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प्रश्न
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
| आकाश में बिजली की कौंधें बीच-बीच में लपक उठती थीं। बादलों की गड़गड़ाहट सुनकर रामबोला को लगा कि मानों चैनसिंह ठाकुर अपने हलवाहा को डॉट रहे हैं। रामबोला अनायास ही ताव में आ गया। उठा और फिर नये श्रम की साधना में लग गया। दूसरे छप्पर के ढीले पड़ गए अंजर-पंजर को कसने के 'लिए पास ही खलार में उगी लंबी घास-पतवार उखाड़ लाया। रामबोला ने भिखारी बस्ती के और लोगों को जैसे घास बैँटकर रस्सी बनाते देखा था; वैसे ही बैंटने लगा। जैसे-तैसे रस्सियाँ बैंटी, जस-तस टट्टर बाँधा। अब जो उसकी आधी से अधिक उधड़ी हुई छावन पर ध्यान गया तो नन्हे मन के उत्साह को फिर' काठ मार गया। घास-फूस, ज्यौनारों में जूठन के साथ-साथ बाहर फेंकी गई पत्तलों और चिथड़े-गुदड़ों से 'बनाई गई वह छोटी -सी छपरिया फिर से छानें के लिए वह सामान कहाँ से जुटाए? हवा दूवारा उड़ाए हुए.माल वह इस बरसात में कहाँ-कहाँ ढूँढ़ैगा। दैव आज प्रलय की बरखा करके ही दम लेंगे। हवा के मारे औरों के छप्पर भी पेंगें ले रहे हैं। |
(1) लिखिए: (2)
|
गद्यांश में उल्लिखित प्राकृतिक घटक |
| ↓ |
| ____________ |
| ____________ |
| ____________ |
| ____________ |
(2) लिखिए:
(i) एक शब्द में उत्तर लिखिए : (1)
- हलवाहा को डाँटने वाला - ____________
- अनायास ही ताव में आने वाला - ____________
(ii) विशेषता लिखिए : (1)
- बिजली - ______
- बादल - ______
(3) 'विनाश और निर्माण प्रकृति के नियम हैं' इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (3)
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उत्तर
(1)
|
गद्यांश में उल्लिखित प्राकृतिक घटक |
| ↓ |
| बिजली |
| बादल |
| घास |
| आकाश |
(2) (i)
- चैनसिंह ठाकुर
- रामबोला
(ii)
- बिजली - लपकना
- बादल - गड़गड़ाहट
(3) इस संसार में कुछ भी अपरिवर्तनशील नहीं है। सब कुछ नश्वर और क्षणभंगुर है। परिवर्तन प्रकृति का नियम है। जो परिवर्तन को और अनित्यता को समझता है, वस्तुत: वही ज्ञानी है। निर्माण और विनाश परस्पर विरोधी होते हुए भी एक सिक्के के दो पहलुओं की तरह जुड़े रहते है। इन्हे अलग-अलग नही किया जा सकता। सदा के लिए कोई भी इस दुनिया में नहीं रह सकता है। बीज का वृक्ष बनना रूप परिवर्तन होता है यह निर्माण नहीं कहलाता। परन्तु वृक्ष को काट कर उससे अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ बनाना, निर्माण है तथा उस वृक्ष को काट कर नष्ट कर देना, या इन्धन के रूप में इसका प्रयोग करना ही विनाश कहलाता है।
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संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए-
| परिश्रम यानी मेहनत अपना जवाब आप ही है। उसका अन्य कोई जवाब न है, न हो सकता है अर्थात जिस काम के लिए परिश्रम करना आवश्यक हो, हम चाहें कि वह अन्य किसी उपाय से पूरा हो जाए, ऐसा हो पाना कतई संभव नहीं। वह तो लगातार और मन लगाकर परिश्रम करने से ही होगा। इसी कारण कहा जाता है कि 'उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मी' अर्थात उद्योग या परिश्रम करने वाले पुरुष सिंहों का ही लक्ष्मी वरण करती है। सभी प्रकार की धन-संपत्तियाँ और सफलताएँ लगातार परिश्रम से ही प्राप्त होती हैं। परिश्रम ही सफलता की कुंजी है, यह परीक्षण की कसौटी पर कसा गया सत्य है। निरंतर प्रगति और विकास की मंज़िलें तय करते हुए हमारा संसार आज जिस स्तर और स्थिति तक पहुँच पाया है, वह सब हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहने से नहीं हुआ। कई प्रकार के विचार बनाने, अनुसंधान करने, उनके अनुसार लगातार योजनाएँ बनाकर तथा कई तरह के अभावों और कठिनाइयों को सहते हुए निरंतर परिश्रम करते रहने से ही संभव हो पाया है। आज जो लोग सफलता के शिखर पर बैठकर दूसरों पर शासन कर रहे हैं, आदेश दे रहे हैं, ऐसी शक्ति और सत्ता प्राप्त करने के लिए पता नहीं किन-किन रास्तों से चलकर, किस-किस तरह के कष्ट और परिश्रमपूर्ण जीवन जीने के बाद उन्हें इस स्थिति में पहुँच पाने में सफलता मिल पाई है। हाथ-पैर हिलाने पर ही कुछ पाया जा सकता है, उदास या निराश होकर बैठ जाने से नहीं। निरंतर परिश्रम व्यक्ति को चुस्त-दुरुस्त रखकर सजग तो बनाता ही है, निराशाओं से दूर रख आशा-उत्साह भरा जीवन जीना भी सिखाया करता है। |
- परीक्षण की कसौटी पर कसे जाने से तात्पर्य है-
(क) सत्य सिद्ध होना
(ख) कथन का प्रामाणिक होना
(ग) आकलन प्रक्रिया तीव्र होना
(घ) योग्यता का मूल्यांकन होना - 'हाथ-पैर हिलाने से कुछ पाया जा सकता है।' पंक्ति के माध्यम से लेखक ______ की प्रेरणा दे रहे हैं।
(क) तैराकी
(ख) परिश्रम
(ग) परीक्षण
(घ) हस्तशिल्प - निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए -
- परिश्रम व्यक्ति को सकारात्मक बनाता है।
- आज संसार पतन की ओर बढ़ रहा है।
- पुरुषार्थ के बल पर ही व्यक्ति धनार्जन करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा /कौन-से कथन सही है / हैं?
(क) केवल (i)
(ख) केवल (ii)
(ग) (i) और (iii)
(घ) (ii) और (iii)
- निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द गद्यांश में दिए गए 'अनुसंधान' शब्द के सही अर्थ को दर्शाता है-
(क) परीक्षण
(ख) योजनाएँ
(ग) अन्वेषण
(घ) सिंहमुपैति - निम्नलिखित में से किस कथन को गद्यांश की सीख के आधार पर कहा जा सकता है -
(क) अल्पज्ञान खतरनाक होता है।
(ख) गया समय वापस नहीं आता है।
(ग) मेहनत से कल्पना साकार होती है।
(घ) आवश्यकता आविष्कार की जननी है।
निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।
|
आरा शहर। भादों का महीना। कृष्ण पक्ष की अँधेरी रात। जोरों की बारिश। हमेशा की भाँति बिजली का गुल हो जाना। रात के 'गहराने और सूनेपन को और सघन भयावह बनाती बारिश कौ तेज़ आवाज़। अंधकार में डूबा शहर तथा अपने घरें में सोए - दुबके लोग ! लेकिन सचदेव बाबू की आँखों में नींद नहीं। अपने आलीशान भवन के भीतर अपने शयनकक्ष में बेहद आरामदायक बिस्तर पर लेटे थे वे। पर लेटने भर से ही तो नींद नहीं आती। नींद के लिए - जैसी निर्शिचितता और बेफिक्री की जरुरत होती है, वह तो उनसे कोसों दूर थी। हालाँकि यह स्थिति सिर्फ सचदेव बाबू की ही नहीं थी। पूरे शहर का खौफ का यह कहर था। आए दिन चोरी, लूट, हत्या, बलात्कार, राहजनी और अपहरण की घटनाओं ने लोगों को बेतरह भयभीत और असुरक्षित बना दिया था। कभी रातों में गुलज़ार रहने वाला उनका 'यह शहर अब शाम गहराते ही शमशानी सन्ताटे में तब्दील होने लगा था। अब रातों में सड़कों और गलियों में नज़र आने वाले लोग शहर के सामान्य और संभ्रांत नागरिक नहीं, संदिग्ध लोग होते थे। कब 'किसके यहाँ कया हो जाए, सब आतंकित थे। जब इस शहर में अपना यह घर बनवा रहे थे सचदेव बाबू तो बहुत प्रसन्न थे कि महानगरों में दमघोंटू, विषाक्त, अजनबीयत और छल - छदमी वातावरण से अलग इस शांत-सहज और निश्छल - निर्दोष गँँबई शहर में बस रहे हैं। लेकिन अब तो महानगर की अजनबीयत की अपेक्षा यहाँ की भयावहता ने बुरी तरह से न्रस्त और परेशान कर दिया था उन्हें। ये 'बरसाती रातें तो उन्हें बरबादी और तबाही का साक्षात संकेत जान पड़ती थीं। इसे दुर्योग कहें या विडंबना कि जिस बात को लेकर आदमी आशंकित बना रहता है, कभी-कभी वह बात घट भी जाती है। इस अंधेरी, तूफानी, बरसाती रात में जिस बात को लेकर डर रहे थे सचदेव बाबू उसका आभास भी अब उन्हें होने लगा था। उन्हें लगा आगंतुक की आहट होने लगी । उनकी शंका सही थी। अब दरवाजे पर थपथपाहट की आवाज़ भी आने लगी थी । सचमुच कोई आ धमका था। |
1. आकृति पूर्ण कीजिए: (2)
- आरा शहर में घर बनवाते समय ये बहुत प्रसन्न थे।
- सचदेव बाबू की आँखों में इसका नाम नहीं था।
- बरसाती रातें बरबादी और तबाही का साक्षात यह थी-
- सचदेव बाबू को लगा आगंतुक की आहाट होने लगी-
2. निम्नलिखित शब्दों का वचन बदलकर लिखिए: (2)
- आवाज - ______
- चोरी - ______
- शंका - ______
- सड़क - ______
3. चोरी, डकैती, राहजनी आदि की घटनाएँ इस विषय पर 40 से 50 शब्दों में अपना मत स्पष्ट कीजिए। (2)
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
|
एक बार अंग्रेजी के मशहूर साहित्यसेवी डॉ. जॉनसन के पास उनका एक मित्र आया और अफसोस जाहिर करने लगा कि उसे धार्मिक ग्रंथ पढ़ने के लिए समय ही नहीं मिलता। “क्यों?” डॉ. जॉनसन ने फौरन पूछा। “आप ही देखिए, दिन-रात मिलाकर सिर्फ चौबीस घंटे होते हैं, इसमें से आठ घंटे तो सोने में निकल जाते हैं।” “पर यह बात सब ही के लिए लागू है।” डॉ. जॉनसन ने कहा। “और करीब आठ ही घंटे ऑफिस में काम करना पड़ता है।” “और बाकी आठ घंटे?” डॉ. जॉनसन ने पूछा। “इन्हीं आठ घंटों में खाना-पीना, हजामत बनाना, नहाना-धोना, ऑफिस आना-जाना, मित्रों से मिलना-जुलना, चिट्ठी-पत्री का जबाब देना, इत्यादि कितने काम रहते हैं। मैं तो बड़ा परेशान हूँ।” “तब तो मुझे भी अब भूखों मरना पड़ेगा।” डॉ. जॉनसन एक गहरी साँस लेकर बोले। “क्यों? क्यों?” उनके मित्र ने तुरंत पूछा। “मैं काफी खाने वाला आदमी हूँ और अन्न उपजाने के लिए दुनिया में एक चौथाई ही तो जमीन है, तीन-चौथाई तो पानी ही है और संसार में मेरे जैसे करोड़ों लोग हैं जिन्हें अपना पेट भरना पड़ता है।” “पर इतने लोगों के लिए फिर तो भी जमीन काफी है।” “काफी कहाँ है? इस एक-चौथाई जमीन में कितने पहाड़ हैं, ऊबड़-खाबड़ स्थल हैं, नदी-नाले हैं, रेगिस्तान और बंजर भूमि हैं। अब मेरा भी कैसे निभ सकेगा भगवान! मित्र महोदय बड़ी हमदर्द के साथ डॉ. जॉनसन को दिलासा देने लगे कि उन्हे परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। दुनिया में करोड़ों लोग रहते आए हैं और उन्हें सदा अन्न मिलता ही रहा है।” |
(१) तालिका पूर्ण कीजिए: (२)

(२) परिच्छेद में आए हुए शब्दयुग्म के कोई भी चार उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए: (२)
- ______
- ______
- ______
- ______
(३) ‘समय अनमोल है’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए -
|
कोलकाता भी दूसरे बड़े शहरों की तरह एक बड़ी नदी के किनारे बसा है। गंगा से निकली एक धारा ही है हुगली नदी। लेकिन दूसरे कई नगरों की तरह कोलकाता में नदी का बहाव एकतरफा नहीं है। हुगली ज्वारी नदी है और बंगाल की खाड़ी से उसका मुहाना 140 किलोमीटर की दूरी पर ही है। हर रोज़ ज्वार के समय समुद्र नदी के पानी को वापस कोलकाता तक ठेलता है। ज्वार और भाटे के बीच जल स्तर एक ही दिन में कई फुट ऊपर-नीचे हो जाता है। शहर के पश्चिम में बहने वाली हुगली नदी में कोलकाता अपना मैला पानी बहाकर उसे भुला नहीं सकता। नीचे बह जाने की बजाए क्या पता ज्वार के पानी के साथ अपशिष्ट पदार्थ वापस शहर लौट आएँ? शहर के कुल मैले पानी का एक छोटा-सा हिस्सा ही हुगली में बहाया जाता है, वह भी चोरी-छिपे। इसका परिणाम यह है कि कोलकाता में हुगली अधिक दूषित नहीं है। लेकिन हर बड़े शहर को अपना मैला पानी फेंकने के लिए एक नदी चाहिए। तो फिर कोलकाता का मैला कहाँ जाता है? हुगली से उल्टी दिशा में, शहर के पूरब में बहने वाली एक छोटी-सी नदी कुल्टीगंग में। पर नदी तक पहुँचने के पहले इस मैले पानी के बड़े हिस्से का उपचार होता है। कुल्टीगंग में गिरने वाला मैला पानी उतना दूषित नहीं होता है जितना वह शहर से निकलते समय होता है। यहाँ मैले पानी की सफाई का तरीका भी दूसरे शहरों से निराला है। कोई 30,000 एकड़ में फैले तालाब और खेत कोलकाता के कुल मैले पानी का दो-तिहाई हिस्सा साफ करते हैं। यही नहीं, इससे कई हज़ार लोगों को रोज़गार मिलता है मैले पानी से मछलियाँ, सब्जियाँ और धान उगाकर। इसका एक कारण है यहाँ का अनूठा भूगोल, जो बना है गंगा के मुहाने पर होने वाले मिट्टी और पानी के प्राकृतिक खेल से। पता नहीं कब से गंगा की बड़ी धार यहाँ से बहकर बंगाल की खाड़ी में विसर्जित होती थी। पर यह संगम केवल गंगा और बंगाल की खाड़ी भर का नहीं रहा है। छोटी-बड़ी कई नदियों की कई धाराएँ हिमालय की मिट्टी गाद या साद के रूप में लाकर यहाँ जमा करती रही हैं। कह सकते हैं कि यहाँ हिमालय और समुद्र मिलते हैं। |
- कोलकाता में बहने वाली किन-किन नदियों का उल्लेख अनुच्छेद में हुआ है?
- गंगा, कुल्टीगंग, यमुना
- गंगा, हुगली, उल्टीगंगा
- गंगा, यमुना, हुगली
- हुगली, गंगा, कुल्टीगंग
- गद्यांश आधारित निम्नलिखित कथनों को पढ़कर सही विकल्प का चयन कीजिए -
कथन
(क) हुगली नदी में जल-स्तर ज्वार और भाटे के अनुरूप ऊपर-नीचे होता रहता है।
(ख) कुल्टीगंग कोलकाता के पूरब में बहती है।
(ग) कोलकाता की अधिकतर नदियाँ उल्टी दिशा की ओर बहती हैं।
विकल्प- कथन (क) सही है।
- कथन (क) और (ख) सही हैं।
- कथन (ख) और (ग) सही हैं।
- कथन (ग) और (क) सही हैं।
-
कुल्टीगंग में गिरने वाला कोलकाता का मैला पानी उतना दूषित क्यों नहीं होता?
- क्योंकि वह पहले हुगली नदी में जाता है।
- कोलकाता के लोग पानी मैला नहीं करते।
- नदी में गिरने से पूर्व खेतों और तालाबों से उपचारित होता है।
- क्योंकि कुल्टीगंग स्वयं ही गंदगी को उपचारित कर लेती है।
-
निम्नलिखित कथन (A) और कारण (R) को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए -
कथन (A): कोलकाता के बंगाल में बंगाल की खाड़ी में हिमालय और समुद्र मिलते हैं।
कारण (R): यहाँ गंगा और अन्य नदियाँ मिट्टी गाद या साद इकट्ठा करती हैं।- कथन (A) गलत है पर कारण (R) सही है।
- कथन (A) सही है पर कारण (R) गलत है।
- कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं।
- कथन (A) और कारण (R) दोनों गलत हैं।
-
कोलकाता हुगली नदी में अपना मैला पानी क्यों नहीं बहा सकता?
- शहर में हुगली को पवित्र मानकर उसकी पूजा की जाती है।
- हुगली एक छोटी नदी है, मैला पानी बहाने लायक नहीं है।
- हुगली में समुद्र पानी वापस भेजता है, अपशिष्ट लौट सकता है।
- हुगली पश्चिम में बहती है, अपशिष्ट उस ओर लाना कठिन है।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:
|
कृषि में हरी खाद उस सहायक फ़सल को कहते हैं जिसकी खेती मुख्यतः भूमि में पोषक तत्त्वों को बढ़ाने तथा उसमें जैविक पदार्थों की पूर्ति करने के उद्देश्य से की जाती है। प्रायः इस तरह की फ़सल को हरित स्थिति में हल चलाकर मिट्टी में मिला दिया जाता है। हरी खाद से भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है और भूमि की रक्षा होती है। मृदा के लगातार उपयोग से उसमें उपस्थित पौधे की बढ़वार के लिए आवश्यक तत्त्व नष्ट होते जाते हैं। इनकी क्षतिपूर्ति के लिए और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखने के लिए हरी खाद एक उत्तम विकल्प है। बिना गले-सड़े हरे पौधे (फ़सलों अथवा उनके भाग) को जब मिट्टी की नत्रजन या जीवांश की मात्रा बढ़ाने के लिए खेत में दबाया जाता है तो इस क्रिया को हरी खाद देना कहते हैं। |
- हरी खाद का उपयोग खेतों में क्यों किया जाना चाहिए?
(a) रासायनिक खाद की महँगी लागत से बचने के लिए।
(b) रासायनिक खाद के ज़हर से बचने के लिए।
(c) खेती के पारंपरिक तरीकों को बढ़ावा देने के लिए।
(d) मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए। - मिट्टी का उपजाऊपन कैसे कम हो जाता है?
(a) रासायनिक खाद के उपयोग से।
(b) समय पर वर्षा न होने से।
(c) मिट्टी के निरंतर उपयोग से।
(d) तेज़ आँधी-तूफान के आने से। - 'हरी खाद देना' क्रिया कहा जाता है:
(a) खेतों में हरे रंग की खाद का प्रयोग करने को।
(b) खेतों में ताज़ी खाद का प्रयोग करने को।
(c) गलने-सड़ने से पूर्व सहायक फसल को खेतों में दबाने को।
(d) गलने-सड़ने के बाद सहायक फ़सल को खेतों में दबाने को। - निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
(I) हरी खाद के उपयोग से भूमि में नमी बढ़ती है।
(II) हरी खाद के उपयोग से भूमि की उर्वरता बढ़ती है।
(III) हरी खाद के उपयोग से वातावरण शुद्ध होता है।
(IV) हरी खाद के उपयोग से मिट्टी में जीवांश बढ़ते हैं।
उपयुक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?
(a) केवल (II)
(b) केवल (I)
(c) (I), (II) और (IV)
(d) (II), (III) और (IV) - निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए, उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए:
कथन (A) - मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखने के लिए हरी खाद एक उत्तम विकल्प है।
कारण (B) - हरी खाद से मृदा की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक दशा में सुधार होता है और लागत घटती है।
(a) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(b) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं।
(c) कथन (A) सही है तथा कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
(d) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं, तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
‘मेरी अभिलाषा’ लगभग छह से आठ पंक्तियों में लिखिए।
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
|
सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति के बाद शनि ग्रह की कक्षा है। शनि सौरमंडल का दूसरा बड़ा ग्रह है। यह हमारी पृथ्वी के करीब 750 गुना बड़ा है। शनि के गोले का व्यास 116 हज़ार किलोमीटर है; अर्थात्, पृथ्वी के व्यास से करीब नौ गुना अधिक। सूर्य से शनि ग्रह की औसत दूरी 143 करोड़ किलोमीटर है। यह ग्रह प्रति सेकंड 9.6 किलोमीटर की औसत गति से करीब 30 वर्षों में सूर्य का एक चक्कर लगाता है। अत: 90 साल का कोई बूढ़ा आदमी यदि शनि ग्रह पर पहुँचेगा, तो उस ग्रह के अनुसार उसकी उम्र होगी सिर्फ तीन साल! हमारी पृथ्वी सूर्य से करीब 15 करोड़ किलोमीटर दूर है। तुलना में शनि ग्रह दस गुना अधिक दूर है। इसे दूरबीन के बिना कोरी आँखों से भी आकाश में पहचाना जा सकता है। पुराने ज़माने के लोगों ने इस पीले चमकीले ग्रह को पहचान लिया था। प्राचीन काल के ज्योतिषियों को सूर्य, चंद्र और काल्पनिक राहु-केतु के अलावा जिन पाँच ग्रहों का ज्ञान था उनमें शनि सबसे अधिक दूर था। शनि को 'शनैश्वर' भी कहते हैं। आकाश के गोल पर यह ग्रह बहुत धीमी गति से चलता दिखाई देता है, इसीलिए प्राचीन काल के लोगों ने इसे 'शनैःचर नाम' दिया था। 'शनैःचर' का अर्थ होता है - धीमी गति से चलने वाला। |
- तालिका पूर्ण कीजिए: [2]
प्राचीन ज्योतिषियों को इन ग्रहों का ज्ञान था। ↓ ↓ ↓ ↓ - परिच्छेद में आए हुए शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए: [2]
- शनि - ______
- दूरबीन - ______
- पृथ्वी - ______
- आकाश - ______
- 'अंतरिक्ष यात्रा' इस विषय पर ४० से ५० शब्दों में अपने विचार लिखिए। [2]
निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों:
| स्वाधीन भारत में अभी तक अंग्रेजी हवाओं में कुछ लोग यह कहते मिलेंगे – जब तक विज्ञान और तकनीकी ग्रंथ हिंदी में न हो तब तक कैसे हिंदी में शिक्षा दी जाए। जब कि स्वामी श्रद्धानंद स्वाधीनता से भी चालीस साल पहले गुरुकुल काँगड़ी में हिंदी के माध्यम से विज्ञान जैसे गहन विषयों की शिक्षा दे रहे थे। ग्रंथ भी हिंदी में थे और पढ़ाने वाले भी हिंदी के थे। जहाँ चाह होती है वहीं राह निकलती है। एक लंबे अरसे तक अंग्रेज गुरुकुल काँगड़ी को भी राष्ट्रीय आंदोलन का अभिन्न अंग मानते रहे। इसमें कोई संदेह भी नहीं कि गुरुकुल के स्नातकों में स्वाधीनता की अजीब तड़प थी। स्वामी श्रद्धानंद जैसा राष्ट्रीय नेता जिस गुरुकुल का संस्थापक हो और हिंदी शिक्षा का माध्यम हो; वहीं राष्ट्रीयता नहीं पनपेगी तो कहाँ पनपेगी। |
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए:
| लगभग एक सप्ताह यही क्रम चलता रहा। हर समय एक व्यक्ति उनके पास बैठा रहता। कभी माँ तो कभी मीनू, कभी रोहित तो कभी आशा। उन सबकी सेवा व ईश्वर के आशीर्वाद से पिताजी की दशा में काफी सुधार हो गया। अब वे धीरे-धीरे अपने आप बैठने भी लगे थे, और थोड़ी देर बातें भी कर लेते थे। प्रात: लगभग नौ बजे का समय था। उस समय हल्की वर्षा की बुँदें पड़ रही थी। तभी घर के बाहर एक कार आकर रुकी। |
- 'पिताजी' को क्या हुआ था? डॉक्टर ने उन्हें क्या सलाह दी थी? [2]
- कार से कौन आए थे और क्यों? [2]
- बुआ जी जाते-जाते अपने भैया को क्या-क्या सलाह दे गई? क्या उपर्युक्त अवसर पर उनकी यह सलाह उचित थी? समझाइए। [3]
- पिताजी द्वारा मीनू को शादी का सुझाव दिए जाने पर मीनू ने उन्हें क्या कहकर समझाया? [3]
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए:
| “यह सब समय का फेर है, दीदी! मेरे भाग्य में यही सब लिखा था। मुझे एक फैक्ट्री में नौकरी मिल गई थी। मैं अपने को बहुत खुशनसीब समझ रहा था कि मुझे इतनी छोटी उम्र में ही नौकरी मिल गई।" |
- 'दीदी' कह कर किसे संबोधित किया गया है? वक्ता का संक्षिप्त परिचय दीजिए। [2]
- 'समय का फेर' किसे कहा जा रहा है और इस समय के फेर से वक्ता पर क्या प्रभाव पड़ा था? [2]
- 'दीदी' ने वक्ता की सहायता क्यों, कब और किस प्रकार से की थी? [3]
- अवतरण में दी गई पंक्तियों के आधार पर उदाहरण सहित सिद्ध कीजिए कि मुसीबत में पड़े व्यक्ति की सहायता करना ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म और कर्तव्य होता है। [3]
