English

Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow: निम्नलिखित अकतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए: “परंतु मैं तो इस पक्ष में जरा भी नहीं हूँ

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Question

Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:

निम्नलिखित अकतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए:

“परंतु मैं तो इस पक्ष में जरा भी नहीं हूँ। हमारी भारत सरकार हमारी पढ़ाई पर कितना पैसा खर्च करती है और हम चंद पैसों के कारण विदेशों में जा कर बस जाएँ? यादि सभी बुद्धिजीवी विदेशों में जाकर बस जाएँगें तो हमारे देश की उन्नति किस प्रकार संभव हो सकेगी।”
  1. वक्ता इस समय किस से मिलने आई है? वक्‍ता के यहाँ आने का कारण भी बताइए।   [2]
  2. इस समय यहाँ किस व्यक्ति के विषय में और क्या बात की जा रही है जिसे सुनकर वक्ता ने यह सब कहा था?     [2]
  3. प्रस्तुत पंक्तियों के आधार पर वक्ता के चारित्र की 'तीन' विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।    [3]
  4. विद्यार्थियों में अपने देश के बजाय विदेश में शिक्षा प्राप्त करने की बढ़ती चाह के कारण भविष्य में देश को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है? समझाकर लिखिए।     [3]
Answer in Brief
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Solution

  1. वक्ता मीनू इस समय नीलिमा से मिलने आई थी । मीनू पढ़ते-पढ़ते थक गई थी। उस समय उसकी कोई प्रतियोगी परीक्षा भी नहीं थी। इसी सोच के साथ नीलिमा से मिलने चली गई।
  2. इस समय यहाँ पर अशोक भैया के अमेरिका में पढ़ने के लिए जाने की बात की जा रही है। जिसमें पता चला कि अभी तो वे दो वर्ष के लिए ही गए हैं। पर बाद में वहीं बस जायेंगे । इसे सुनकर वक्ता ने कहा कि मैं इसके पक्ष में नहीं हूँ। भारत सरकार हमारी पढ़ाई पर कितना खर्च करती है और हम चंद पैसों के लिए विदेशों में जाकर बस जाएँ।
  3. प्रस्तुत पंक्तियों की वक्ता मीनू है। वह उपन्यास की मुख्य पात्र है। उपन्यास की पूरी कथा उसके इर्द-गिर्द ही घूमती है। मीनू एक कुशल अभिवक्ता के साथ-साथ दृढ़ इच्छाशक्ति वाली नारी है। वह देश के प्रति भी कर्तव्यनिष्ठ है। वह पढ़ी-लिखी, मेधावी व साहसी युवती है। बहुमुखी प्रतिभा की धनी मीनू एक आत्म-निर्भर प्रगतिशील युवती है।
  4. विद्यार्थियों में अपने देश के बजाय विदेश में शिक्षा प्राप्त करने की चाह निरंतर बढ़ती जा रही है जो एक चिंता का विषय है। इससे देश के सक्षम युवा शक्ति के पलायन की समस्या बढ़ रही है। सभी बुद्धिजीवी विदेशों में जाकर बस जाएंगे तो हमारे देश की उन्नति कैसे हो पायेगी? उद्योग धंधों के लिए श्रम शक्ति की कमी हो रही है तथा देश की बहुमूल्य देशी मुद्रा विदेशों में भेजी जा रही है।
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