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प्रश्न
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
यह एक 'साधारण महिला' की असाधारण कहानी है, जो अपनी असाधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से प्रोत्साहन व प्रेरणा लेकर सफलता के शिखर पर पहुँची है। वहाँ अंतरिक्ष में रहते हुए सुनीता का मन बारिश में भीगने, समुद्र या झील या फिर सरोवर में तैरने को कर रहा था। दरअसल अंतरिक्ष में रहते हुए हरदम गंदगी-सी महसूस होती है। भारहीनता के कारण पसीने की बूँद त्वचा से चिपकी रहती हैं। और धीरे-धीरे इकट्ठा होकर त्वचा को छोड़ देती हैं, लेकिन किसी चीज से टकराने से पहले वे इधर - इधर तैरती सी रहती हैं। कभी-कभी सुनीता का पृथ्वी को स्पर्श करने का मन करता था। वह अपोलो के अंतरिक्ष यात्रियों के बारे में सोचने लगती थी और यह सोचती थी कि चंद्रमा पर पूरी तरह उतरने से पहलें ही पृथ्वी पर वापस आना उन्हें कितना निराशाजनक लगा होगा। रात से पृथ्वी जैसे टिमटिमाने लगती थी और जो क्षेत्र दिन में वीरान दिखाई दे रहे थे, वे चमत्कारी रूप से छोटी-छोटी बत्तियों के प्रकार से जगमगा उठते थे। ऐसे में सुनीता का जी करता था, 'समुद्र मैं डुबकी लगाने का। |
(1) कृति पूर्ण कीजिए : (2)

(2) कृति पूर्ण कीजिए : (2)

(3) परिवार से प्रोत्साहन तथा प्रेरणा का महत्त्व' विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
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उत्तर
(1)

(2)

(3) परिवार से मिलने वाला प्रोत्साहन और प्रेरणा हमें जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती है। यह हमें अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर करता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है, और हमारी सफलता की नींव रखता है। परिवार का समर्थन हमें आत्मनिर्भर बनाता है और हमें जीवन की चुनौतियों के सामने दृढ़ रहने की प्रेरणा देता है।
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संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
आने वाली महिला की तबीयत थोड़ी खराब थी और पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उनका इलाज होना था। चूँकि वह मेरी बुआ जी को जानते थे और बुआ जी के छोटे भाई का परिवार पटना में था इसलिए ये तो सोचने की बात नहीं थी कि वह कहाँ रहेंगे। वह बिना किसी पूर्व सूचना के हमारे घर पहुँच गए थे। उनकी ट्रेन तो शाम को थी, लेकिन ट्रेन के टाइम से न चलने का बुरा कौन मानता है। ट्रेन पाँच घंटे लेट पहुँची थी और हमारे वह मेहमान बिना खाए-पिए आधी रात में हमारे घर पहुँच गए थे। फटाफट खाना बना। सोने का जुगाड़ हुआ। वे कोई सप्ताह भर हमारे घर रहे। हम खूब घूल-मिल गए। हम रोज ठहाके लगाते, साथ खाते और पूरी मस्ती करते। ऐसा लग रहा था, मानो हम सदियों से एक-दूसरे को जानते हों। बुआ जी ने तिल की मिठाई भेजी थी। दिल्ली में उसे गजक कहते हैं, हमारे यहाँ सब तिलकुंट कहते थे। हम सबने तिल और गुड़ की उस मिठाई को खूब मजे लेकर खाया। हमारी बुआ जी सारे संसार का ख्याल रखती थीं और भाई-भतीजों में तो उनकी आत्मा ही बसती थी। उन्होंने अपने परिचित भेज दिए, हमने उन्हें रिश्तेदार बना लिया। |
(1) कृति पूर्ण कीजिए: (2)
(i)

(ii)

(2) उत्तर लिखिए: (2)
- बुआ जी की आत्मा बसती थी - .....................
- आने वाली महिला की तबीयत थी - .....................
- बुआ जी खयाल रखती थीं - .....................
- अतिथि लेखक के घर रहे - .....................
(3) ‘संयुक्त परिवार’ इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (3)
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए-
| "एक भारत श्रेष्ठ भारत' अभियान देश के विभिन्न राज्यों में सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देता है। भारत एक अनोखा राष्ट्र है, जिसका निर्माण विविध भाषा, संस्कृति, धर्म के तानों- बानों, अहिंसा और न्याय के सिद्धान्तों पर आधारित स्वाधीनता संग्राम तथा सांस्कृतिक विकास के समृद्ध इतिहास द्वारा एकता के सूत्र में बाँधकर हुआ हैं। हम इतिहास की बात करें या वर्तमान की भारतवर्ष में कला एवं संस्कृति का अनूठा प्रदर्शन हर समय एवं हर स्थान पर हुआ है। नृत्य, संगीत, चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला इत्यादि से समृद्ध भारत की पहचान पूरे विश्व में है। भारतीय वास्तुकला एवं मूर्तिकला की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। इस कला की कहानी लगभग पॉँच हज़ार वर्ष पूर्व सिंधु घाटी की सभ्यता से आरंभ होती है। इसके दो प्रमुख नगरों ; मोहनजोदाड़ो और हड़प्पा में अच्छी सड़कें, दो मंज़िले मकान, स्नान-घर, पक्की ईंटों के प्रयोग के सबूत मिले हैं। गुजरात के लोथल नामक स्थान की खुदाई से पता चलता है कि वहाँ नावों से सामान उतारने के लिए 216 x 37 मीटर लम्बी-चौड़ी तथा 15 फीट गहरी गोदी बनी हुई थी। ये लोग मिट्टी, पत्थर, धातु, हड्डी, कॉँच आदि की मूर्तियाँ एवं खिलौने बनाने में कुशल थे। धातु से बनी एक मूर्ति में एक नारी को कमर पर हाथ रखे नृत्य मुद्रा में दर्शाया गया है। दूसरी मूर्ति पशुपतिनाथ शिव की तथा तीसरी मूर्ति दाढ़ी वाले व्यक्ति की है। ये तीनों मूर्तियाँ कला के सर्वश्रेष्ठ नमूने हैं। मूर्ति का श्रेष्ठ होना मूर्तिकार के कौशल पर निर्भर करता है। मूर्ति की प्रत्येक आवभंगिमा को दर्शाने में मूर्तिकार जी-जान लगा देता है। भारत के प्रत्येक कोने में इस प्रकार की विभिन्न कलाएँ हमारी संस्कृति में प्रतिबिंबित होती हैं। इस अतुलनीय निधि का बचाव और प्रचार-प्रसार ही एक भारत श्रेष्ठ भरत की परिकल्पना है। |
- भारत को 'अनोखा राष्ट्र' कहने से लेखक का तात्पर्य है-
(क) बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन
(ख) मूर्तिकला के सर्वश्रेष्ठ नमूने
(ग) संवेदनशील भारतीय नागरिक
(घ) विभिन्नता में एकता का प्रतीक - सिंधु घाटी की सभ्यता प्रतीक है-
(क) मूर्तिकार के कौशल का
(ख) एक भारत श्रेष्ठ भारत का
(ग) प्राचीन सुव्यवस्थित सभ्यता का
(घ) स्वाधीनता संग्राम के नायकों का - गद्यांश हमें संदेश देता है-
(क) कलाकार अपनी कला का श्रेष्ठ प्रदर्शन करता है।
(ख) भारतीय नृत्य और संगीत की कला विश्व प्रसिद्ध है।
(ग) भारतीय सभ्यता व संस्कृति का संरक्षण आवश्यक है।
(घ) स्वाधीनता संग्राम में क्रांतिकारियों का विशेष योगदान है। - गदयांश में मूर्तियों का सविस्तार वर्णन दर्शाता है-
(क) सूक्ष्म अवलोकन एवं कला-प्रेम
(ख) प्राचीन मूर्तियों की भावभंगिमा
(ग) स्थूल अवलोकन एवं कला-प्रेम
(घ) सांस्कृतिक एकता एवं सौहार्द्र| - निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पोंमें से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) भारतवर्ष में कला एवं संस्कृति का अनूठा प्रदर्शन हर समय हुआ है।
कारण (R) भारतीय वास्तुकला एवं मूर्तिकला की परंपरा अत्यंत प्राचीन है।
(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत है।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
(घ) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए-
| परिश्रम यानी मेहनत अपना जवाब आप ही है। उसका अन्य कोई जवाब न है, न हो सकता है अर्थात जिस काम के लिए परिश्रम करना आवश्यक हो, हम चाहें कि वह अन्य किसी उपाय से पूरा हो जाए, ऐसा हो पाना कतई संभव नहीं। वह तो लगातार और मन लगाकर परिश्रम करने से ही होगा। इसी कारण कहा जाता है कि 'उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मी' अर्थात उद्योग या परिश्रम करने वाले पुरुष सिंहों का ही लक्ष्मी वरण करती है। सभी प्रकार की धन-संपत्तियाँ और सफलताएँ लगातार परिश्रम से ही प्राप्त होती हैं। परिश्रम ही सफलता की कुंजी है, यह परीक्षण की कसौटी पर कसा गया सत्य है। निरंतर प्रगति और विकास की मंज़िलें तय करते हुए हमारा संसार आज जिस स्तर और स्थिति तक पहुँच पाया है, वह सब हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहने से नहीं हुआ। कई प्रकार के विचार बनाने, अनुसंधान करने, उनके अनुसार लगातार योजनाएँ बनाकर तथा कई तरह के अभावों और कठिनाइयों को सहते हुए निरंतर परिश्रम करते रहने से ही संभव हो पाया है। आज जो लोग सफलता के शिखर पर बैठकर दूसरों पर शासन कर रहे हैं, आदेश दे रहे हैं, ऐसी शक्ति और सत्ता प्राप्त करने के लिए पता नहीं किन-किन रास्तों से चलकर, किस-किस तरह के कष्ट और परिश्रमपूर्ण जीवन जीने के बाद उन्हें इस स्थिति में पहुँच पाने में सफलता मिल पाई है। हाथ-पैर हिलाने पर ही कुछ पाया जा सकता है, उदास या निराश होकर बैठ जाने से नहीं। निरंतर परिश्रम व्यक्ति को चुस्त-दुरुस्त रखकर सजग तो बनाता ही है, निराशाओं से दूर रख आशा-उत्साह भरा जीवन जीना भी सिखाया करता है। |
- परीक्षण की कसौटी पर कसे जाने से तात्पर्य है-
(क) सत्य सिद्ध होना
(ख) कथन का प्रामाणिक होना
(ग) आकलन प्रक्रिया तीव्र होना
(घ) योग्यता का मूल्यांकन होना - 'हाथ-पैर हिलाने से कुछ पाया जा सकता है।' पंक्ति के माध्यम से लेखक ______ की प्रेरणा दे रहे हैं।
(क) तैराकी
(ख) परिश्रम
(ग) परीक्षण
(घ) हस्तशिल्प - निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए -
- परिश्रम व्यक्ति को सकारात्मक बनाता है।
- आज संसार पतन की ओर बढ़ रहा है।
- पुरुषार्थ के बल पर ही व्यक्ति धनार्जन करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा /कौन-से कथन सही है / हैं?
(क) केवल (i)
(ख) केवल (ii)
(ग) (i) और (iii)
(घ) (ii) और (iii)
- निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द गद्यांश में दिए गए 'अनुसंधान' शब्द के सही अर्थ को दर्शाता है-
(क) परीक्षण
(ख) योजनाएँ
(ग) अन्वेषण
(घ) सिंहमुपैति - निम्नलिखित में से किस कथन को गद्यांश की सीख के आधार पर कहा जा सकता है -
(क) अल्पज्ञान खतरनाक होता है।
(ख) गया समय वापस नहीं आता है।
(ग) मेहनत से कल्पना साकार होती है।
(घ) आवश्यकता आविष्कार की जननी है।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए।
| संस्कृति और सभ्यता ये दो शब्द हैं और इनके अर्थ भी अलग-अलग हैं। सभ्यता मनुष्य का वह गुण है, जिससे वह अपनी बाहरी तरक्की करता है। संस्कृति वह गुण है, जिससे वह अपनी भीतरी उन्नति करता है और करुणा, प्रेम एवं परोपकार सीखता है। आज रेलगाड़ी, मोटर और हवाई जहाज़, लंबी-चौड़ी सड़कें और बड़े-बड़े मकान, अच्छा भोजन और अच्छी पोशाक ये सभी सभ्यता की पहचान हैं और जिस देश में इनकी जितनी ही अधिकता है, उस देश को हम उतना ही सभ्य मानते हैं। मगर संस्कृति इन सबसे कहीं बारीक चीज़ है। वह मोटर नहीं, मोटर बनाने की कला है। मकान नहीं, मकान बनाने की रुचि है। संस्कृति धन नहीं, गुण है। संस्कृति ठाठ-बाट नहीं, विनय और विनम्रता है। एक कहावत है कि सभ्यता वह चीज़ है जो हमारे पास है, लेकिन संस्कृति वह गुण है जो हममें छिपा हुआ है। हमारे पास घर होता है, कपड़े होते हैं, मगर ये सारी चीज़ें हमारी सभ्यता के सबूत हैं, जबकि संस्कृति इतने मोटे तौर पर दिखलाई नहीं देती, वह बहुत ही सूक्ष्म और महीन चीज़ है और वह हमारी हर पसंद, हर आदत में छिपी रहती है। मकान बनाना सभ्यता का काम है। लेकिन हम मकान का कौन-सा नक्शा पसंद करते हैं यह हमारी संस्कृति बतलाती है। आदमी के भीतर काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह और मत्सर ये छह विकार प्रकृति के दिए हुए हैं। परंतु अगर ये विकार बेरोक-टोक छोड़ दिए जाएँ तो आदमी इतना गिर जाए कि उसमें और जानवर में कोई भेद नहीं रह जाएगा। इसलिए आदमी इन विकारों पर रोक लगाता है। इन दुर्गणों पर जो आदमी जितना ज्यादा काबू कर पाता है, उसकी संस्कृति भी उतनी ही ऊँची समझी जाती है। संस्कृति का स्वभाव है कि वह आदान-प्रदान से बढ़ती है। जब दो देशों या जातियों के लोग आपस में मिलते हैं, तब उन दोनों की संस्कृतियाँ एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं। इसलिए संस्कृति की दृष्टि से वह जाति या वह देश बहुत ही धनी समझा जाता है, जिसने ज़्यादा-से-ज़्यादा देशों या जातियों की संस्कृतियों से लाभ उठाकर अपनी संस्कृति का विकास किया हो। |
(1) गद्यांश में ‘सभ्यता को बाहरी तरक्की’ बताया गया है क्योंकि यह - (1)
(क) इच्छापूर्ति में सक्षम है।
(ख) भौतिक साधनों की द्योतक है।
(ग) संस्कृति से भिन्न पहचान लिए है।
(घ) करुणा, प्रेम एवं परोपकार सिखाती है।
(2) सभ्यता और संस्कृति का मूलभूत अंतर क्रमशः है - (1)
(क) रेलगाड़ी, विनय
(ख) प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष
(ग) बाहरी तरक्की, भीतरी द्वंद्व
(घ) रिवाज़, सीख
(3) संस्कृति को ‘महीन चीज़’ कहने से लेखक सिद्ध करना चाहते हैं कि संस्कृति है - (1)
(क) अत्यंत तुच्छ
(ख) अति महत्वहीन
(ग) अत्यधिक उपयोगी
(घ) अति सर्वश्रेष्ठ
(4) निम्नलिखित वाक्यों में से सभ्यता के संदर्भ मैं कौन-सा वाक्य सही है? (1)
(क) सभ्यता मनुष्य के स्वाधीन चिंतन की गाथा है।
(ख) सभ्यता मानव के विकास का विधायक गुण है।
(ग) सभ्यता मानव को कलाकार बना देती है।
(घ) सभ्यता संस्कृति से अधिक महत्वपूर्ण है।
(5) संस्कृति की प्रवृत्ति है - (1)
(क) आदाय-प्रदाय
(ख) आदाय-प्राप्ति
(ग) क्रय-विक्रय
(घ) आबाद-बर्बाद
(6) ‘मकान के लिए नक्शा पसंद करना हमारी संस्कृति का परिचायक है।’ ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि - (1)
(क) घर हमारी सभ्यता की पहचान है।
(ख) अन्य लोगों से जोड़ने का माध्यम है।
(ग) नक्शे के बिना मकान बनाना कठिन है।
(घ) हमारी सोच-समझ को उजागर करता है।
(7) अन्य संस्कृतियों का लाभ उठाकर अपनी संस्कृति का विकास करना दर्शाता है - (1)
(क) समरसता
(ख) संपूर्णता
(ग) सफलता
(घ) संपन्नता
(8) मनुष्य की मनुष्यता इसी बात में निहित है कि वह - (1)
(क) सभ्यता और संस्कृति का प्रचार-प्रसार करता रहे।
(ख) संस्कृति की समृद्धि के लिए कटिबद्धता बनाए रहे।
(ग) सभ्यता की ऊँचाई की प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील रहे।
(घ) मानसिक त्रुटियों पर नियंत्रण पाने के लिए चेष्टावान रहे।
(9) आदमी और जानवर का भेद समाप्त होना दर्शाता है - (1)
(क) सामाजिक असमानता
(ख) चारित्रिक पतन
(ग) सांप्रदायिक भेदभाव
(घ) अणुमात्रिक गिरावट
(10) सुसंस्कृत व्यक्ति से तात्पर्य है - (1)
(क) विकारग्रस्त व्यक्ति
(ख) विकासशील व्यक्ति
(ग) विचारशील व्यक्ति
(घ) विकारमुक्त व्यक्ति
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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हमेशा यह कहा जाता है कि जीवन में जितनी भी तकलीफ हो, पीड़ा हो, दुख हो, कष्ट हो, हमें बहुत धैर्यपूर्वक इन सभी का प्रतिकार करना चाहिए। दुख के समय या विपत्ति के समय हमें बहुत शांत रहकर इनको सहन करना चाहिए, क्योंकि संसार में यह धारणा बहुत साफ दिखती है कि व्यक्ति अपने मन की व्यथा को खुद संभालकर रखे, नहीं तो वह उपहास का पात्र भी बन सकता है। यदि हम अपने मन की बातों या दुख होने पर इसे समाज के साथ बाँटते हैं, तो कुछ लोग इस पर ध्यान नहीं देते, अपितु वह इन्हें एक सामान्य सी बात कहकर मजाक भी बना डालते हैं। अत: कहा भी गया है- रहिमन निज मन की व्यथा, मन में राखो गोय। |
(1) उत्तर लिखिए- (2)
समाज में लोगों की विशेषताएँ-
- ______
- ______
(2) मन की प्रवृत्ति पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।
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मधुरता सत्य का अनुपान है और मितता उसका पथ्य है। जिसे हम सम्यक वाणी कहते हैं; वह सत्य, मित और मधुर होती है और वही परिणामकारक भी होती है। समाज का हित किस बात में है, समझना कभी कठिन हो सकता है। परंतु सम्यक वाणी से ही वह सधेगा, यह किसी भी आदमी के लिए समझना कठिन नहीं होना चाहिए। परंतु यही आज भारी हो रहा है। समाजहित के नाम पर कार्यकर्ताओं की वाणी दूषित हो गई हैं, अर्थात मन ही दूषित हो गया है। फिर कृति कैसे भूषित हो सकती है? आज लेखन व भाषण के साधन सुलभतम हो गए हैं। परंतु शायद इसी कारण सभ्य वाणी दुर्लभ हो गई है। सभ्य वाणी को खोकर सुलभ साधनों की प्राप्ति करना यानी कवि की भाषा में नेत्र बेचकर चित्र खरीदने जैसा है। |
(1) संजाल पूर्ण कीजिए: (2)

(2) ‘वाणी : मनुष्य को प्राप्त वरदान’ इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए -
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साहित्य को समाज का प्रतिबिंब माना गया है अर्थात समाज का पूर्णरूप साहित्य में प्रतिबिंबित होता रहता है। अनादि काल से साहित्य अपने इसी धर्म का पूर्ण निर्वाह करता चला आ रहा है। वह समाज के विभिन्न रूपों का चित्रण कर एक ओर तो हमारे सामने समाज का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करता है और दूसरी ओर अपनी प्रखर मेधा और स्वस्थ कल्पना द्वारा समाज के विभिन्न पहलुओं का विवेचन करता हुआ यह भी बताता है कि मानव समाज की सुख-समृद्धि, सुरक्षा और विकास के लिए कौन-सा मार्ग उपादेय है? एक आलोचक के शब्दों में - "कवि वास्तव में समाज की व्यवस्था, वातावरण, धर्म-कर्म, रीति-नीति तथा सामाजिक शिष्टाचार या लोक व्यवहार से ही अपने काव्य के उपकरण चुनता है और उनका प्रतिपादन अपने आदर्शों के अनुरूप करता है।” साहित्यकार उसी समाज का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें वह जन्म लेता है। वह अपनी समस्याओं का सुलझाव, अपने आदर्श की स्थापना अपने समाज के आदर्शों के अनुरूप ही करता है। जिस सामाजिक वातावरण में उसका जन्म होता है, उसी में उसका शारीरिक, बौद्धिक और मानसिक विकास भी होता है। अत: यह कहना सर्वथा असंभव और अविवेकपूर्ण है कि साहित्यकार समाज से पूर्णतः निरपेक्ष या तटस्थ रह कर साहित्य सृजन करता है। वाल्मीकि, तुलसी, सूर, भारतेंदु , प्रेमचंद आदि का साहित्य इस बात का सर्वाधिक सशक्त प्रमाण है कि साहित्यकार समाज से घनिष्ठ रूप से संबंध रखता हुआ ही साहित्य सृजन करता है। समाज की अवहेलना करने वाला साहित्य क्षणजीवी होता है। |
- साहित्य समाज का प्रतिबिंब है क्योंकि यह -
(A) समाज की वास्तविकता का द्योतक है।
(B) समाज में लोक व्यवहार का समर्थक है।
(C) व्यक्ति की समस्याओं का निदान करता है।
(D) साहित्य को दिशा प्रदान करता है। - गद्यांश दर्शाता है -
(A) समाज एवं साहित्य का पारस्परिक संबंध
(B) समाज एवं साहित्य की अवहेलना
(C) साहित्यकार की सृजन शक्ति
(D) सामाजिक शिष्टाचार एवं लोक व्यवहार - साहित्य की क्षणभंगुरता का कारण होगा -
(A) सामाजिक अवज्ञा
(B) सामाजिक समस्या
(C) सामाजिक सद्भाव
(D) सामाजिक समरसता - वाल्मीकि, तुलसी, सूर के उदाहरण द्वारा लेखक चाहता है -
(A) भाव साम्यता
(B) प्रत्यक्ष प्रमाण
(C) सहानुभूति
(D) शिष्टाचार - निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) - कवि अपने काव्य के उपकरणों का प्रतिपादन अपने आदर्शों के अनुरूप करता है।
कारण (R) - कवि हृदय अत्यधिक संवेदनशील होता है एवं सदैव देशहित चाहता है।
(A) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत है।
(B) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
(C) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
(D) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इस पर आधारित प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:
| कभी-कभी सहज से तेज़ गति में परिवर्तित होते क्रोध को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो उसके परिणाम उत्यंत घातक और पश्चाताप के भाव जगाने वाले हो सकते हैं। कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी के मनोविश्लेषक टॉम जी. स्टीवेन्स ने अपनी किताब 'ओवरकम एंगर ऐंड एग्रेसन' में स्पष्ट किया है कि क्रोध-नियंत्रण का एक प्रमुख तरीका यह है कि स्थिति को अपने नहीं, दूसरों के नज़रिए से देखें। दूसरों को उन स्थितियों पर प्रकाश डालने के लिए प्रोत्साहित करें, क्षमा करना सीखें, बीते को बिसारने की आदत विकसित करें और किसी को चोट पहुँचाने के बजाए प्रशंसा से उसका मूल्यांकन करें। याद रखें, क्रोध-नियंत्रण से आप स्वयं शक्तिशाली बनाते हैं। इससे आपकी खुशहाली और स्मृतियों का विस्तार होता है। यूनिवर्सिटी ऑफ सिनियाटी के वैज्ञानिकों ने अपनी किताब 50 साइंस ऑफ मेंटल इलनेस में इन कमज़ोरियों पर प्रकाश डालते हुए गुस्से को काबू में रखने के कारगर सूत्र दिए हैं। क्रोध-नियंत्रण से हम अपना ही नहीं, दूसरों के उजड़ते संसार को फिर से आबाद कर सकते हैं क्योंकि शांत मन सृजन में समर्थ होता है। हमारे सृजनात्मक होने से ही मानवता का हित सध सकता है। तो जब भी क्रोध आए, तो इन उपायों को आजमाएँ। जीवन में बिखरी हुई चीजों को सँवारने की ओर कदम खुद बढ़ चलेंगे। |
- क्रोध-नियंत्रण से होने वाले लाभों के संबंध में अनुपयुक्त कथन है।
(a) इससे व्यक्ति स्वयं को शक्तिशाली बनाता है।
(b) इससे व्यक्ति के जीवन में खुशहाली आती है।
(c) इससे व्यक्ति की विस्मृतियों का विस्तार होता है।
(d) इससे व्यक्ति की रचनात्मकता में वृद्धि होती है। - किस तरह का क्रोध अंततः पश्चात्ताप का कारण बनता है?
(a) अत्यंत आवेग में किया गया क्रोध
(b) सहज भाव से किया गया क्रोध
(c) प्रायश्चित भाव से किया गया क्रोध
(d) आत्मघात भाव से किया गया क्रोध - मनोविश्लेषक स्टीवेन्स के अनुसार क्रोध पर काबू पाने पर सर्वोपयुक्त उपाय है।
(a) परिस्थितियों पर दूसरों के नियंत्रण को स्वीकार करना।
(b) परिस्थितियों पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित करना।
(c) परिस्थितियों को अपने नज़रिए से और अच्छे से समझना।
(d) परिस्थितियों को दूसरों के नज़रिए से जानने का प्रयास करना। - क्रोध आने पर क्या करना चाहिए?
(a) उसकी असहज अभिव्यक्ति
(b) उसकी सहज अभिव्यक्ति
(c) संयमित रहने का प्रयत्न
(d) घातक परिणाम का स्मरण - निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए:
कथन (A) - क्रोध नवसृजन का संहारक है।
कारण (R) - क्रोध अवस्था में क्षमाशीलता न्यून हो जाती है।
(a) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(b) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
(c) कथन (A) सही है तथा कारण (R) उसकी सही व्याख्या है।
(d) कथन (A) सही है तथा कारण (R) उसकी सही व्याख्या नहीं है।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:
|
'किसी भी राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर उसकी आत्मा है।' यह उक्ति भारत जैसे प्राचीन राष्ट्र के संदर्भ में और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है। संस्कृति राष्ट्र के जीवन मूल्यों, आदर्शों, दर्शन आदि को मानसिक धरातल पर अभिव्यक्त करने का महत्त्वपूर्ण साधन है। भारत में इसके पीछे हजारों वर्षों के आचरण, व्यवहार, अनुभव, चिंतन, मनन आदि की पूंजी लगी हुई है। कालचक्र के सैकड़ों सुखद एवं दुखद घटनाक्रमों के दौरान कसौटी पर खरे उतर कर उन्होंने अपनी सत्यता व विश्वसनीयता अनेक बार सिद्ध की है। त्याग, संयम, परहित एवं अहिंसा या जीवों पर दया आदि भारतीय संस्कृति के सर्वोच्च मूल्यों में से हैं। संस्कृति और सभ्यता दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। अपने आयु, पद और अनुभव में बड़ों के प्रति आदर भाव, श्रद्धा व सम्मान रखना ही संस्कृति की आत्मा है, उसकी पहचान है। संस्कृति और उसके आदर्श एवं मूल्य एक दिन में निर्मित नहीं होते, वें हजारों वर्षों की अनुभूतियों तथा सिद्धांतों के परिणाम होते हैं। इन आदर्शों व मूल्यों के आधार पर ही राष्ट्रीय संस्कृति निर्मित होती है। इसका निर्माण कार्य ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका आचरण, व्यावहारिक ज़िंदगी में सहज रूप से अभिव्यक्त होना अर्थात उसका अंगीभाव हो जाना, संस्कृति कहलाता है। भारतीय संस्कृति का सर्वोच्च मूल्य त्याग है, यह मूल्य हमें पाश्चात्य संस्कृति तथा साम्यवादी संस्कृति की भोगवादी वृत्ति से दूर रखता है। इनकी इस भोगवादी संस्कृति ने आज संपूर्ण मानव जाति को विनाश के कगार पर पहुँचा दिया है और इसी प्रवृत्ति ने मनुष्य और प्रकृति के बीच एक खाई पैदा कर दी है भारतीय संस्कृति सर्वसमावेशक है, जीवमात्र में ईश्वरीय सत्ता की अनुभूति करने वाली है। भारतीय संस्कृति अपने सुखों के लिए दूसरों को नष्ट करने की बर्बरता नहीं रखती। भारतीय संस्कृति में विश्वास करने वाले लोग, राजा से भी अधिक उस संन्यासी को समादृत करते हैं, जो विश्व कल्याण के लिए संयम नियम का पालन करते हुए अपना सर्वस्वार्पण करते हैं। |
(क) 'भारत में आचरण, व्यवहार, अनुभव, चिंतन और मनन आदि की पूंजी लगी हुई है' पंक्ति से आशय है? (1)
- जीवन मूल्यों का महत्त्व
- ईश्वरीय सत्ता का योगदान
- राष्ट्रीय संस्कृति की चेतना
- त्याग का उदात्त रूप
(ख) पाश्चात्य संस्कृति तथा साम्यवादी संस्कृति की भोगवादी वृति से बचाव होता है - (1)
- संयम से
- अहिंसा से
- मूल्यों से
- चिंतन से
(ग) संस्कृति और सभ्यता एक दूसरे के पूरक हैं, क्योंकि ______. (1)
- सभ्यता के भीतर ही संस्कृति का विकास हैं
- सांस्कृतिक निर्धारक तत्व ही सभ्यता को परिभाषित करते हैं
- सभ्यता व संस्कृति का प्रभाव एक-दूसरे पर पड़ता है
- सभ्यता उन्नति है और संस्कृति उदात्तता
(घ) भारतीय संस्कृति पाश्चात्य संस्कृति से किन अर्थों में भिन्न है - (1)
- भोगवाद से मुक्त होने के कारण
- भोगवाद से युक्त होने के कारण
- उदारता के कारण
- स्वार्थ भावना के कारण
(ड) 'समादृत' शब्द का समानार्थी हो सकता है - (1)
- समवयस्क
- सम्मानित
- सुसंस्कृत
- समावेशक
(च) मनुष्य और प्रकृति के बीच खाई पैदा करने के महत्त्वपूर्ण कारण हैं - (1)
- आधुनिकता
- भोगवादी दृष्टिकोण
- प्रकृति के प्रति उदासीनता
- लालची स्वभाव
(छ) संस्कृति के मूल में समाहित है: इस कथन के मूलभाव हेतु निम्नलिखित कथनों को पढ़कर सही विकल्प का चयन कीजिए: (1)
कथन -
- एक राष्ट्र की आत्मा
- जीवन मूल्यों, दर्शन का आईना
- पाश्चात्य जगत की भोगवादी संस्कृति
- आधारभूत तत्वों का अवमूल्यन
विकल्प -
- कथन 1 व 4 सही है।
- कथन 1 व 2 सही है।
- कथन 1, 2, 3 व 4 सही है।
- कथन 1 व 3 सही है।
(ज) प्रस्तुत गद्यांश के आधार पर सांस्कृतिक संरक्षण के विषय में कहा जा सकता है - (1)
- सांस्कृतिक व्यवहार का संरक्षण करना
- सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाना
- संस्कृति का हस्तांतरण करना
- संरक्षण को व्यावहारिक रूप प्रदान करना
(झ) राष्ट्रीय संस्कृति का निर्माण होता है - (1)
- ईश्वरीय सत्ता के प्रभाव से
- विश्व के कल्याण की ओर उन्मुख होने से
- आदर्शों व मूल्यों के आधार पर
- आर्थिक विकास की ओर अग्रसर होने से
(ञ) भारतीय संस्कृति में राजा से अधिक संन्यासी को आदर देने का प्रबल कारण है - (1)
- आत्मसंयम
- परोपकार
- त्याग की भावना
- जनप्रियता
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए:
| लगभग एक सप्ताह यही क्रम चलता रहा। हर समय एक व्यक्ति उनके पास बैठा रहता। कभी माँ तो कभी मीनू, कभी रोहित तो कभी आशा। उन सबकी सेवा व ईश्वर के आशीर्वाद से पिताजी की दशा में काफी सुधार हो गया। अब वे धीरे-धीरे अपने आप बैठने भी लगे थे, और थोड़ी देर बातें भी कर लेते थे। प्रात: लगभग नौ बजे का समय था। उस समय हल्की वर्षा की बुँदें पड़ रही थी। तभी घर के बाहर एक कार आकर रुकी। |
- 'पिताजी' को क्या हुआ था? डॉक्टर ने उन्हें क्या सलाह दी थी? [2]
- कार से कौन आए थे और क्यों? [2]
- बुआ जी जाते-जाते अपने भैया को क्या-क्या सलाह दे गई? क्या उपर्युक्त अवसर पर उनकी यह सलाह उचित थी? समझाइए। [3]
- पिताजी द्वारा मीनू को शादी का सुझाव दिए जाने पर मीनू ने उन्हें क्या कहकर समझाया? [3]
