मराठी

Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: निम्नलिखित अकतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए: “परंतु मैं तो इस पक्ष में जरा भी नहीं हूँ

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प्रश्न

Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:

निम्नलिखित अकतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए:

“परंतु मैं तो इस पक्ष में जरा भी नहीं हूँ। हमारी भारत सरकार हमारी पढ़ाई पर कितना पैसा खर्च करती है और हम चंद पैसों के कारण विदेशों में जा कर बस जाएँ? यादि सभी बुद्धिजीवी विदेशों में जाकर बस जाएँगें तो हमारे देश की उन्नति किस प्रकार संभव हो सकेगी।”
  1. वक्ता इस समय किस से मिलने आई है? वक्‍ता के यहाँ आने का कारण भी बताइए।   [2]
  2. इस समय यहाँ किस व्यक्ति के विषय में और क्या बात की जा रही है जिसे सुनकर वक्ता ने यह सब कहा था?     [2]
  3. प्रस्तुत पंक्तियों के आधार पर वक्ता के चारित्र की 'तीन' विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।    [3]
  4. विद्यार्थियों में अपने देश के बजाय विदेश में शिक्षा प्राप्त करने की बढ़ती चाह के कारण भविष्य में देश को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है? समझाकर लिखिए।     [3]
थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

  1. वक्ता मीनू इस समय नीलिमा से मिलने आई थी । मीनू पढ़ते-पढ़ते थक गई थी। उस समय उसकी कोई प्रतियोगी परीक्षा भी नहीं थी। इसी सोच के साथ नीलिमा से मिलने चली गई।
  2. इस समय यहाँ पर अशोक भैया के अमेरिका में पढ़ने के लिए जाने की बात की जा रही है। जिसमें पता चला कि अभी तो वे दो वर्ष के लिए ही गए हैं। पर बाद में वहीं बस जायेंगे । इसे सुनकर वक्ता ने कहा कि मैं इसके पक्ष में नहीं हूँ। भारत सरकार हमारी पढ़ाई पर कितना खर्च करती है और हम चंद पैसों के लिए विदेशों में जाकर बस जाएँ।
  3. प्रस्तुत पंक्तियों की वक्ता मीनू है। वह उपन्यास की मुख्य पात्र है। उपन्यास की पूरी कथा उसके इर्द-गिर्द ही घूमती है। मीनू एक कुशल अभिवक्ता के साथ-साथ दृढ़ इच्छाशक्ति वाली नारी है। वह देश के प्रति भी कर्तव्यनिष्ठ है। वह पढ़ी-लिखी, मेधावी व साहसी युवती है। बहुमुखी प्रतिभा की धनी मीनू एक आत्म-निर्भर प्रगतिशील युवती है।
  4. विद्यार्थियों में अपने देश के बजाय विदेश में शिक्षा प्राप्त करने की चाह निरंतर बढ़ती जा रही है जो एक चिंता का विषय है। इससे देश के सक्षम युवा शक्ति के पलायन की समस्या बढ़ रही है। सभी बुद्धिजीवी विदेशों में जाकर बस जाएंगे तो हमारे देश की उन्नति कैसे हो पायेगी? उद्योग धंधों के लिए श्रम शक्ति की कमी हो रही है तथा देश की बहुमूल्य देशी मुद्रा विदेशों में भेजी जा रही है।
shaalaa.com
अपठित गद्यांश
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
2023-2024 (March) Official

संबंधित प्रश्‍न

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

आने वाली महिला की तबीयत थोड़ी खराब थी और पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उनका इलाज होना था। चूँकि वह मेरी बुआ जी को जानते थे और बुआ जी के छोटे भाई का परिवार पटना में था इसलिए ये तो सोचने की बात नहीं थी कि वह कहाँ रहेंगे। वह बिना किसी पूर्व सूचना के हमारे घर पहुँच गए थे। उनकी ट्रेन तो शाम को थी, लेकिन ट्रेन के टाइम से न चलने का बुरा कौन मानता है।

ट्रेन पाँच घंटे लेट पहुँची थी और हमारे वह मेहमान बिना खाए-पिए आधी रात में हमारे घर पहुँच गए थे।

फटाफट खाना बना। सोने का जुगाड़ हुआ।
और सुबह उन्हें अस्पताल पहुँचाने का भी।

वे कोई सप्ताह भर हमारे घर रहे। हम खूब घूल-मिल गए। हम रोज ठहाके लगाते, साथ खाते और पूरी मस्ती करते। ऐसा लग रहा था, मानो हम सदियों से एक-दूसरे को जानते हों। बुआ जी ने तिल की मिठाई भेजी थी। दिल्‍ली में उसे गजक कहते हैं, हमारे यहाँ सब तिलकुंट कहते थे। हम सबने तिल और गुड़ की उस मिठाई को खूब मजे लेकर खाया। हमारी बुआ जी सारे संसार का ख्याल रखती थीं और भाई-भतीजों में तो उनकी आत्मा ही बसती थी।

उन्होंने अपने परिचित भेज दिए, हमने उन्हें रिश्तेदार बना लिया।
आप जानकर हैरान रह जाएँगे कि हम दुबारा कभी उन रिश्तेदारों से नहीं मिल पाए जो उस रात हमारे घर आए थे। लेकिन हम सभी भाई-बहनों के जेहन में उस रिश्ते की याद आज भी ताजा है। हम आज भी उनके आने और अपनी रजाई छिन जाने को याद कर खुश होते हैं।

(1) कृति पूर्ण कीजिए:   (2)

(i)

(ii)

(2) उत्तर लिखिए:   (2)

  1. बुआ जी की आत्मा बसती थी - .....................
  2. आने वाली महिला की तबीयत थी - .....................
  3. बुआ जी खयाल रखती थीं - .....................
  4. अतिथि लेखक के घर रहे - .....................

(3) ‘संयुक्त परिवार’ इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए।   (3)


निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए- 

"एक भारत श्रेष्ठ भारत' अभियान देश के विभिन्‍न राज्यों में सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देता है। भारत एक अनोखा राष्ट्र है, जिसका निर्माण विविध भाषा, संस्कृति, धर्म के तानों- बानों, अहिंसा और न्याय के सिद्धान्तों पर आधारित स्वाधीनता संग्राम तथा सांस्कृतिक विकास के समृद्ध इतिहास द्वारा एकता के सूत्र में बाँधकर हुआ हैं। हम इतिहास की बात करें या वर्तमान की भारतवर्ष में कला एवं संस्कृति का अनूठा प्रदर्शन हर समय एवं हर स्थान पर हुआ है। नृत्य, संगीत, चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला इत्यादि से समृद्ध भारत की पहचान पूरे विश्व में है। भारतीय वास्तुकला एवं मूर्तिकला की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। इस कला की कहानी लगभग पॉँच हज़ार वर्ष पूर्व सिंधु घाटी की सभ्यता से आरंभ होती है। इसके दो प्रमुख नगरों ; मोहनजोदाड़ो और हड़प्पा में अच्छी सड़कें, दो मंज़िले मकान, स्नान-घर, पक्की ईंटों के प्रयोग के सबूत मिले हैं। गुजरात के लोथल नामक स्थान की खुदाई से पता चलता है कि वहाँ नावों से सामान उतारने के लिए 216 x 37 मीटर लम्बी-चौड़ी तथा 15 फीट गहरी गोदी बनी हुई थी। ये लोग मिट्टी, पत्थर, धातु, हड्डी, कॉँच आदि की मूर्तियाँ एवं खिलौने बनाने में कुशल थे। धातु से बनी एक मूर्ति में एक नारी को कमर पर हाथ रखे नृत्य मुद्रा में दर्शाया गया है। दूसरी मूर्ति पशुपतिनाथ शिव की तथा तीसरी मूर्ति दाढ़ी वाले व्यक्ति की है। ये तीनों मूर्तियाँ कला के सर्वश्रेष्ठ नमूने हैं। मूर्ति का श्रेष्ठ होना मूर्तिकार के कौशल पर निर्भर करता है। मूर्ति की प्रत्येक आवभंगिमा को दर्शाने में मूर्तिकार जी-जान लगा देता है। भारत के प्रत्येक कोने में इस प्रकार की विभिन्‍न कलाएँ हमारी संस्कृति में प्रतिबिंबित होती हैं। इस अतुलनीय निधि का बचाव और प्रचार-प्रसार ही एक भारत श्रेष्ठ भरत की परिकल्पना है।
  1. भारत को 'अनोखा राष्ट्र' कहने से लेखक का तात्पर्य है-
    (क) बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन
    (ख) मूर्तिकला के सर्वश्रेष्ठ नमूने
    (ग) संवेदनशील भारतीय नागरिक
    (घ) विभिन्‍नता में एकता का प्रतीक

  2. सिंधु घाटी की सभ्यता प्रतीक है-
    (क) मूर्तिकार के कौशल का
    (ख) एक भारत श्रेष्ठ भारत का
    (ग) प्राचीन सुव्यवस्थित सभ्यता का
    (घ) स्वाधीनता संग्राम के नायकों का

  3. गद्यांश हमें संदेश देता है-
    (क) कलाकार अपनी कला का श्रेष्ठ प्रदर्शन करता है।
    (ख) भारतीय नृत्य और संगीत की कला विश्व प्रसिद्ध है।
    (ग) भारतीय सभ्यता व संस्कृति का संरक्षण आवश्यक है।
    (घ) स्वाधीनता संग्राम में क्रांतिकारियों का विशेष योगदान है।

  4. गदयांश में मूर्तियों का सविस्तार वर्णन दर्शाता है-
    (क) सूक्ष्म अवलोकन एवं कला-प्रेम
    (ख) प्राचीन मूर्तियों की भावभंगिमा
    (ग) स्थूल अवलोकन एवं कला-प्रेम
    (घ) सांस्कृतिक एकता एवं सौहार्द्र|

  5. निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पोंमें से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
    कथन (A) भारतवर्ष में कला एवं संस्कृति का अनूठा प्रदर्शन हर समय हुआ है।
    कारण (R) भारतीय वास्तुकला एवं मूर्तिकला की परंपरा अत्यंत प्राचीन है।

    (क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत है।
    (ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
    (ग) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
    (घ) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी/वस्तुपरक प्रश्नों के उत्तर सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए।

    हमारे देश में हिंदी फ़िल्मों के गीत अपने आरंभ से ही आम दर्शक के सुख-दुख के साथी रहे हैं। वर्तमान समय में हिंदी फ़िल्मों के गीतों ने आम जन के हृदय में लोकगीतों सी आत्मीय जगह बना ली है। जिस तरह से एक जमाने में लोकगीत जनमानस के सुख-दुख, आकांक्षा, उल्लास और उम्मीद को स्वर देते थे, आज फ़िल्मी गीत उसी भूमिका को निभा रहे हैं। इतना ही नहीं देश की विविधता को एकता के सूत्र में बाँधने में हिंदी फ़िल्मों का योगदान सभी स्वीकार करते हैं। हिंदी भाषा की शब्द संपदा को समृद्ध करने का जो काम राजभाषा विभाग तत्सम शब्दों की सहायता से कर रहा है वही कार्य फ़िल्मी गीत और डायलॉग लिखने वाले विविध क्षेत्रीय भाषाओं के मेल से करते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। यह गाने जन-जन के गीत इसी कारण बन सके क्योंकि इनमें राजनीति के उतार-चढ़ाव की अनुगूंजों के साथ देहाती कस्बायी और नए बने शहरों का देशज जीवन दर्शन भी आत्मसात किया जाता रहा है। भारत की जिस गंगा-जमुनी संस्कृति का महिमामंडन बहुधा होता है उसकी गूंज भी इन गीतों में मिलती है। आजादी की लड़ाई के दौरान लिखे प्रदीप के गीत हों या स्वाधीनता प्राप्ति साथ ही होनेवाले देश के विभाजन की विभीषिका, सभी को भी इन गीतों में बहुत संवेदनशील रूप से व्यक्त किया गया है।

   हिंदी फ़िल्मी गीतों के इस संसार में हिंदी-उर्दू का 'झगड़ा' भी कभी पनप नहीं सका। प्रदीप, नीरज जैसे शानदार हिंदी कवियों, इंदीवर तथा शैलेंद्र जैसे श्रेष्ठ गीतकारों और साहिर, कैफी, मजरूह जैसे मशहूर शायरों को हिंदी सिनेमा में हमेशा एक ही बिरादरी का माना जाता रहा है। यह सिनेमा की इस दुनिया की ही खासियत है कि एक तरफ गीतकार साहिर ने 'कहाँ हैं कहाँ हैं/मुहाफिज खुदी के/जिन्हें नाज है हिंद पर/वो कहाँ हैं' लिखा तो दूसरी तरफ उन्होंने ही 'संसार से भागे फिरते हो/भगवान को तुम क्या पाओगे !/ये भोग भी एक तपस्या है/तुम प्यार के मारे क्या जानोगे/अपमान रचयिता का होगा/रचना को अगर ठुकरा ओगे!' जैसी पंक्तियाँ भी रची हैं। परवर्तियों में गुलजार ऐसे गीतकार हैं जिन्होंने उर्दू, हिंदी, पंजाबी, राजस्थानी के साथ पुरबिया बोलियों में मन को मोह लेने वाले गीतों की रचना की है। बंदिनी के 'मोरा गोरा अंग लइले, मोहे श्याम रंग दइदे', 'कजरारे-कजरारे तेरे कारे-कारे नयना!', 'यारा सिली सिली रात का ढलना' और 'चप्पा चप्पा चरखा चले' जैसे गीतों को रचकर उन्होंने भारत की साझा संस्कृति को मूर्तिमान कर दिया है। वस्तुतः भारत में बनने वाली फिल्मों में आने वाले गीत उसे विश्व-सिनेमा में एक अलग पहचान देते हैं। ये गीत सही मायने में भारतीय संस्कृति की खूबसूरती को अभिव्यक्त करते हैं।

  1. हिंदी फिल्‍मी गीतों और लोकगीतों में क्या समानता है?
    A. ये लोगों के रीति-रिवाजों, उनकी लालसाओं उनकी सोच और कल्पनाओं को स्वर देते हैं।
    B. ये लोगों के जीवन के अनुभवों, आमोद प्रमोद, विचारों और दर्शन को स्वर देते हैं।
    C. ये लोगों के आनंद उनके शोक, उनके हर्ष और उनकी आशाओं को स्वर देते हैं।
    D. ये लोगों के जीवन के यथार्थ और कठोरताओं में ज़िंदा रहने की चाह को स्वर देते हैं।
  2. हिंदी भाषा की शब्द संपदा को समृद्ध करने का काम फिल्‍मी गीतों ने किस प्रकार किया?
    A. राजभाषा विभाग से प्रेरणा पाकर
    B. विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं के मेल से
    C. क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों को प्रोत्साहित करके
    D. विदेशी भाषाओं की फिल्मों को हतोत्साहित करके
  3. कथन (A) और कारण (R) को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए:
    कथन (A): हिंदी फिल्मों के गाने जन जन के गीत बन गए हैं।
    कारण (R): इन गीतों में राजनीति की अनुगूंजों के साथ, देहाती कस्बायी और नए बने शहरों का जीवन दर्शन थी आत्मसात किया जाता रहा है।
    A. कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
    B. कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत हैं।
    C. कथन (A) सही है और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है।
    D. कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  4. 'हिंदी फिल्‍मी गीतों के इस संसार में हिंदी-उर्दू का 'झगड़ा' भी कभी पनप नहीं सका।' उपर्युक्त कथन के पक्ष में निम्नलिखित तर्कों पर विचार कीजिए।
    1. यहाँ सभी गीतकारों को एक ही बंधुत्व वर्ग का माना जाता है।
    2. ये गीतकार सभी भाषाओं में समान रूप से गीत लिखते हैं।
    3. इन गीतकारों में वैमनस्य व प्रतिस्पर्धा का भाव नहीं है।
    A. 1 सही है।
    B. 2 सही है।
    C. 3 सही है।
    D. 1 और 2 सही है।
  5. उपर्युक्त गद्यांश में हिंदी फिल्‍मी गीतों की किस विशेषता पर सर्वाधिक बल दिया गया है?
    A. ये गीत कलात्मक श्रेष्ठता व सर्वधर्म समभाव को अभिव्यक्त करते हैं।
    B. ये गीत सांप्रदायिक सद्धाव को अभिव्यक्त करते हैं।
    C. ये गीत पारस्परिक प्रेम व सद्भाव को अभिव्यक्त करते हैं।
    D. ये गीत हमारी तहज़ीब की खूबसूरती को अभिव्यक्त करते हैं।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए -

    आदमी की पहचान उसकी भाषा से होती है और भाषा संस्कार से बनती है। जिसके जैसे संस्कार होंगे, वैसी उसकी भाषा होगी। जब कोई आदमी भाषा बोलता है, तो साथ में उसके संस्कार भी बोलते हैं। यही कारण है कि भाषा शिक्षक का दायित्व बहुत गुरुतर और चुनौतीपूर्ण है। परंपरागत रूप में शिक्षक की भूमिका इन तीन कौशलों - बोलना, पढ़ना और लिखना तक सीमित कर दी गई है। केवल यांत्रिक कौशल किसी जीती-जागती भाषा का उदाहरण नहीं हो सकते हैं। सोचना और महसूस करना दो ऐसे कारक हैं, जिनमें भाषा सही आकार पाती है। इनके बिना भाषा, भाषा नहीं है, इनके बिना भाषा संस्कार नहीं बन सकती, इनके बिना भाषा युगों-युगों का लंबा सफ़र तय नहीं कर सकती, इनके बिना कोई भाषा किसी देश या समाज की धड़कन नहीं बन सकती। केवल संप्रेषण ही भाषा नहीं है। दर्द और मुस्कान के बिना कोई भाषा जीवंत नहीं हो सकती।

    भाषा हमारे समाज के निर्माण, विकास, अस्मिता, सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण साधन है। भाषा के बिना मनुष्य पूर्ण नहीं है। भाषा में ही हमारे भाव राज्य, संस्कार, प्रांतीयता झलकती है। इस झलक का संबंध व्यक्ति की मानवीय संवेदना और मानसिकता से भी होता है। जिस व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य और मानसिकता जिस स्तर की होगी, उसकी भाषा के शब्द और मुख्यार्थ भी उसी स्तर के होंगे। साहित्यकार ऐसी भाषा को आधार बनाते हैं, जो उनके पाठकों एवं श्रोताओं की संवेदना के साथ एकाकार करने में समर्थ हों।

  1. आदमी की पहचान उसकी भाषा से होती है, क्योंकि -
    (A) मनुष्य की पूर्णता भाषा द्वारा ही संभव है।
    (B) व्यक्ति के मनोभाव भाषा से ही व्यक्त होते हैं।
    (C) भाषा का प्रचार और विकास कोई रोक नहीं सकता।
    (D) दर्द और मुस्कान के बिना भाषा जीवित नहीं हो सकती।
  2. निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
    कथन (A): जब कोई आदमी बोलता है, तो साथ में उसके संस्कार भी बोलते हैं।
    कारण (R): भाषा शिक्षक का दायित्व बहुत चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि उसे कौशलों का विकास करना होता है।
    (A) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत है।
    (B) कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
    (C) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
    (D) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
  3. गद्यांश में साहित्यकार द्वारा किए गए कार्य का उल्लेख इनमें से कौन-से विकल्प से ज्ञात होता है -
    (A) साहित्य समाज का दर्पण है।
    (B) साहित्यकार साहित्य सृजन में व्यस्त रहता है।
    (C) साहित्यकार सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान बनाता है।
    (D) साहित्यकार जन सामान्य की अस्मिता का परिचायक होता है।
  4. 'दर्द और मुसकान के बिना भाषा जीवंत नहीं हो सकती।' लेखक द्वारा ऐसा कथन दर्शाता है -
    (A) यथार्थ की समझ
    (B) सामाजिक समरसता
    (C) साहित्य-प्रेम
    (D) भाषा कौशल
  5. भाषा तब सही आकार पाती है, जब -
    (A) मनुष्य निरंतर उसका अभ्यास करता रहता है।
    (B) भाषा को सरकारी समर्थन भी प्राप्त होता है।
    (C) भाषा सामाजिक संस्थाओं से प्रोत्साहन प्राप्त करती है।
    (D) भाषायी कौशलों के साथ मनुष्य सोचता और महसूस भी करता है।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए:-

पश्चिमी सभ्यता मुख मोड़ रही है। वह एक नया आदर्श देख रही है। अब उसकी चाल बदलने लगी है। वह कलों की पूजा को छोड़कर मनुष्यों की पूजा को अपना आदर्श बना रही है। इस आदर्श के दर्शाने वाले देवता रस्किन और टालस्टॉय आदि हैं। पाश्चात्य देशों में नया प्रभात होने वाला है। वहाँ के गंभीर विचार वाले लोग इस प्रभात का स्वागत करने के लिए उठ खड़े हुए हैं। प्रभात होने के पूर्व ही उसका अनुभव कर लेने वाले पक्षियों की तरह इन महात्माओं को इस नए प्रभात का पूर्व ज्ञान हुआ है और हो क्यों न? इंजनों के पहिए के नीचे दबकर वहाँ वालों के भाई-बहन ही नहीं, उनकी सारी जाति पिस गई, उनके जीवन के धुरे टूट गए, उनका समस्त धन घरों से निकलकर एक-दो स्थानों में एकत्र हो गया।

साधारण लोग मर रहे हैं, मज़दूरों के हाथ-पाँव फट रहे हैं, लहू बह रहा है! सर्दी से ठिठुर रहे हैं। एक तरफ दरिद्रता का अखंड राज्य है, दूसरी तरफ अमीरी का चरम दृश्य। परंतु अमीरी भी मानसिक दुखों से विमर्दित है। मशीनें बनाई तो गई थीं मनुष्यों का पेट भरने के लिए - मज़दूरों को सुख देने के लिए - परंतु वे काली-काली मशीनें ही काली बनकर उन्हीं मनुष्यों का भक्षण कर जाने के लिए मुख खोल रही हैं। प्रभात होने पर ये काली-काली बलाएँ टूर होंगी। मनुष्य के सौभाग्य का सूर्योदय होगा।

शोक का विषय यह है कि हमारे और अन्य पूर्वी देशों में लोगों को मज़दूरी से तो लेशमात्र भी प्रेम नहीं है, पर वे तैयारी कर रहे हैं पूर्वोक्त काली मशीनों का आलिंगन करने की। पश्चिम वालों के तो ये गले पड़ी हुई बहती नदी की काली कमली हो रही हैं। वे छोड़ना चाहते हैं, परंतु काली कमली उन्हें नहीं छोड़ती। देखेंगे पूर्व वाले इस कमली को छाती से लगाकर कितना आनंद अनुभव करते हैं। यदि हम में से हर आदमी अपनी दस उँगलियों की सहायता से साहसपूर्वक अच्छी तरह काम करे तो हम मशीनों की कृपा से बढ़े हुए परिश्रम वालों को वाणिज्य के जातीय संग्राम में सहज ही पछाड़ सकते हैं। सूर्य तो सदा पूर्व ही से पश्चिम की ओर जाता है। पर आओ पश्चिम से आनेवाली सभ्यता के नए प्रभात को हम पूर्व से भेजें।

इंजनों की वह मज़दूरी किस काम की जो बच्चों, स्त्रियों और कारीगरों को ही भूखा नंगा रखती है और केवल सोने, चाँदी, लोहे आदि धातुओं का ही पालन करती है। पश्चिम को विदित हो चुका है कि इनसे मनुष्य का दुख दिन पर दिन बढ़ता है।

  1. "पाश्चात्य देशों में नया प्रभात होने वाला है।" - पंक्ति में रेखांकित पद का आशय हो सकता है?     1
    1. नया प्रकाश
    2. नया विचार
    3. नया सवेरा
    4. नया प्रभास
  2. संदर्भ के अनुसार गद्यांश में 'विमर्दित' शब्द का सटीक अर्थ क्या हो सकता है?     1
    1. ठगी हुई
    2. ग्लानिपूर्ण
    3. ईर्ष्या पूर्ण
    4. पीड़ा पूर्ण
  3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए -     1 
    कथन (I): मानवीय दक्षता को महत्त्व देना चाहिए।
    कथन (II): मनुष्य तथा मानवीयता से प्रेम करना चाहिए।
    कथन (III): अपनी चाल को बदल लेना चाहिए।
    कथन (IV): मानव जीवन को आदर्श मानना चाहिए।
    गद्यांश के अनुसार कौन-सा/से कथन सही हैं?
    1. केवल कथन I सही है।
    2. केवल कथन II सही है।
    3. केवल कथन II और III सही हैं।
    4.  केवल कथन I और IV सही हैं।
  4. गद्यांश के अनुसार पूर्वी देशों की समस्या क्या है?     1
    1.  मज़दूरों के लिए अधिकारों की कमी
    2.  मज़दूरों का पूँजी पतियों द्वारा शोषण
    3. मज़दूरी को कम महत्त्व का आंकना
    4. मज़दूरी पर अमीरी का प्रभाव
  5. गद्यांश के अनुसार साधारण लोग क्यों मर रहे हैं?     1
    1. मानव श्रम से ज्यादा मशीनों को महत्त्व मिलने के कारण
    2. हाथ-पाँव फटने, खून रिसने और सर्दी के कारण
    3. कम मज़दूरी मिलने कारण हुई बीमारियों से
    4. कार्य क्षेत्रों के विषैले पर्यावरण व खाने की कमी से
  6. गद्यांश में मशीनों को 'काली मशीनें' कहना किस बात की ओर संकेत करता है?     1
    1. काला रंग शोक का प्रतीक होता है।
    2. मशीनों द्वारा जन साधारण में बेरोज़गारी बढ़ाने के कारण
    3. माँ दुर्गा के अवतार काली के जैसे भक्षण करने के कारण
    4. मशीनों से अमीरों द्वारा काले धन अर्जन करने के कारण
  7. "इंजनों के पहिए के नीचे दबकर वहाँ वालों के....." इस प्रक्रिया के क्या परिणाम हुए?     1
    1. आर्थिक संपदा का अनुचित वितरण
    2. भाई बहनों व अन्य रिश्तेदारों में दुराव
    3. समस्त जाति द्वारा कठिन परिश्रम
    4. मशीनों द्वारा मनुष्यों का संरक्षण 
  8. रस्किन और टालस्टॉय का महत्त्व है क्योंकि इन्होनें ______ ।   1
    1. पूर्वी देशों में साम्राज्यवाद के विरुद्ध आवाज़ उठाई थी।
    2. मानवीय संवेदनाओं एवं गुणों को महत्त्व दिया था।
    3. धार्मिक कट्टरता के प्रति चेतना जगाई थी।
    4. गाँधी जी इन दोनों के विचारों से अत्याधिक प्रभावित थे।
  9. मनुष्य के सौभाग्य का सूर्योदय कब होगा?     1
    1. मज़दूरों द्वारा क्रांति करने से
    2. मशीनों के हट जाने से
    3. सभी लोगों को काम मिलने से
    4. मानवीय दक्षताओं को महत्त्व मिलने से
  10. मनुष्य के दुख में निरंतर वृद्धि का क्या कारण बताया गया है?     1
    1. मशीनों पर अत्यधिक आश्रित हो जाना
    2. मानवीय दक्षता की आलोचना
    3. पूँजी पतियों द्वारा गरीबों का शोषण
    4. काली मशीनों द्वारा मनुष्यों का भक्षण

निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए:-

कारण लिखिए:

(क) विमान के प्रति लेखक का आकर्षित होना

(ख) लेखक ने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग को अपना अध्ययन क्षेत्र चुनना

पहली बार मैंने एम. आई. टी. में निकट से विमान देखा था, जहाँ विद्यार्थियों को विभिन्न सब- सिस्टम दिखाने के लिए दो विमान रखे थे। उनके प्रति मेरे मन में विशेष आकर्षण था। वे मुझे बार-बार अपनी ओर खींचते थे। मुझे वे सीमाओं से परे मनुष्य की सोचने की शक्ति की जानकारी देते थे तथा मेरे सपनों को पंख लगाते थे। मैंने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग काे अपना अध्ययन क्षेत्र चुना क्योंकि उड़ान भरने के प्रति मैं आकर्षित था। वर्षों से उड़ने की अभिलाषा मेरे मन में पलती रही। मेरा सबसे प्यारा सपना यही था कि सुदूर आकाश में ऊँची और ऊँची उड़ान भरती मशीन को हैंडल किया जाए।

‘मेरी अभिलाषा’ लगभग छह से आठ पंक्तियों में लिखिए।


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति के बाद शनि ग्रह की कक्षा है। शनि सौरमंडल का दूसरा बड़ा ग्रह है। यह हमारी पृथ्वी के करीब 750 गुना बड़ा है। शनि के गोले का व्यास 116 हज़ार किलोमीटर है; अर्थात्‌, पृथ्वी के व्यास से करीब नौ गुना अधिक।

सूर्य से शनि ग्रह की औसत दूरी 143 करोड़ किलोमीटर है। यह ग्रह प्रति सेकंड 9.6 किलोमीटर की औसत गति से करीब 30 वर्षों में सूर्य का एक चक्कर लगाता है। अत: 90 साल का कोई बूढ़ा आदमी यदि शनि ग्रह पर पहुँचेगा, तो उस ग्रह के अनुसार उसकी उम्र होगी सिर्फ तीन साल!

हमारी पृथ्वी सूर्य से करीब 15 करोड़ किलोमीटर दूर है। तुलना में शनि ग्रह दस गुना अधिक दूर है। इसे दूरबीन के बिना कोरी आँखों से भी आकाश में पहचाना जा सकता है। पुराने ज़माने के लोगों ने इस पीले चमकीले ग्रह को पहचान लिया था। प्राचीन काल के ज्योतिषियों को सूर्य, चंद्र और काल्पनिक राहु-केतु के अलावा जिन पाँच ग्रहों का ज्ञान था उनमें शनि सबसे अधिक दूर था। 

शनि को 'शनैश्वर' भी कहते हैं। आकाश के गोल पर यह ग्रह बहुत धीमी गति से चलता दिखाई देता है, इसीलिए प्राचीन काल के लोगों ने इसे 'शनैःचर नाम' दिया था। 'शनैःचर' का अर्थ होता है - धीमी गति से चलने वाला। 

  1. तालिका पूर्ण कीजिए:     [2]
    प्राचीन ज्योतिषियों को इन ग्रहों का ज्ञान था। 
     
     
     
     
  2. परिच्छेद में आए हुए शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए:    [2]
    1. शनि - ______
    2. दूरबीन - ______
    3. पृथ्वी - ______
    4. आकाश - ______
  3. 'अंतरिक्ष यात्रा' इस विषय पर ४० से ५० शब्दों में अपने विचार लिखिए।      [2]  

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों:

स्वाधीन भारत में अभी तक अंग्रेजी हवाओं में कुछ लोग यह कहते मिलेंगे – जब तक विज्ञान और तकनीकी ग्रंथ हिंदी में न हो तब तक कैसे हिंदी में शिक्षा दी जाए। जब कि स्वामी श्रद्धानंद स्वाधीनता से भी चालीस साल पहले गुरुकुल काँगड़ी में हिंदी के माध्यम से विज्ञान जैसे गहन विषयों की शिक्षा दे रहे थे। ग्रंथ भी हिंदी में थे और पढ़ाने वाले भी हिंदी के थे। जहाँ चाह होती है वहीं राह निकलती है। एक लंबे अरसे तक अंग्रेज गुरुकुल काँगड़ी को भी राष्ट्रीय आंदोलन का अभिन्न अंग मानते रहे। इसमें कोई संदेह भी नहीं कि गुरुकुल के स्नातकों में स्वाधीनता की अजीब तड़प थी। स्वामी श्रद्धानंद जैसा राष्ट्रीय नेता जिस गुरुकुल का संस्थापक हो और हिंदी शिक्षा का माध्यम हो; वहीं राष्ट्रीयता नहीं पनपेगी तो कहाँ पनपेगी।

Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:

निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए:

लगभग एक सप्ताह यही क्रम चलता रहा। हर समय एक व्यक्ति उनके पास बैठा रहता। कभी माँ तो कभी मीनू, कभी रोहित तो कभी आशा। उन सबकी सेवा व ईश्वर के आशीर्वाद से पिताजी की दशा में काफी सुधार हो गया। अब वे धीरे-धीरे अपने आप बैठने भी लगे थे, और थोड़ी देर बातें भी कर लेते थे। प्रात: लगभग नौ बजे का समय था। उस समय हल्की वर्षा की बुँदें पड़ रही थी। तभी घर के बाहर एक कार आकर रुकी।
  1. 'पिताजी' को क्या हुआ था? डॉक्टर ने उन्हें क्या सलाह दी थी?      [2]
  2. कार से कौन आए थे और क्यों?     [2]
  3. बुआ जी जाते-जाते अपने भैया को क्या-क्या सलाह दे गई? क्या उपर्युक्त अवसर पर उनकी यह सलाह उचित थी? समझाइए।     [3]
  4. पिताजी द्वारा मीनू को शादी का सुझाव दिए जाने पर मीनू ने उन्हें क्या कहकर समझाया?    [3]

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