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प्रश्न
निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों:
| स्वाधीन भारत में अभी तक अंग्रेजी हवाओं में कुछ लोग यह कहते मिलेंगे – जब तक विज्ञान और तकनीकी ग्रंथ हिंदी में न हो तब तक कैसे हिंदी में शिक्षा दी जाए। जब कि स्वामी श्रद्धानंद स्वाधीनता से भी चालीस साल पहले गुरुकुल काँगड़ी में हिंदी के माध्यम से विज्ञान जैसे गहन विषयों की शिक्षा दे रहे थे। ग्रंथ भी हिंदी में थे और पढ़ाने वाले भी हिंदी के थे। जहाँ चाह होती है वहीं राह निकलती है। एक लंबे अरसे तक अंग्रेज गुरुकुल काँगड़ी को भी राष्ट्रीय आंदोलन का अभिन्न अंग मानते रहे। इसमें कोई संदेह भी नहीं कि गुरुकुल के स्नातकों में स्वाधीनता की अजीब तड़प थी। स्वामी श्रद्धानंद जैसा राष्ट्रीय नेता जिस गुरुकुल का संस्थापक हो और हिंदी शिक्षा का माध्यम हो; वहीं राष्ट्रीयता नहीं पनपेगी तो कहाँ पनपेगी। |
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उत्तर
- कौन हिंदी के माध्यम से विज्ञान जैसे गहन विषयों की शिक्षा दे रहे थे?
- स्वाधीनता से कितने साल पहले स्वामी श्रद्धानंद ने गुरुकुल काँगड़ी में हिंदी में विज्ञान की शिक्षा दी थी?
- गुरुकुल काँगड़ी में ग्रंथ और पढ़ाई किस भाषा में होती थी?
- लंबे अरसे तक अंग्रेज किसे राष्ट्रीय आंदोलन का अभिनन अंग मानते रहे?
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संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए।
| संस्कृति और सभ्यता ये दो शब्द हैं और इनके अर्थ भी अलग-अलग हैं। सभ्यता मनुष्य का वह गुण है, जिससे वह अपनी बाहरी तरक्की करता है। संस्कृति वह गुण है, जिससे वह अपनी भीतरी उन्नति करता है और करुणा, प्रेम एवं परोपकार सीखता है। आज रेलगाड़ी, मोटर और हवाई जहाज़, लंबी-चौड़ी सड़कें और बड़े-बड़े मकान, अच्छा भोजन और अच्छी पोशाक ये सभी सभ्यता की पहचान हैं और जिस देश में इनकी जितनी ही अधिकता है, उस देश को हम उतना ही सभ्य मानते हैं। मगर संस्कृति इन सबसे कहीं बारीक चीज़ है। वह मोटर नहीं, मोटर बनाने की कला है। मकान नहीं, मकान बनाने की रुचि है। संस्कृति धन नहीं, गुण है। संस्कृति ठाठ-बाट नहीं, विनय और विनम्रता है। एक कहावत है कि सभ्यता वह चीज़ है जो हमारे पास है, लेकिन संस्कृति वह गुण है जो हममें छिपा हुआ है। हमारे पास घर होता है, कपड़े होते हैं, मगर ये सारी चीज़ें हमारी सभ्यता के सबूत हैं, जबकि संस्कृति इतने मोटे तौर पर दिखलाई नहीं देती, वह बहुत ही सूक्ष्म और महीन चीज़ है और वह हमारी हर पसंद, हर आदत में छिपी रहती है। मकान बनाना सभ्यता का काम है। लेकिन हम मकान का कौन-सा नक्शा पसंद करते हैं यह हमारी संस्कृति बतलाती है। आदमी के भीतर काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह और मत्सर ये छह विकार प्रकृति के दिए हुए हैं। परंतु अगर ये विकार बेरोक-टोक छोड़ दिए जाएँ तो आदमी इतना गिर जाए कि उसमें और जानवर में कोई भेद नहीं रह जाएगा। इसलिए आदमी इन विकारों पर रोक लगाता है। इन दुर्गणों पर जो आदमी जितना ज्यादा काबू कर पाता है, उसकी संस्कृति भी उतनी ही ऊँची समझी जाती है। संस्कृति का स्वभाव है कि वह आदान-प्रदान से बढ़ती है। जब दो देशों या जातियों के लोग आपस में मिलते हैं, तब उन दोनों की संस्कृतियाँ एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं। इसलिए संस्कृति की दृष्टि से वह जाति या वह देश बहुत ही धनी समझा जाता है, जिसने ज़्यादा-से-ज़्यादा देशों या जातियों की संस्कृतियों से लाभ उठाकर अपनी संस्कृति का विकास किया हो। |
(1) गद्यांश में ‘सभ्यता को बाहरी तरक्की’ बताया गया है क्योंकि यह - (1)
(क) इच्छापूर्ति में सक्षम है।
(ख) भौतिक साधनों की द्योतक है।
(ग) संस्कृति से भिन्न पहचान लिए है।
(घ) करुणा, प्रेम एवं परोपकार सिखाती है।
(2) सभ्यता और संस्कृति का मूलभूत अंतर क्रमशः है - (1)
(क) रेलगाड़ी, विनय
(ख) प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष
(ग) बाहरी तरक्की, भीतरी द्वंद्व
(घ) रिवाज़, सीख
(3) संस्कृति को ‘महीन चीज़’ कहने से लेखक सिद्ध करना चाहते हैं कि संस्कृति है - (1)
(क) अत्यंत तुच्छ
(ख) अति महत्वहीन
(ग) अत्यधिक उपयोगी
(घ) अति सर्वश्रेष्ठ
(4) निम्नलिखित वाक्यों में से सभ्यता के संदर्भ मैं कौन-सा वाक्य सही है? (1)
(क) सभ्यता मनुष्य के स्वाधीन चिंतन की गाथा है।
(ख) सभ्यता मानव के विकास का विधायक गुण है।
(ग) सभ्यता मानव को कलाकार बना देती है।
(घ) सभ्यता संस्कृति से अधिक महत्वपूर्ण है।
(5) संस्कृति की प्रवृत्ति है - (1)
(क) आदाय-प्रदाय
(ख) आदाय-प्राप्ति
(ग) क्रय-विक्रय
(घ) आबाद-बर्बाद
(6) ‘मकान के लिए नक्शा पसंद करना हमारी संस्कृति का परिचायक है।’ ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि - (1)
(क) घर हमारी सभ्यता की पहचान है।
(ख) अन्य लोगों से जोड़ने का माध्यम है।
(ग) नक्शे के बिना मकान बनाना कठिन है।
(घ) हमारी सोच-समझ को उजागर करता है।
(7) अन्य संस्कृतियों का लाभ उठाकर अपनी संस्कृति का विकास करना दर्शाता है - (1)
(क) समरसता
(ख) संपूर्णता
(ग) सफलता
(घ) संपन्नता
(8) मनुष्य की मनुष्यता इसी बात में निहित है कि वह - (1)
(क) सभ्यता और संस्कृति का प्रचार-प्रसार करता रहे।
(ख) संस्कृति की समृद्धि के लिए कटिबद्धता बनाए रहे।
(ग) सभ्यता की ऊँचाई की प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील रहे।
(घ) मानसिक त्रुटियों पर नियंत्रण पाने के लिए चेष्टावान रहे।
(9) आदमी और जानवर का भेद समाप्त होना दर्शाता है - (1)
(क) सामाजिक असमानता
(ख) चारित्रिक पतन
(ग) सांप्रदायिक भेदभाव
(घ) अणुमात्रिक गिरावट
(10) सुसंस्कृत व्यक्ति से तात्पर्य है - (1)
(क) विकारग्रस्त व्यक्ति
(ख) विकासशील व्यक्ति
(ग) विचारशील व्यक्ति
(घ) विकारमुक्त व्यक्ति
निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए-
|
जहाँ कोयल की मीठी वाणी सबका मन मोह लेती है, वहीं कौए को कर्कश आवाज किसी को अच्छी नहीं लगती । मधुर वचन न केवल सुनने वाले को, बल्कि बोलने वाले को भी आत्मिक शांति प्रदान करतें हैं। मनुष्य अपनी सद्भावनाओं का अधिकांश प्रदर्शन वचनों द्वारा ही करता है। मधुर वचन तप्त और दुःखी व्यक्ति का सही और सच्चा उपचार हैं। सहानुभूति के कुछ शब्द उसे इतना सुख देते हैं जितना संसार का कोई धनकोष नहीं दे पाता। मधुरभाषी शीघ्र ही सबका मित्र बन जाता है। लोग उसकी प्रशंसा करते हैं। यहाँ तक कि पराए भी अपने बन जाते हैं। इससे समाज में पारस्परिक सौहार्द की भावना पैदा होती है, लोग एक-दूसरे की सहायता के लिए तत्पर हो जाते हैं। सामाजिक मान-प्रतिष्ठा और श्रद्धा का आधार भी मधुर वाणी ही है। मधुर वचन किसी के मन को ठेस नहीं पहुँचाते, बल्कि दूसरे के क्रोध को शांत करने में सहायक होते हैं। मधुर वाणी में ऐसा आकर्षण है जो बिना रस्सी के सबको बाँध लेती है। अतः याद रखना चाहिए- ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोए। |
(1) उत्तर लिखिए- (2)
गद्यांश के आधार पर मधुर वचन की विशेषताएँ लिखिए-
- ____________
- ____________
(2) “शब्द शस्त्र के समान होते हैं उनका सावधानी से उपयोग करना चाहिए" वचन पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
लालच ऐसी बुरी चीज है, जिसके फेर में पड़कर मानव मानवता को भूल जाता है। व्यकित किसी भी स्तर तक गिर जाता है। लालच इंसानियत का दुश्मन है। देशभक्ति की जगह गद्दारी करना लालच के तहत ही आता है। यदि व्यक्ति लालच न करे और संतोषपूर्वक अपना जीवन व्यतीत करे तो उसे परमसुख की प्राप्ति हो सकती है। अफसोस कि आज जीवन के हर क्षेत्र में इनका बोलबाला है। पैसा ही आज ईश्वर है। मानवता आज इस लालच के बल पर कराह रही है। संतोष ही जीवन का आधार है। परंतु हमें यह याद रखना चाहिए कि हर लालच का परिणाम बुरा ही होता है। कहा भी गया है- रूखी-सूखी खाय के ठंडा पानी पीव। |
(1) उत्तर लिखिए- (2)
गद्यांश के आधार पर लालच के अभिशाप
- ______
- ______
(2) संतोष ही जीवन का आधार है, अपने विचार 25 से 30 शब्द में लिखें। (2)
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
हमेशा यह कहा जाता है कि जीवन में जितनी भी तकलीफ हो, पीड़ा हो, दुख हो, कष्ट हो, हमें बहुत धैर्यपूर्वक इन सभी का प्रतिकार करना चाहिए। दुख के समय या विपत्ति के समय हमें बहुत शांत रहकर इनको सहन करना चाहिए, क्योंकि संसार में यह धारणा बहुत साफ दिखती है कि व्यक्ति अपने मन की व्यथा को खुद संभालकर रखे, नहीं तो वह उपहास का पात्र भी बन सकता है। यदि हम अपने मन की बातों या दुख होने पर इसे समाज के साथ बाँटते हैं, तो कुछ लोग इस पर ध्यान नहीं देते, अपितु वह इन्हें एक सामान्य सी बात कहकर मजाक भी बना डालते हैं। अत: कहा भी गया है- रहिमन निज मन की व्यथा, मन में राखो गोय। |
(1) उत्तर लिखिए- (2)
समाज में लोगों की विशेषताएँ-
- ______
- ______
(2) मन की प्रवृत्ति पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए -
|
आदमी की पहचान उसकी भाषा से होती है और भाषा संस्कार से बनती है। जिसके जैसे संस्कार होंगे, वैसी उसकी भाषा होगी। जब कोई आदमी भाषा बोलता है, तो साथ में उसके संस्कार भी बोलते हैं। यही कारण है कि भाषा शिक्षक का दायित्व बहुत गुरुतर और चुनौतीपूर्ण है। परंपरागत रूप में शिक्षक की भूमिका इन तीन कौशलों - बोलना, पढ़ना और लिखना तक सीमित कर दी गई है। केवल यांत्रिक कौशल किसी जीती-जागती भाषा का उदाहरण नहीं हो सकते हैं। सोचना और महसूस करना दो ऐसे कारक हैं, जिनमें भाषा सही आकार पाती है। इनके बिना भाषा, भाषा नहीं है, इनके बिना भाषा संस्कार नहीं बन सकती, इनके बिना भाषा युगों-युगों का लंबा सफ़र तय नहीं कर सकती, इनके बिना कोई भाषा किसी देश या समाज की धड़कन नहीं बन सकती। केवल संप्रेषण ही भाषा नहीं है। दर्द और मुस्कान के बिना कोई भाषा जीवंत नहीं हो सकती। भाषा हमारे समाज के निर्माण, विकास, अस्मिता, सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण साधन है। भाषा के बिना मनुष्य पूर्ण नहीं है। भाषा में ही हमारे भाव राज्य, संस्कार, प्रांतीयता झलकती है। इस झलक का संबंध व्यक्ति की मानवीय संवेदना और मानसिकता से भी होता है। जिस व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य और मानसिकता जिस स्तर की होगी, उसकी भाषा के शब्द और मुख्यार्थ भी उसी स्तर के होंगे। साहित्यकार ऐसी भाषा को आधार बनाते हैं, जो उनके पाठकों एवं श्रोताओं की संवेदना के साथ एकाकार करने में समर्थ हों। |
- आदमी की पहचान उसकी भाषा से होती है, क्योंकि -
(A) मनुष्य की पूर्णता भाषा द्वारा ही संभव है।
(B) व्यक्ति के मनोभाव भाषा से ही व्यक्त होते हैं।
(C) भाषा का प्रचार और विकास कोई रोक नहीं सकता।
(D) दर्द और मुस्कान के बिना भाषा जीवित नहीं हो सकती। - निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A): जब कोई आदमी बोलता है, तो साथ में उसके संस्कार भी बोलते हैं।
कारण (R): भाषा शिक्षक का दायित्व बहुत चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि उसे कौशलों का विकास करना होता है।
(A) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत है।
(B) कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
(C) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
(D) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है। - गद्यांश में साहित्यकार द्वारा किए गए कार्य का उल्लेख इनमें से कौन-से विकल्प से ज्ञात होता है -
(A) साहित्य समाज का दर्पण है।
(B) साहित्यकार साहित्य सृजन में व्यस्त रहता है।
(C) साहित्यकार सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान बनाता है।
(D) साहित्यकार जन सामान्य की अस्मिता का परिचायक होता है। - 'दर्द और मुसकान के बिना भाषा जीवंत नहीं हो सकती।' लेखक द्वारा ऐसा कथन दर्शाता है -
(A) यथार्थ की समझ
(B) सामाजिक समरसता
(C) साहित्य-प्रेम
(D) भाषा कौशल - भाषा तब सही आकार पाती है, जब -
(A) मनुष्य निरंतर उसका अभ्यास करता रहता है।
(B) भाषा को सरकारी समर्थन भी प्राप्त होता है।
(C) भाषा सामाजिक संस्थाओं से प्रोत्साहन प्राप्त करती है।
(D) भाषायी कौशलों के साथ मनुष्य सोचता और महसूस भी करता है।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए -
|
साहित्य को समाज का प्रतिबिंब माना गया है अर्थात समाज का पूर्णरूप साहित्य में प्रतिबिंबित होता रहता है। अनादि काल से साहित्य अपने इसी धर्म का पूर्ण निर्वाह करता चला आ रहा है। वह समाज के विभिन्न रूपों का चित्रण कर एक ओर तो हमारे सामने समाज का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करता है और दूसरी ओर अपनी प्रखर मेधा और स्वस्थ कल्पना द्वारा समाज के विभिन्न पहलुओं का विवेचन करता हुआ यह भी बताता है कि मानव समाज की सुख-समृद्धि, सुरक्षा और विकास के लिए कौन-सा मार्ग उपादेय है? एक आलोचक के शब्दों में - "कवि वास्तव में समाज की व्यवस्था, वातावरण, धर्म-कर्म, रीति-नीति तथा सामाजिक शिष्टाचार या लोक व्यवहार से ही अपने काव्य के उपकरण चुनता है और उनका प्रतिपादन अपने आदर्शों के अनुरूप करता है।” साहित्यकार उसी समाज का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें वह जन्म लेता है। वह अपनी समस्याओं का सुलझाव, अपने आदर्श की स्थापना अपने समाज के आदर्शों के अनुरूप ही करता है। जिस सामाजिक वातावरण में उसका जन्म होता है, उसी में उसका शारीरिक, बौद्धिक और मानसिक विकास भी होता है। अत: यह कहना सर्वथा असंभव और अविवेकपूर्ण है कि साहित्यकार समाज से पूर्णतः निरपेक्ष या तटस्थ रह कर साहित्य सृजन करता है। वाल्मीकि, तुलसी, सूर, भारतेंदु , प्रेमचंद आदि का साहित्य इस बात का सर्वाधिक सशक्त प्रमाण है कि साहित्यकार समाज से घनिष्ठ रूप से संबंध रखता हुआ ही साहित्य सृजन करता है। समाज की अवहेलना करने वाला साहित्य क्षणजीवी होता है। |
- साहित्य समाज का प्रतिबिंब है क्योंकि यह -
(A) समाज की वास्तविकता का द्योतक है।
(B) समाज में लोक व्यवहार का समर्थक है।
(C) व्यक्ति की समस्याओं का निदान करता है।
(D) साहित्य को दिशा प्रदान करता है। - गद्यांश दर्शाता है -
(A) समाज एवं साहित्य का पारस्परिक संबंध
(B) समाज एवं साहित्य की अवहेलना
(C) साहित्यकार की सृजन शक्ति
(D) सामाजिक शिष्टाचार एवं लोक व्यवहार - साहित्य की क्षणभंगुरता का कारण होगा -
(A) सामाजिक अवज्ञा
(B) सामाजिक समस्या
(C) सामाजिक सद्भाव
(D) सामाजिक समरसता - वाल्मीकि, तुलसी, सूर के उदाहरण द्वारा लेखक चाहता है -
(A) भाव साम्यता
(B) प्रत्यक्ष प्रमाण
(C) सहानुभूति
(D) शिष्टाचार - निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) - कवि अपने काव्य के उपकरणों का प्रतिपादन अपने आदर्शों के अनुरूप करता है।
कारण (R) - कवि हृदय अत्यधिक संवेदनशील होता है एवं सदैव देशहित चाहता है।
(A) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत है।
(B) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
(C) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
(D) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इस पर आधारित प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:
| शोर से होने वाली बहरेपन की बीमारी एक गंभीर स्वास्थ्यगत समस्या है। तेज़ आवाज़ हमारी श्रवण कोशिकाओं पर बहुत दबाव डालती है, जिससे वे स्थायी रूप से चोटिल हो सकती हैं। यदि सुनने की क्षमता एकबार चली गई तो उसे पुनः पाना नामुमकिन है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की 'वर्ल्ड हीयरिंग रिपोर्ट' के मुताबिक विश्व की 1.5 अरब आबादी बहरेपन के साथ जी रही है। ध्वनि प्रदूषण दरअसल ऐसे अवांछित विद्युत चुंबकीय संकेत हैं, जो इंसान को कई रूपों में नुकसान पहुँचाते हैं। इसीलिए, शोर-प्रेरित बहरेपन पर फौरन ध्यान देने की ज़रूरत है। वैश्विक अध्ययन बताते हैं कि निर्माण कार्य, औद्योगिक कामकाज़, जहाज बनाने या मरम्त करने संबंधी काम, अग्निश्मन, नागरिक उड्डयन आदि सेवाओं में लगे श्रमिकों में शोर-प्रेरित बहरेपन का खतरा अधिक होता है। आकलन है कि 15 फीसदी नौजवान संगीत-कार्यक्रमों, खेल-आयोजनों और दैनिक कामकाज़ में होने वाले शोर से बहरेपन का शिकार होते हैं। शोर-प्रेरित बहरनेपन की समस्या विकासशील देशों में ज़्यादा है, जहाँ तीव्र औद्योगीकरण, अनौपचारिक क्षेत्र के विस्तार और सुरक्षात्मक व शोर-नियंत्रणरोधी उपायों की कमी से लोग चौतरफ़ा शोर-शराबे में दिन-बिताने को अभिशप्त हैं। हमें यह समझना ही होगा कि श्रवण-शक्ति का ह्रास न सिर्फ़ इंसान को प्रभावित करता है, बल्कि समाज पर भी नकारात्मक असर डालता है। |
- शोर-प्रेरित बहरेपन का खतरा किस क्षेत्र से जुड़े लोगों को कम है?
(a) जहाज-निर्माण से जुड़े लोगों को
(b) स्वास्थ्य-सेवाओं से जुड़े लोगों को
(c) खेल-आयोजनों से जुड़े लोगों को
(d) संगीत-कार्यक्रमों से जुड़े लोगों को - गद्यांश के संदर्भ में अनुपयुक्त कथन है -
(a) विकासशील देशों में अनौपचारिक क्षेत्र विस्तार की समस्या नहीं है।
(b) विकासशील देशों में शोर-निंयत्रणरोधी उपायों पर अधिक ध्यान नहीं दिया जाता है।
(c) कुछ सेवाओं से जुडे लोग अन्य की तुलना में बहरेपन के अधिक शिकार हैं।
(d) कुछ खास सेवाओं से जुड़े युवा भी आज बहरेपन का शिकार हो रहे हैं। - विकासशील देशों के लोगों के जीवन को अभिशप्त क्यों कहा गया है?
(a) उनका जीवन अनेक सामाजिक संकटों से घिरा है।
(b) उनका जीवन अनेक आर्थिक संकटों से घिरा है।
(c) वे खराब सेहत वाली विवश ज़िंदगी बसर करते हैं।
(d) वे शोर-शराबे से भी ज़िंदगी जीने को विवश हैं। - तीव्र आवाज़ का हमारे शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
(a) तंत्रिका-कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त
(b) श्रवण-कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त
(c) रक्त-कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त
(d) हृदय-कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त - निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए:
कथन (A) - वर्तमान में श्रवण शक्ति का ह्रास एक सार्वजनिक समस्या बन गई है।
कारण (R) - आर्थिक विकास की अनियमित होड़ इस समस्या के मूल कारणों में से एक है।
(a) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(b) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
(c) कथन (A) सही है तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(d) कथन (A) सही है परंतु कारण (R) कथन (A) की गलत व्याख्या करता है।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए:-
|
पश्चिमी सभ्यता मुख मोड़ रही है। वह एक नया आदर्श देख रही है। अब उसकी चाल बदलने लगी है। वह कलों की पूजा को छोड़कर मनुष्यों की पूजा को अपना आदर्श बना रही है। इस आदर्श के दर्शाने वाले देवता रस्किन और टालस्टॉय आदि हैं। पाश्चात्य देशों में नया प्रभात होने वाला है। वहाँ के गंभीर विचार वाले लोग इस प्रभात का स्वागत करने के लिए उठ खड़े हुए हैं। प्रभात होने के पूर्व ही उसका अनुभव कर लेने वाले पक्षियों की तरह इन महात्माओं को इस नए प्रभात का पूर्व ज्ञान हुआ है और हो क्यों न? इंजनों के पहिए के नीचे दबकर वहाँ वालों के भाई-बहन ही नहीं, उनकी सारी जाति पिस गई, उनके जीवन के धुरे टूट गए, उनका समस्त धन घरों से निकलकर एक-दो स्थानों में एकत्र हो गया। साधारण लोग मर रहे हैं, मज़दूरों के हाथ-पाँव फट रहे हैं, लहू बह रहा है! सर्दी से ठिठुर रहे हैं। एक तरफ दरिद्रता का अखंड राज्य है, दूसरी तरफ अमीरी का चरम दृश्य। परंतु अमीरी भी मानसिक दुखों से विमर्दित है। मशीनें बनाई तो गई थीं मनुष्यों का पेट भरने के लिए - मज़दूरों को सुख देने के लिए - परंतु वे काली-काली मशीनें ही काली बनकर उन्हीं मनुष्यों का भक्षण कर जाने के लिए मुख खोल रही हैं। प्रभात होने पर ये काली-काली बलाएँ टूर होंगी। मनुष्य के सौभाग्य का सूर्योदय होगा। शोक का विषय यह है कि हमारे और अन्य पूर्वी देशों में लोगों को मज़दूरी से तो लेशमात्र भी प्रेम नहीं है, पर वे तैयारी कर रहे हैं पूर्वोक्त काली मशीनों का आलिंगन करने की। पश्चिम वालों के तो ये गले पड़ी हुई बहती नदी की काली कमली हो रही हैं। वे छोड़ना चाहते हैं, परंतु काली कमली उन्हें नहीं छोड़ती। देखेंगे पूर्व वाले इस कमली को छाती से लगाकर कितना आनंद अनुभव करते हैं। यदि हम में से हर आदमी अपनी दस उँगलियों की सहायता से साहसपूर्वक अच्छी तरह काम करे तो हम मशीनों की कृपा से बढ़े हुए परिश्रम वालों को वाणिज्य के जातीय संग्राम में सहज ही पछाड़ सकते हैं। सूर्य तो सदा पूर्व ही से पश्चिम की ओर जाता है। पर आओ पश्चिम से आनेवाली सभ्यता के नए प्रभात को हम पूर्व से भेजें। इंजनों की वह मज़दूरी किस काम की जो बच्चों, स्त्रियों और कारीगरों को ही भूखा नंगा रखती है और केवल सोने, चाँदी, लोहे आदि धातुओं का ही पालन करती है। पश्चिम को विदित हो चुका है कि इनसे मनुष्य का दुख दिन पर दिन बढ़ता है। |
- "पाश्चात्य देशों में नया प्रभात होने वाला है।" - पंक्ति में रेखांकित पद का आशय हो सकता है? 1
- नया प्रकाश
- नया विचार
- नया सवेरा
- नया प्रभास
- संदर्भ के अनुसार गद्यांश में 'विमर्दित' शब्द का सटीक अर्थ क्या हो सकता है? 1
- ठगी हुई
- ग्लानिपूर्ण
- ईर्ष्या पूर्ण
- पीड़ा पूर्ण
- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - 1
कथन (I): मानवीय दक्षता को महत्त्व देना चाहिए।
कथन (II): मनुष्य तथा मानवीयता से प्रेम करना चाहिए।
कथन (III): अपनी चाल को बदल लेना चाहिए।
कथन (IV): मानव जीवन को आदर्श मानना चाहिए।
गद्यांश के अनुसार कौन-सा/से कथन सही हैं?- केवल कथन I सही है।
- केवल कथन II सही है।
- केवल कथन II और III सही हैं।
- केवल कथन I और IV सही हैं।
- गद्यांश के अनुसार पूर्वी देशों की समस्या क्या है? 1
- मज़दूरों के लिए अधिकारों की कमी
- मज़दूरों का पूँजी पतियों द्वारा शोषण
- मज़दूरी को कम महत्त्व का आंकना
- मज़दूरी पर अमीरी का प्रभाव
- गद्यांश के अनुसार साधारण लोग क्यों मर रहे हैं? 1
- मानव श्रम से ज्यादा मशीनों को महत्त्व मिलने के कारण
- हाथ-पाँव फटने, खून रिसने और सर्दी के कारण
- कम मज़दूरी मिलने कारण हुई बीमारियों से
- कार्य क्षेत्रों के विषैले पर्यावरण व खाने की कमी से
- गद्यांश में मशीनों को 'काली मशीनें' कहना किस बात की ओर संकेत करता है? 1
- काला रंग शोक का प्रतीक होता है।
- मशीनों द्वारा जन साधारण में बेरोज़गारी बढ़ाने के कारण
- माँ दुर्गा के अवतार काली के जैसे भक्षण करने के कारण
- मशीनों से अमीरों द्वारा काले धन अर्जन करने के कारण
- "इंजनों के पहिए के नीचे दबकर वहाँ वालों के....." इस प्रक्रिया के क्या परिणाम हुए? 1
- आर्थिक संपदा का अनुचित वितरण
- भाई बहनों व अन्य रिश्तेदारों में दुराव
- समस्त जाति द्वारा कठिन परिश्रम
- मशीनों द्वारा मनुष्यों का संरक्षण
- रस्किन और टालस्टॉय का महत्त्व है क्योंकि इन्होनें ______ । 1
- पूर्वी देशों में साम्राज्यवाद के विरुद्ध आवाज़ उठाई थी।
- मानवीय संवेदनाओं एवं गुणों को महत्त्व दिया था।
- धार्मिक कट्टरता के प्रति चेतना जगाई थी।
- गाँधी जी इन दोनों के विचारों से अत्याधिक प्रभावित थे।
- मनुष्य के सौभाग्य का सूर्योदय कब होगा? 1
- मज़दूरों द्वारा क्रांति करने से
- मशीनों के हट जाने से
- सभी लोगों को काम मिलने से
- मानवीय दक्षताओं को महत्त्व मिलने से
- मनुष्य के दुख में निरंतर वृद्धि का क्या कारण बताया गया है? 1
- मशीनों पर अत्यधिक आश्रित हो जाना
- मानवीय दक्षता की आलोचना
- पूँजी पतियों द्वारा गरीबों का शोषण
- काली मशीनों द्वारा मनुष्यों का भक्षण
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए:-
कारण लिखिए:
(क) विमान के प्रति लेखक का आकर्षित होना
(ख) लेखक ने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग को अपना अध्ययन क्षेत्र चुनना
| पहली बार मैंने एम. आई. टी. में निकट से विमान देखा था, जहाँ विद्यार्थियों को विभिन्न सब- सिस्टम दिखाने के लिए दो विमान रखे थे। उनके प्रति मेरे मन में विशेष आकर्षण था। वे मुझे बार-बार अपनी ओर खींचते थे। मुझे वे सीमाओं से परे मनुष्य की सोचने की शक्ति की जानकारी देते थे तथा मेरे सपनों को पंख लगाते थे। मैंने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग काे अपना अध्ययन क्षेत्र चुना क्योंकि उड़ान भरने के प्रति मैं आकर्षित था। वर्षों से उड़ने की अभिलाषा मेरे मन में पलती रही। मेरा सबसे प्यारा सपना यही था कि सुदूर आकाश में ऊँची और ऊँची उड़ान भरती मशीन को हैंडल किया जाए। |
‘मेरी अभिलाषा’ लगभग छह से आठ पंक्तियों में लिखिए।
