हिंदी
महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) १० वीं कक्षा

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों: स्वाधीन भारत में अभी तक अंग्रेजी हवाओं में कुछ लोग यह कहते मिलेंगे

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प्रश्न

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों:

स्वाधीन भारत में अभी तक अंग्रेजी हवाओं में कुछ लोग यह कहते मिलेंगे – जब तक विज्ञान और तकनीकी ग्रंथ हिंदी में न हो तब तक कैसे हिंदी में शिक्षा दी जाए। जब कि स्वामी श्रद्धानंद स्वाधीनता से भी चालीस साल पहले गुरुकुल काँगड़ी में हिंदी के माध्यम से विज्ञान जैसे गहन विषयों की शिक्षा दे रहे थे। ग्रंथ भी हिंदी में थे और पढ़ाने वाले भी हिंदी के थे। जहाँ चाह होती है वहीं राह निकलती है। एक लंबे अरसे तक अंग्रेज गुरुकुल काँगड़ी को भी राष्ट्रीय आंदोलन का अभिन्न अंग मानते रहे। इसमें कोई संदेह भी नहीं कि गुरुकुल के स्नातकों में स्वाधीनता की अजीब तड़प थी। स्वामी श्रद्धानंद जैसा राष्ट्रीय नेता जिस गुरुकुल का संस्थापक हो और हिंदी शिक्षा का माध्यम हो; वहीं राष्ट्रीयता नहीं पनपेगी तो कहाँ पनपेगी।
संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

  1. कौन हिंदी के माध्यम से विज्ञान जैसे गहन विषयों की शिक्षा दे रहे थे?
  2. स्वाधीनता से कितने साल पहले स्वामी श्रद्धानंद ने गुरुकुल काँगड़ी में हिंदी में विज्ञान की शिक्षा दी थी?
  3. गुरुकुल काँगड़ी में ग्रंथ और पढ़ाई किस भाषा में होती थी?
  4. लंबे अरसे तक अंग्रेज किसे राष्ट्रीय आंदोलन का अभिनन अंग मानते रहे?
shaalaa.com
अपठित गद्यांश
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
2023-2024 (March) Official

संबंधित प्रश्न

निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

          जापानी और चीनी वैज्ञानिकों ने भूकंप आने के कुछ दिन पूर्व जीव-जन्तुओंकी गतिविधियों के आधार पर चेतावनी देने का प्रयत्न किया है। वास्तव में ४ फरवरी, १९७५ को चीन के हाइचेंग क्षेत्र में आए भूकंप का पूर्वानुमान चीनी वैज्ञानिकों ने भूकंप आने के कुछ दिन पूर्व से मेंढकों व साँपों के अपने बिलों से एकाएक बाहर निकल आने, मुर्गियों की बेचैनी और अपने दरबों से दूर भागने तथा कुत्तों के भाैंकने और लगातार इधर-उधर भागने के आधार पर, काफी सफलतापूर्वक किया; परंतु वही वैज्ञानिक सन् १९७६ के विध्वंसक भूकंप की पूर्वसूचना नहीं दे सके। महाराष्ट्र के भूकंप के पूर्व भी वहाँ के निवासियों ने ऐसा दावा किया है कि पालतू पशु विचित्र व्यवहार कर रहे थे। जीव-जन्तुओंके विचित्र व्यवहार के अतिरिक्त, भूकंप पूर्व मिलने वाले कुछ मुख्य संकेत, जिनपर वैज्ञानिक बिरादरी एकमत हैं।

1. उत्तर लिखिए: (2)

चीनी वैज्ञानिकों द्वारा भूकंप आने के पूर्वानुमान लगाने के आधार -

  1. ______
  2. ______

2. 'भूकंप से होने वाली हानि से बचने के उपाय' विषय पर २५ से ३० शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)


निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए।

       उपवास और संयम ये आत्महत्या के साधन नहीं हैं। भोजन का असली स्वाद उसी को मिलता है जो कुछ दिन बिना खाए भी रह सकता है। ‘त्यक्तेन भुंजीथा:’, जीवन का भोग त्याग के साथ करो, यह केवल परमार्थ का ही उपदेश नहीं है, क्योंकि संयम से भोग करने पर जीवन में जो आनंद प्राप्त होता है, वह निरा भोगी बनकर भोगने से नहीं मिल पाता ज़िंदगी की दो सूरतें हैं। एक तो यह कि आदमी बड़े-से-बड़े मकसद के लिए कोशिश करे, जगमगाती हुई जीत पर पंजा डालने के लिए हाथ बढ़ाए, और अगर असफलताएँ कदम-कदम पर जोश की रोशनी के साथ अंधियाली का जाल बुन रही हों, तब भी वह पीछे को पाँव न हटाए। दूसरी सूरत यह है कि उन गरीब आत्माओं का हमजोली बन जाए जो न तो बहुत अधिक सुख पाती हैं और न जिन्हें बहुत अधिक दुख पाने का ही संयोग है, क्योंकि वे आत्माएँ ऐसी गोधूलि में बसती हैं जहाँ न तो जीत हँसती है और न कभी हार के रोने की आवाज़ सुनाई पड़ती है। इस गोधूलि वाली दुनिया के लोग बंधे हुए घाट का पानी पीते हैं, वे ज़िंदगी के साथ जुआ नहीं खेल सकते। और कौन कहता है कि पूरी ज़िंदगी को दाँव पर लगा देने में कोई आनंद नहीं है?

       जनमत की उपेक्षा करके जीने वाला आदमी दुनिया की असली ताकत होता है और मनुष्यता को प्रकाश भी उसी आदमी से मिलता है। ज़िंदगी से, अंत में, हम उतना ही पाते हैं जितनी कि उसमे पूँजी लगाते हैं। यह पूँजी लगाना ज़िंदगी के संकटों का सामना करना है, उसके उस पन्ने को उलट कर पढ़ना है जिसके सभी अक्षर फूलों से ही नहीं, कुछ अंगारों से भी लिखे गए हैं। ज़िंदगी का भेद कुछ उसे ही मालूम है जो यह जानकार चलता है की ज़िंदगी कभी भी ख़त्म न होने वाली चीज़ है।

       अरे! ओ जीवन के साधकों! अगर किनारे की मरी सीपियों से ही तुम्हें संतोष हो जाए तो समुद्र के अंतराल में छिपे हुए मौक्तिक - कोष को कौन बाहर लाएगा? दुनिया में जितने भी मज़े बिखेरे गए हैं उनमें तुम्हारा भी हिस्सा है। वह चीज़ भी तुम्हारी हो सकती है जिसे तुम अपनी पहुँच के परे मान कर लौटे जा रहे हो। कामना का अंचल छोटा मत करो, ज़िंदगी के फल को दोनों हाथों से दबाकर निचोड़ो, रस की निर्झरी तुम्हारे बहाए भी बह सकती है।

(i) ‘त्यक्तेन भुंजीथा:’ कथन से लेखक के व्यक्तित्व की किस विशेषता का बोध होता है? (1)

(क) परिवर्जन
(ख) परिवर्तन
(ग) परावर्तन
(घ) प्रत्यावर्तन

(ii) मंज़िल पर पहुँचने का सच्चा आनंद उसे मिलता है, जिसने उसे - (1)

(क) आन की आन में प्राप्त कर लिया हो
(ख) पाने के लिए भरसक प्रयास किया हो
(ग) हाथ बढ़ा कर मिट्ठी में कर लिया हो
(घ) सच्चाई से अपने सपनों में बसा लिया हो

(iii) ‘गोधूलि’ शब्द का तात्पर्य है - (1)

(क) गोधेनु
(ख) संध्यावेला
(ग) गगन धूलि
(घ) गोद ली कन्या

(iv) ‘गोधूलि’ वाली दुनिया के लोगों से अभिप्राय है - (1)

(क) विवशता और अभाव में जीने वाले
(ख) जीवन को दाँव पर लगाने वाले
(ग) गायों के खुरों से धूलि उड़ाने वाले
(घ) क्षितिज में लालिमा फैलाने वाले

(v) जीवन में असफलताएँ मिलने पर भी साहसी मनुष्य क्या करता है? (1)

(क) बिना डरे आगे बढ़ता है क्योंकि डर के आगे जीत है
(ख) पराजय से निपटने के लिए फूँक-फूँककर कदम आगे रखता है
(ग) अपने मित्र बंधुओं से सलाह और मदद के विषय में विचार करता है
(घ) असफलता का कारण ढूँढकर पुनः आगे बढ़ने का प्रयास करता है

(vi) आप कैसे पहचानेंगे कि कोई व्यक्ति साहस की ज़िंदगी जी रहा है? (1)

(क) जनमत की परवाह करने वाला
(ख) निडर और निशंक जीने वाला
(ग) शत्रु के छक्के छुड़ाने वाला
(घ) भागीरथी प्रयत्न करने वाला

(vii) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - (1)

(I) प्रत्येक परिस्थिति का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।

(II) मनुष्य अपने दृढ़ मंतव्य व कठिन परिश्रम से सर्वोच्च प्राप्ति की ओर अग्रसर रहता है।

(III) विपत्ति सदैव समर्थ के समक्ष ही आती है, जिससे वह पार उतर सके।

उपरिलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?

(क) केवल I
(ख) केवल III
(ग) I और II
(घ) II और III

(viii) ‘ज़िंदगी को दाँव पर लगा देने’ में कोई आनंद नहीं है? लेखक इससे सिद्ध करना चाहते हैं कि ज़िंदगी - (1)

(क) रंगमंच के कलाकारों के समान व्यतीत करनी चाहिए।
(ख) में सकारात्मक परिस्थितियाँ ही आनंद प्रदान करती हैं।
(ग) में प्रतिकूलता का अनुभव जीवनोपयोगी होता है।
(घ) केवल दुखद स्थितियों का सामना करवाती है।

(ix) किन व्यक्तियों को सुख का स्वाद अधिक मिलता है? (1)

(क) जो अत्यधिक सुख प्राप्त करते हैं
(ख) जो सुख-दुख से दूर होते हैं
(ग) जो पहले दुख झेलते हैं
(घ) जो सुख को अन्य लोगों से साझा करते हैं

(x) निम्नलिखित कथन कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए। (1) 

कथन (A): ‘ज़िंदगी के फल को दोनों हाथों से दबाकर निचोड़ो, रस की निर्झरी तुम्हारे बहाए भी बह सकती है’।

कारण (R): ज़िंदगी रूपी फल का रसास्वादन करने के लिए दोनों हाथों से श्रम करना होगा।

(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(घ) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

            लालच ऐसी बुरी चीज है, जिसके फेर में पड़कर मानव मानवता को भूल जाता है। व्यकित किसी भी स्तर तक गिर जाता है। लालच इंसानियत का दुश्मन है। देशभक्ति की जगह गद्दारी करना लालच के तहत ही आता है। यदि व्यक्ति लालच न करे और संतोषपूर्वक अपना जीवन व्यतीत करे तो उसे परमसुख की प्राप्ति हो सकती है। अफसोस कि आज जीवन के हर क्षेत्र में इनका बोलबाला है। पैसा ही आज ईश्वर है। मानवता आज इस लालच के बल पर कराह रही है। संतोष ही जीवन का आधार है।

            परंतु हमें यह याद रखना चाहिए कि हर लालच का परिणाम बुरा ही होता है। कहा भी गया है-

रूखी-सूखी खाय के ठंडा पानी पीव।
देख पराई चूपड़ी यह ललचावै जीव।।

(1) उत्तर लिखिए- (2)

गद्यांश के आधार पर लालच के अभिशाप

  1. ______
  2. ______

(2) संतोष ही जीवन का आधार है, अपने विचार 25 से 30 शब्द में लिखें। (2)


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

             हमेशा यह कहा जाता है कि जीवन में जितनी भी तकलीफ हो, पीड़ा हो, दुख हो, कष्ट हो, हमें बहुत धैर्यपूर्वक इन सभी का प्रतिकार करना चाहिए। दुख के समय या विपत्ति के समय हमें बहुत शांत रहकर इनको सहन करना चाहिए, क्योंकि संसार में यह धारणा बहुत साफ दिखती है कि व्यक्ति अपने मन की व्यथा को खुद संभालकर रखे, नहीं तो वह उपहास का पात्र भी बन सकता है। यदि हम अपने मन की बातों या दुख होने पर इसे समाज के साथ बाँटते हैं, तो कुछ लोग इस पर ध्यान नहीं देते, अपितु वह इन्हें एक सामान्य सी बात कहकर मजाक भी बना डालते हैं। अत: कहा भी गया है-

रहिमन निज मन की व्यथा, मन में राखो गोय।
सुनि इठलैहैं लोग सब, बाटि न लैहैं कोय।।

(1) उत्तर लिखिए- (2)

समाज में लोगों की विशेषताएँ-

  1. ______
  2. ______

(2) मन की प्रवृत्ति पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

          एक बार अंग्रेजी के मशहूर साहित्यसेवी डॉ. जॉनसन के पास उनका एक मित्र आया और अफसोस जाहिर करने लगा कि उसे धार्मिक ग्रंथ पढ़ने के लिए समय ही नहीं मिलता।

          “क्यों?” डॉ. जॉनसन ने फौरन पूछा।

           “आप ही देखिए, दिन-रात मिलाकर सिर्फ चौबीस घंटे होते हैं, इसमें से आठ घंटे तो सोने में निकल जाते हैं।”

          “पर यह बात सब ही के लिए लागू है।” डॉ. जॉनसन ने कहा।

          “और करीब आठ ही घंटे ऑफिस में काम करना पड़ता है।”

           “और बाकी आठ घंटे?” डॉ. जॉनसन ने पूछा।

          “इन्हीं आठ घंटों में खाना-पीना, हजामत बनाना, नहाना-धोना, ऑफिस आना-जाना, मित्रों से मिलना-जुलना, चिट्ठी-पत्री का जबाब देना, इत्यादि कितने काम रहते हैं। मैं तो बड़ा परेशान हूँ।”

          “तब तो मुझे भी अब भूखों मरना पड़ेगा।” डॉ. जॉनसन एक गहरी साँस लेकर बोले।

          “क्यों? क्यों?” उनके मित्र ने तुरंत पूछा।

          “मैं काफी खाने वाला आदमी हूँ और अन्न उपजाने के लिए दुनिया में एक चौथाई ही तो जमीन है, तीन-चौथाई तो पानी ही है और संसार में मेरे जैसे करोड़ों लोग हैं जिन्हें अपना पेट भरना पड़ता है।”

          “पर इतने लोगों के लिए फिर तो भी जमीन काफी है।”

          “काफी कहाँ है? इस एक-चौथाई जमीन में कितने पहाड़ हैं, ऊबड़-खाबड़ स्थल हैं, नदी-नाले हैं, रेगिस्तान और बंजर भूमि हैं। अब मेरा भी कैसे निभ सकेगा भगवान! मित्र महोदय बड़ी हमदर्द के साथ डॉ. जॉनसन को दिलासा देने लगे कि उन्हे परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। दुनिया में करोड़ों लोग रहते आए हैं और उन्हें सदा अन्न मिलता ही रहा है।”

(१) तालिका पूर्ण कीजिए: (२)

(२) परिच्छेद में आए हुए शब्दयुग्म के कोई भी चार उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए: (२)

  1. ______
  2. ______
  3. ______
  4. ______

(३) ‘समय अनमोल है’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)


निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए।

वैज्ञानिकों का मानना है कि दुनियाभर में बढ़ते पर्यावरण संकट को कम करने में जैविक खेती एक उपचारक भूमिका निभा सकती है। गौरतलब है कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में प्राकृतिक खेती बड़े पैमाने पर अपनाई जा रही है। धीरे-धीरे दक्षिण, मध्य भारत और उत्तर भारत में भी यह किसानों में लोकप्रिय हो रही है। अब किसानों ने जैविक खेती को एक सशक्त विकल्प के रूप में अपना लिया है। गौरतलब है कि जैविक या प्राकृतिक खेती की तरफ भारतीय किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। धीरे-धीरे जैविक खेती का प्रचलन बढ़ रहा है। जैविक बीज, जैविक खाद, पानी, किसानी के यंत्रों आदि की आसानी से उपलब्धता जैविक खेती की लोकप्रियता को और अधिक बढ़ा सकती है।

प्राकृतिक खेती को लेकर अनुसंधान भी बहुत हो रहे हैं। किसान नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। इससे कृषि वैज्ञानिक भी प्राकृतिक खेती को लेकर अधिक उत्साहित हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि जैविक या प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से पर्यावरण,खाद्यान्न, भूमि, इंसान की सेहत, पानी की शुद्धता को और बेहतर बनाने में मदद मिलती है। रासायनिक खादों और कीटनाशकों के इस्तेमाल से होने वाली बीमारियों और समस्याओं की जानकारी न होने की वजह से किसान इनका प्रयोग काफी ज़्यादा करने लगे हैं। वहीं दूसरी तरफ सिक्किम में प्राकृतिक खेती से पर्यावरण को जितनी मदद मिली है उससे साफ़ हो गया है कि प्राकृतिक खेती को अपनाकर कई समस्याओं का समाधान हो सकता है।

  1. आज जैविक खेती की माँग क्यों बढ़ती जा रही है?
    1. सस्ती होने के कारण 
    2. अधिक उत्पादन के कारण
    3. स्वच्छ पर्यावरण के कारण 
    4. सरकारी मदद मिलने के कारण
  2. सही कथन का चयन कीजिए-
    1. उत्तर भारत में जैविक खेती के लिए प्रेरणा की ज़रूरत है।
    2. पूर्वोत्तर राज्यों में जैविक खेती के प्रति अधिक उत्साह है।
    3. लोगों में प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी का अभाव है।
    4. प्राकृतिक खेती के लिए विश्वविद्यालय से शिक्षित होना ज़रूरी है।
  3. जैविक खेती को किसानों की पहली पसंद बनाने के लिए क्या करना चाहिए?
    1. रासायनिक खेती निषिद्ध की जानी चाहिए।
    2. बाजार में केवल जैविक उत्पादों बिक्री होनी चाहिए।
    3. युवकों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करना चाहिए।
    4. जैविक बीज, खाद, किसानी के यंत्र आदि सुविधाएँ उपलब्ध करवानी चाहिए।
  4. वर्तमान समय में खेती के लिए; अनुसंधानों में बढ़ोतरी किसके बारे में हुई है?
    1. जैविक खेती 
    2. रासायनिक खाद
    3. नई-नई दवाइयाँ 
    4. नए बीज
  5. किसान कीटनाशकों और रासायनिक खादों का अधिक प्रयोग क्यों करने लगे हैं?
    1. सहज उपलब्धता के कारण
    2. दुष्प्रभावों की जानकारी न होने के कारण
    3. अधिक प्रचार-प्रसार के कारण
    4. सस्ती होने के कारण

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्‍प चुनकर लिखिए:

    कृषि में हरी खाद उस सहायक फ़सल को कहते हैं जिसकी खेती मुख्यतः भूमि में पोषक तत्त्वों को बढ़ाने तथा उसमें जैविक पदार्थों की पूर्ति करने के उद्देश्य से की जाती है। प्रायः इस तरह की फ़सल को हरित स्थिति में हल चलाकर मिट्टी में मिला दिया जाता है। हरी खाद से भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है और भूमि की रक्षा होती है। मृदा के लगातार उपयोग से उसमें उपस्थित पौधे की बढ़वार के लिए आवश्यक तत्त्व नष्ट होते जाते हैं। इनकी क्षतिपूर्ति के लिए और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखने के लिए हरी खाद एक उत्तम विकल्प है। बिना गले-सड़े हरे पौधे (फ़सलों अथवा उनके भाग) को जब मिट्टी की नत्रजन या जीवांश की मात्रा बढ़ाने के लिए खेत में दबाया जाता है तो इस क्रिया को हरी खाद देना कहते हैं।
हरी खाद के उपयोग से न सिर्फ़ जीवांश भूमि में उपलब्ध होता है बल्कि मृदा की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक दशा में भी सुधार होता है। वातावरण तथा भूमि प्रदूषण की समस्या को समाप्त किया जा सकता है। लागत घटने से किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर होती है, भूमि में सूक्ष्म तत्त्वों की आपूर्ति होती है साथ ही साथ मृदा की उर्वरा शक्ति भी बेहतर हो जाती है।

  1. हरी खाद का उपयोग खेतों में क्यों किया जाना चाहिए?
    (a) रासायनिक खाद की महँगी लागत से बचने के लिए।
    (b) रासायनिक खाद के ज़हर से बचने के लिए।
    (c) खेती के पारंपरिक तरीकों को बढ़ावा देने के लिए।
    (d) मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए।
  2. मिट्टी का उपजाऊपन कैसे कम हो जाता है?
    (a) रासायनिक खाद के उपयोग से।
    (b) समय पर वर्षा न होने से।
    (c) मिट्टी के निरंतर उपयोग से।
    (d) तेज़ आँधी-तूफान के आने से।
  3. 'हरी खाद देना' क्रिया कहा जाता है:
    (a) खेतों में हरे रंग की खाद का प्रयोग करने को।
    (b) खेतों में ताज़ी खाद का प्रयोग करने को।
    (c) गलने-सड़ने से पूर्व सहायक फसल को खेतों में दबाने को।
    (d) गलने-सड़ने के बाद सहायक फ़सल को खेतों में दबाने को।
  4. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
    (I) हरी खाद के उपयोग से भूमि में नमी बढ़ती है।
    (II) हरी खाद के उपयोग से भूमि की उर्वरता बढ़ती है।
    (III) हरी खाद के उपयोग से वातावरण शुद्ध होता है।
    (IV) हरी खाद के उपयोग से मिट्टी में जीवांश बढ़ते हैं।
    उपयुक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?
    (a) केवल (II)
    (b) केवल (I)  
    (c) (I), (II) और (IV)
    (d) (II), (III) और (IV)
  5. निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए, उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए:
    कथन (A) - मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखने के लिए हरी खाद एक उत्तम विकल्प है।
    कारण (B) - हरी खाद से मृदा की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक दशा में सुधार होता है और लागत घटती है।
    (a) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
    (b) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं।
    (c) कथन (A) सही है तथा कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
    (d) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं, तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:

'किसी भी राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर उसकी आत्मा है।' यह उक्ति भारत जैसे प्राचीन राष्ट्र के संदर्भ में और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है। संस्कृति राष्ट्र के जीवन मूल्यों, आदर्शों, दर्शन आदि को मानसिक धरातल पर अभिव्यक्त करने का महत्त्वपूर्ण साधन है। भारत में इसके पीछे हजारों वर्षों के आचरण, व्यवहार, अनुभव, चिंतन, मनन आदि की पूंजी लगी हुई है। कालचक्र के सैकड़ों सुखद एवं दुखद घटनाक्रमों के दौरान कसौटी पर खरे उतर कर उन्होंने अपनी सत्यता व विश्वसनीयता अनेक बार सिद्ध की है। त्याग, संयम, परहित एवं अहिंसा या जीवों पर दया आदि भारतीय संस्कृति के सर्वोच्च मूल्यों में से हैं। संस्कृति और सभ्यता दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। अपने आयु, पद और अनुभव में बड़ों के प्रति आदर भाव, श्रद्धा व सम्मान रखना ही संस्कृति की आत्मा है, उसकी पहचान है। संस्कृति और उसके आदर्श एवं मूल्य एक दिन में निर्मित नहीं होते, वें हजारों वर्षों की अनुभूतियों तथा सिद्धांतों के परिणाम होते हैं। इन आदर्शों व मूल्यों के आधार पर ही राष्ट्रीय संस्कृति निर्मित होती है। इसका निर्माण कार्य ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका आचरण, व्यावहारिक ज़िंदगी में सहज रूप से अभिव्यक्त होना अर्थात उसका अंगीभाव हो जाना, संस्कृति कहलाता है।

भारतीय संस्कृति का सर्वोच्च मूल्य त्याग है, यह मूल्य हमें पाश्चात्य संस्कृति तथा साम्यवादी संस्कृति की भोगवादी वृत्ति से दूर रखता है। इनकी इस भोगवादी संस्कृति ने आज संपूर्ण मानव जाति को विनाश के कगार पर पहुँचा दिया है और इसी प्रवृत्ति ने मनुष्य और प्रकृति के बीच एक खाई पैदा कर दी है भारतीय संस्कृति सर्वसमावेशक है, जीवमात्र में ईश्वरीय सत्ता की अनुभूति करने वाली है। भारतीय संस्कृति अपने सुखों के लिए दूसरों को नष्ट करने की बर्बरता नहीं रखती। भारतीय संस्कृति में विश्वास करने वाले लोग, राजा से भी अधिक उस संन्यासी को समादृत करते हैं, जो विश्व कल्याण के लिए संयम नियम का पालन करते हुए अपना सर्वस्वार्पण करते हैं।

(क) 'भारत में आचरण, व्यवहार, अनुभव, चिंतन और मनन आदि की पूंजी लगी हुई है' पंक्ति से आशय है?     (1)

  1. जीवन मूल्यों का महत्त्व
  2. ईश्वरीय सत्ता का योगदान
  3. राष्ट्रीय संस्कृति की चेतना
  4. त्याग का उदात्त रूप

(ख) पाश्चात्य संस्कृति तथा साम्यवादी संस्कृति की भोगवादी वृति से बचाव होता है -   (1)

  1. संयम से
  2. अहिंसा से 
  3. मूल्यों से
  4. चिंतन से

(ग) संस्कृति और सभ्यता एक दूसरे के पूरक हैं, क्योंकि ______.    (1)

  1. सभ्यता के भीतर ही संस्कृति का विकास हैं
  2. सांस्कृतिक निर्धारक तत्व ही सभ्यता को परिभाषित करते हैं
  3. सभ्यता व संस्कृति का प्रभाव एक-दूसरे पर पड़ता है
  4. सभ्यता उन्नति है और संस्कृति उदात्तता

(घ) भारतीय संस्कृति पाश्चात्य संस्कृति से किन अर्थों में भिन्न है -   (1)

  1. भोगवाद से मुक्त होने के कारण
  2. भोगवाद से युक्त होने के कारण
  3. उदारता के कारण
  4. स्वार्थ भावना के कारण

(ड) 'समादृत' शब्द का समानार्थी हो सकता है -    (1)

  1. समवयस्क
  2. सम्मानित
  3. सुसंस्कृत
  4. समावेशक

(च) मनुष्य और प्रकृति के बीच खाई पैदा करने के महत्त्वपूर्ण कारण हैं -      (1)

  1. आधुनिकता
  2. भोगवादी दृष्टिकोण
  3. प्रकृति के प्रति उदासीनता
  4. लालची स्वभाव

(छ) संस्कृति के मूल में समाहित है: इस कथन के मूलभाव हेतु निम्नलिखित कथनों को पढ़कर सही विकल्प का चयन कीजिए:  (1)

कथन -

  1. एक राष्ट्र की आत्मा
  2. जीवन मूल्यों, दर्शन का आईना
  3. पाश्चात्य जगत की भोगवादी संस्कृति
  4. आधारभूत तत्वों का अवमूल्यन

विकल्प -

  1. कथन 1 व 4 सही है।
  2. कथन 1 व 2 सही है।
  3. कथन 1, 2, 3 व 4 सही है।
  4. कथन 1 व 3 सही है।

(ज) प्रस्तुत गद्यांश के आधार पर सांस्कृतिक संरक्षण के विषय में कहा जा सकता है -    (1)

  1. सांस्कृतिक व्यवहार का संरक्षण करना
  2. सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाना
  3. संस्कृति का हस्तांतरण करना
  4. संरक्षण को व्यावहारिक रूप प्रदान करना

(झ) राष्ट्रीय संस्कृति का निर्माण होता है -    (1)

  1. ईश्वरीय सत्ता के प्रभाव से
  2. विश्व के कल्याण की ओर उन्मुख होने से
  3. आदर्शों व मूल्यों के आधार पर
  4. आर्थिक विकास की ओर अग्रसर होने से 

(ञ) भारतीय संस्कृति में राजा से अधिक संन्यासी को आदर देने का प्रबल कारण है -   (1)

  1. आत्मसंयम
  2. परोपकार
  3. त्याग की भावना
  4. जनप्रियता

‘मेरी अभिलाषा’ लगभग छह से आठ पंक्तियों में लिखिए।


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति के बाद शनि ग्रह की कक्षा है। शनि सौरमंडल का दूसरा बड़ा ग्रह है। यह हमारी पृथ्वी के करीब 750 गुना बड़ा है। शनि के गोले का व्यास 116 हज़ार किलोमीटर है; अर्थात्‌, पृथ्वी के व्यास से करीब नौ गुना अधिक।

सूर्य से शनि ग्रह की औसत दूरी 143 करोड़ किलोमीटर है। यह ग्रह प्रति सेकंड 9.6 किलोमीटर की औसत गति से करीब 30 वर्षों में सूर्य का एक चक्कर लगाता है। अत: 90 साल का कोई बूढ़ा आदमी यदि शनि ग्रह पर पहुँचेगा, तो उस ग्रह के अनुसार उसकी उम्र होगी सिर्फ तीन साल!

हमारी पृथ्वी सूर्य से करीब 15 करोड़ किलोमीटर दूर है। तुलना में शनि ग्रह दस गुना अधिक दूर है। इसे दूरबीन के बिना कोरी आँखों से भी आकाश में पहचाना जा सकता है। पुराने ज़माने के लोगों ने इस पीले चमकीले ग्रह को पहचान लिया था। प्राचीन काल के ज्योतिषियों को सूर्य, चंद्र और काल्पनिक राहु-केतु के अलावा जिन पाँच ग्रहों का ज्ञान था उनमें शनि सबसे अधिक दूर था। 

शनि को 'शनैश्वर' भी कहते हैं। आकाश के गोल पर यह ग्रह बहुत धीमी गति से चलता दिखाई देता है, इसीलिए प्राचीन काल के लोगों ने इसे 'शनैःचर नाम' दिया था। 'शनैःचर' का अर्थ होता है - धीमी गति से चलने वाला। 

  1. तालिका पूर्ण कीजिए:     [2]
    प्राचीन ज्योतिषियों को इन ग्रहों का ज्ञान था। 
     
     
     
     
  2. परिच्छेद में आए हुए शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए:    [2]
    1. शनि - ______
    2. दूरबीन - ______
    3. पृथ्वी - ______
    4. आकाश - ______
  3. 'अंतरिक्ष यात्रा' इस विषय पर ४० से ५० शब्दों में अपने विचार लिखिए।      [2]  

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