बढ़ चलेंगे।
  1. क्रोध-नियंत्रण से होने वाले लाभों के संबंध में अनुपयुक्त कथन है।
    (a) इससे व्यक्ति स्वयं को शक्तिशाली बनाता है।
    (b) इससे व्यक्ति के जीवन में खुशहाली आती है।
    (c) इससे व्यक्ति की विस्मृतियों का विस्तार होता है।
    (d) इससे व्यक्ति की रचनात्मकता में वृद्धि होती है।
  2. किस तरह का क्रोध अंततः पश्चात्ताप का कारण बनता है?
    (a) अत्यंत आवेग में किया गया क्रोध
    (b) सहज भाव से किया गया क्रोध
    (c) प्रायश्चित भाव से किया गया क्रोध
    (d) आत्मघात भाव से किया गया क्रोध
  3. मनोविश्लेषक स्टीवेन्स के अनुसार क्रोध पर काबू पाने पर सर्वोपयुक्त उपाय है।
    (a) परिस्थितियों पर दूसरों के नियंत्रण को स्वीकार करना।
    (b) परिस्थितियों पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित करना।
    (c) परिस्थितियों को अपने नज़रिए से और अच्छे से समझना।
    (d) परिस्थितियों को दूसरों के नज़रिए से जानने का प्रयास करना।
  4. क्रोध आने पर क्या करना चाहिए?
    (a) उसकी असहज अभिव्यक्ति
    (b) उसकी सहज अभिव्यक्ति
    (c) संयमित रहने का प्रयत्न
    (d) घातक परिणाम का स्मरण
  5. निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए:
    कथन (A) - क्रोध नवसृजन का संहारक है।
    कारण (R) - क्रोध अवस्था में क्षमाशीलता न्यून हो जाती है।
    (a) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
    (b) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
    (c) कथन (A) सही है तथा कारण (R) उसकी सही व्याख्या है।
    (d) कथन (A) सही है तथा कारण (R) उसकी सही व्याख्या नहीं है।

Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:

निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए:

लगभग एक सप्ताह यही क्रम चलता रहा। हर समय एक व्यक्ति उनके पास बैठा रहता। कभी माँ तो कभी मीनू, कभी रोहित तो कभी आशा। उन सबकी सेवा व ईश्वर के आशीर्वाद से पिताजी की दशा में काफी सुधार हो गया। अब वे धीरे-धीरे अपने आप बैठने भी लगे थे, और थोड़ी देर बातें भी कर लेते थे। प्रात: लगभग नौ बजे का समय था। उस समय हल्की वर्षा की बुँदें पड़ रही थी। तभी घर के बाहर एक कार आकर रुकी।
  1. 'पिताजी' को क्या हुआ था? डॉक्टर ने उन्हें क्या सलाह दी थी?      [2]
  2. कार से कौन आए थे और क्यों?     [2]
  3. बुआ जी जाते-जाते अपने भैया को क्या-क्या सलाह दे गई? क्या उपर्युक्त अवसर पर उनकी यह सलाह उचित थी? समझाइए।     [3]
  4. पिताजी द्वारा मीनू को शादी का सुझाव दिए जाने पर मीनू ने उन्हें क्या कहकर समझाया?    [3]

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