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प्रश्न
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
यह एक 'साधारण महिला' की असाधारण कहानी है, जो अपनी असाधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से प्रोत्साहन व प्रेरणा लेकर सफलता के शिखर पर पहुँची है। वहाँ अंतरिक्ष में रहते हुए सुनीता का मन बारिश में भीगने, समुद्र या झील या फिर सरोवर में तैरने को कर रहा था। दरअसल अंतरिक्ष में रहते हुए हरदम गंदगी-सी महसूस होती है। भारहीनता के कारण पसीने की बूँद त्वचा से चिपकी रहती हैं। और धीरे-धीरे इकट्ठा होकर त्वचा को छोड़ देती हैं, लेकिन किसी चीज से टकराने से पहले वे इधर - इधर तैरती सी रहती हैं। कभी-कभी सुनीता का पृथ्वी को स्पर्श करने का मन करता था। वह अपोलो के अंतरिक्ष यात्रियों के बारे में सोचने लगती थी और यह सोचती थी कि चंद्रमा पर पूरी तरह उतरने से पहलें ही पृथ्वी पर वापस आना उन्हें कितना निराशाजनक लगा होगा। रात से पृथ्वी जैसे टिमटिमाने लगती थी और जो क्षेत्र दिन में वीरान दिखाई दे रहे थे, वे चमत्कारी रूप से छोटी-छोटी बत्तियों के प्रकार से जगमगा उठते थे। ऐसे में सुनीता का जी करता था, 'समुद्र मैं डुबकी लगाने का। |
(1) कृति पूर्ण कीजिए : (2)

(2) कृति पूर्ण कीजिए : (2)

(3) परिवार से प्रोत्साहन तथा प्रेरणा का महत्त्व' विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
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उत्तर
(1)

(2)

(3) परिवार से मिलने वाला प्रोत्साहन और प्रेरणा हमें जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती है। यह हमें अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर करता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है, और हमारी सफलता की नींव रखता है। परिवार का समर्थन हमें आत्मनिर्भर बनाता है और हमें जीवन की चुनौतियों के सामने दृढ़ रहने की प्रेरणा देता है।
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संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए
| हर किसी को आत्मरक्षा करनी होगी, हर किसी को अपना कर्तव्य करना होगा । मैं किसी की सहायता की प्रत्याशा नहीं करता। मैं किसी का भी प्रत्याह नहीं करता । इस दुनिया से मदद की प्रार्थना करने का मुझे कोई अधकिार नहीं है । अतीत में जनि लोगों ने मेरी मदद की है या भविष्य में भी जो लोग मेरी मदद करेंगे, मेरे प्रति उन सबकी करुणा मौजूद है, इसका दावा कभी नहीं किया जा सकता। इसीलिए मैं सभी लोगों के प्रति चरि कृतज्ञ हूँ । तुम्हारी परिस्तिति इतनी बुरी देखकर मैं बेहद चिंतति हूँ । लेकनि यह जान लो कि-‘तुमसे भी ज्यादा दुखी लोग इस संसार में हैं । मैं तुमसे भी ज्यादा बुरी परसि्थतिि में हूँ । इंग्लैंड में सब कुछ के लिए मुझे अपनी ही जेब से खर्च करना पड़ता है । आमदनी कुछ भी नहीं है । लंदन में एक कमरे का किराया हर सप्ताह के लिए तीन पाउंड होता है । ऊपर से अन्य कई खर्च हैं । अपनी तकलीफों के लिए मैं किससे शकिायत करूँ ? यह मेरा अपना कर्मफल है, मुझे ही भुगतना होगा ।’ |
(१) कृति पूर्ण कीजिए :
१.

२.

(२) उत्तर लिखिए :
१. परिच्छेद में उल्लिखित देश - ______
२. हर किसी को करना होगा - ______
३. लेखक की तकलीफें - ______
4. हर किसी को करनी होगी - ______
(३) निर्देशानुसार हल कीजिए :
(अ) निम्नलिखित अर्थ से मेल खाने वाला शब्द उपर्युक्त परिच्छेद से ढूँढ़कर लिखिए :
१. स्वयं की रक्षा करना - ______
२. दूसरों के उपकारों को मानने वाला - ______
(ब) लिंग पहचानकर लिखिए :
१. जेब - ______
२. दावा - ______
३. साहित्य - ______
4. सेवा - ______
(४) ‘कृतज्ञता’ के संबंध में अपने विचार लिखिए ।
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
| जापानी और चीनी वैज्ञानिकों ने भूकंप आने के कुछ दिन पूर्व जीव-जन्तुओंकी गतिविधियों के आधार पर चेतावनी देने का प्रयत्न किया है। वास्तव में ४ फरवरी, १९७५ को चीन के हाइचेंग क्षेत्र में आए भूकंप का पूर्वानुमान चीनी वैज्ञानिकों ने भूकंप आने के कुछ दिन पूर्व से मेंढकों व साँपों के अपने बिलों से एकाएक बाहर निकल आने, मुर्गियों की बेचैनी और अपने दरबों से दूर भागने तथा कुत्तों के भाैंकने और लगातार इधर-उधर भागने के आधार पर, काफी सफलतापूर्वक किया; परंतु वही वैज्ञानिक सन् १९७६ के विध्वंसक भूकंप की पूर्वसूचना नहीं दे सके। महाराष्ट्र के भूकंप के पूर्व भी वहाँ के निवासियों ने ऐसा दावा किया है कि पालतू पशु विचित्र व्यवहार कर रहे थे। जीव-जन्तुओंके विचित्र व्यवहार के अतिरिक्त, भूकंप पूर्व मिलने वाले कुछ मुख्य संकेत, जिनपर वैज्ञानिक बिरादरी एकमत हैं। |
1. उत्तर लिखिए: (2)
चीनी वैज्ञानिकों द्वारा भूकंप आने के पूर्वानुमान लगाने के आधार -
- ______
- ______
2. 'भूकंप से होने वाली हानि से बचने के उपाय' विषय पर २५ से ३० शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
| संस्कृति ऐसी चीज नहीं है कि जिसकी रचना दस-बीस या सौ-पचास वर्षों में की जा सकती हो। अनेक शताब्दियों तक एक समाज के लोग जिस तरह खाते-पीते, रहते-सहते, पढ़ते-लिखते, सोचते-समझते और राज-काज चलाते अथवा धर्म-कर्म करते हैं, उन सभी कार्यों से उनकी संस्कृति उत्पन्न होती है। हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें हमारी संस्कृति की झलक होती है। यहाँ तक कि हमारे उठने-बैठने, पहनने-ओढ़ने, घूमने-फिरने और रोने-हँसने में भी हमारी संस्कृति की पहचान होती है। हमारा कोई भी काम हमारी संस्कृति का पर्याय नहीं बन सकता।असल में संस्कृति जिंदगी का एक तरीका है और यह तरीका सदियों से जमा होकर उस समाज में छाया रहता है, जिसमें हम जन्म लेते हैं। इसलिए जिस समाज में हम पैदा हुए हैं, अथवा जिस समाज से मिलकर हम जी रहे हैं, उसकी संस्कृति हमारी संस्कृति है। |
(1) घटक लिखिए: (2)

(2) विधानों को पढ़कर केवल सही अथवा गलत लिखिए: (2)
- समाज के लोगों के कार्यों से उनकी संस्कृति उत्पन होती है ______
- हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें हमारी संस्कृति की झलक नहीं होती ______
- जिस संस्कृति में हम पैदा हुए हैं उसकी संस्कृति हमारी संस्कृति है ______
- संस्कृति जिंदगी का तरीका नहीं है ______
(3) दी गई सूचना के अनुसार लिखिए: (2)

(4) ‘पाश्चात्य संस्कृति का बढ़ता प्रभाव’ अपने विचार लिखिए। (2)
निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए -
| 'घर' जैसा छोटा-सा शब्द भावात्मक दृष्टि से बहुत विशाल होता है। इस आधार पर मकान, भवन, फ़्लैट, कमरा, कोठी, बँगला आदि इसके समानार्थी बिलकुल भी नहीं लगते हैं क्योंकि इनका सामान्य संबंध दीवारों, छतों और बाहरी व आंतरिक साज-सज्जा तक सीमित होता है, जबकि घर प्यार-भरोसे और रिश्तों की मिठास से बनता है। एक आदर्श घर वही है, जिसमें प्रेम व भरोसे की दीवारें, आपसी तालमेल की छतें, रिश्तों की मधुरता के खिले-खिले रंग, स्नेह, सम्मान व संवेदनाओं की सज्जा हो। घर में भावात्मकता है, वह भावात्मकता, जो संबंधों को महकाकर परिवार को जोड़े रखती है। यह बात हमें अच्छी तरह याद रखनी चाहिए कि जब रिश्ते महकते हैं, तो घर महकता है, प्यार अठखेलियाँ करता है, तो घर अठखेलियाँ करता है, रिश्तों का उल्लास घर का उल्लास होता है, इसलिए रिश्ते हैं, तो घर है और रिश्तों के बीच बहता प्रेम घर की नींव है। यह नींव जितनी मज़बूत होगी, घर उतना ही मज़बूत होगा। न जाने क्यों, आज का मनुष्य संवेदनाओं से दूर होता जा रहा है, उसके मन की कोमलता, कठोरता में बदल रही है; दिन-रात कार्य में व्यस्त रहने और धनोपार्जन की अति तीव्र लालसा से उसके अंदर मशीनियत बढ़ रही है, इसलिए उसके लिए घर के मायने बदल रहे हैं; उसकी अहमियत बदल रही है, इसी कारण आज परिवार में आपसी कलह, द्वंद्व आदि बढ़ रहे हैं। आज की पीढ़ी प्राइवेसी (वैयक्तिकता) के नाम पर एकाकीपन में सुख खोज रही है। उसकी सोच 'मेरा कमरा, मेरी दुनिया' तक सिमट गई है। एक छत के नीचे रहते हुए भी हम एकाकी होते जा रहे हैं। काश, सब घर की अहमियत समझें और अपना अहं हटाकर घर को घर बनाए रखने का प्रयास करें। |
(1) भावात्मक दृष्टी से घर जैसे छोटे-से शब्द की 'विशालता' में निहित हैं-
कथन पढ़कर सही विकल्प का चयन कीजिए -
कथन -
- प्रेम, विश्वास, नातों का माधुर्य व संवेदनाएँ
- आकर्षक बनावट, सुंदर लोग, वैभव व संपन्नता
- सुंदर रंग संयोजन, आंतरिक सजावट एवं हरियाली
- स्नेह, सम्मान, सरसता, संवेदनाएँ, संपन्नता व साज-सज्जा
विकल्प -
(क) कथन i सही है।
(ख) कथन i व ii सही है।
(ग) कथन ii व iii सही हैं।
(घ) कथन iii व iv सही हैं।
(2) सामान्य रूप में मकान, भवन, फ़्लैट, कमरा, कोठी आदि शब्दों का संबंध किससे होता है?
(क) हृदय की भावनाओं से
(ख) वैभव और समृद्धि से
(ग) स्थानीय सुविधाओं से
(घ) बनावट व सजावट से
(3) आज की पीढ़ी को सुख किसमें दिखाई दे रहा है?
(क) निजी जीवन व एकांतिकता में
(खं) पारिवारिक भावात्मक संबंधों में
(ग) बिना मेहनत सब कुछ मिल जाने में
(घ) धन कमाने के लिए जी तोड़ मेहनत करने में
(4) गद्यांश में प्रेम को घर का क्या बताया गया है?
(क) आभूषण
(ख) आधार
(ग) भरोसा
(घ) उल्लास
(5) कथन (A) और कारण (R) को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए-
कथन (A) - आदमी के अंदर संवेदनाओं की जगह मशीनियत बढ़ती जा रही है।
कारण (R) - व्यस्तता और अर्थोपार्जन की अति महत्वाकांक्षा ने उसे यहाँ तक पहुँचा दिया है।
(क) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत हैं।
(ग) कथन (A) सही है और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है।
(घ) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए-
| कुछ नहीं पूछ पाए हालदार साहब। कुछ पल चुपचाप खड़े रहे, फिर पान के पैसे चुकाकर जीप में आ बैठे और रवाना हो गए। बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-ज़िंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है। दुखी हो गए। पंद्रह दिन बाद फिर उसी कस्बे से गुज़रे। कस्बे में घुसने से पहले ही खयाल आया कि कस्बे की हृदयस्थली में सुभाष की प्रतिमा अवश्य ही प्रतिष्ठापित होगी, लेकिन सुभाष की आँखों पर चश्मा नहीं होगा। ...क्योंकि मास्टर बनाना भूल गया। ...और कैप्टन मर गया। सोचा, आज वहाँ रुकेंगे नहीं, पान भी नहीं खाएँगे, मूर्ति की तरफ़ देखेंगे भी नहीं, सीधे निकल जाएँगे। ड्राइवर से कह दिया, चौराहे पर रुकना नहीं, आज बहुत काम है, पान आगे कहीं खा लेंगे। लेकिन आदत से मजबूर आँखें चौराहा आते ही मूर्ति की तरफ़ उठ गईं। कुछ ऐसा देखा कि चीखे, रोको! जीप स्पीड में थी, ड्राइवर ने ज़ोर से ब्रेक मारे। रास्ता चलते लोग देखने लगे। जीप रुकते-न-रुकते हालदार साहब जीप से कूदकर तेज़-तेज़ कदमों से मूर्ति की तरफ़ लपके और उसके ठीक सामने जाकर अटेंशन में खड़े हो गए। मूर्ति की आँखों पर सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा रखा हुआ था, जैसा बच्चे बना लेते हैं। हालदार साहब भावुक हैं। इतनी-सी बात पर उनकी आँखें भर आईं। |
- हालदार साहब क्या सोचकर दुखी हो गए?
(क) नेता जी की मूर्ति की आँखों पर चश्मा न देखकर
(ख) देशभक्तों का मज़ाक उड़ाने वाली बिकाऊ कौम को देखकर
(ग) घर-गृहस्थी, जवानी-ज़िंदगी आदि की बीती हुई बातें सोचकर
(घ) देश में अलग-अलग कौमों की विचारधारा में बहुत अंतर देखकर - 'सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति की आँखों पर चश्मा नहीं होगा...!' हालदार साहब ऐसा क्यों सोच रहे थे?
(क) कैप्टन के सारे चश्मे बिक जाने के कारण
(ख) कैप्टन के गंभीर रूप से बीमार हो जाने के कारण
(ग) मूर्तिकार मास्टर की भूल और कैप्टन की मृत्यु के कारण
(घ) नटखट बच्चों द्वारा चश्मा बार-बार उतार दिए जाने के कारण - हालदार साहब की आदत से मजबूर आँखों ने क्या किया?
(क) चौराहे पर आते ही पान की दुकान खोजने लगीं
(ख) उन्होंने कैप्टन का स्मरण किया और वे नम हो गईं
(ग) चौराहे पर आते ही स्वभावतः मूर्ति की ओर उठ गईं
(घ) बाँस पर चश्मे लगाकर उन्हें बेचते हुए कैप्टन को खोजने लगीं - हालदार साहब क्यों चीख पड़े?
(क) पानवाले का बदला हुआ व्यवहार देखकर
(ख) नेता जी की मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा लगा देखकर
(ग) नेता जी की मूर्ति के पास बहुत सारे बच्चों को एकत्र देखकर
(घ) ड्राइवर के द्वारा उनके आदेश का पालन न किए जाने के कारण - सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा किस बात का प्रतीक था?
(क) राष्ट्रीय धरोहरों को संरक्षण देने का
(ख) हस्तकला के प्रति बढ़ रहे अनुराग का
(ग) देशभक्तों के प्रति श्रद्धा व सम्मान का
(घ) सरकंडे जैसी वनस्पति को संरक्षित करने का
निम्नलिखित अपठित गदूयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
अब अकेला बैल किस काम का? उसका जोड़ बहुत ढूँढ़ा गया, पर न मिला। निदान यह सलाह ठहरी कि इसे बेच डालना चाहिये। गाँव में एक समझू साहु थे, वह इकका गाड़ी हाँकते थे। गाँव के गुड़, घी लाद कर मंडी ले जाते, मंडी से तेल, नमक भर लाते और गाँव में बेचते। इस बैल पर उनका मन लहराया। उन्होंने सोचा, यह बैल हाथ लगे तो दिनभर में बेखटके तीन खेप हों। आजकल तो एक ही खेप में लाले पड़े रहते हैं। बैल देखा, गाड़ी में दौड़ाया, बाल-भौंरी की पहचान करायी, मोल-तोल किया और उसे लाकर दूवार पर बाँध ही दिया। एक महीने में दाम चुकाने का वादा ठहरा। चौधरी को भी गरज थी ही, घाटे की परवाह न की। समझू साहु ने नया बेल पाया, तो लगे उसे रगेदने। वह दिन में तीन-तीन, चार-चार खेपें करने लगे। न चारे की फिक्र थी, न पानी की, बस खेपों से काम था। |
(1) कृति पूर्ण कीजिए - (2)

(2) लिखिए - (2)
बैल को देखकर समझू ने यह किया :
- ____________
- ____________
- ____________
- ____________
(3) 'हमारे अन्नदाता किसान' इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
हमेशा यह कहा जाता है कि जीवन में जितनी भी तकलीफ हो, पीड़ा हो, दुख हो, कष्ट हो, हमें बहुत धैर्यपूर्वक इन सभी का प्रतिकार करना चाहिए। दुख के समय या विपत्ति के समय हमें बहुत शांत रहकर इनको सहन करना चाहिए, क्योंकि संसार में यह धारणा बहुत साफ दिखती है कि व्यक्ति अपने मन की व्यथा को खुद संभालकर रखे, नहीं तो वह उपहास का पात्र भी बन सकता है। यदि हम अपने मन की बातों या दुख होने पर इसे समाज के साथ बाँटते हैं, तो कुछ लोग इस पर ध्यान नहीं देते, अपितु वह इन्हें एक सामान्य सी बात कहकर मजाक भी बना डालते हैं। अत: कहा भी गया है- रहिमन निज मन की व्यथा, मन में राखो गोय। |
(1) उत्तर लिखिए- (2)
समाज में लोगों की विशेषताएँ-
- ______
- ______
(2) मन की प्रवृत्ति पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए -
|
आदमी की पहचान उसकी भाषा से होती है और भाषा संस्कार से बनती है। जिसके जैसे संस्कार होंगे, वैसी उसकी भाषा होगी। जब कोई आदमी भाषा बोलता है, तो साथ में उसके संस्कार भी बोलते हैं। यही कारण है कि भाषा शिक्षक का दायित्व बहुत गुरुतर और चुनौतीपूर्ण है। परंपरागत रूप में शिक्षक की भूमिका इन तीन कौशलों - बोलना, पढ़ना और लिखना तक सीमित कर दी गई है। केवल यांत्रिक कौशल किसी जीती-जागती भाषा का उदाहरण नहीं हो सकते हैं। सोचना और महसूस करना दो ऐसे कारक हैं, जिनमें भाषा सही आकार पाती है। इनके बिना भाषा, भाषा नहीं है, इनके बिना भाषा संस्कार नहीं बन सकती, इनके बिना भाषा युगों-युगों का लंबा सफ़र तय नहीं कर सकती, इनके बिना कोई भाषा किसी देश या समाज की धड़कन नहीं बन सकती। केवल संप्रेषण ही भाषा नहीं है। दर्द और मुस्कान के बिना कोई भाषा जीवंत नहीं हो सकती। भाषा हमारे समाज के निर्माण, विकास, अस्मिता, सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण साधन है। भाषा के बिना मनुष्य पूर्ण नहीं है। भाषा में ही हमारे भाव राज्य, संस्कार, प्रांतीयता झलकती है। इस झलक का संबंध व्यक्ति की मानवीय संवेदना और मानसिकता से भी होता है। जिस व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य और मानसिकता जिस स्तर की होगी, उसकी भाषा के शब्द और मुख्यार्थ भी उसी स्तर के होंगे। साहित्यकार ऐसी भाषा को आधार बनाते हैं, जो उनके पाठकों एवं श्रोताओं की संवेदना के साथ एकाकार करने में समर्थ हों। |
- आदमी की पहचान उसकी भाषा से होती है, क्योंकि -
(A) मनुष्य की पूर्णता भाषा द्वारा ही संभव है।
(B) व्यक्ति के मनोभाव भाषा से ही व्यक्त होते हैं।
(C) भाषा का प्रचार और विकास कोई रोक नहीं सकता।
(D) दर्द और मुस्कान के बिना भाषा जीवित नहीं हो सकती। - निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A): जब कोई आदमी बोलता है, तो साथ में उसके संस्कार भी बोलते हैं।
कारण (R): भाषा शिक्षक का दायित्व बहुत चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि उसे कौशलों का विकास करना होता है।
(A) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत है।
(B) कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
(C) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
(D) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है। - गद्यांश में साहित्यकार द्वारा किए गए कार्य का उल्लेख इनमें से कौन-से विकल्प से ज्ञात होता है -
(A) साहित्य समाज का दर्पण है।
(B) साहित्यकार साहित्य सृजन में व्यस्त रहता है।
(C) साहित्यकार सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान बनाता है।
(D) साहित्यकार जन सामान्य की अस्मिता का परिचायक होता है। - 'दर्द और मुसकान के बिना भाषा जीवंत नहीं हो सकती।' लेखक द्वारा ऐसा कथन दर्शाता है -
(A) यथार्थ की समझ
(B) सामाजिक समरसता
(C) साहित्य-प्रेम
(D) भाषा कौशल - भाषा तब सही आकार पाती है, जब -
(A) मनुष्य निरंतर उसका अभ्यास करता रहता है।
(B) भाषा को सरकारी समर्थन भी प्राप्त होता है।
(C) भाषा सामाजिक संस्थाओं से प्रोत्साहन प्राप्त करती है।
(D) भाषायी कौशलों के साथ मनुष्य सोचता और महसूस भी करता है।
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए:-
कारण लिखिए:
(क) विमान के प्रति लेखक का आकर्षित होना
(ख) लेखक ने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग को अपना अध्ययन क्षेत्र चुनना
| पहली बार मैंने एम. आई. टी. में निकट से विमान देखा था, जहाँ विद्यार्थियों को विभिन्न सब- सिस्टम दिखाने के लिए दो विमान रखे थे। उनके प्रति मेरे मन में विशेष आकर्षण था। वे मुझे बार-बार अपनी ओर खींचते थे। मुझे वे सीमाओं से परे मनुष्य की सोचने की शक्ति की जानकारी देते थे तथा मेरे सपनों को पंख लगाते थे। मैंने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग काे अपना अध्ययन क्षेत्र चुना क्योंकि उड़ान भरने के प्रति मैं आकर्षित था। वर्षों से उड़ने की अभिलाषा मेरे मन में पलती रही। मेरा सबसे प्यारा सपना यही था कि सुदूर आकाश में ऊँची और ऊँची उड़ान भरती मशीन को हैंडल किया जाए। |
‘मेरी अभिलाषा’ लगभग छह से आठ पंक्तियों में लिखिए।
