Advertisements
Advertisements
प्रश्न
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
आने वाली महिला की तबीयत थोड़ी खराब थी और पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उनका इलाज होना था। चूँकि वह मेरी बुआ जी को जानते थे और बुआ जी के छोटे भाई का परिवार पटना में था इसलिए ये तो सोचने की बात नहीं थी कि वह कहाँ रहेंगे। वह बिना किसी पूर्व सूचना के हमारे घर पहुँच गए थे। उनकी ट्रेन तो शाम को थी, लेकिन ट्रेन के टाइम से न चलने का बुरा कौन मानता है। ट्रेन पाँच घंटे लेट पहुँची थी और हमारे वह मेहमान बिना खाए-पिए आधी रात में हमारे घर पहुँच गए थे। फटाफट खाना बना। सोने का जुगाड़ हुआ। वे कोई सप्ताह भर हमारे घर रहे। हम खूब घूल-मिल गए। हम रोज ठहाके लगाते, साथ खाते और पूरी मस्ती करते। ऐसा लग रहा था, मानो हम सदियों से एक-दूसरे को जानते हों। बुआ जी ने तिल की मिठाई भेजी थी। दिल्ली में उसे गजक कहते हैं, हमारे यहाँ सब तिलकुंट कहते थे। हम सबने तिल और गुड़ की उस मिठाई को खूब मजे लेकर खाया। हमारी बुआ जी सारे संसार का ख्याल रखती थीं और भाई-भतीजों में तो उनकी आत्मा ही बसती थी। उन्होंने अपने परिचित भेज दिए, हमने उन्हें रिश्तेदार बना लिया। |
(1) कृति पूर्ण कीजिए: (2)
(i)

(ii)

(2) उत्तर लिखिए: (2)
- बुआ जी की आत्मा बसती थी - .....................
- आने वाली महिला की तबीयत थी - .....................
- बुआ जी खयाल रखती थीं - .....................
- अतिथि लेखक के घर रहे - .....................
(3) ‘संयुक्त परिवार’ इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (3)
Advertisements
उत्तर
(1) (i)

(ii)

(2)
- बुआ जी की आत्मा बसती थी - भाई भतीजों में
- आने वाली महिला की तबीयत थी - थोड़ी खराब
- बुआ जी खयाल रखती थीं - सारे संसार का
- अतिथि लेखक के घर रहे - कोई सप्ताह भर
(3) संयुक्त परिवार से तात्पर्य परिवार के सभी सदस्य दादा दादी, चाचा चाची, माता पिता, उनके पुत्र सभी मिल जुलकर एकजुट रहें इसे ही हम संयुक्त परिवार कहते हैं। बदलते जमाने के साथ संयुक्त परिवार बहुत ही कम बचे हैं संयुक्त परिवार अलग-अलग होकर एकल परिवार में विभाजित हो रहे हैं और अपने जीवन को यापन कर रहे हैं एक तरफ हम देखे हैं तो संयुक्त परिवार हर किसी के लिए बहुत ही फायदेमंद है लेकिन संयुक्त परिवार की डोर सही तरह से नहीं चलाई जाए तो वास्तव में हमे बहुत सारी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए-
| कुछ नहीं पूछ पाए हालदार साहब। कुछ पल चुपचाप खड़े रहे, फिर पान के पैसे चुकाकर जीप में आ बैठे और रवाना हो गए। बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-ज़िंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है। दुखी हो गए। पंद्रह दिन बाद फिर उसी कस्बे से गुज़रे। कस्बे में घुसने से पहले ही खयाल आया कि कस्बे की हृदयस्थली में सुभाष की प्रतिमा अवश्य ही प्रतिष्ठापित होगी, लेकिन सुभाष की आँखों पर चश्मा नहीं होगा। ...क्योंकि मास्टर बनाना भूल गया। ...और कैप्टन मर गया। सोचा, आज वहाँ रुकेंगे नहीं, पान भी नहीं खाएँगे, मूर्ति की तरफ़ देखेंगे भी नहीं, सीधे निकल जाएँगे। ड्राइवर से कह दिया, चौराहे पर रुकना नहीं, आज बहुत काम है, पान आगे कहीं खा लेंगे। लेकिन आदत से मजबूर आँखें चौराहा आते ही मूर्ति की तरफ़ उठ गईं। कुछ ऐसा देखा कि चीखे, रोको! जीप स्पीड में थी, ड्राइवर ने ज़ोर से ब्रेक मारे। रास्ता चलते लोग देखने लगे। जीप रुकते-न-रुकते हालदार साहब जीप से कूदकर तेज़-तेज़ कदमों से मूर्ति की तरफ़ लपके और उसके ठीक सामने जाकर अटेंशन में खड़े हो गए। मूर्ति की आँखों पर सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा रखा हुआ था, जैसा बच्चे बना लेते हैं। हालदार साहब भावुक हैं। इतनी-सी बात पर उनकी आँखें भर आईं। |
- हालदार साहब क्या सोचकर दुखी हो गए?
(क) नेता जी की मूर्ति की आँखों पर चश्मा न देखकर
(ख) देशभक्तों का मज़ाक उड़ाने वाली बिकाऊ कौम को देखकर
(ग) घर-गृहस्थी, जवानी-ज़िंदगी आदि की बीती हुई बातें सोचकर
(घ) देश में अलग-अलग कौमों की विचारधारा में बहुत अंतर देखकर - 'सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति की आँखों पर चश्मा नहीं होगा...!' हालदार साहब ऐसा क्यों सोच रहे थे?
(क) कैप्टन के सारे चश्मे बिक जाने के कारण
(ख) कैप्टन के गंभीर रूप से बीमार हो जाने के कारण
(ग) मूर्तिकार मास्टर की भूल और कैप्टन की मृत्यु के कारण
(घ) नटखट बच्चों द्वारा चश्मा बार-बार उतार दिए जाने के कारण - हालदार साहब की आदत से मजबूर आँखों ने क्या किया?
(क) चौराहे पर आते ही पान की दुकान खोजने लगीं
(ख) उन्होंने कैप्टन का स्मरण किया और वे नम हो गईं
(ग) चौराहे पर आते ही स्वभावतः मूर्ति की ओर उठ गईं
(घ) बाँस पर चश्मे लगाकर उन्हें बेचते हुए कैप्टन को खोजने लगीं - हालदार साहब क्यों चीख पड़े?
(क) पानवाले का बदला हुआ व्यवहार देखकर
(ख) नेता जी की मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा लगा देखकर
(ग) नेता जी की मूर्ति के पास बहुत सारे बच्चों को एकत्र देखकर
(घ) ड्राइवर के द्वारा उनके आदेश का पालन न किए जाने के कारण - सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा किस बात का प्रतीक था?
(क) राष्ट्रीय धरोहरों को संरक्षण देने का
(ख) हस्तकला के प्रति बढ़ रहे अनुराग का
(ग) देशभक्तों के प्रति श्रद्धा व सम्मान का
(घ) सरकंडे जैसी वनस्पति को संरक्षित करने का
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
| आकाश में बिजली की कौंधें बीच-बीच में लपक उठती थीं। बादलों की गड़गड़ाहट सुनकर रामबोला को लगा कि मानों चैनसिंह ठाकुर अपने हलवाहा को डॉट रहे हैं। रामबोला अनायास ही ताव में आ गया। उठा और फिर नये श्रम की साधना में लग गया। दूसरे छप्पर के ढीले पड़ गए अंजर-पंजर को कसने के 'लिए पास ही खलार में उगी लंबी घास-पतवार उखाड़ लाया। रामबोला ने भिखारी बस्ती के और लोगों को जैसे घास बैँटकर रस्सी बनाते देखा था; वैसे ही बैंटने लगा। जैसे-तैसे रस्सियाँ बैंटी, जस-तस टट्टर बाँधा। अब जो उसकी आधी से अधिक उधड़ी हुई छावन पर ध्यान गया तो नन्हे मन के उत्साह को फिर' काठ मार गया। घास-फूस, ज्यौनारों में जूठन के साथ-साथ बाहर फेंकी गई पत्तलों और चिथड़े-गुदड़ों से 'बनाई गई वह छोटी -सी छपरिया फिर से छानें के लिए वह सामान कहाँ से जुटाए? हवा दूवारा उड़ाए हुए.माल वह इस बरसात में कहाँ-कहाँ ढूँढ़ैगा। दैव आज प्रलय की बरखा करके ही दम लेंगे। हवा के मारे औरों के छप्पर भी पेंगें ले रहे हैं। |
(1) लिखिए: (2)
|
गद्यांश में उल्लिखित प्राकृतिक घटक |
| ↓ |
| ____________ |
| ____________ |
| ____________ |
| ____________ |
(2) लिखिए:
(i) एक शब्द में उत्तर लिखिए : (1)
- हलवाहा को डाँटने वाला - ____________
- अनायास ही ताव में आने वाला - ____________
(ii) विशेषता लिखिए : (1)
- बिजली - ______
- बादल - ______
(3) 'विनाश और निर्माण प्रकृति के नियम हैं' इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (3)
निम्नलिखित अपठित गदूयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
अब अकेला बैल किस काम का? उसका जोड़ बहुत ढूँढ़ा गया, पर न मिला। निदान यह सलाह ठहरी कि इसे बेच डालना चाहिये। गाँव में एक समझू साहु थे, वह इकका गाड़ी हाँकते थे। गाँव के गुड़, घी लाद कर मंडी ले जाते, मंडी से तेल, नमक भर लाते और गाँव में बेचते। इस बैल पर उनका मन लहराया। उन्होंने सोचा, यह बैल हाथ लगे तो दिनभर में बेखटके तीन खेप हों। आजकल तो एक ही खेप में लाले पड़े रहते हैं। बैल देखा, गाड़ी में दौड़ाया, बाल-भौंरी की पहचान करायी, मोल-तोल किया और उसे लाकर दूवार पर बाँध ही दिया। एक महीने में दाम चुकाने का वादा ठहरा। चौधरी को भी गरज थी ही, घाटे की परवाह न की। समझू साहु ने नया बेल पाया, तो लगे उसे रगेदने। वह दिन में तीन-तीन, चार-चार खेपें करने लगे। न चारे की फिक्र थी, न पानी की, बस खेपों से काम था। |
(1) कृति पूर्ण कीजिए - (2)

(2) लिखिए - (2)
बैल को देखकर समझू ने यह किया :
- ____________
- ____________
- ____________
- ____________
(3) 'हमारे अन्नदाता किसान' इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए-
| परिश्रम यानी मेहनत अपना जवाब आप ही है। उसका अन्य कोई जवाब न है, न हो सकता है अर्थात जिस काम के लिए परिश्रम करना आवश्यक हो, हम चाहें कि वह अन्य किसी उपाय से पूरा हो जाए, ऐसा हो पाना कतई संभव नहीं। वह तो लगातार और मन लगाकर परिश्रम करने से ही होगा। इसी कारण कहा जाता है कि 'उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मी' अर्थात उद्योग या परिश्रम करने वाले पुरुष सिंहों का ही लक्ष्मी वरण करती है। सभी प्रकार की धन-संपत्तियाँ और सफलताएँ लगातार परिश्रम से ही प्राप्त होती हैं। परिश्रम ही सफलता की कुंजी है, यह परीक्षण की कसौटी पर कसा गया सत्य है। निरंतर प्रगति और विकास की मंज़िलें तय करते हुए हमारा संसार आज जिस स्तर और स्थिति तक पहुँच पाया है, वह सब हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहने से नहीं हुआ। कई प्रकार के विचार बनाने, अनुसंधान करने, उनके अनुसार लगातार योजनाएँ बनाकर तथा कई तरह के अभावों और कठिनाइयों को सहते हुए निरंतर परिश्रम करते रहने से ही संभव हो पाया है। आज जो लोग सफलता के शिखर पर बैठकर दूसरों पर शासन कर रहे हैं, आदेश दे रहे हैं, ऐसी शक्ति और सत्ता प्राप्त करने के लिए पता नहीं किन-किन रास्तों से चलकर, किस-किस तरह के कष्ट और परिश्रमपूर्ण जीवन जीने के बाद उन्हें इस स्थिति में पहुँच पाने में सफलता मिल पाई है। हाथ-पैर हिलाने पर ही कुछ पाया जा सकता है, उदास या निराश होकर बैठ जाने से नहीं। निरंतर परिश्रम व्यक्ति को चुस्त-दुरुस्त रखकर सजग तो बनाता ही है, निराशाओं से दूर रख आशा-उत्साह भरा जीवन जीना भी सिखाया करता है। |
- परीक्षण की कसौटी पर कसे जाने से तात्पर्य है-
(क) सत्य सिद्ध होना
(ख) कथन का प्रामाणिक होना
(ग) आकलन प्रक्रिया तीव्र होना
(घ) योग्यता का मूल्यांकन होना - 'हाथ-पैर हिलाने से कुछ पाया जा सकता है।' पंक्ति के माध्यम से लेखक ______ की प्रेरणा दे रहे हैं।
(क) तैराकी
(ख) परिश्रम
(ग) परीक्षण
(घ) हस्तशिल्प - निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए -
- परिश्रम व्यक्ति को सकारात्मक बनाता है।
- आज संसार पतन की ओर बढ़ रहा है।
- पुरुषार्थ के बल पर ही व्यक्ति धनार्जन करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा /कौन-से कथन सही है / हैं?
(क) केवल (i)
(ख) केवल (ii)
(ग) (i) और (iii)
(घ) (ii) और (iii)
- निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द गद्यांश में दिए गए 'अनुसंधान' शब्द के सही अर्थ को दर्शाता है-
(क) परीक्षण
(ख) योजनाएँ
(ग) अन्वेषण
(घ) सिंहमुपैति - निम्नलिखित में से किस कथन को गद्यांश की सीख के आधार पर कहा जा सकता है -
(क) अल्पज्ञान खतरनाक होता है।
(ख) गया समय वापस नहीं आता है।
(ग) मेहनत से कल्पना साकार होती है।
(घ) आवश्यकता आविष्कार की जननी है।
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-
|
आज संपूर्ण विश्व में एक धर्म दूसरे धर्म का दुश्मन बन बैठा है। धर्म का उद्देश्य सिर्फ मानवता की रक्षा करना है। कर्म, भक्ति, ज्ञान इनके त्रिरत हैं। इनमें से किसी एक के न होने पर धर्म को सही अर्थ में परिभाषित नहीं किया जा सकता है। आज धर्म के नाम पर विभाजन, संप्रदायवाद, सामाजिक बैर आम हैं। धर्म किसी से बैर करना नहीं सिखाता। धर्म सिर्फ जोड़ता है। धर्म का आश्रय लेकर आज कुछ स्वार्थी लोग कुछ लोगों को पथश्रष्ट कर रहे हैं। हमें कबीर की उक्ति हमेशा याद रखनी चाहिए- 'कांकड़ पाथर जोड़ के मस्जिद लयी बनाय।। |
(1) उत्तर लिखिए-
धर्म की विशेषताएँ लिखिए। (2)
- ____________
- ____________
(2) धर्म विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए- (2)
निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।
|
“हम रसायनों के युग में रह रहे हैं। हमारे पर्यावरण कीं सारी वस्तुएँ और हम सब, रासायनिक यौगिकों के बने हुए हैं। हवा मिट्टी, पानी, खाना, वनस्पति और जीव-जंतु ये सब अजूबे जीवन कौ रासायनिक सच्चाई ने पैदा किए हैं। प्रकृति में सैकड़ों -हजारों रासायनिक पदार्थ हैं। रसायन न होते तो धरती पर जीवन भी नहीं होता। पानी, जो जीवन के आधार है, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बना एक रासायनिक यौगिक है। मधुर-मीठी चीनी, कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बनी है। कोयला और तेल, बीमारियों से मुक्ति दिलाने वाली औषधियाँ, एंटीबायोटिक्स, एस्प्रीन और पेनिसिलीन, अनाज साब्जियाँ फल और मेवे-सभी तो रसायन हैं। जीवन जोखिम से भरा है, गुफामानव ने जब भी आग जलाई, उसने जल जाने का खतरा उठाया। जीवन-यापन के आधुनिक तरीकों के कुछ खतरों को कम किया है, पर कुछ खतरे अनेक गुना बढ़ गए हैं। ये खतरे नुकसान और शारीरिक चोट के रूप में हैं। हम सभी अपने दैनिक जीवन में जोखिम उठाते हैं। जैसे जब हम सड़क पार करते हैं, स्टोव जलातें हैं, कार में बैठते हैं, खेलते हैं, पालतू जानवरों को दुलारते हैं, घरेलू काम-काज करते हैं या केवल पेड़ के नीचे बैठे होते हैं, तो हम जोखिम उठा रहे होते हैं। इन जोखिमों में से कुछ तात्कालिक हैं, जैसे जलने का, गिरने का या अपने ऊपर कुछ गिर जाने का खतरा। कुछ खतरे ऐसे हैं जिनमें प्रभाव लंबे समय के बाद सामने आते हैं जैसे लंबे समय तक शोर-गुल वाले पर्यावरण में रहने वाले व्यक्तियों की श्रवणशक्ति कम हो सकती है। क्या रसायन भी जोखिम उत्पन्न करते हैं ? स्पष्ट है कि कुछ अवश्य करते हैं। उनमें से अनेक बहुत अधिक जहरीले हैं, कुछ प्रचंड 'विस्फोट करते हैं और कुछ अन्य अचानक आग पकड़ लेते हैं, ये रसायनों के कुछ तात्कालिक 'उग्र' खतरे हैं। रसायनों में कुछ दीर्घकालीन खतरे भी होते हैं, क्योंकि कुछ रसायनों के संपर्क में अधिक समय तक रहने पर, चाहे उन रसायनों का स्तर लेशमात्र ही क्यों न हो, शरीर में बीमारियाँ पैदा हो सकती हैं।'' |
1. आकृति पूर्ण कीजिए: (2)

2. परिच्छेद में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढकर लिखिए। (2)
- जीव - ______
- सैकड़ों - ______
- काम - ______
- मधुर - ______
3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए । (2)
'ध्वनि प्रदूषण' इस विषय पर अपने विचार लिखिए।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए।
|
वैज्ञानिकों का मानना है कि दुनियाभर में बढ़ते पर्यावरण संकट को कम करने में जैविक खेती एक उपचारक भूमिका निभा सकती है। गौरतलब है कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में प्राकृतिक खेती बड़े पैमाने पर अपनाई जा रही है। धीरे-धीरे दक्षिण, मध्य भारत और उत्तर भारत में भी यह किसानों में लोकप्रिय हो रही है। अब किसानों ने जैविक खेती को एक सशक्त विकल्प के रूप में अपना लिया है। गौरतलब है कि जैविक या प्राकृतिक खेती की तरफ भारतीय किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। धीरे-धीरे जैविक खेती का प्रचलन बढ़ रहा है। जैविक बीज, जैविक खाद, पानी, किसानी के यंत्रों आदि की आसानी से उपलब्धता जैविक खेती की लोकप्रियता को और अधिक बढ़ा सकती है। प्राकृतिक खेती को लेकर अनुसंधान भी बहुत हो रहे हैं। किसान नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। इससे कृषि वैज्ञानिक भी प्राकृतिक खेती को लेकर अधिक उत्साहित हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि जैविक या प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से पर्यावरण,खाद्यान्न, भूमि, इंसान की सेहत, पानी की शुद्धता को और बेहतर बनाने में मदद मिलती है। रासायनिक खादों और कीटनाशकों के इस्तेमाल से होने वाली बीमारियों और समस्याओं की जानकारी न होने की वजह से किसान इनका प्रयोग काफी ज़्यादा करने लगे हैं। वहीं दूसरी तरफ सिक्किम में प्राकृतिक खेती से पर्यावरण को जितनी मदद मिली है उससे साफ़ हो गया है कि प्राकृतिक खेती को अपनाकर कई समस्याओं का समाधान हो सकता है। |
- आज जैविक खेती की माँग क्यों बढ़ती जा रही है?
- सस्ती होने के कारण
- अधिक उत्पादन के कारण
- स्वच्छ पर्यावरण के कारण
- सरकारी मदद मिलने के कारण
- सही कथन का चयन कीजिए-
- उत्तर भारत में जैविक खेती के लिए प्रेरणा की ज़रूरत है।
- पूर्वोत्तर राज्यों में जैविक खेती के प्रति अधिक उत्साह है।
- लोगों में प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी का अभाव है।
- प्राकृतिक खेती के लिए विश्वविद्यालय से शिक्षित होना ज़रूरी है।
- जैविक खेती को किसानों की पहली पसंद बनाने के लिए क्या करना चाहिए?
- रासायनिक खेती निषिद्ध की जानी चाहिए।
- बाजार में केवल जैविक उत्पादों बिक्री होनी चाहिए।
- युवकों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करना चाहिए।
- जैविक बीज, खाद, किसानी के यंत्र आदि सुविधाएँ उपलब्ध करवानी चाहिए।
- वर्तमान समय में खेती के लिए; अनुसंधानों में बढ़ोतरी किसके बारे में हुई है?
- जैविक खेती
- रासायनिक खाद
- नई-नई दवाइयाँ
- नए बीज
- किसान कीटनाशकों और रासायनिक खादों का अधिक प्रयोग क्यों करने लगे हैं?
- सहज उपलब्धता के कारण
- दुष्प्रभावों की जानकारी न होने के कारण
- अधिक प्रचार-प्रसार के कारण
- सस्ती होने के कारण
निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी/वस्तुपरक प्रश्नों के उत्तर सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए।
|
हमारे देश में हिंदी फ़िल्मों के गीत अपने आरंभ से ही आम दर्शक के सुख-दुख के साथी रहे हैं। वर्तमान समय में हिंदी फ़िल्मों के गीतों ने आम जन के हृदय में लोकगीतों सी आत्मीय जगह बना ली है। जिस तरह से एक जमाने में लोकगीत जनमानस के सुख-दुख, आकांक्षा, उल्लास और उम्मीद को स्वर देते थे, आज फ़िल्मी गीत उसी भूमिका को निभा रहे हैं। इतना ही नहीं देश की विविधता को एकता के सूत्र में बाँधने में हिंदी फ़िल्मों का योगदान सभी स्वीकार करते हैं। हिंदी भाषा की शब्द संपदा को समृद्ध करने का जो काम राजभाषा विभाग तत्सम शब्दों की सहायता से कर रहा है वही कार्य फ़िल्मी गीत और डायलॉग लिखने वाले विविध क्षेत्रीय भाषाओं के मेल से करते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। यह गाने जन-जन के गीत इसी कारण बन सके क्योंकि इनमें राजनीति के उतार-चढ़ाव की अनुगूंजों के साथ देहाती कस्बायी और नए बने शहरों का देशज जीवन दर्शन भी आत्मसात किया जाता रहा है। भारत की जिस गंगा-जमुनी संस्कृति का महिमामंडन बहुधा होता है उसकी गूंज भी इन गीतों में मिलती है। आजादी की लड़ाई के दौरान लिखे प्रदीप के गीत हों या स्वाधीनता प्राप्ति साथ ही होनेवाले देश के विभाजन की विभीषिका, सभी को भी इन गीतों में बहुत संवेदनशील रूप से व्यक्त किया गया है। हिंदी फ़िल्मी गीतों के इस संसार में हिंदी-उर्दू का 'झगड़ा' भी कभी पनप नहीं सका। प्रदीप, नीरज जैसे शानदार हिंदी कवियों, इंदीवर तथा शैलेंद्र जैसे श्रेष्ठ गीतकारों और साहिर, कैफी, मजरूह जैसे मशहूर शायरों को हिंदी सिनेमा में हमेशा एक ही बिरादरी का माना जाता रहा है। यह सिनेमा की इस दुनिया की ही खासियत है कि एक तरफ गीतकार साहिर ने 'कहाँ हैं कहाँ हैं/मुहाफिज खुदी के/जिन्हें नाज है हिंद पर/वो कहाँ हैं' लिखा तो दूसरी तरफ उन्होंने ही 'संसार से भागे फिरते हो/भगवान को तुम क्या पाओगे !/ये भोग भी एक तपस्या है/तुम प्यार के मारे क्या जानोगे/अपमान रचयिता का होगा/रचना को अगर ठुकरा ओगे!' जैसी पंक्तियाँ भी रची हैं। परवर्तियों में गुलजार ऐसे गीतकार हैं जिन्होंने उर्दू, हिंदी, पंजाबी, राजस्थानी के साथ पुरबिया बोलियों में मन को मोह लेने वाले गीतों की रचना की है। बंदिनी के 'मोरा गोरा अंग लइले, मोहे श्याम रंग दइदे', 'कजरारे-कजरारे तेरे कारे-कारे नयना!', 'यारा सिली सिली रात का ढलना' और 'चप्पा चप्पा चरखा चले' जैसे गीतों को रचकर उन्होंने भारत की साझा संस्कृति को मूर्तिमान कर दिया है। वस्तुतः भारत में बनने वाली फिल्मों में आने वाले गीत उसे विश्व-सिनेमा में एक अलग पहचान देते हैं। ये गीत सही मायने में भारतीय संस्कृति की खूबसूरती को अभिव्यक्त करते हैं। |
- हिंदी फिल्मी गीतों और लोकगीतों में क्या समानता है?
A. ये लोगों के रीति-रिवाजों, उनकी लालसाओं उनकी सोच और कल्पनाओं को स्वर देते हैं।
B. ये लोगों के जीवन के अनुभवों, आमोद प्रमोद, विचारों और दर्शन को स्वर देते हैं।
C. ये लोगों के आनंद उनके शोक, उनके हर्ष और उनकी आशाओं को स्वर देते हैं।
D. ये लोगों के जीवन के यथार्थ और कठोरताओं में ज़िंदा रहने की चाह को स्वर देते हैं। - हिंदी भाषा की शब्द संपदा को समृद्ध करने का काम फिल्मी गीतों ने किस प्रकार किया?
A. राजभाषा विभाग से प्रेरणा पाकर
B. विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं के मेल से
C. क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों को प्रोत्साहित करके
D. विदेशी भाषाओं की फिल्मों को हतोत्साहित करके - कथन (A) और कारण (R) को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए:
कथन (A): हिंदी फिल्मों के गाने जन जन के गीत बन गए हैं।
कारण (R): इन गीतों में राजनीति की अनुगूंजों के साथ, देहाती कस्बायी और नए बने शहरों का जीवन दर्शन थी आत्मसात किया जाता रहा है।
A. कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
B. कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत हैं।
C. कथन (A) सही है और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है।
D. कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है। - 'हिंदी फिल्मी गीतों के इस संसार में हिंदी-उर्दू का 'झगड़ा' भी कभी पनप नहीं सका।' उपर्युक्त कथन के पक्ष में निम्नलिखित तर्कों पर विचार कीजिए।
1. यहाँ सभी गीतकारों को एक ही बंधुत्व वर्ग का माना जाता है।
2. ये गीतकार सभी भाषाओं में समान रूप से गीत लिखते हैं।
3. इन गीतकारों में वैमनस्य व प्रतिस्पर्धा का भाव नहीं है।
A. 1 सही है।
B. 2 सही है।
C. 3 सही है।
D. 1 और 2 सही है। - उपर्युक्त गद्यांश में हिंदी फिल्मी गीतों की किस विशेषता पर सर्वाधिक बल दिया गया है?
A. ये गीत कलात्मक श्रेष्ठता व सर्वधर्म समभाव को अभिव्यक्त करते हैं।
B. ये गीत सांप्रदायिक सद्धाव को अभिव्यक्त करते हैं।
C. ये गीत पारस्परिक प्रेम व सद्भाव को अभिव्यक्त करते हैं।
D. ये गीत हमारी तहज़ीब की खूबसूरती को अभिव्यक्त करते हैं।
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
|
सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति के बाद शनि ग्रह की कक्षा है। शनि सौरमंडल का दूसरा बड़ा ग्रह है। यह हमारी पृथ्वी के करीब 750 गुना बड़ा है। शनि के गोले का व्यास 116 हज़ार किलोमीटर है; अर्थात्, पृथ्वी के व्यास से करीब नौ गुना अधिक। सूर्य से शनि ग्रह की औसत दूरी 143 करोड़ किलोमीटर है। यह ग्रह प्रति सेकंड 9.6 किलोमीटर की औसत गति से करीब 30 वर्षों में सूर्य का एक चक्कर लगाता है। अत: 90 साल का कोई बूढ़ा आदमी यदि शनि ग्रह पर पहुँचेगा, तो उस ग्रह के अनुसार उसकी उम्र होगी सिर्फ तीन साल! हमारी पृथ्वी सूर्य से करीब 15 करोड़ किलोमीटर दूर है। तुलना में शनि ग्रह दस गुना अधिक दूर है। इसे दूरबीन के बिना कोरी आँखों से भी आकाश में पहचाना जा सकता है। पुराने ज़माने के लोगों ने इस पीले चमकीले ग्रह को पहचान लिया था। प्राचीन काल के ज्योतिषियों को सूर्य, चंद्र और काल्पनिक राहु-केतु के अलावा जिन पाँच ग्रहों का ज्ञान था उनमें शनि सबसे अधिक दूर था। शनि को 'शनैश्वर' भी कहते हैं। आकाश के गोल पर यह ग्रह बहुत धीमी गति से चलता दिखाई देता है, इसीलिए प्राचीन काल के लोगों ने इसे 'शनैःचर नाम' दिया था। 'शनैःचर' का अर्थ होता है - धीमी गति से चलने वाला। |
- तालिका पूर्ण कीजिए: [2]
प्राचीन ज्योतिषियों को इन ग्रहों का ज्ञान था। ↓ ↓ ↓ ↓ - परिच्छेद में आए हुए शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए: [2]
- शनि - ______
- दूरबीन - ______
- पृथ्वी - ______
- आकाश - ______
- 'अंतरिक्ष यात्रा' इस विषय पर ४० से ५० शब्दों में अपने विचार लिखिए। [2]
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इस पर आधारित प्रश्नों के सर्वाधिक वाले विकल्प चुनकर लिखिए।
|
अठारह साल के युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञाननंदा इन दिनों छाए हुए हैं। पाँच बार विश्व चैंपियन रहे मैग्नस कार्लसन के साथ शतरंज वर्ल्ड कप का अंतिम मुकाबला भले ही वह नहीं जीत पाए। पर, कम उम्र में ही सफलता और उम्मीदों का भारी ताज वह पहन चुके हैं। उनकी सादगी, शालीनता पसंद की जा रही है। अच्छी बात है कि वे हार-जीत दोनों में सहज दिखते हैं। बीते साल एक ऑनलाइन शतरंज टूर्नामेंट में कार्लसन को हराने के बाद प्रज्ञान ने कमाल बात कही। उन्होंने कहा, 'यह केवल एक जीत है, कोई अंतिम नहीं। आगे कई चुनौतियाँ हैं। बहुत कुछ करना है। यही हार के साथ होता है। किसी एक हार से सब खत्म नहीं हो जाता।' अब सवाल यह है क्या अपनी सफलता की खुशी मनाना गलत है? माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स कहते हैं, 'सफलता की खुशी मनाने में हर्ज नहीं है। पर ज्यादा जरूरी है कि हम असफलताओं के सबक पर भी ध्यान देते रहें।' सफलता के साथ बहुत कुछ बदलता है। कभी हम बदल जाते हैं तो कभी दूसरे। कितनी ही बार तो हमें अपने से आगे दिखना ही बंद हो जाता है। इस कारण कभी हम अतिआत्मविश्वास के शिकार होकर जरूरी मेहनत नहीं करते, तो कभी दूसरों से हमारे रिश्ते खराब हो जाते हैं। ऐसे में सबसे पहले अपने घमंड और आक्रामक होने की इच्छा को काबू करना जरूरी हो जाता है। कितनी ही प्रतिभाएँ एक-दो बड़ी जीत की चमक-धमक में ही अटक कर रह जाती है। या समझ नहीं आता कि आगे क्या? ऐसे में सहजता ही हमारी उपलब्धियों के कद को बढ़ाती है। हम विनम्र रहें, सफलता की चाह हो और मेहनत करने में आगे रहें। ध्यान प्रक्रिया पर हो । हम नतीजा भले ही हार जाएँ, पर हमारा उत्साह हमेशा बना रहे। |
- निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्प में से कोई एक सही विकल्पों चुनकर लिखिए। [1]
कथन: सफलता के मद में हमें अपने से आगे दिखना ही बंद हो जाता है।
कारण: हम अति आत्मविश्वास के शिकार होकर जरूरी मेहनत नहीं करते।- कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
- कथन गलत हैं लेकिन कारण सही है।
- कथन सही है लेकिन कारण उसकी गलत व्याख्या करता है।
- कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- सफलता प्राप्ति के बाद किसे अपने नियंत्रण में रखना आवश्यक है? [1]
- दूसरों के प्रति अपने व्यवहार को
- अहंकार और आक्रोश की इच्छा को
- आत्मविश्वास और जीत की खुशी को
- अपने प्रति दूसरों के व्यवहार को
- बिल गेट्स के अनुसार सफलता की खुशी मनाने से अधिक आवश्यक है: [1]
- असफलताओं की चुनौतियों को स्वीकारना
- असफलताओं के कारणों पर ध्यान देना
- नए लक्ष्य के लिए संघर्ष करना
- असफलताओं से शिक्षा ग्रहण करना
- 'किसी एक हार से सब खत्म नहीं हो जाता' - पंक्ति का आशय है: [1]
- जीत-हार जीवन के दिन और रात हैं।
- असफल होने से जीवन समाप्त नहीं होता।
- हार के बाद जीत अवश्य आती है।
- लक्ष्य प्राप्ति के लिए संघर्ष करना चाहिए।
-
प्रज्ञाननंदा की प्रसिद्धि का कारण है: [1]
- कम उम्र में शतरंज के क्षेत्र में नाम कमाना
- उनकी सादगी, सरलता और शालीनता
- हार-जीत को समान भाव से स्वीकारना
- जीवन को चुनौती के रूप में स्वीकरना
