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प्रश्न
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए:-
कारण लिखिए:
(क) विमान के प्रति लेखक का आकर्षित होना
(ख) लेखक ने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग को अपना अध्ययन क्षेत्र चुनना
| पहली बार मैंने एम. आई. टी. में निकट से विमान देखा था, जहाँ विद्यार्थियों को विभिन्न सब- सिस्टम दिखाने के लिए दो विमान रखे थे। उनके प्रति मेरे मन में विशेष आकर्षण था। वे मुझे बार-बार अपनी ओर खींचते थे। मुझे वे सीमाओं से परे मनुष्य की सोचने की शक्ति की जानकारी देते थे तथा मेरे सपनों को पंख लगाते थे। मैंने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग काे अपना अध्ययन क्षेत्र चुना क्योंकि उड़ान भरने के प्रति मैं आकर्षित था। वर्षों से उड़ने की अभिलाषा मेरे मन में पलती रही। मेरा सबसे प्यारा सपना यही था कि सुदूर आकाश में ऊँची और ऊँची उड़ान भरती मशीन को हैंडल किया जाए। |
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उत्तर
- क्योंकि विमान लेखक को बार-बार अपनी ओर खींचते थे। वे सीमाओं से परे मनुष्य की सोचने की शक्ति की जानकारी देते थे तथा लेखक के सपनों को पंख लगाते थे।
- लेखक ने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग काे अपना अध्ययन क्षेत्र इसलिए चुना क्योंकि उड़ान भरने के प्रति उनका आकर्षण था। वर्षों से उड़ने की अभिलाषा लेखक के मन में पल रही थी।
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संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए
| हर किसी को आत्मरक्षा करनी होगी, हर किसी को अपना कर्तव्य करना होगा । मैं किसी की सहायता की प्रत्याशा नहीं करता। मैं किसी का भी प्रत्याह नहीं करता । इस दुनिया से मदद की प्रार्थना करने का मुझे कोई अधकिार नहीं है । अतीत में जनि लोगों ने मेरी मदद की है या भविष्य में भी जो लोग मेरी मदद करेंगे, मेरे प्रति उन सबकी करुणा मौजूद है, इसका दावा कभी नहीं किया जा सकता। इसीलिए मैं सभी लोगों के प्रति चरि कृतज्ञ हूँ । तुम्हारी परिस्तिति इतनी बुरी देखकर मैं बेहद चिंतति हूँ । लेकनि यह जान लो कि-‘तुमसे भी ज्यादा दुखी लोग इस संसार में हैं । मैं तुमसे भी ज्यादा बुरी परसि्थतिि में हूँ । इंग्लैंड में सब कुछ के लिए मुझे अपनी ही जेब से खर्च करना पड़ता है । आमदनी कुछ भी नहीं है । लंदन में एक कमरे का किराया हर सप्ताह के लिए तीन पाउंड होता है । ऊपर से अन्य कई खर्च हैं । अपनी तकलीफों के लिए मैं किससे शकिायत करूँ ? यह मेरा अपना कर्मफल है, मुझे ही भुगतना होगा ।’ |
(१) कृति पूर्ण कीजिए :
१.

२.

(२) उत्तर लिखिए :
१. परिच्छेद में उल्लिखित देश - ______
२. हर किसी को करना होगा - ______
३. लेखक की तकलीफें - ______
4. हर किसी को करनी होगी - ______
(३) निर्देशानुसार हल कीजिए :
(अ) निम्नलिखित अर्थ से मेल खाने वाला शब्द उपर्युक्त परिच्छेद से ढूँढ़कर लिखिए :
१. स्वयं की रक्षा करना - ______
२. दूसरों के उपकारों को मानने वाला - ______
(ब) लिंग पहचानकर लिखिए :
१. जेब - ______
२. दावा - ______
३. साहित्य - ______
4. सेवा - ______
(४) ‘कृतज्ञता’ के संबंध में अपने विचार लिखिए ।
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
| जापानी और चीनी वैज्ञानिकों ने भूकंप आने के कुछ दिन पूर्व जीव-जन्तुओंकी गतिविधियों के आधार पर चेतावनी देने का प्रयत्न किया है। वास्तव में ४ फरवरी, १९७५ को चीन के हाइचेंग क्षेत्र में आए भूकंप का पूर्वानुमान चीनी वैज्ञानिकों ने भूकंप आने के कुछ दिन पूर्व से मेंढकों व साँपों के अपने बिलों से एकाएक बाहर निकल आने, मुर्गियों की बेचैनी और अपने दरबों से दूर भागने तथा कुत्तों के भाैंकने और लगातार इधर-उधर भागने के आधार पर, काफी सफलतापूर्वक किया; परंतु वही वैज्ञानिक सन् १९७६ के विध्वंसक भूकंप की पूर्वसूचना नहीं दे सके। महाराष्ट्र के भूकंप के पूर्व भी वहाँ के निवासियों ने ऐसा दावा किया है कि पालतू पशु विचित्र व्यवहार कर रहे थे। जीव-जन्तुओंके विचित्र व्यवहार के अतिरिक्त, भूकंप पूर्व मिलने वाले कुछ मुख्य संकेत, जिनपर वैज्ञानिक बिरादरी एकमत हैं। |
1. उत्तर लिखिए: (2)
चीनी वैज्ञानिकों द्वारा भूकंप आने के पूर्वानुमान लगाने के आधार -
- ______
- ______
2. 'भूकंप से होने वाली हानि से बचने के उपाय' विषय पर २५ से ३० शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों:
स्वाधीन भारत में अभी तक अंग्रेजी हवाओं में कुछ लोग यह कहते मिलेंगे – जब तक विज्ञान और तकनीकी ग्रंथ हिंदी में न हो तब तक कैसे हिंदी में शिक्षा दी जाए। जब कि स्वामी श्रद्धानंद स्वाधीनता से भी चालीस साल पहले गुरुकुल काँगड़ी में हिंदी के माध्यम से विज्ञान जैसे गहन विषयों की शिक्षा दे रहे थे। ग्रंथ भी हिंदी में थे और पढ़ाने वाले भी हिंदी के थे। जहाँ चाह होती है वहीं राह निकलती है। एक लंबे अरसे तक अंग्रेज गुरुकुल काँगड़ी को भी राष्ट्रीय आंदोलन का अभिन्न अंग मानते रहे। इसमें कोई संदेह भी नहीं कि गुरुकुल के स्नातकों में स्वाधीनता की अजीब तड़प थी। स्वामी श्रद्धानंद जैसा राष्ट्रीय नेता जिस गुरुकुल का संस्थापक हो और हिंदी शिक्षा का माध्यम हो; वहीं राष्ट्रीयता नहीं पनपेगी तो कहाँ पनपेगी। स्वामी जी से मिलने देश के प्रमुख राष्ट्रीय नेता भी गुरुकुल आते रहते थे।
परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
| परोपकार ही मानवता है, जैसा कि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने लिखा है - ‘वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे।’ केवल अपने दुख-सुख की चिंता करना मानवता नहीं, पशुता है। परोपकार ही मानव को पशुता से सदय बनाता है। वस्तुतः निस्स्वार्थ भावना से दूसरों का हित साधन ही परोपकार है। मनुष्य अपनी सामर्थ्य के अनुसार परोपकार कर सकता है। दूसरों के प्रति सहानुभूति करना ही परोपकार है और सहानुभूति किसी भी रूप में प्रकट की जा सकती है। किसी निर्धन की आर्थिक सहायता करना अथवा किसी असहाय की रक्षा करना परोपकार के रूप हैं। किसी पागल अथवा रोगी की सेवा-शुश्रूषा करना अथवा किसी भूखे को अन्नदान करना भी परोपकार है। किसी को संकट से बचा लेना, किसी को कुमार्ग से हटा देना, किसी दुखी-निराश को सांत्वना देना-ये सब परोपकार के ही रूप हैं। कोई भी कार्य, जिससे किसी को लाभ पहॅुंचता है, परोपकार है, जो अपनी सामर्थ्य के अनुसार विभिन्न रूपों में किया जा सकता है। |
(१) संजाल पूर्ण कीजिए :

(२) ‘वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे’ इस पंक्ति का तात्पर्य लिखिए।
(३)
१. वचन परिवर्तन कीजिए :
१. चिंता - ______
२. भूखे - ______
२. निम्न शब्दों के लिंग पहचानिएः
१. सामर्थ्य - ______
२. परोपकार - ______
(४) ‘परहित सरिस धरम नहिं भाई’ पर अपने विचार लिखिए ।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए-
| "एक भारत श्रेष्ठ भारत' अभियान देश के विभिन्न राज्यों में सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देता है। भारत एक अनोखा राष्ट्र है, जिसका निर्माण विविध भाषा, संस्कृति, धर्म के तानों- बानों, अहिंसा और न्याय के सिद्धान्तों पर आधारित स्वाधीनता संग्राम तथा सांस्कृतिक विकास के समृद्ध इतिहास द्वारा एकता के सूत्र में बाँधकर हुआ हैं। हम इतिहास की बात करें या वर्तमान की भारतवर्ष में कला एवं संस्कृति का अनूठा प्रदर्शन हर समय एवं हर स्थान पर हुआ है। नृत्य, संगीत, चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला इत्यादि से समृद्ध भारत की पहचान पूरे विश्व में है। भारतीय वास्तुकला एवं मूर्तिकला की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। इस कला की कहानी लगभग पॉँच हज़ार वर्ष पूर्व सिंधु घाटी की सभ्यता से आरंभ होती है। इसके दो प्रमुख नगरों ; मोहनजोदाड़ो और हड़प्पा में अच्छी सड़कें, दो मंज़िले मकान, स्नान-घर, पक्की ईंटों के प्रयोग के सबूत मिले हैं। गुजरात के लोथल नामक स्थान की खुदाई से पता चलता है कि वहाँ नावों से सामान उतारने के लिए 216 x 37 मीटर लम्बी-चौड़ी तथा 15 फीट गहरी गोदी बनी हुई थी। ये लोग मिट्टी, पत्थर, धातु, हड्डी, कॉँच आदि की मूर्तियाँ एवं खिलौने बनाने में कुशल थे। धातु से बनी एक मूर्ति में एक नारी को कमर पर हाथ रखे नृत्य मुद्रा में दर्शाया गया है। दूसरी मूर्ति पशुपतिनाथ शिव की तथा तीसरी मूर्ति दाढ़ी वाले व्यक्ति की है। ये तीनों मूर्तियाँ कला के सर्वश्रेष्ठ नमूने हैं। मूर्ति का श्रेष्ठ होना मूर्तिकार के कौशल पर निर्भर करता है। मूर्ति की प्रत्येक आवभंगिमा को दर्शाने में मूर्तिकार जी-जान लगा देता है। भारत के प्रत्येक कोने में इस प्रकार की विभिन्न कलाएँ हमारी संस्कृति में प्रतिबिंबित होती हैं। इस अतुलनीय निधि का बचाव और प्रचार-प्रसार ही एक भारत श्रेष्ठ भरत की परिकल्पना है। |
- भारत को 'अनोखा राष्ट्र' कहने से लेखक का तात्पर्य है-
(क) बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन
(ख) मूर्तिकला के सर्वश्रेष्ठ नमूने
(ग) संवेदनशील भारतीय नागरिक
(घ) विभिन्नता में एकता का प्रतीक - सिंधु घाटी की सभ्यता प्रतीक है-
(क) मूर्तिकार के कौशल का
(ख) एक भारत श्रेष्ठ भारत का
(ग) प्राचीन सुव्यवस्थित सभ्यता का
(घ) स्वाधीनता संग्राम के नायकों का - गद्यांश हमें संदेश देता है-
(क) कलाकार अपनी कला का श्रेष्ठ प्रदर्शन करता है।
(ख) भारतीय नृत्य और संगीत की कला विश्व प्रसिद्ध है।
(ग) भारतीय सभ्यता व संस्कृति का संरक्षण आवश्यक है।
(घ) स्वाधीनता संग्राम में क्रांतिकारियों का विशेष योगदान है। - गदयांश में मूर्तियों का सविस्तार वर्णन दर्शाता है-
(क) सूक्ष्म अवलोकन एवं कला-प्रेम
(ख) प्राचीन मूर्तियों की भावभंगिमा
(ग) स्थूल अवलोकन एवं कला-प्रेम
(घ) सांस्कृतिक एकता एवं सौहार्द्र| - निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पोंमें से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) भारतवर्ष में कला एवं संस्कृति का अनूठा प्रदर्शन हर समय हुआ है।
कारण (R) भारतीय वास्तुकला एवं मूर्तिकला की परंपरा अत्यंत प्राचीन है।
(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत है।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
(घ) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
लालच ऐसी बुरी चीज है, जिसके फेर में पड़कर मानव मानवता को भूल जाता है। व्यकित किसी भी स्तर तक गिर जाता है। लालच इंसानियत का दुश्मन है। देशभक्ति की जगह गद्दारी करना लालच के तहत ही आता है। यदि व्यक्ति लालच न करे और संतोषपूर्वक अपना जीवन व्यतीत करे तो उसे परमसुख की प्राप्ति हो सकती है। अफसोस कि आज जीवन के हर क्षेत्र में इनका बोलबाला है। पैसा ही आज ईश्वर है। मानवता आज इस लालच के बल पर कराह रही है। संतोष ही जीवन का आधार है। परंतु हमें यह याद रखना चाहिए कि हर लालच का परिणाम बुरा ही होता है। कहा भी गया है- रूखी-सूखी खाय के ठंडा पानी पीव। |
(1) उत्तर लिखिए- (2)
गद्यांश के आधार पर लालच के अभिशाप
- ______
- ______
(2) संतोष ही जीवन का आधार है, अपने विचार 25 से 30 शब्द में लिखें। (2)
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।
|
मधुरता सत्य का अनुपान है और मितता उसका पथ्य है। जिसे हम सम्यक वाणी कहते हैं; वह सत्य, मित और मधुर होती है और वही परिणामकारक भी होती है। समाज का हित किस बात में है, समझना कभी कठिन हो सकता है। परंतु सम्यक वाणी से ही वह सधेगा, यह किसी भी आदमी के लिए समझना कठिन नहीं होना चाहिए। परंतु यही आज भारी हो रहा है। समाजहित के नाम पर कार्यकर्ताओं की वाणी दूषित हो गई हैं, अर्थात मन ही दूषित हो गया है। फिर कृति कैसे भूषित हो सकती है? आज लेखन व भाषण के साधन सुलभतम हो गए हैं। परंतु शायद इसी कारण सभ्य वाणी दुर्लभ हो गई है। सभ्य वाणी को खोकर सुलभ साधनों की प्राप्ति करना यानी कवि की भाषा में नेत्र बेचकर चित्र खरीदने जैसा है। |
(1) संजाल पूर्ण कीजिए: (2)

(2) ‘वाणी : मनुष्य को प्राप्त वरदान’ इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
‘मेरी अभिलाषा’ लगभग छह से आठ पंक्तियों में लिखिए।
निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों:
| स्वाधीन भारत में अभी तक अंग्रेजी हवाओं में कुछ लोग यह कहते मिलेंगे – जब तक विज्ञान और तकनीकी ग्रंथ हिंदी में न हो तब तक कैसे हिंदी में शिक्षा दी जाए। जब कि स्वामी श्रद्धानंद स्वाधीनता से भी चालीस साल पहले गुरुकुल काँगड़ी में हिंदी के माध्यम से विज्ञान जैसे गहन विषयों की शिक्षा दे रहे थे। ग्रंथ भी हिंदी में थे और पढ़ाने वाले भी हिंदी के थे। जहाँ चाह होती है वहीं राह निकलती है। एक लंबे अरसे तक अंग्रेज गुरुकुल काँगड़ी को भी राष्ट्रीय आंदोलन का अभिन्न अंग मानते रहे। इसमें कोई संदेह भी नहीं कि गुरुकुल के स्नातकों में स्वाधीनता की अजीब तड़प थी। स्वामी श्रद्धानंद जैसा राष्ट्रीय नेता जिस गुरुकुल का संस्थापक हो और हिंदी शिक्षा का माध्यम हो; वहीं राष्ट्रीयता नहीं पनपेगी तो कहाँ पनपेगी। |
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढक़र इसके आधार पर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:
|
आज के दौर में जिसे देखो, वही दुखी, परेशीन, हताश और उदास नजर आता है। तमाम तरह की चिंताओं ने लोगों को घेर रखा है। कोई अपनी सेहत को लेकर परेशान रहता है, तो कोई काम-धंधे की मंदी या वेतन में कटौती से दुखी है। किसी को भविष्य की चिंता सता रही है तो कोई अपने मान-सम्मान के बारे में सोच कर मायूस महसूस कर रहा है। जाहिर है, ऐसे में हर कोई खुशी के पीछे भाग रहा है। कई लोग सोचते हैं कि अमीर उद्योगपति या मोटा वेतन पाने वाले पेशेवर लोग खुश रहते हैं और गरीबी या आर्थिक विपनन्नता ही खुशी से वंचित रहने की एकमात्र वजह है। लेकिन अगर धन से खुशी आती तो दुनिया में कई धनी लोग कुंठा और हताशा में जीवन नहीं जीते। खुशी पैसा नहीं, संतुष्टि का भाव है। यह पैसे से नहीं, हमारे प्रयासों से आती है और सबसे बड़ी बात है कि खुशी के पीछे भागने से खुशी नहीं मिलती। खुशी हमारे बिल्कुल आसपास होती है, जिसे हमें पहचानना और ग्रहण करना होता है। ज्यादातर लोग खुशी हमेशा बाहर खोजते हैं, जबकि यह उसी परिवार में उपलब्ध होती है, जिसका हम अहम हिस्सा होते हैं। मुश्किल यह हैं कि आजकल परिवार की परिभाषा सिकुड़ गई है। हम सिर्फ पति-पत्नी और अपने बच्चों को ही परिवार मानने लगे हैं जबकि भाई-बहन, देवर-देवरानी, जेट-जेठानी, सास-ससुर, चाचा-मामा आदि सभी इस परिवार के सदस्य होते हैं। जब हम अपने परिवार के सदस्यों की खुशी में सच्चे मन से सम्मिलित होने लगते हैं और उनकी खुशी के लिए सक्रिय रहते हैं, तो खुशी स्वयं हमारे पास आती है। जब हम इस मानसिकता से व्यवहार करते हैं, तो परिवार के दूसरे सदस्य भी हमारे लिए ऐसा ही करते हैं। फिर खुशी न मिलने का कोई कारण नहीं हो सकता। इसलिए हम भले ही एक चारदीवारी में न रहकर अलग रहते हों, अलग खाना बनाते हैं, लेकिन मन से हम अपने संपूर्ण परिवार से जुड़े रह सकते हैं । |
(i) निम्नलिखित में से कौन-सा/से वाक्य गद्यांश से मेल खाते हैं ? [1]
-
- संपूर्ण परिवार से जुड़कर खुशी पाई जा सकती है।
- दादा-दादी, चाचा-चाची, बुआ आदि को मिलाकर परिवार मानना चाहिए।
- दुनिया में सभी धनी कुंठाग्रस्त और हताश नहीं है।
- तथाकथित खुशी को धन से नहीं खरीदा जा सकता।
विकल्प:- केवल I
- II और III
- केवल IV
- I, II, IV
(ii) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर लिखिए: [1]
कथन: हमें अपने परिवार की खुशियों में सच्चे मन से और सक्रियता से उपस्थित रहना चाहिए।
कारण: यही प्रसन्न रहने का एकमात्र साधन है।
विकल्प:
- कथन तथा कारण दोनों ग़लत हैं।
- कथन ग़लत हैं, लेकिन कारण सही है।
- कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- कथन सही है, लेकिन कारण उसकी गलत व्याख्या करता है।
(iii) प्रत्येक व्यक्ति खुशी के पीछे क्यों भाग रहा है? [1]
- आर्थिक विपन्नता के कारण
- विभिन्न चिंताओं से घिरे होने के कारण
- 'खुशी' से स्वस्थ रह पाएँगे, ऐसी सोच के कारण
- 'खुशी' से पैसा आएगा, ऐसी सोच के कारण
(iv) खुश रहने के लिए आवश्यक है: [1]
- आर्थिक संपन्नता
- प्रतिष्ठित होना
- उद्योगपति होना
- संतोषी होना
(v) आजकल लोगों की चिंता के कारण हैं: [1]
- अस्वस्थ होना, वेतन कटौती, व्यावसायिक मंदी
- आर्थिक मंदी, अस्वस्थ होना, हताशा
- उदासी, वेतन कटौती, व्यावसायिक मंदी
- निराशा, आर्थिक मंदी, अस्वस्थ होना
