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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) १० वीं कक्षा

निम्नलिखित अपठित गदूयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए: अब अकेला बैल किस काम का? उसका जोड़ बहुत ढूँढ़ा गया, पर न मिला। निदान यह सलाह ठहरी कि इसे बेच डालना चाहिये।

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प्रश्न

निम्नलिखित अपठित गदूयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

अब अकेला बैल किस काम का? उसका जोड़ बहुत ढूँढ़ा गया, पर न मिला। निदान यह सलाह ठहरी कि इसे बेच डालना चाहिये। गाँव में एक समझू साहु थे, वह इकका गाड़ी हाँकते थे। गाँव के गुड़, घी लाद कर मंडी ले जाते, मंडी से तेल, नमक भर लाते और गाँव में बेचते। इस बैल पर उनका मन लहराया। उन्होंने सोचा, यह बैल हाथ लगे तो दिनभर में बेखटके तीन खेप हों। आजकल तो एक ही खेप में लाले पड़े रहते हैं। बैल देखा, गाड़ी में दौड़ाया, बाल-भौंरी की पहचान करायी, मोल-तोल किया और उसे लाकर दूवार पर बाँध ही दिया। एक महीने में दाम चुकाने का वादा ठहरा। चौधरी को भी गरज थी ही, घाटे की परवाह न की।

समझू साहु ने नया बेल पाया, तो लगे उसे रगेदने। वह दिन में तीन-तीन, चार-चार खेपें करने लगे। न चारे की फिक्र थी, न पानी की, बस खेपों से काम था।

(1) कृति पूर्ण कीजिए -  (2)

(2) लिखिए -  (2)

बैल को देखकर समझू ने यह किया :

  1. ____________
  2. ____________
  3. ____________
  4. ____________

(3) 'हमारे अन्नदाता किसान' इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।  (2)

संक्षेप में उत्तर
सारिणी
एक पंक्ति में उत्तर
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उत्तर

(1)

(2) 

बैल को देखकर समझू ने यह किया -

  1. गाड़ी में दौड़ाया।
  2. बाल-भौंरी की पहचान करायी।
  3. मोल-तोल किया।
  4. लाकर द्वार पर बाँध दिया।

(3) हमारा भारत एक ऐसा देश है, जहां कृषि को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाती है। इसमें कोई संदेह नहीं की हमारे किसानों के माध्यम से ही हमारा देश और दुनिया के अन्य राष्ट्र भी फल फूल रहे है। आज से पैंतीस वर्ष पहले के किसान और आज के किसान में बहुत अंतर आया है। किसान आज भी पूर्ण रूप से सुखी नहीं है। आज भी 20 या 25 प्रतिशत किसान ऐसे हैं जिनके पास दो समय का भोजन नहीं है। शरीर ढकने के लिए कपड़े नहीं हैं। हमारे देश की सरकार किसानों केलिए कई योजनाएँ बनाती है किन्तु अशिक्षित होने के कारण वे उन योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते। इसलिए देश के कई किसान आत्महत्या तक कर लेते हैं।

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अपठित गद्यांश
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
2021-2022 (March) Set 1

संबंधित प्रश्न

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों:

        स्वाधीन भारत में अभी तक अंग्रेजी हवाओं में कुछ लोग यह कहते मिलेंगे – जब तक विज्ञान और तकनीकी ग्रंथ हिंदी में न हो तब तक कैसे हिंदी में शिक्षा दी जाए। जब कि स्वामी श्रद्धानंद स्वाधीनता से भी चालीस साल पहले गुरुकुल काँगड़ी में हिंदी के माध्यम से विज्ञान जैसे गहन विषयों की शिक्षा दे रहे थे। ग्रंथ भी हिंदी में थे और पढ़ाने वाले भी हिंदी के थे। जहाँ चाह होती है वहीं राह निकलती है। एक लंबे अरसे तक अंग्रेज गुरुकुल काँगड़ी को भी राष्ट्रीय आंदोलन का अभिन्न अंग मानते रहे। इसमें कोई संदेह भी नहीं कि गुरुकुल के स्नातकों में स्वाधीनता की अजीब तड़प थी। स्वामी श्रद्धानंद जैसा राष्ट्रीय नेता जिस गुरुकुल का संस्थापक हो और हिंदी शिक्षा का माध्यम हो; वहीं राष्ट्रीयता नहीं पनपेगी तो कहाँ पनपेगी। स्वामी जी से मिलने देश के प्रमुख राष्ट्रीय नेता भी गुरुकुल आते रहते थे।


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

संस्कृति ऐसी चीज नहीं है कि जिसकी रचना दस-बीस या सौ-पचास वर्षों में की जा सकती हो। अनेक शताब्दियों तक एक समाज के लोग जिस तरह खाते-पीते, रहते-सहते, पढ़ते-लिखते, सोचते-समझते और राज-काज चलाते अथवा धर्म-कर्म करते हैं, उन सभी कार्यों से उनकी संस्कृति उत्पन्न होती है। हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें हमारी संस्कृति की झलक होती है। यहाँ तक कि हमारे उठने-बैठने, पहनने-ओढ़ने, घूमने-फिरने और रोने-हँसने में भी हमारी संस्कृति की पहचान होती है। हमारा कोई भी काम हमारी संस्कृति का पर्याय नहीं बन सकता।असल में संस्कृति जिंदगी का एक तरीका है और यह तरीका सदियों से जमा होकर उस समाज में छाया रहता है, जिसमें हम जन्म लेते हैं। इसलिए जिस समाज में हम पैदा हुए हैं, अथवा जिस समाज से मिलकर हम जी रहे हैं, उसकी संस्कृति हमारी संस्कृति है।

(1) घटक लिखिए: (2)

(2) विधानों को पढ़कर केवल सही अथवा गलत लिखिए: (2)

  1. समाज के लोगों के कार्यों से उनकी संस्कृति उत्पन होती है ______
  2. हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें हमारी संस्कृति की झलक नहीं होती ______
  3. जिस संस्कृति में हम पैदा हुए हैं उसकी संस्कृति हमारी संस्कृति है ______
  4. संस्कृति जिंदगी का तरीका नहीं है ______

(3) दी गई सूचना के अनुसार लिखिए: (2)

(4) ‘पाश्चात्य संस्कृति का बढ़ता प्रभाव’ अपने विचार लिखिए। (2)


निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

आने वाली महिला की तबीयत थोड़ी खराब थी और पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उनका इलाज होना था। चूँकि वह मेरी बुआ जी को जानते थे और बुआ जी के छोटे भाई का परिवार पटना में था इसलिए ये तो सोचने की बात नहीं थी कि वह कहाँ रहेंगे। वह बिना किसी पूर्व सूचना के हमारे घर पहुँच गए थे। उनकी ट्रेन तो शाम को थी, लेकिन ट्रेन के टाइम से न चलने का बुरा कौन मानता है।

ट्रेन पाँच घंटे लेट पहुँची थी और हमारे वह मेहमान बिना खाए-पिए आधी रात में हमारे घर पहुँच गए थे।

फटाफट खाना बना। सोने का जुगाड़ हुआ।
और सुबह उन्हें अस्पताल पहुँचाने का भी।

वे कोई सप्ताह भर हमारे घर रहे। हम खूब घूल-मिल गए। हम रोज ठहाके लगाते, साथ खाते और पूरी मस्ती करते। ऐसा लग रहा था, मानो हम सदियों से एक-दूसरे को जानते हों। बुआ जी ने तिल की मिठाई भेजी थी। दिल्‍ली में उसे गजक कहते हैं, हमारे यहाँ सब तिलकुंट कहते थे। हम सबने तिल और गुड़ की उस मिठाई को खूब मजे लेकर खाया। हमारी बुआ जी सारे संसार का ख्याल रखती थीं और भाई-भतीजों में तो उनकी आत्मा ही बसती थी।

उन्होंने अपने परिचित भेज दिए, हमने उन्हें रिश्तेदार बना लिया।
आप जानकर हैरान रह जाएँगे कि हम दुबारा कभी उन रिश्तेदारों से नहीं मिल पाए जो उस रात हमारे घर आए थे। लेकिन हम सभी भाई-बहनों के जेहन में उस रिश्ते की याद आज भी ताजा है। हम आज भी उनके आने और अपनी रजाई छिन जाने को याद कर खुश होते हैं।

(1) कृति पूर्ण कीजिए:   (2)

(i)

(ii)

(2) उत्तर लिखिए:   (2)

  1. बुआ जी की आत्मा बसती थी - .....................
  2. आने वाली महिला की तबीयत थी - .....................
  3. बुआ जी खयाल रखती थीं - .....................
  4. अतिथि लेखक के घर रहे - .....................

(3) ‘संयुक्त परिवार’ इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए।   (3)


निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए- 

परिश्रम यानी मेहनत अपना जवाब आप ही है। उसका अन्य कोई जवाब न है, न हो सकता है अर्थात जिस काम के लिए परिश्रम करना आवश्यक हो, हम चाहें कि वह अन्य किसी उपाय से पूरा हो जाए, ऐसा हो पाना कतई संभव नहीं। वह तो लगातार और मन लगाकर परिश्रम करने से ही होगा। इसी कारण कहा जाता है कि 'उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मी' अर्थात उद्योग या परिश्रम करने वाले पुरुष सिंहों का ही लक्ष्मी वरण करती है। सभी प्रकार की धन-संपत्तियाँ और सफलताएँ लगातार परिश्रम से ही प्राप्त होती हैं। परिश्रम ही सफलता की कुंजी है, यह परीक्षण की कसौटी पर कसा गया सत्य है। निरंतर प्रगति और विकास की मंज़िलें तय करते हुए हमारा संसार आज जिस स्तर और स्थिति तक पहुँच पाया है, वह सब हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहने से नहीं हुआ। कई प्रकार के विचार बनाने, अनुसंधान करने, उनके अनुसार लगातार योजनाएँ बनाकर तथा कई तरह के अभावों और कठिनाइयों को सहते हुए निरंतर परिश्रम करते रहने से ही संभव हो पाया है। आज जो लोग सफलता के शिखर पर बैठकर दूसरों पर शासन कर रहे हैं, आदेश दे रहे हैं, ऐसी शक्ति और सत्ता प्राप्त करने के लिए पता नहीं किन-किन रास्तों से चलकर, किस-किस तरह के कष्ट और परिश्रमपूर्ण जीवन जीने के बाद उन्हें इस स्थिति में पहुँच पाने में सफलता मिल पाई है। हाथ-पैर हिलाने पर ही कुछ पाया जा सकता है, उदास या निराश होकर बैठ जाने से नहीं। निरंतर परिश्रम व्यक्ति को चुस्त-दुरुस्त रखकर सजग तो बनाता ही है, निराशाओं से दूर रख आशा-उत्साह भरा जीवन जीना भी सिखाया करता है।
  1. परीक्षण की कसौटी पर कसे जाने से तात्पर्य है-
    (क) सत्य सिद्ध होना
    (ख) कथन का प्रामाणिक होना
    (ग) आकलन प्रक्रिया तीव्र होना
    (घ) योग्यता का मूल्यांकन होना

  2. 'हाथ-पैर हिलाने से कुछ पाया जा सकता है।' पंक्ति के माध्यम से लेखक ______ की प्रेरणा दे रहे हैं।
    (क) तैराकी
    (ख) परिश्रम
    (ग) परीक्षण
    (घ) हस्तशिल्प

  3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए -
    1. परिश्रम व्यक्ति को सकारात्मक बनाता है।
    2. आज संसार पतन की ओर बढ़ रहा है।
    3. पुरुषार्थ के बल पर ही व्यक्ति धनार्जन करता है।
      उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा /कौन-से कथन सही है / हैं?

      (क) केवल (i)
      (ख) केवल (ii)
      (ग) (i) और (iii)
      (घ) (ii) और (iii)
  4. निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द गद्यांश में दिए गए 'अनुसंधान' शब्द के सही अर्थ को दर्शाता है-
    (क) परीक्षण
    (ख) योजनाएँ
    (ग) अन्वेषण
    (घ) सिंहमुपैति
  5. निम्नलिखित में से किस कथन को गद्यांश की सीख के आधार पर कहा जा सकता है -
    (क) अल्पज्ञान खतरनाक होता है।
    (ख) गया समय वापस नहीं आता है।
    (ग) मेहनत से कल्पना साकार होती है।
    (घ) आवश्यकता आविष्कार की जननी है।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए।

       उपवास और संयम ये आत्महत्या के साधन नहीं हैं। भोजन का असली स्वाद उसी को मिलता है जो कुछ दिन बिना खाए भी रह सकता है। ‘त्यक्तेन भुंजीथा:’, जीवन का भोग त्याग के साथ करो, यह केवल परमार्थ का ही उपदेश नहीं है, क्योंकि संयम से भोग करने पर जीवन में जो आनंद प्राप्त होता है, वह निरा भोगी बनकर भोगने से नहीं मिल पाता ज़िंदगी की दो सूरतें हैं। एक तो यह कि आदमी बड़े-से-बड़े मकसद के लिए कोशिश करे, जगमगाती हुई जीत पर पंजा डालने के लिए हाथ बढ़ाए, और अगर असफलताएँ कदम-कदम पर जोश की रोशनी के साथ अंधियाली का जाल बुन रही हों, तब भी वह पीछे को पाँव न हटाए। दूसरी सूरत यह है कि उन गरीब आत्माओं का हमजोली बन जाए जो न तो बहुत अधिक सुख पाती हैं और न जिन्हें बहुत अधिक दुख पाने का ही संयोग है, क्योंकि वे आत्माएँ ऐसी गोधूलि में बसती हैं जहाँ न तो जीत हँसती है और न कभी हार के रोने की आवाज़ सुनाई पड़ती है। इस गोधूलि वाली दुनिया के लोग बंधे हुए घाट का पानी पीते हैं, वे ज़िंदगी के साथ जुआ नहीं खेल सकते। और कौन कहता है कि पूरी ज़िंदगी को दाँव पर लगा देने में कोई आनंद नहीं है?

       जनमत की उपेक्षा करके जीने वाला आदमी दुनिया की असली ताकत होता है और मनुष्यता को प्रकाश भी उसी आदमी से मिलता है। ज़िंदगी से, अंत में, हम उतना ही पाते हैं जितनी कि उसमे पूँजी लगाते हैं। यह पूँजी लगाना ज़िंदगी के संकटों का सामना करना है, उसके उस पन्ने को उलट कर पढ़ना है जिसके सभी अक्षर फूलों से ही नहीं, कुछ अंगारों से भी लिखे गए हैं। ज़िंदगी का भेद कुछ उसे ही मालूम है जो यह जानकार चलता है की ज़िंदगी कभी भी ख़त्म न होने वाली चीज़ है।

       अरे! ओ जीवन के साधकों! अगर किनारे की मरी सीपियों से ही तुम्हें संतोष हो जाए तो समुद्र के अंतराल में छिपे हुए मौक्तिक - कोष को कौन बाहर लाएगा? दुनिया में जितने भी मज़े बिखेरे गए हैं उनमें तुम्हारा भी हिस्सा है। वह चीज़ भी तुम्हारी हो सकती है जिसे तुम अपनी पहुँच के परे मान कर लौटे जा रहे हो। कामना का अंचल छोटा मत करो, ज़िंदगी के फल को दोनों हाथों से दबाकर निचोड़ो, रस की निर्झरी तुम्हारे बहाए भी बह सकती है।

(i) ‘त्यक्तेन भुंजीथा:’ कथन से लेखक के व्यक्तित्व की किस विशेषता का बोध होता है? (1)

(क) परिवर्जन
(ख) परिवर्तन
(ग) परावर्तन
(घ) प्रत्यावर्तन

(ii) मंज़िल पर पहुँचने का सच्चा आनंद उसे मिलता है, जिसने उसे - (1)

(क) आन की आन में प्राप्त कर लिया हो
(ख) पाने के लिए भरसक प्रयास किया हो
(ग) हाथ बढ़ा कर मिट्ठी में कर लिया हो
(घ) सच्चाई से अपने सपनों में बसा लिया हो

(iii) ‘गोधूलि’ शब्द का तात्पर्य है - (1)

(क) गोधेनु
(ख) संध्यावेला
(ग) गगन धूलि
(घ) गोद ली कन्या

(iv) ‘गोधूलि’ वाली दुनिया के लोगों से अभिप्राय है - (1)

(क) विवशता और अभाव में जीने वाले
(ख) जीवन को दाँव पर लगाने वाले
(ग) गायों के खुरों से धूलि उड़ाने वाले
(घ) क्षितिज में लालिमा फैलाने वाले

(v) जीवन में असफलताएँ मिलने पर भी साहसी मनुष्य क्या करता है? (1)

(क) बिना डरे आगे बढ़ता है क्योंकि डर के आगे जीत है
(ख) पराजय से निपटने के लिए फूँक-फूँककर कदम आगे रखता है
(ग) अपने मित्र बंधुओं से सलाह और मदद के विषय में विचार करता है
(घ) असफलता का कारण ढूँढकर पुनः आगे बढ़ने का प्रयास करता है

(vi) आप कैसे पहचानेंगे कि कोई व्यक्ति साहस की ज़िंदगी जी रहा है? (1)

(क) जनमत की परवाह करने वाला
(ख) निडर और निशंक जीने वाला
(ग) शत्रु के छक्के छुड़ाने वाला
(घ) भागीरथी प्रयत्न करने वाला

(vii) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - (1)

(I) प्रत्येक परिस्थिति का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।

(II) मनुष्य अपने दृढ़ मंतव्य व कठिन परिश्रम से सर्वोच्च प्राप्ति की ओर अग्रसर रहता है।

(III) विपत्ति सदैव समर्थ के समक्ष ही आती है, जिससे वह पार उतर सके।

उपरिलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?

(क) केवल I
(ख) केवल III
(ग) I और II
(घ) II और III

(viii) ‘ज़िंदगी को दाँव पर लगा देने’ में कोई आनंद नहीं है? लेखक इससे सिद्ध करना चाहते हैं कि ज़िंदगी - (1)

(क) रंगमंच के कलाकारों के समान व्यतीत करनी चाहिए।
(ख) में सकारात्मक परिस्थितियाँ ही आनंद प्रदान करती हैं।
(ग) में प्रतिकूलता का अनुभव जीवनोपयोगी होता है।
(घ) केवल दुखद स्थितियों का सामना करवाती है।

(ix) किन व्यक्तियों को सुख का स्वाद अधिक मिलता है? (1)

(क) जो अत्यधिक सुख प्राप्त करते हैं
(ख) जो सुख-दुख से दूर होते हैं
(ग) जो पहले दुख झेलते हैं
(घ) जो सुख को अन्य लोगों से साझा करते हैं

(x) निम्नलिखित कथन कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए। (1) 

कथन (A): ‘ज़िंदगी के फल को दोनों हाथों से दबाकर निचोड़ो, रस की निर्झरी तुम्हारे बहाए भी बह सकती है’।

कारण (R): ज़िंदगी रूपी फल का रसास्वादन करने के लिए दोनों हाथों से श्रम करना होगा।

(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(घ) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

            लालच ऐसी बुरी चीज है, जिसके फेर में पड़कर मानव मानवता को भूल जाता है। व्यकित किसी भी स्तर तक गिर जाता है। लालच इंसानियत का दुश्मन है। देशभक्ति की जगह गद्दारी करना लालच के तहत ही आता है। यदि व्यक्ति लालच न करे और संतोषपूर्वक अपना जीवन व्यतीत करे तो उसे परमसुख की प्राप्ति हो सकती है। अफसोस कि आज जीवन के हर क्षेत्र में इनका बोलबाला है। पैसा ही आज ईश्वर है। मानवता आज इस लालच के बल पर कराह रही है। संतोष ही जीवन का आधार है।

            परंतु हमें यह याद रखना चाहिए कि हर लालच का परिणाम बुरा ही होता है। कहा भी गया है-

रूखी-सूखी खाय के ठंडा पानी पीव।
देख पराई चूपड़ी यह ललचावै जीव।।

(1) उत्तर लिखिए- (2)

गद्यांश के आधार पर लालच के अभिशाप

  1. ______
  2. ______

(2) संतोष ही जीवन का आधार है, अपने विचार 25 से 30 शब्द में लिखें। (2)


निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

आरा शहर। भादों का महीना। कृष्ण पक्ष की अँधेरी रात। जोरों की बारिश। हमेशा की भाँति बिजली का गुल हो जाना। रात के 'गहराने और सूनेपन को और सघन भयावह बनाती बारिश कौ तेज़ आवाज़। अंधकार में डूबा शहर तथा अपने घरें में सोए - दुबके लोग ! लेकिन सचदेव बाबू की आँखों में नींद नहीं। अपने आलीशान भवन के भीतर अपने शयनकक्ष में बेहद आरामदायक बिस्तर पर लेटे थे वे। पर लेटने भर से ही तो नींद नहीं आती। नींद के लिए - जैसी निर्शिचितता और बेफिक्री की जरुरत होती है, वह तो उनसे कोसों दूर थी।

हालाँकि यह स्थिति सिर्फ सचदेव बाबू की ही नहीं थी। पूरे शहर का खौफ का यह कहर था। आए दिन चोरी, लूट, हत्या, बलात्कार, राहजनी और अपहरण की घटनाओं ने लोगों को बेतरह भयभीत और असुरक्षित बना दिया था। कभी रातों में गुलज़ार रहने वाला उनका 'यह शहर अब शाम गहराते ही शमशानी सन्ताटे में तब्दील होने लगा था। अब रातों में सड़कों और गलियों में नज़र आने वाले लोग शहर के सामान्य और संभ्रांत नागरिक नहीं, संदिग्ध लोग होते थे। कब 'किसके यहाँ कया हो जाए, सब आतंकित थे। जब इस शहर में अपना यह घर बनवा रहे थे सचदेव बाबू तो बहुत प्रसन्न थे कि महानगरों में दमघोंटू, विषाक्त, अजनबीयत और छल - छदमी वातावरण से अलग इस शांत-सहज और निश्छल - निर्दोष गँँबई शहर में बस रहे हैं। लेकिन अब तो महानगर की अजनबीयत की अपेक्षा यहाँ की भयावहता ने बुरी तरह से न्रस्त और परेशान कर दिया था उन्हें। ये 'बरसाती रातें तो उन्हें बरबादी और तबाही का साक्षात संकेत जान पड़ती थीं। इसे दुर्योग कहें या विडंबना कि जिस बात को लेकर आदमी आशंकित बना रहता है, कभी-कभी वह बात घट भी जाती है। इस अंधेरी, तूफानी, बरसाती रात में जिस बात को लेकर डर रहे थे सचदेव बाबू उसका आभास भी अब उन्हें होने लगा था। उन्हें लगा आगंतुक की आहट होने लगी । उनकी शंका सही थी। अब दरवाजे पर थपथपाहट की आवाज़ भी आने लगी थी । सचमुच कोई आ धमका था।

1. आकृति पूर्ण कीजिए:  (2)

  1. आरा शहर में घर बनवाते समय ये बहुत प्रसन्न थे।
  2. सचदेव बाबू की आँखों में इसका नाम नहीं था।
  3. बरसाती रातें बरबादी और तबाही का साक्षात यह थी-
  4. सचदेव बाबू को लगा आगंतुक की आहाट होने लगी-

2. निम्नलिखित शब्दों का वचन बदलकर लिखिए:    (2)

  1. आवाज - ______
  2. चोरी - ______
  3. शंका - ______
  4. सड़क - ______

3. चोरी, डकैती, राहजनी आदि की घटनाएँ इस विषय पर 40 से 50 शब्दों में अपना मत स्पष्ट कीजिए।  (2)


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

            अंजुना बीच नीले पानीवाला, पथरीला बहुत ही खूबसूरत हैं। इसके एक ओर लंबी-सी पहाड़ी है, जहाँ से बीच का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है। समुद्र तक जाने के लिए थोड़ा नीचे उतरना पड़ता है। नीला पानी काले पत्थरों पर पछाड़ खाता रहता है। पानी ने काट-काटकर इन पत्थरों में कई छेद कर दिए हैं जिससे ये पत्थर कमजोर भी हो गए हैं। साथ ही समुद्र के काफी पीछे हट जाने से कई पत्थरों के बीच में पानी भर गया है। इससे वहाँ काई ने अपना घर बना लिया है। फिसलने का डर हमेशा लगा रहता है, लेकिन संघर्षों में ही जीवन है, इसलिए यहाँ घूमने का भी अपना अलग आनंद है। यहाँ युवाओं का दल तो अपनी मस्ती में डूबा रहता है, लेकिन परिवार के साथ आए पर्यटकों का ध्यान अपने बच्चों को खतरों से सावधान रहने के दिशानिर्देश देने में ही लगा रहता है। मैंने देखा कि समुद्र किनारा होते हुए भी बेनालियम बीच तथा अंजुना बीच का अपना-अपना सौंदर्य है। बेनालियम बीच रेतीला तथा उथला है। यह मछुआरों की पहली पसंद है।

(1) विशेषताएँ लिखिए: (2)

अंजुना बीच बेनालियम बीच
(i) ______ (i) ______
(ii) ______ (ii) ______

(2) निम्नलिखित विधान सही अथवा गलत पहचानकर लिखिए: (2)

  1. पानी ने काट-काटकर इन पत्थरों में कई छेद नहीं कर दिए हैं।
  2. समुद्र तक जाने के लिए थोड़ा नीचे उतरना पड़ता है।
  3. बेनालियम बीच नीले पानीवाला है।
  4. अंजुना बीच पर फिसलने का डर हमेशा लगा रहता है।

(3) ‘संघर्षों में ही जीवन है’- इस विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

          एक बार अंग्रेजी के मशहूर साहित्यसेवी डॉ. जॉनसन के पास उनका एक मित्र आया और अफसोस जाहिर करने लगा कि उसे धार्मिक ग्रंथ पढ़ने के लिए समय ही नहीं मिलता।

          “क्यों?” डॉ. जॉनसन ने फौरन पूछा।

           “आप ही देखिए, दिन-रात मिलाकर सिर्फ चौबीस घंटे होते हैं, इसमें से आठ घंटे तो सोने में निकल जाते हैं।”

          “पर यह बात सब ही के लिए लागू है।” डॉ. जॉनसन ने कहा।

          “और करीब आठ ही घंटे ऑफिस में काम करना पड़ता है।”

           “और बाकी आठ घंटे?” डॉ. जॉनसन ने पूछा।

          “इन्हीं आठ घंटों में खाना-पीना, हजामत बनाना, नहाना-धोना, ऑफिस आना-जाना, मित्रों से मिलना-जुलना, चिट्ठी-पत्री का जबाब देना, इत्यादि कितने काम रहते हैं। मैं तो बड़ा परेशान हूँ।”

          “तब तो मुझे भी अब भूखों मरना पड़ेगा।” डॉ. जॉनसन एक गहरी साँस लेकर बोले।

          “क्यों? क्यों?” उनके मित्र ने तुरंत पूछा।

          “मैं काफी खाने वाला आदमी हूँ और अन्न उपजाने के लिए दुनिया में एक चौथाई ही तो जमीन है, तीन-चौथाई तो पानी ही है और संसार में मेरे जैसे करोड़ों लोग हैं जिन्हें अपना पेट भरना पड़ता है।”

          “पर इतने लोगों के लिए फिर तो भी जमीन काफी है।”

          “काफी कहाँ है? इस एक-चौथाई जमीन में कितने पहाड़ हैं, ऊबड़-खाबड़ स्थल हैं, नदी-नाले हैं, रेगिस्तान और बंजर भूमि हैं। अब मेरा भी कैसे निभ सकेगा भगवान! मित्र महोदय बड़ी हमदर्द के साथ डॉ. जॉनसन को दिलासा देने लगे कि उन्हे परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। दुनिया में करोड़ों लोग रहते आए हैं और उन्हें सदा अन्न मिलता ही रहा है।”

(१) तालिका पूर्ण कीजिए: (२)

(२) परिच्छेद में आए हुए शब्दयुग्म के कोई भी चार उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए: (२)

  1. ______
  2. ______
  3. ______
  4. ______

(३) ‘समय अनमोल है’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति के बाद शनि ग्रह की कक्षा है। शनि सौरमंडल का दूसरा बड़ा ग्रह है। यह हमारी पृथ्वी के करीब 750 गुना बड़ा है। शनि के गोले का व्यास 116 हज़ार किलोमीटर है; अर्थात्‌, पृथ्वी के व्यास से करीब नौ गुना अधिक।

सूर्य से शनि ग्रह की औसत दूरी 143 करोड़ किलोमीटर है। यह ग्रह प्रति सेकंड 9.6 किलोमीटर की औसत गति से करीब 30 वर्षों में सूर्य का एक चक्कर लगाता है। अत: 90 साल का कोई बूढ़ा आदमी यदि शनि ग्रह पर पहुँचेगा, तो उस ग्रह के अनुसार उसकी उम्र होगी सिर्फ तीन साल!

हमारी पृथ्वी सूर्य से करीब 15 करोड़ किलोमीटर दूर है। तुलना में शनि ग्रह दस गुना अधिक दूर है। इसे दूरबीन के बिना कोरी आँखों से भी आकाश में पहचाना जा सकता है। पुराने ज़माने के लोगों ने इस पीले चमकीले ग्रह को पहचान लिया था। प्राचीन काल के ज्योतिषियों को सूर्य, चंद्र और काल्पनिक राहु-केतु के अलावा जिन पाँच ग्रहों का ज्ञान था उनमें शनि सबसे अधिक दूर था। 

शनि को 'शनैश्वर' भी कहते हैं। आकाश के गोल पर यह ग्रह बहुत धीमी गति से चलता दिखाई देता है, इसीलिए प्राचीन काल के लोगों ने इसे 'शनैःचर नाम' दिया था। 'शनैःचर' का अर्थ होता है - धीमी गति से चलने वाला। 

  1. तालिका पूर्ण कीजिए:     [2]
    प्राचीन ज्योतिषियों को इन ग्रहों का ज्ञान था। 
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  2. परिच्छेद में आए हुए शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए:    [2]
    1. शनि - ______
    2. दूरबीन - ______
    3. पृथ्वी - ______
    4. आकाश - ______
  3. 'अंतरिक्ष यात्रा' इस विषय पर ४० से ५० शब्दों में अपने विचार लिखिए।      [2]  

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