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प्रश्न
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए:-
कारण लिखिए:
(क) विमान के प्रति लेखक का आकर्षित होना
(ख) लेखक ने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग को अपना अध्ययन क्षेत्र चुनना
| पहली बार मैंने एम. आई. टी. में निकट से विमान देखा था, जहाँ विद्यार्थियों को विभिन्न सब- सिस्टम दिखाने के लिए दो विमान रखे थे। उनके प्रति मेरे मन में विशेष आकर्षण था। वे मुझे बार-बार अपनी ओर खींचते थे। मुझे वे सीमाओं से परे मनुष्य की सोचने की शक्ति की जानकारी देते थे तथा मेरे सपनों को पंख लगाते थे। मैंने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग काे अपना अध्ययन क्षेत्र चुना क्योंकि उड़ान भरने के प्रति मैं आकर्षित था। वर्षों से उड़ने की अभिलाषा मेरे मन में पलती रही। मेरा सबसे प्यारा सपना यही था कि सुदूर आकाश में ऊँची और ऊँची उड़ान भरती मशीन को हैंडल किया जाए। |
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उत्तर
- क्योंकि विमान लेखक को बार-बार अपनी ओर खींचते थे। वे सीमाओं से परे मनुष्य की सोचने की शक्ति की जानकारी देते थे तथा लेखक के सपनों को पंख लगाते थे।
- लेखक ने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग काे अपना अध्ययन क्षेत्र इसलिए चुना क्योंकि उड़ान भरने के प्रति उनका आकर्षण था। वर्षों से उड़ने की अभिलाषा लेखक के मन में पल रही थी।
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संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों:
स्वाधीन भारत में अभी तक अंग्रेजी हवाओं में कुछ लोग यह कहते मिलेंगे – जब तक विज्ञान और तकनीकी ग्रंथ हिंदी में न हो तब तक कैसे हिंदी में शिक्षा दी जाए। जब कि स्वामी श्रद्धानंद स्वाधीनता से भी चालीस साल पहले गुरुकुल काँगड़ी में हिंदी के माध्यम से विज्ञान जैसे गहन विषयों की शिक्षा दे रहे थे। ग्रंथ भी हिंदी में थे और पढ़ाने वाले भी हिंदी के थे। जहाँ चाह होती है वहीं राह निकलती है। एक लंबे अरसे तक अंग्रेज गुरुकुल काँगड़ी को भी राष्ट्रीय आंदोलन का अभिन्न अंग मानते रहे। इसमें कोई संदेह भी नहीं कि गुरुकुल के स्नातकों में स्वाधीनता की अजीब तड़प थी। स्वामी श्रद्धानंद जैसा राष्ट्रीय नेता जिस गुरुकुल का संस्थापक हो और हिंदी शिक्षा का माध्यम हो; वहीं राष्ट्रीयता नहीं पनपेगी तो कहाँ पनपेगी। स्वामी जी से मिलने देश के प्रमुख राष्ट्रीय नेता भी गुरुकुल आते रहते थे।
परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
| परोपकार ही मानवता है, जैसा कि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने लिखा है - ‘वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे।’ केवल अपने दुख-सुख की चिंता करना मानवता नहीं, पशुता है। परोपकार ही मानव को पशुता से सदय बनाता है। वस्तुतः निस्स्वार्थ भावना से दूसरों का हित साधन ही परोपकार है। मनुष्य अपनी सामर्थ्य के अनुसार परोपकार कर सकता है। दूसरों के प्रति सहानुभूति करना ही परोपकार है और सहानुभूति किसी भी रूप में प्रकट की जा सकती है। किसी निर्धन की आर्थिक सहायता करना अथवा किसी असहाय की रक्षा करना परोपकार के रूप हैं। किसी पागल अथवा रोगी की सेवा-शुश्रूषा करना अथवा किसी भूखे को अन्नदान करना भी परोपकार है। किसी को संकट से बचा लेना, किसी को कुमार्ग से हटा देना, किसी दुखी-निराश को सांत्वना देना-ये सब परोपकार के ही रूप हैं। कोई भी कार्य, जिससे किसी को लाभ पहॅुंचता है, परोपकार है, जो अपनी सामर्थ्य के अनुसार विभिन्न रूपों में किया जा सकता है। |
(१) संजाल पूर्ण कीजिए :

(२) ‘वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे’ इस पंक्ति का तात्पर्य लिखिए।
(३)
१. वचन परिवर्तन कीजिए :
१. चिंता - ______
२. भूखे - ______
२. निम्न शब्दों के लिंग पहचानिएः
१. सामर्थ्य - ______
२. परोपकार - ______
(४) ‘परहित सरिस धरम नहिं भाई’ पर अपने विचार लिखिए ।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए-
| "एक भारत श्रेष्ठ भारत' अभियान देश के विभिन्न राज्यों में सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देता है। भारत एक अनोखा राष्ट्र है, जिसका निर्माण विविध भाषा, संस्कृति, धर्म के तानों- बानों, अहिंसा और न्याय के सिद्धान्तों पर आधारित स्वाधीनता संग्राम तथा सांस्कृतिक विकास के समृद्ध इतिहास द्वारा एकता के सूत्र में बाँधकर हुआ हैं। हम इतिहास की बात करें या वर्तमान की भारतवर्ष में कला एवं संस्कृति का अनूठा प्रदर्शन हर समय एवं हर स्थान पर हुआ है। नृत्य, संगीत, चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला इत्यादि से समृद्ध भारत की पहचान पूरे विश्व में है। भारतीय वास्तुकला एवं मूर्तिकला की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। इस कला की कहानी लगभग पॉँच हज़ार वर्ष पूर्व सिंधु घाटी की सभ्यता से आरंभ होती है। इसके दो प्रमुख नगरों ; मोहनजोदाड़ो और हड़प्पा में अच्छी सड़कें, दो मंज़िले मकान, स्नान-घर, पक्की ईंटों के प्रयोग के सबूत मिले हैं। गुजरात के लोथल नामक स्थान की खुदाई से पता चलता है कि वहाँ नावों से सामान उतारने के लिए 216 x 37 मीटर लम्बी-चौड़ी तथा 15 फीट गहरी गोदी बनी हुई थी। ये लोग मिट्टी, पत्थर, धातु, हड्डी, कॉँच आदि की मूर्तियाँ एवं खिलौने बनाने में कुशल थे। धातु से बनी एक मूर्ति में एक नारी को कमर पर हाथ रखे नृत्य मुद्रा में दर्शाया गया है। दूसरी मूर्ति पशुपतिनाथ शिव की तथा तीसरी मूर्ति दाढ़ी वाले व्यक्ति की है। ये तीनों मूर्तियाँ कला के सर्वश्रेष्ठ नमूने हैं। मूर्ति का श्रेष्ठ होना मूर्तिकार के कौशल पर निर्भर करता है। मूर्ति की प्रत्येक आवभंगिमा को दर्शाने में मूर्तिकार जी-जान लगा देता है। भारत के प्रत्येक कोने में इस प्रकार की विभिन्न कलाएँ हमारी संस्कृति में प्रतिबिंबित होती हैं। इस अतुलनीय निधि का बचाव और प्रचार-प्रसार ही एक भारत श्रेष्ठ भरत की परिकल्पना है। |
- भारत को 'अनोखा राष्ट्र' कहने से लेखक का तात्पर्य है-
(क) बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन
(ख) मूर्तिकला के सर्वश्रेष्ठ नमूने
(ग) संवेदनशील भारतीय नागरिक
(घ) विभिन्नता में एकता का प्रतीक - सिंधु घाटी की सभ्यता प्रतीक है-
(क) मूर्तिकार के कौशल का
(ख) एक भारत श्रेष्ठ भारत का
(ग) प्राचीन सुव्यवस्थित सभ्यता का
(घ) स्वाधीनता संग्राम के नायकों का - गद्यांश हमें संदेश देता है-
(क) कलाकार अपनी कला का श्रेष्ठ प्रदर्शन करता है।
(ख) भारतीय नृत्य और संगीत की कला विश्व प्रसिद्ध है।
(ग) भारतीय सभ्यता व संस्कृति का संरक्षण आवश्यक है।
(घ) स्वाधीनता संग्राम में क्रांतिकारियों का विशेष योगदान है। - गदयांश में मूर्तियों का सविस्तार वर्णन दर्शाता है-
(क) सूक्ष्म अवलोकन एवं कला-प्रेम
(ख) प्राचीन मूर्तियों की भावभंगिमा
(ग) स्थूल अवलोकन एवं कला-प्रेम
(घ) सांस्कृतिक एकता एवं सौहार्द्र| - निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पोंमें से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) भारतवर्ष में कला एवं संस्कृति का अनूठा प्रदर्शन हर समय हुआ है।
कारण (R) भारतीय वास्तुकला एवं मूर्तिकला की परंपरा अत्यंत प्राचीन है।
(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत है।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
(घ) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
हमेशा यह कहा जाता है कि जीवन में जितनी भी तकलीफ हो, पीड़ा हो, दुख हो, कष्ट हो, हमें बहुत धैर्यपूर्वक इन सभी का प्रतिकार करना चाहिए। दुख के समय या विपत्ति के समय हमें बहुत शांत रहकर इनको सहन करना चाहिए, क्योंकि संसार में यह धारणा बहुत साफ दिखती है कि व्यक्ति अपने मन की व्यथा को खुद संभालकर रखे, नहीं तो वह उपहास का पात्र भी बन सकता है। यदि हम अपने मन की बातों या दुख होने पर इसे समाज के साथ बाँटते हैं, तो कुछ लोग इस पर ध्यान नहीं देते, अपितु वह इन्हें एक सामान्य सी बात कहकर मजाक भी बना डालते हैं। अत: कहा भी गया है- रहिमन निज मन की व्यथा, मन में राखो गोय। |
(1) उत्तर लिखिए- (2)
समाज में लोगों की विशेषताएँ-
- ______
- ______
(2) मन की प्रवृत्ति पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)
निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।
|
आरा शहर। भादों का महीना। कृष्ण पक्ष की अँधेरी रात। जोरों की बारिश। हमेशा की भाँति बिजली का गुल हो जाना। रात के 'गहराने और सूनेपन को और सघन भयावह बनाती बारिश कौ तेज़ आवाज़। अंधकार में डूबा शहर तथा अपने घरें में सोए - दुबके लोग ! लेकिन सचदेव बाबू की आँखों में नींद नहीं। अपने आलीशान भवन के भीतर अपने शयनकक्ष में बेहद आरामदायक बिस्तर पर लेटे थे वे। पर लेटने भर से ही तो नींद नहीं आती। नींद के लिए - जैसी निर्शिचितता और बेफिक्री की जरुरत होती है, वह तो उनसे कोसों दूर थी। हालाँकि यह स्थिति सिर्फ सचदेव बाबू की ही नहीं थी। पूरे शहर का खौफ का यह कहर था। आए दिन चोरी, लूट, हत्या, बलात्कार, राहजनी और अपहरण की घटनाओं ने लोगों को बेतरह भयभीत और असुरक्षित बना दिया था। कभी रातों में गुलज़ार रहने वाला उनका 'यह शहर अब शाम गहराते ही शमशानी सन्ताटे में तब्दील होने लगा था। अब रातों में सड़कों और गलियों में नज़र आने वाले लोग शहर के सामान्य और संभ्रांत नागरिक नहीं, संदिग्ध लोग होते थे। कब 'किसके यहाँ कया हो जाए, सब आतंकित थे। जब इस शहर में अपना यह घर बनवा रहे थे सचदेव बाबू तो बहुत प्रसन्न थे कि महानगरों में दमघोंटू, विषाक्त, अजनबीयत और छल - छदमी वातावरण से अलग इस शांत-सहज और निश्छल - निर्दोष गँँबई शहर में बस रहे हैं। लेकिन अब तो महानगर की अजनबीयत की अपेक्षा यहाँ की भयावहता ने बुरी तरह से न्रस्त और परेशान कर दिया था उन्हें। ये 'बरसाती रातें तो उन्हें बरबादी और तबाही का साक्षात संकेत जान पड़ती थीं। इसे दुर्योग कहें या विडंबना कि जिस बात को लेकर आदमी आशंकित बना रहता है, कभी-कभी वह बात घट भी जाती है। इस अंधेरी, तूफानी, बरसाती रात में जिस बात को लेकर डर रहे थे सचदेव बाबू उसका आभास भी अब उन्हें होने लगा था। उन्हें लगा आगंतुक की आहट होने लगी । उनकी शंका सही थी। अब दरवाजे पर थपथपाहट की आवाज़ भी आने लगी थी । सचमुच कोई आ धमका था। |
1. आकृति पूर्ण कीजिए: (2)
- आरा शहर में घर बनवाते समय ये बहुत प्रसन्न थे।
- सचदेव बाबू की आँखों में इसका नाम नहीं था।
- बरसाती रातें बरबादी और तबाही का साक्षात यह थी-
- सचदेव बाबू को लगा आगंतुक की आहाट होने लगी-
2. निम्नलिखित शब्दों का वचन बदलकर लिखिए: (2)
- आवाज - ______
- चोरी - ______
- शंका - ______
- सड़क - ______
3. चोरी, डकैती, राहजनी आदि की घटनाएँ इस विषय पर 40 से 50 शब्दों में अपना मत स्पष्ट कीजिए। (2)
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।
|
मधुरता सत्य का अनुपान है और मितता उसका पथ्य है। जिसे हम सम्यक वाणी कहते हैं; वह सत्य, मित और मधुर होती है और वही परिणामकारक भी होती है। समाज का हित किस बात में है, समझना कभी कठिन हो सकता है। परंतु सम्यक वाणी से ही वह सधेगा, यह किसी भी आदमी के लिए समझना कठिन नहीं होना चाहिए। परंतु यही आज भारी हो रहा है। समाजहित के नाम पर कार्यकर्ताओं की वाणी दूषित हो गई हैं, अर्थात मन ही दूषित हो गया है। फिर कृति कैसे भूषित हो सकती है? आज लेखन व भाषण के साधन सुलभतम हो गए हैं। परंतु शायद इसी कारण सभ्य वाणी दुर्लभ हो गई है। सभ्य वाणी को खोकर सुलभ साधनों की प्राप्ति करना यानी कवि की भाषा में नेत्र बेचकर चित्र खरीदने जैसा है। |
(1) संजाल पूर्ण कीजिए: (2)

(2) ‘वाणी : मनुष्य को प्राप्त वरदान’ इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए -
|
कोलकाता भी दूसरे बड़े शहरों की तरह एक बड़ी नदी के किनारे बसा है। गंगा से निकली एक धारा ही है हुगली नदी। लेकिन दूसरे कई नगरों की तरह कोलकाता में नदी का बहाव एकतरफा नहीं है। हुगली ज्वारी नदी है और बंगाल की खाड़ी से उसका मुहाना 140 किलोमीटर की दूरी पर ही है। हर रोज़ ज्वार के समय समुद्र नदी के पानी को वापस कोलकाता तक ठेलता है। ज्वार और भाटे के बीच जल स्तर एक ही दिन में कई फुट ऊपर-नीचे हो जाता है। शहर के पश्चिम में बहने वाली हुगली नदी में कोलकाता अपना मैला पानी बहाकर उसे भुला नहीं सकता। नीचे बह जाने की बजाए क्या पता ज्वार के पानी के साथ अपशिष्ट पदार्थ वापस शहर लौट आएँ? शहर के कुल मैले पानी का एक छोटा-सा हिस्सा ही हुगली में बहाया जाता है, वह भी चोरी-छिपे। इसका परिणाम यह है कि कोलकाता में हुगली अधिक दूषित नहीं है। लेकिन हर बड़े शहर को अपना मैला पानी फेंकने के लिए एक नदी चाहिए। तो फिर कोलकाता का मैला कहाँ जाता है? हुगली से उल्टी दिशा में, शहर के पूरब में बहने वाली एक छोटी-सी नदी कुल्टीगंग में। पर नदी तक पहुँचने के पहले इस मैले पानी के बड़े हिस्से का उपचार होता है। कुल्टीगंग में गिरने वाला मैला पानी उतना दूषित नहीं होता है जितना वह शहर से निकलते समय होता है। यहाँ मैले पानी की सफाई का तरीका भी दूसरे शहरों से निराला है। कोई 30,000 एकड़ में फैले तालाब और खेत कोलकाता के कुल मैले पानी का दो-तिहाई हिस्सा साफ करते हैं। यही नहीं, इससे कई हज़ार लोगों को रोज़गार मिलता है मैले पानी से मछलियाँ, सब्जियाँ और धान उगाकर। इसका एक कारण है यहाँ का अनूठा भूगोल, जो बना है गंगा के मुहाने पर होने वाले मिट्टी और पानी के प्राकृतिक खेल से। पता नहीं कब से गंगा की बड़ी धार यहाँ से बहकर बंगाल की खाड़ी में विसर्जित होती थी। पर यह संगम केवल गंगा और बंगाल की खाड़ी भर का नहीं रहा है। छोटी-बड़ी कई नदियों की कई धाराएँ हिमालय की मिट्टी गाद या साद के रूप में लाकर यहाँ जमा करती रही हैं। कह सकते हैं कि यहाँ हिमालय और समुद्र मिलते हैं। |
- कोलकाता में बहने वाली किन-किन नदियों का उल्लेख अनुच्छेद में हुआ है?
- गंगा, कुल्टीगंग, यमुना
- गंगा, हुगली, उल्टीगंगा
- गंगा, यमुना, हुगली
- हुगली, गंगा, कुल्टीगंग
- गद्यांश आधारित निम्नलिखित कथनों को पढ़कर सही विकल्प का चयन कीजिए -
कथन
(क) हुगली नदी में जल-स्तर ज्वार और भाटे के अनुरूप ऊपर-नीचे होता रहता है।
(ख) कुल्टीगंग कोलकाता के पूरब में बहती है।
(ग) कोलकाता की अधिकतर नदियाँ उल्टी दिशा की ओर बहती हैं।
विकल्प- कथन (क) सही है।
- कथन (क) और (ख) सही हैं।
- कथन (ख) और (ग) सही हैं।
- कथन (ग) और (क) सही हैं।
-
कुल्टीगंग में गिरने वाला कोलकाता का मैला पानी उतना दूषित क्यों नहीं होता?
- क्योंकि वह पहले हुगली नदी में जाता है।
- कोलकाता के लोग पानी मैला नहीं करते।
- नदी में गिरने से पूर्व खेतों और तालाबों से उपचारित होता है।
- क्योंकि कुल्टीगंग स्वयं ही गंदगी को उपचारित कर लेती है।
-
निम्नलिखित कथन (A) और कारण (R) को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए -
कथन (A): कोलकाता के बंगाल में बंगाल की खाड़ी में हिमालय और समुद्र मिलते हैं।
कारण (R): यहाँ गंगा और अन्य नदियाँ मिट्टी गाद या साद इकट्ठा करती हैं।- कथन (A) गलत है पर कारण (R) सही है।
- कथन (A) सही है पर कारण (R) गलत है।
- कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं।
- कथन (A) और कारण (R) दोनों गलत हैं।
-
कोलकाता हुगली नदी में अपना मैला पानी क्यों नहीं बहा सकता?
- शहर में हुगली को पवित्र मानकर उसकी पूजा की जाती है।
- हुगली एक छोटी नदी है, मैला पानी बहाने लायक नहीं है।
- हुगली में समुद्र पानी वापस भेजता है, अपशिष्ट लौट सकता है।
- हुगली पश्चिम में बहती है, अपशिष्ट उस ओर लाना कठिन है।
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
|
सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति के बाद शनि ग्रह की कक्षा है। शनि सौरमंडल का दूसरा बड़ा ग्रह है। यह हमारी पृथ्वी के करीब 750 गुना बड़ा है। शनि के गोले का व्यास 116 हज़ार किलोमीटर है; अर्थात्, पृथ्वी के व्यास से करीब नौ गुना अधिक। सूर्य से शनि ग्रह की औसत दूरी 143 करोड़ किलोमीटर है। यह ग्रह प्रति सेकंड 9.6 किलोमीटर की औसत गति से करीब 30 वर्षों में सूर्य का एक चक्कर लगाता है। अत: 90 साल का कोई बूढ़ा आदमी यदि शनि ग्रह पर पहुँचेगा, तो उस ग्रह के अनुसार उसकी उम्र होगी सिर्फ तीन साल! हमारी पृथ्वी सूर्य से करीब 15 करोड़ किलोमीटर दूर है। तुलना में शनि ग्रह दस गुना अधिक दूर है। इसे दूरबीन के बिना कोरी आँखों से भी आकाश में पहचाना जा सकता है। पुराने ज़माने के लोगों ने इस पीले चमकीले ग्रह को पहचान लिया था। प्राचीन काल के ज्योतिषियों को सूर्य, चंद्र और काल्पनिक राहु-केतु के अलावा जिन पाँच ग्रहों का ज्ञान था उनमें शनि सबसे अधिक दूर था। शनि को 'शनैश्वर' भी कहते हैं। आकाश के गोल पर यह ग्रह बहुत धीमी गति से चलता दिखाई देता है, इसीलिए प्राचीन काल के लोगों ने इसे 'शनैःचर नाम' दिया था। 'शनैःचर' का अर्थ होता है - धीमी गति से चलने वाला। |
- तालिका पूर्ण कीजिए: [2]
प्राचीन ज्योतिषियों को इन ग्रहों का ज्ञान था। ↓ ↓ ↓ ↓ - परिच्छेद में आए हुए शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए: [2]
- शनि - ______
- दूरबीन - ______
- पृथ्वी - ______
- आकाश - ______
- 'अंतरिक्ष यात्रा' इस विषय पर ४० से ५० शब्दों में अपने विचार लिखिए। [2]
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
यह एक 'साधारण महिला' की असाधारण कहानी है, जो अपनी असाधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से प्रोत्साहन व प्रेरणा लेकर सफलता के शिखर पर पहुँची है। वहाँ अंतरिक्ष में रहते हुए सुनीता का मन बारिश में भीगने, समुद्र या झील या फिर सरोवर में तैरने को कर रहा था। दरअसल अंतरिक्ष में रहते हुए हरदम गंदगी-सी महसूस होती है। भारहीनता के कारण पसीने की बूँद त्वचा से चिपकी रहती हैं। और धीरे-धीरे इकट्ठा होकर त्वचा को छोड़ देती हैं, लेकिन किसी चीज से टकराने से पहले वे इधर - इधर तैरती सी रहती हैं। कभी-कभी सुनीता का पृथ्वी को स्पर्श करने का मन करता था। वह अपोलो के अंतरिक्ष यात्रियों के बारे में सोचने लगती थी और यह सोचती थी कि चंद्रमा पर पूरी तरह उतरने से पहलें ही पृथ्वी पर वापस आना उन्हें कितना निराशाजनक लगा होगा। रात से पृथ्वी जैसे टिमटिमाने लगती थी और जो क्षेत्र दिन में वीरान दिखाई दे रहे थे, वे चमत्कारी रूप से छोटी-छोटी बत्तियों के प्रकार से जगमगा उठते थे। ऐसे में सुनीता का जी करता था, 'समुद्र मैं डुबकी लगाने का। |
(1) कृति पूर्ण कीजिए : (2)

(2) कृति पूर्ण कीजिए : (2)

(3) परिवार से प्रोत्साहन तथा प्रेरणा का महत्त्व' विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित अकतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए:
| “परंतु मैं तो इस पक्ष में जरा भी नहीं हूँ। हमारी भारत सरकार हमारी पढ़ाई पर कितना पैसा खर्च करती है और हम चंद पैसों के कारण विदेशों में जा कर बस जाएँ? यादि सभी बुद्धिजीवी विदेशों में जाकर बस जाएँगें तो हमारे देश की उन्नति किस प्रकार संभव हो सकेगी।” |
- वक्ता इस समय किस से मिलने आई है? वक्ता के यहाँ आने का कारण भी बताइए। [2]
- इस समय यहाँ किस व्यक्ति के विषय में और क्या बात की जा रही है जिसे सुनकर वक्ता ने यह सब कहा था? [2]
- प्रस्तुत पंक्तियों के आधार पर वक्ता के चारित्र की 'तीन' विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। [3]
- विद्यार्थियों में अपने देश के बजाय विदेश में शिक्षा प्राप्त करने की बढ़ती चाह के कारण भविष्य में देश को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है? समझाकर लिखिए। [3]
