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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) १० वीं कक्षा

अंजुना बीच नीले पानीवाला, पथरीला बहुत ही खूबसूरत हैं। इसके एक ओर लंबी-सी पहाड़ी है, जहाँ से बीच का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है। (1) विशेषताएँ लिखिए: अंजुना बीच ______

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प्रश्न

निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

            अंजुना बीच नीले पानीवाला, पथरीला बहुत ही खूबसूरत हैं। इसके एक ओर लंबी-सी पहाड़ी है, जहाँ से बीच का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है। समुद्र तक जाने के लिए थोड़ा नीचे उतरना पड़ता है। नीला पानी काले पत्थरों पर पछाड़ खाता रहता है। पानी ने काट-काटकर इन पत्थरों में कई छेद कर दिए हैं जिससे ये पत्थर कमजोर भी हो गए हैं। साथ ही समुद्र के काफी पीछे हट जाने से कई पत्थरों के बीच में पानी भर गया है। इससे वहाँ काई ने अपना घर बना लिया है। फिसलने का डर हमेशा लगा रहता है, लेकिन संघर्षों में ही जीवन है, इसलिए यहाँ घूमने का भी अपना अलग आनंद है। यहाँ युवाओं का दल तो अपनी मस्ती में डूबा रहता है, लेकिन परिवार के साथ आए पर्यटकों का ध्यान अपने बच्चों को खतरों से सावधान रहने के दिशानिर्देश देने में ही लगा रहता है। मैंने देखा कि समुद्र किनारा होते हुए भी बेनालियम बीच तथा अंजुना बीच का अपना-अपना सौंदर्य है। बेनालियम बीच रेतीला तथा उथला है। यह मछुआरों की पहली पसंद है।

(1) विशेषताएँ लिखिए: (2)

अंजुना बीच बेनालियम बीच
(i) ______ (i) ______
(ii) ______ (ii) ______

(2) निम्नलिखित विधान सही अथवा गलत पहचानकर लिखिए: (2)

  1. पानी ने काट-काटकर इन पत्थरों में कई छेद नहीं कर दिए हैं।
  2. समुद्र तक जाने के लिए थोड़ा नीचे उतरना पड़ता है।
  3. बेनालियम बीच नीले पानीवाला है।
  4. अंजुना बीच पर फिसलने का डर हमेशा लगा रहता है।

(3) ‘संघर्षों में ही जीवन है’- इस विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

(1)

अंजुना बीच बेनालियम बीच
(i) पानीवाला (i) रेतीला
(ii) पथरीला (ii) उथला

(2)

  1. गलत
  2. सही
  3. गलत
  4. सही

(3) जीवन संघर्ष से बना है। संघर्ष के समय ही सारी जीवनी-शक्ति प्रकट हो उठती है। मनुष्य संघर्ष के समय जितना प्रखर, तेजस्वी और कर्मठ हो उठता है, उतना और किसी अवसर पर नहीं दिखाई देता। संघर्ष का अर्थ लड़ना-भिड़ना नहीं है। इसका अर्थ है किसी उद्देश्य के लिए भरपूर कर्म करना। जब मनुष्य पूरे मन से कर्म करता है तो उसे असीम आनंद मिलता है। उस क्षण उसकी सारी शक्तियाँ केंद्रित हो जाती हैं। वह पूरे मनोयोग से कर्म करता है। ईश्वर का विधान है कि सबको कुछ-न-कुछ करना पड़ता है। सूरज को बिना रुके अपनी धूरी पर घूमना पड़ता है। बादलों को कहीं से उठकर पूरी धरती पर बरसना पड़ता है। पशु और पक्षियों को भी भाग-दौड़कर पेट भरना पड़ता है। मनुष्य भी अपने सभी कर्म संघर्षपूर्वक करता है। वास्तव में संघर्ष में ही आनंद है। निठल्ले और बेकार आदमी को किसी प्रकार का सुख नहीं मिलता।

shaalaa.com
अपठित गद्यांश
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
2022-2023 (March) Official

संबंधित प्रश्न

निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

          जापानी और चीनी वैज्ञानिकों ने भूकंप आने के कुछ दिन पूर्व जीव-जन्तुओंकी गतिविधियों के आधार पर चेतावनी देने का प्रयत्न किया है। वास्तव में ४ फरवरी, १९७५ को चीन के हाइचेंग क्षेत्र में आए भूकंप का पूर्वानुमान चीनी वैज्ञानिकों ने भूकंप आने के कुछ दिन पूर्व से मेंढकों व साँपों के अपने बिलों से एकाएक बाहर निकल आने, मुर्गियों की बेचैनी और अपने दरबों से दूर भागने तथा कुत्तों के भाैंकने और लगातार इधर-उधर भागने के आधार पर, काफी सफलतापूर्वक किया; परंतु वही वैज्ञानिक सन् १९७६ के विध्वंसक भूकंप की पूर्वसूचना नहीं दे सके। महाराष्ट्र के भूकंप के पूर्व भी वहाँ के निवासियों ने ऐसा दावा किया है कि पालतू पशु विचित्र व्यवहार कर रहे थे। जीव-जन्तुओंके विचित्र व्यवहार के अतिरिक्त, भूकंप पूर्व मिलने वाले कुछ मुख्य संकेत, जिनपर वैज्ञानिक बिरादरी एकमत हैं।

1. उत्तर लिखिए: (2)

चीनी वैज्ञानिकों द्वारा भूकंप आने के पूर्वानुमान लगाने के आधार -

  1. ______
  2. ______

2. 'भूकंप से होने वाली हानि से बचने के उपाय' विषय पर २५ से ३० शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)


निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए-

कुछ नहीं पूछ पाए हालदार साहब। कुछ पल चुपचाप खड़े रहे, फिर पान के पैसे चुकाकर जीप में आ बैठे और रवाना हो गए। बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-ज़िंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है। दुखी हो गए। पंद्रह दिन बाद फिर उसी कस्बे से गुज़रे। कस्बे में घुसने से पहले ही खयाल आया कि कस्बे की हृदयस्थली में सुभाष की प्रतिमा अवश्य ही प्रतिष्ठापित होगी, लेकिन सुभाष की आँखों पर चश्मा नहीं होगा। ...क्योंकि मास्टर बनाना भूल गया। ...और कैप्टन मर गया। सोचा, आज वहाँ रुकेंगे नहीं, पान भी नहीं खाएँगे, मूर्ति की तरफ़ देखेंगे भी नहीं, सीधे निकल जाएँगे। ड्राइवर से कह दिया, चौराहे पर रुकना नहीं, आज बहुत काम है, पान आगे कहीं खा लेंगे। लेकिन आदत से मजबूर आँखें चौराहा आते ही मूर्ति की तरफ़ उठ गईं। कुछ ऐसा देखा कि चीखे, रोको! जीप स्पीड में थी, ड्राइवर ने ज़ोर से ब्रेक मारे। रास्ता चलते लोग देखने लगे। जीप रुकते-न-रुकते हालदार साहब जीप से कूदकर तेज़-तेज़ कदमों से मूर्ति की तरफ़ लपके और उसके ठीक सामने जाकर अटेंशन में खड़े हो गए। मूर्ति की आँखों पर सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा रखा हुआ था, जैसा बच्चे बना लेते हैं। हालदार साहब भावुक हैं। इतनी-सी बात पर उनकी आँखें भर आईं।
  1. हालदार साहब क्या सोचकर दुखी हो गए?
    (क) नेता जी की मूर्ति की आँखों पर चश्मा न देखकर
    (ख) देशभक्तों का मज़ाक उड़ाने वाली बिकाऊ कौम को देखकर
    (ग) घर-गृहस्थी, जवानी-ज़िंदगी आदि की बीती हुई बातें सोचकर
    (घ) देश में अलग-अलग कौमों की विचारधारा में बहुत अंतर देखकर

  2. 'सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति की आँखों पर चश्मा नहीं होगा...!'  हालदार साहब ऐसा क्यों सोच रहे थे?
    (क) कैप्टन के सारे चश्मे बिक जाने के कारण
    (ख) कैप्टन के गंभीर रूप से बीमार हो जाने के कारण
    (ग) मूर्तिकार मास्टर की भूल और कैप्टन की मृत्यु के कारण
    (घ) नटखट बच्चों द्वारा चश्मा बार-बार उतार दिए जाने के कारण

  3. हालदार साहब की आदत से मजबूर आँखों ने क्या किया?
    (क) चौराहे पर आते ही पान की दुकान खोजने लगीं
    (ख) उन्होंने कैप्टन का स्मरण किया और वे नम हो गईं
    (ग) चौराहे पर आते ही स्वभावतः मूर्ति की ओर उठ गईं
    (घ) बाँस पर चश्मे लगाकर उन्हें बेचते हुए कैप्टन को खोजने लगीं

  4. हालदार साहब क्यों चीख पड़े?
    (क) पानवाले का बदला हुआ व्यवहार देखकर
    (ख) नेता जी की मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा लगा देखकर
    (ग) नेता जी की मूर्ति के पास बहुत सारे बच्चों को एकत्र देखकर
    (घ) ड्राइवर के द्वारा उनके आदेश का पालन न किए जाने के कारण

  5. सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा किस बात का प्रतीक था?
    (क) राष्ट्रीय धरोहरों को संरक्षण देने का
    (ख) हस्तकला के प्रति बढ़ रहे अनुराग का
    (ग) देशभक्तों के प्रति श्रद्धा व सम्मान का
    (घ) सरकंडे जैसी वनस्पति को संरक्षित करने का

निम्नलिखित अपठित गदूयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

अब अकेला बैल किस काम का? उसका जोड़ बहुत ढूँढ़ा गया, पर न मिला। निदान यह सलाह ठहरी कि इसे बेच डालना चाहिये। गाँव में एक समझू साहु थे, वह इकका गाड़ी हाँकते थे। गाँव के गुड़, घी लाद कर मंडी ले जाते, मंडी से तेल, नमक भर लाते और गाँव में बेचते। इस बैल पर उनका मन लहराया। उन्होंने सोचा, यह बैल हाथ लगे तो दिनभर में बेखटके तीन खेप हों। आजकल तो एक ही खेप में लाले पड़े रहते हैं। बैल देखा, गाड़ी में दौड़ाया, बाल-भौंरी की पहचान करायी, मोल-तोल किया और उसे लाकर दूवार पर बाँध ही दिया। एक महीने में दाम चुकाने का वादा ठहरा। चौधरी को भी गरज थी ही, घाटे की परवाह न की।

समझू साहु ने नया बेल पाया, तो लगे उसे रगेदने। वह दिन में तीन-तीन, चार-चार खेपें करने लगे। न चारे की फिक्र थी, न पानी की, बस खेपों से काम था।

(1) कृति पूर्ण कीजिए -  (2)

(2) लिखिए -  (2)

बैल को देखकर समझू ने यह किया :

  1. ____________
  2. ____________
  3. ____________
  4. ____________

(3) 'हमारे अन्नदाता किसान' इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।  (2)


निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए।

       उपवास और संयम ये आत्महत्या के साधन नहीं हैं। भोजन का असली स्वाद उसी को मिलता है जो कुछ दिन बिना खाए भी रह सकता है। ‘त्यक्तेन भुंजीथा:’, जीवन का भोग त्याग के साथ करो, यह केवल परमार्थ का ही उपदेश नहीं है, क्योंकि संयम से भोग करने पर जीवन में जो आनंद प्राप्त होता है, वह निरा भोगी बनकर भोगने से नहीं मिल पाता ज़िंदगी की दो सूरतें हैं। एक तो यह कि आदमी बड़े-से-बड़े मकसद के लिए कोशिश करे, जगमगाती हुई जीत पर पंजा डालने के लिए हाथ बढ़ाए, और अगर असफलताएँ कदम-कदम पर जोश की रोशनी के साथ अंधियाली का जाल बुन रही हों, तब भी वह पीछे को पाँव न हटाए। दूसरी सूरत यह है कि उन गरीब आत्माओं का हमजोली बन जाए जो न तो बहुत अधिक सुख पाती हैं और न जिन्हें बहुत अधिक दुख पाने का ही संयोग है, क्योंकि वे आत्माएँ ऐसी गोधूलि में बसती हैं जहाँ न तो जीत हँसती है और न कभी हार के रोने की आवाज़ सुनाई पड़ती है। इस गोधूलि वाली दुनिया के लोग बंधे हुए घाट का पानी पीते हैं, वे ज़िंदगी के साथ जुआ नहीं खेल सकते। और कौन कहता है कि पूरी ज़िंदगी को दाँव पर लगा देने में कोई आनंद नहीं है?

       जनमत की उपेक्षा करके जीने वाला आदमी दुनिया की असली ताकत होता है और मनुष्यता को प्रकाश भी उसी आदमी से मिलता है। ज़िंदगी से, अंत में, हम उतना ही पाते हैं जितनी कि उसमे पूँजी लगाते हैं। यह पूँजी लगाना ज़िंदगी के संकटों का सामना करना है, उसके उस पन्ने को उलट कर पढ़ना है जिसके सभी अक्षर फूलों से ही नहीं, कुछ अंगारों से भी लिखे गए हैं। ज़िंदगी का भेद कुछ उसे ही मालूम है जो यह जानकार चलता है की ज़िंदगी कभी भी ख़त्म न होने वाली चीज़ है।

       अरे! ओ जीवन के साधकों! अगर किनारे की मरी सीपियों से ही तुम्हें संतोष हो जाए तो समुद्र के अंतराल में छिपे हुए मौक्तिक - कोष को कौन बाहर लाएगा? दुनिया में जितने भी मज़े बिखेरे गए हैं उनमें तुम्हारा भी हिस्सा है। वह चीज़ भी तुम्हारी हो सकती है जिसे तुम अपनी पहुँच के परे मान कर लौटे जा रहे हो। कामना का अंचल छोटा मत करो, ज़िंदगी के फल को दोनों हाथों से दबाकर निचोड़ो, रस की निर्झरी तुम्हारे बहाए भी बह सकती है।

(i) ‘त्यक्तेन भुंजीथा:’ कथन से लेखक के व्यक्तित्व की किस विशेषता का बोध होता है? (1)

(क) परिवर्जन
(ख) परिवर्तन
(ग) परावर्तन
(घ) प्रत्यावर्तन

(ii) मंज़िल पर पहुँचने का सच्चा आनंद उसे मिलता है, जिसने उसे - (1)

(क) आन की आन में प्राप्त कर लिया हो
(ख) पाने के लिए भरसक प्रयास किया हो
(ग) हाथ बढ़ा कर मिट्ठी में कर लिया हो
(घ) सच्चाई से अपने सपनों में बसा लिया हो

(iii) ‘गोधूलि’ शब्द का तात्पर्य है - (1)

(क) गोधेनु
(ख) संध्यावेला
(ग) गगन धूलि
(घ) गोद ली कन्या

(iv) ‘गोधूलि’ वाली दुनिया के लोगों से अभिप्राय है - (1)

(क) विवशता और अभाव में जीने वाले
(ख) जीवन को दाँव पर लगाने वाले
(ग) गायों के खुरों से धूलि उड़ाने वाले
(घ) क्षितिज में लालिमा फैलाने वाले

(v) जीवन में असफलताएँ मिलने पर भी साहसी मनुष्य क्या करता है? (1)

(क) बिना डरे आगे बढ़ता है क्योंकि डर के आगे जीत है
(ख) पराजय से निपटने के लिए फूँक-फूँककर कदम आगे रखता है
(ग) अपने मित्र बंधुओं से सलाह और मदद के विषय में विचार करता है
(घ) असफलता का कारण ढूँढकर पुनः आगे बढ़ने का प्रयास करता है

(vi) आप कैसे पहचानेंगे कि कोई व्यक्ति साहस की ज़िंदगी जी रहा है? (1)

(क) जनमत की परवाह करने वाला
(ख) निडर और निशंक जीने वाला
(ग) शत्रु के छक्के छुड़ाने वाला
(घ) भागीरथी प्रयत्न करने वाला

(vii) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - (1)

(I) प्रत्येक परिस्थिति का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।

(II) मनुष्य अपने दृढ़ मंतव्य व कठिन परिश्रम से सर्वोच्च प्राप्ति की ओर अग्रसर रहता है।

(III) विपत्ति सदैव समर्थ के समक्ष ही आती है, जिससे वह पार उतर सके।

उपरिलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?

(क) केवल I
(ख) केवल III
(ग) I और II
(घ) II और III

(viii) ‘ज़िंदगी को दाँव पर लगा देने’ में कोई आनंद नहीं है? लेखक इससे सिद्ध करना चाहते हैं कि ज़िंदगी - (1)

(क) रंगमंच के कलाकारों के समान व्यतीत करनी चाहिए।
(ख) में सकारात्मक परिस्थितियाँ ही आनंद प्रदान करती हैं।
(ग) में प्रतिकूलता का अनुभव जीवनोपयोगी होता है।
(घ) केवल दुखद स्थितियों का सामना करवाती है।

(ix) किन व्यक्तियों को सुख का स्वाद अधिक मिलता है? (1)

(क) जो अत्यधिक सुख प्राप्त करते हैं
(ख) जो सुख-दुख से दूर होते हैं
(ग) जो पहले दुख झेलते हैं
(घ) जो सुख को अन्य लोगों से साझा करते हैं

(x) निम्नलिखित कथन कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए। (1) 

कथन (A): ‘ज़िंदगी के फल को दोनों हाथों से दबाकर निचोड़ो, रस की निर्झरी तुम्हारे बहाए भी बह सकती है’।

कारण (R): ज़िंदगी रूपी फल का रसास्वादन करने के लिए दोनों हाथों से श्रम करना होगा।

(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(घ) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।


निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

“हम रसायनों के युग में रह रहे हैं। हमारे पर्यावरण कीं सारी वस्तुएँ और हम सब, रासायनिक यौगिकों के बने हुए हैं। हवा मिट्टी, पानी, खाना, वनस्पति और जीव-जंतु ये सब अजूबे जीवन कौ रासायनिक सच्चाई ने पैदा किए हैं। प्रकृति में सैकड़ों -हजारों रासायनिक पदार्थ हैं। रसायन न होते तो धरती पर जीवन भी नहीं होता। पानी, जो जीवन के आधार है, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बना एक रासायनिक यौगिक है। मधुर-मीठी चीनी, कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बनी है। कोयला और तेल, बीमारियों से मुक्ति दिलाने वाली औषधियाँ, एंटीबायोटिक्स, एस्प्रीन और पेनिसिलीन, अनाज साब्जियाँ फल और मेवे-सभी तो रसायन हैं।

जीवन जोखिम से भरा है, गुफामानव ने जब भी आग जलाई, उसने जल जाने का खतरा उठाया। जीवन-यापन के आधुनिक तरीकों के कुछ खतरों को कम किया है, पर कुछ खतरे अनेक गुना बढ़ गए हैं। ये खतरे नुकसान और शारीरिक चोट के रूप में हैं। हम सभी अपने दैनिक जीवन में जोखिम उठाते हैं। जैसे जब हम सड़क पार करते हैं, स्टोव जलातें हैं, कार में बैठते हैं, खेलते हैं, पालतू जानवरों को दुलारते हैं, घरेलू काम-काज करते हैं या केवल पेड़ के नीचे बैठे होते हैं, तो हम जोखिम उठा रहे होते हैं। इन जोखिमों में से कुछ तात्कालिक हैं, जैसे जलने का, गिरने का या अपने ऊपर कुछ गिर जाने का खतरा। कुछ खतरे ऐसे हैं जिनमें प्रभाव लंबे समय के बाद सामने आते हैं जैसे लंबे समय तक शोर-गुल वाले पर्यावरण में रहने वाले व्यक्तियों की श्रवणशक्ति कम हो सकती है।

क्या रसायन भी जोखिम उत्पन्न करते हैं ? स्पष्ट है कि कुछ अवश्य करते हैं। उनमें से अनेक बहुत अधिक जहरीले हैं, कुछ प्रचंड 'विस्फोट करते हैं और कुछ अन्य अचानक आग पकड़ लेते हैं, ये रसायनों के कुछ तात्कालिक 'उग्र' खतरे हैं। रसायनों में कुछ दीर्घकालीन खतरे भी होते हैं, क्योंकि कुछ रसायनों के संपर्क में अधिक समय तक रहने पर, चाहे उन रसायनों का स्तर लेशमात्र ही क्यों न हो, शरीर में बीमारियाँ पैदा हो सकती हैं।''

1. आकृति पूर्ण कीजिए:   (2)

2.  परिच्छेद में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढकर लिखिए।  (2)

  1. जीव - ______
  2. सैकड़ों - ______
  3. काम - ______
  4. मधुर - ______

3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए ।  (2)

'ध्वनि प्रदूषण' इस विषय पर अपने विचार लिखिए।


निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इस पर आधारित प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्‍प चुनकर लिखिए:

शोर से होने वाली बहरेपन की बीमारी एक गंभीर स्वास्थ्यगत समस्या है। तेज़ आवाज़ हमारी श्रवण कोशिकाओं पर बहुत दबाव डालती है, जिससे वे स्थायी रूप से चोटिल हो सकती हैं। यदि सुनने की क्षमता एकबार चली गई तो उसे पुनः पाना नामुमकिन है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की 'वर्ल्ड हीयरिंग रिपोर्ट' के मुताबिक विश्व की 1.5 अरब आबादी बहरेपन के साथ जी रही है। ध्वनि प्रदूषण दरअसल ऐसे अवांछित विद्युत चुंबकीय संकेत हैं, जो इंसान को कई रूपों में नुकसान पहुँचाते हैं। इसीलिए, शोर-प्रेरित बहरेपन पर फौरन ध्यान देने की ज़रूरत है। वैश्विक अध्ययन बताते हैं कि निर्माण कार्य, औद्योगिक कामकाज़, जहाज बनाने या मरम्त करने संबंधी काम, अग्निश्मन, नागरिक उड्डयन आदि सेवाओं में लगे श्रमिकों में शोर-प्रेरित बहरेपन का खतरा अधिक होता है। आकलन है कि 15 फीसदी नौजवान संगीत-कार्यक्रमों, खेल-आयोजनों और दैनिक कामकाज़ में होने वाले शोर से बहरेपन का शिकार होते हैं। शोर-प्रेरित बहरनेपन की समस्या विकासशील देशों में ज़्यादा है, जहाँ तीव्र औद्योगीकरण, अनौपचारिक क्षेत्र के विस्तार और सुरक्षात्मक व शोर-नियंत्रणरोधी उपायों की कमी से लोग चौतरफ़ा शोर-शराबे में दिन-बिताने को अभिशप्त हैं। हमें यह समझना ही होगा कि श्रवण-शक्ति का ह्रास न सिर्फ़ इंसान को प्रभावित करता है, बल्कि समाज पर भी नकारात्मक असर डालता है।
  1. शोर-प्रेरित बहरेपन का खतरा किस क्षेत्र से जुड़े लोगों को कम है?
    (a) जहाज-निर्माण से जुड़े लोगों को
    (b) स्वास्थ्य-सेवाओं से जुड़े लोगों को
    (c) खेल-आयोजनों से जुड़े लोगों को
    (d) संगीत-कार्यक्रमों से जुड़े लोगों को
  2. गद्यांश के संदर्भ में अनुपयुक्त कथन है -
    (a) विकासशील देशों में अनौपचारिक क्षेत्र विस्तार की समस्या नहीं है।
    (b) विकासशील देशों में शोर-निंयत्रणरोधी उपायों पर अधिक ध्यान नहीं दिया जाता है।
    (c) कुछ सेवाओं से जुडे लोग अन्य की तुलना में बहरेपन के अधिक शिकार हैं।
    (d) कुछ खास सेवाओं से जुड़े युवा भी आज बहरेपन का शिकार हो रहे हैं।
  3. विकासशील देशों के लोगों के जीवन को अभिशप्त क्यों कहा गया है?
    (a) उनका जीवन अनेक सामाजिक संकटों से घिरा है।
    (b) उनका जीवन अनेक आर्थिक संकटों से घिरा है।
    (c) वे खराब सेहत वाली विवश ज़िंदगी बसर करते हैं।
    (d) वे शोर-शराबे से भी ज़िंदगी जीने को विवश हैं।
  4. तीव्र आवाज़ का हमारे शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
    (a) तंत्रिका-कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त
    (b) श्रवण-कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त
    (c) रक्त-कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त
    (d) हृदय-कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त
  5. निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए:
    कथन (A) - वर्तमान में श्रवण शक्ति का ह्रास एक सार्वजनिक समस्या बन गई है।
    कारण (R) - आर्थिक विकास की अनियमित होड़ इस समस्या के मूल कारणों में से एक है।
    (a) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
    (b) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
    (c) कथन (A) सही है तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (d) कथन (A) सही है परंतु कारण (R) कथन (A) की गलत व्याख्या करता है।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए:-

पश्चिमी सभ्यता मुख मोड़ रही है। वह एक नया आदर्श देख रही है। अब उसकी चाल बदलने लगी है। वह कलों की पूजा को छोड़कर मनुष्यों की पूजा को अपना आदर्श बना रही है। इस आदर्श के दर्शाने वाले देवता रस्किन और टालस्टॉय आदि हैं। पाश्चात्य देशों में नया प्रभात होने वाला है। वहाँ के गंभीर विचार वाले लोग इस प्रभात का स्वागत करने के लिए उठ खड़े हुए हैं। प्रभात होने के पूर्व ही उसका अनुभव कर लेने वाले पक्षियों की तरह इन महात्माओं को इस नए प्रभात का पूर्व ज्ञान हुआ है और हो क्यों न? इंजनों के पहिए के नीचे दबकर वहाँ वालों के भाई-बहन ही नहीं, उनकी सारी जाति पिस गई, उनके जीवन के धुरे टूट गए, उनका समस्त धन घरों से निकलकर एक-दो स्थानों में एकत्र हो गया।

साधारण लोग मर रहे हैं, मज़दूरों के हाथ-पाँव फट रहे हैं, लहू बह रहा है! सर्दी से ठिठुर रहे हैं। एक तरफ दरिद्रता का अखंड राज्य है, दूसरी तरफ अमीरी का चरम दृश्य। परंतु अमीरी भी मानसिक दुखों से विमर्दित है। मशीनें बनाई तो गई थीं मनुष्यों का पेट भरने के लिए - मज़दूरों को सुख देने के लिए - परंतु वे काली-काली मशीनें ही काली बनकर उन्हीं मनुष्यों का भक्षण कर जाने के लिए मुख खोल रही हैं। प्रभात होने पर ये काली-काली बलाएँ टूर होंगी। मनुष्य के सौभाग्य का सूर्योदय होगा।

शोक का विषय यह है कि हमारे और अन्य पूर्वी देशों में लोगों को मज़दूरी से तो लेशमात्र भी प्रेम नहीं है, पर वे तैयारी कर रहे हैं पूर्वोक्त काली मशीनों का आलिंगन करने की। पश्चिम वालों के तो ये गले पड़ी हुई बहती नदी की काली कमली हो रही हैं। वे छोड़ना चाहते हैं, परंतु काली कमली उन्हें नहीं छोड़ती। देखेंगे पूर्व वाले इस कमली को छाती से लगाकर कितना आनंद अनुभव करते हैं। यदि हम में से हर आदमी अपनी दस उँगलियों की सहायता से साहसपूर्वक अच्छी तरह काम करे तो हम मशीनों की कृपा से बढ़े हुए परिश्रम वालों को वाणिज्य के जातीय संग्राम में सहज ही पछाड़ सकते हैं। सूर्य तो सदा पूर्व ही से पश्चिम की ओर जाता है। पर आओ पश्चिम से आनेवाली सभ्यता के नए प्रभात को हम पूर्व से भेजें।

इंजनों की वह मज़दूरी किस काम की जो बच्चों, स्त्रियों और कारीगरों को ही भूखा नंगा रखती है और केवल सोने, चाँदी, लोहे आदि धातुओं का ही पालन करती है। पश्चिम को विदित हो चुका है कि इनसे मनुष्य का दुख दिन पर दिन बढ़ता है।

  1. "पाश्चात्य देशों में नया प्रभात होने वाला है।" - पंक्ति में रेखांकित पद का आशय हो सकता है?     1
    1. नया प्रकाश
    2. नया विचार
    3. नया सवेरा
    4. नया प्रभास
  2. संदर्भ के अनुसार गद्यांश में 'विमर्दित' शब्द का सटीक अर्थ क्या हो सकता है?     1
    1. ठगी हुई
    2. ग्लानिपूर्ण
    3. ईर्ष्या पूर्ण
    4. पीड़ा पूर्ण
  3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए -     1 
    कथन (I): मानवीय दक्षता को महत्त्व देना चाहिए।
    कथन (II): मनुष्य तथा मानवीयता से प्रेम करना चाहिए।
    कथन (III): अपनी चाल को बदल लेना चाहिए।
    कथन (IV): मानव जीवन को आदर्श मानना चाहिए।
    गद्यांश के अनुसार कौन-सा/से कथन सही हैं?
    1. केवल कथन I सही है।
    2. केवल कथन II सही है।
    3. केवल कथन II और III सही हैं।
    4.  केवल कथन I और IV सही हैं।
  4. गद्यांश के अनुसार पूर्वी देशों की समस्या क्या है?     1
    1.  मज़दूरों के लिए अधिकारों की कमी
    2.  मज़दूरों का पूँजी पतियों द्वारा शोषण
    3. मज़दूरी को कम महत्त्व का आंकना
    4. मज़दूरी पर अमीरी का प्रभाव
  5. गद्यांश के अनुसार साधारण लोग क्यों मर रहे हैं?     1
    1. मानव श्रम से ज्यादा मशीनों को महत्त्व मिलने के कारण
    2. हाथ-पाँव फटने, खून रिसने और सर्दी के कारण
    3. कम मज़दूरी मिलने कारण हुई बीमारियों से
    4. कार्य क्षेत्रों के विषैले पर्यावरण व खाने की कमी से
  6. गद्यांश में मशीनों को 'काली मशीनें' कहना किस बात की ओर संकेत करता है?     1
    1. काला रंग शोक का प्रतीक होता है।
    2. मशीनों द्वारा जन साधारण में बेरोज़गारी बढ़ाने के कारण
    3. माँ दुर्गा के अवतार काली के जैसे भक्षण करने के कारण
    4. मशीनों से अमीरों द्वारा काले धन अर्जन करने के कारण
  7. "इंजनों के पहिए के नीचे दबकर वहाँ वालों के....." इस प्रक्रिया के क्या परिणाम हुए?     1
    1. आर्थिक संपदा का अनुचित वितरण
    2. भाई बहनों व अन्य रिश्तेदारों में दुराव
    3. समस्त जाति द्वारा कठिन परिश्रम
    4. मशीनों द्वारा मनुष्यों का संरक्षण 
  8. रस्किन और टालस्टॉय का महत्त्व है क्योंकि इन्होनें ______ ।   1
    1. पूर्वी देशों में साम्राज्यवाद के विरुद्ध आवाज़ उठाई थी।
    2. मानवीय संवेदनाओं एवं गुणों को महत्त्व दिया था।
    3. धार्मिक कट्टरता के प्रति चेतना जगाई थी।
    4. गाँधी जी इन दोनों के विचारों से अत्याधिक प्रभावित थे।
  9. मनुष्य के सौभाग्य का सूर्योदय कब होगा?     1
    1. मज़दूरों द्वारा क्रांति करने से
    2. मशीनों के हट जाने से
    3. सभी लोगों को काम मिलने से
    4. मानवीय दक्षताओं को महत्त्व मिलने से
  10. मनुष्य के दुख में निरंतर वृद्धि का क्या कारण बताया गया है?     1
    1. मशीनों पर अत्यधिक आश्रित हो जाना
    2. मानवीय दक्षता की आलोचना
    3. पूँजी पतियों द्वारा गरीबों का शोषण
    4. काली मशीनों द्वारा मनुष्यों का भक्षण

निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए:-

कारण लिखिए:

(क) विमान के प्रति लेखक का आकर्षित होना

(ख) लेखक ने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग को अपना अध्ययन क्षेत्र चुनना

पहली बार मैंने एम. आई. टी. में निकट से विमान देखा था, जहाँ विद्यार्थियों को विभिन्न सब- सिस्टम दिखाने के लिए दो विमान रखे थे। उनके प्रति मेरे मन में विशेष आकर्षण था। वे मुझे बार-बार अपनी ओर खींचते थे। मुझे वे सीमाओं से परे मनुष्य की सोचने की शक्ति की जानकारी देते थे तथा मेरे सपनों को पंख लगाते थे। मैंने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग काे अपना अध्ययन क्षेत्र चुना क्योंकि उड़ान भरने के प्रति मैं आकर्षित था। वर्षों से उड़ने की अभिलाषा मेरे मन में पलती रही। मेरा सबसे प्यारा सपना यही था कि सुदूर आकाश में ऊँची और ऊँची उड़ान भरती मशीन को हैंडल किया जाए।

‘मेरी अभिलाषा’ लगभग छह से आठ पंक्तियों में लिखिए।


Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:

निम्नलिखित अकतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए:

“परंतु मैं तो इस पक्ष में जरा भी नहीं हूँ। हमारी भारत सरकार हमारी पढ़ाई पर कितना पैसा खर्च करती है और हम चंद पैसों के कारण विदेशों में जा कर बस जाएँ? यादि सभी बुद्धिजीवी विदेशों में जाकर बस जाएँगें तो हमारे देश की उन्नति किस प्रकार संभव हो सकेगी।”
  1. वक्ता इस समय किस से मिलने आई है? वक्‍ता के यहाँ आने का कारण भी बताइए।   [2]
  2. इस समय यहाँ किस व्यक्ति के विषय में और क्या बात की जा रही है जिसे सुनकर वक्ता ने यह सब कहा था?     [2]
  3. प्रस्तुत पंक्तियों के आधार पर वक्ता के चारित्र की 'तीन' विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।    [3]
  4. विद्यार्थियों में अपने देश के बजाय विदेश में शिक्षा प्राप्त करने की बढ़ती चाह के कारण भविष्य में देश को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है? समझाकर लिखिए।     [3]

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